Friday, 18 March 2022

गाँव का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

गाँव का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

    गांव या ग्रामीण समुदाय का अर्थ

    गांव से तात्पर्य मनुष्यों की बस्ती से हैं जहाँ खेती-बाड़ी मुख्य पेशा होता है। गांव शब्द को सामान्यतः स्पष्ट कर देना आसान नहीं है, क्योंकि आज गांव और शहर में परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध होते जा रहे हैं। कुछ प्रमुख समाज विद्वानों ने गांव शब्द को स्पष्ट करने में ग्राम या ग्रामीण जीवन की एक सामान्य रूपरेखा प्रस्तुत की है। गांव या ग्रामीण समुदाय को परिभाषित करते हुए कुछ प्रमुख विद्वानों ने लिखा है कि -

    गांव की परिभाषा

    "गांव नाम का प्रयोग सामान्यतः किसानों की बस्तियों से किया जाता है। जिन वृहत क्षेत्रों में एक समूह के लगभग सभी महत्वपूर्ण हितों की संतुष्टि की जाती है उनको ग्रामीण समुदाय मान लेने के लिए समाजशास्त्रियों की प्रतिबद्धता बढ़ती जा रही है। - सिम्स "

    ग्राम मानव के सामूहिक निवास की प्रथम व्यवस्था और कृषि व्यवस्था के विकास का उत्पादक है। - डॉ. ए. आर. देसाई 

    "ग्रामीण समुदाय के अन्तर्गत संस्थाओं और ऐसे व्यक्तियों का समावेश होता है जो एक छोटे से केन्द्र के चारों ओर संगठित होते हैं तथा सामान्य और प्राथमिक हितों द्वारा आपस में बंधे रहते हैं।' - मेरिल एण्ड एलड्रिज 

    भारतीय ग्राम की विशेषताएं

    1. ग्रामीण समुदाय परिवार पर आधारित(Family as Fundamental unit of Rural Community) 
    2. संयुक्त परिवार प्रणाली (Joint Family System)
    3. खेती ही मूल्य व्यवसाय (Farming as the Main Occupation) 
    4. जजमानी प्रथा (Jajmani System) 
    5. श्रम के विशेषीकरण का अभाव (Lack of Specialization) 
    6. प्रकृति से घनिष्ठ सम्बन्ध (Closer Contact with Nature) 
    7.परिवार उत्पादन की इकाई के रूप में (Family as a unit of Production)

    1. ग्रामीण समुदाय परिवार पर आधारित तथा नियन्त्रित (Family as Fundamental and Controlling unit of Rural Community) - गाँव में परिवार को सामाजिक जीवन की आधारभूत इकाई माना जाता है, इसीलिए इसका महत्वपूर्ण स्थान होता है।

    2. संयुक्त परिवार प्रणाली (Joint Family System) - भारतीय संयुक्त परिवार प्रणाली ग्रामीण समुदाय में ही दिखाई पड़ती है। सामान्यतः भारत में इस प्रकार के अधिकांश गाँव पाये जाते हैं. जिनमें संयुक्त संगठन के आधार पर अनेक नाते-रिश्तेदारों की एक सहयोगी व्यवस्था होती है और जिनमें शामिल सम्पत्ति, शामिल वमन, अधिकार एवं कर्तव्यों का समावेश होता है।

    3. खेती ही मूल्य व्यवसाय (Farming as the Main Occupation) - भारत जनसंख्या का लगभग 70 प्रतिशत भाग प्रत्यक्षतः कृषि पर आश्रित है, यदि इसमें अप्रत्यक्षतः व्यक्तियों का शामिल किया जाता है तो यह प्रतिशत 75 तक बढ़कर पहुंच सकता है।

    4. जजमानी प्रथा (Jajmani System) - जाति प्रथा में प्रत्येक जाति के एक निश्चित वंशानुगति व्यवसाय रहे हैं, जिसे अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति जीविकोपार्जन करता है। भारतीय समाज में प्राचीनकाल से ही अनेक जातियाँ एक-दूसरे से प्रकार्यात्मक रूप से जुड़ी रहती हैं।

    5. श्रम के विशेषीकरण का अभाव (Lack of Specialization) - ग्रामीणों को कृषि के साथ-साथ अन्य जानकारियों को करना भी आवश्यक है, क्योंकि कृषि से अनेकों कार्य सम्बन्धित होते है।

    6. प्रकृति से घनिष्ठ सम्बन्ध (Closer Contact with Nature) - गाँव के लोगों का प्रकृति से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है, क्योंकि किसान का अधिकांश समय खेत में व्यतीत होता है। किसान प्रकृति के सभी रूपों से परिचित होता है। कृषि पूर्णतया प्रकृति पर निर्भर होती है।

    7. परिवार उत्पादन की इकाई के रूप में (Family as a unit of Production) - गाँव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि अवश्य है, लेकिन इसका यह आशय कदापि नहीं है कि गाँव में अन्य कोई दूसरा काम नहीं होता है।

    सम्बंधित प्रश्न :

    1. गांव और कस्बा में क्या अंतर हैं?
    2. कस्बा किसे कहते हैं ? इसके प्रकार एवं विशेषताओं को बताइए।
    3. भारतीय समाज पर संक्षिप्त नोट लिखें।
    4. गांव का वर्गीकरण कीजिए अथवा गांव के प्रकार बताइये।
    5. कृषक ग्राम क्या है ? कृषक ग्राम की परिभाषा बताइये।
    6. भारतीय ग्रामीण समाज की विशेषताएं लिखिये।
    7. गांव को एक जीवन विधि क्यों कहा जाता है व्याख्या कीजिए।
    8. नगरीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं बताइए
    9. नगरों की अवधारणा बताइये तथा भारतीय नगरों का वर्गीकरण कीजिए।

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