Thursday, 19 May 2022

Hindi Essay on "Cheetah", "चीता पर निबंध", "चीता पर कुछ वाक्य" for Students

Hindi Essay on "Cheetah", "चीता पर निबंध", "चीता पर कुछ वाक्य" for Students

Hindi Essay on "Cheetah", "चीता पर निबंध", "चीता पर कुछ वाक्य" for Students

Hindi Essay on "Cheetah", "चीता पर निबंध", "चीता पर कुछ वाक्य" for Students
Essay on Cheetah in Hindi : इस लेख में चीता जानवर पर हिंदी निबंध लिखा गया है। चीता पर एक छोटा निबंध और चीता पर 10 वाक्य भी लिखकर दिए गए हैं for Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 and 8

    10 Lines about Cheetah in Hindi - चीता पर कुछ वाक्य

    (1) चीता धरती पर सबसे तेज़ ज़मीन पर दौड़ने  वाला जानवर है। 

    (2) चीता का फर पीला होता है जिस पर काले धब्बे होते हैं। 

    (3) चीता का वैज्ञानिक नाम 'एसिनोनिक्स जुबेटस' है। 

    (4) चीता छोटे जानवरों जैसे पक्षी, चिकारे, हिरण आदि का शिकार करते हैं।

    (5) चीता की दोनों आँखों से मुँह के किनारे तक कला धब्बा पाया जाता है। 

    (6) चीता सिर से पूंछ के सिरे तक लगभग 2 मीटर लंबा होता है। 

    (7) चीता बिना पानी पिए 10 दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

    (8) चीता अन्य बड़ी बिल्लियों जैसे शेर या बाघों की तरह दहाड़ते नहीं हैं। 

    (9) चीते खुले इलाकों जैसे घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं। 

    (10) इन दिनों जंगल में केवल 7,000 से 13000 चीता ही बचे हैं।


    चीता जानवर पर निबंध - Short Essay on Cheetah in Hindi

    चीता एक मांसाहारी शिकारी पशु है। चीते मुख्यतः पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के जंगलों में पाए जाते हैं। चीता स्वाभाविक रूप से एकांतप्रिय होता हैं। चीता आमतौर पर जंगल में 7 से 10 साल तक जीवित रहते हैं। लेकिन वे चिड़ियाघरों में 19 साल तक जीवित रह सकते हैं। चीता धरती पर सबसे तेज़ दौड़ाने वाला जानवर है। चीता  का छोटा मुंह, दो आँख, दो कान, नुकीले दांत, चार पैर और एक लम्बी पूंछ होती है। चीता की के पुरे शरीर में काले रंग के मोटे-मोटे गोल धब्बे होते हैं। चीते के आँख के कोने वाले भाग से नाक के नीचे मुंह तक काले रंग के "आँसू चिह्न“ होतें हैं। इसका शरीर पतला, सुडौल और फुर्तीला होता है। चीता पूरे एशिया में पाया जाता है। यह 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकता है। चीते को रात में कम दिखाई देता है। हिरन बारहसिंगा, सूअर, खरगोश इसका पसंदीदा भोजन है। चीता को चिड़ियाघर में भी देखा जा सकता है।


    चीता पर निबंध - Cheetah par Nibandh

    चीता पृथ्वी पर सबसे तेज़ ज़मीन पर दौड़ने वाला जानवर है। चीता का वैज्ञानिक नाम एसिनोनिक्स जुबेटस है। बिल्ली परिवार का यह सदस्य प्रति घंटे 70 मील (112 किलोमीटर) से अधिक तेजी से दौड़ सकता है। 

    चीता कहाँ रहता है

    चीता मध्य, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के जंगलों में पाए जाते हैं। ईरान में बहुत कम संख्या में जंगली चीते रहते हैं। ज्यादातर चीते घास के मैदानों और सूखे, खुले इलाकों में रहना पसंद करते हैं।

    चीता की विशेषताएं

    छोटे काले धब्बे चीते के अधिकांश पीले फर को ढक लेते हैं। चीता का पेट सफेद हो जाता है, और पूंछ काले  रंग के छल्ले होते हैं। चीते की आंखों से लेकर मुंह के कोनों तक काला धब्बा होता है।

    चीता सिर से पूंछ के सिरे तक लगभग 6.5 फीट (2 मीटर) लंबा होता है। यह एक पतला और फुर्तीला स्तनपायी है जिसका वजन लगभग 75 से 120 पाउंड (34 से 54 किलोग्राम) होता है। नर मादाओं से बड़े होते हैं।

    चीते का शरीर गति के लिए बना होता है। लंबी टांगें चीते को बड़ी छलांग लगाने की क्षमता देती हैं। कठोर पंजे और खुले पंजे जमीन को पकड़ने में मदद करते हैं। चीता एकमात्र ऐसी बिल्ली है जो अपने पंजों को पूरी तरह से पीछे नहीं खींच सकती।

    चीता का व्यवहार 

    चीते अकेले या छोटे समूहों में रहते हैं। ये दिन में छोटे जानवरों का शिकार करते हैं। चीता पहले अपने शिकार पर घात लगाता है। जैसे ही शिकार लापरवाह होता है यह कुछ सौ फीट दूर से उस पर दौड़ता है। चीता लंबे समय तक पीछा नहीं कर सकता है। जब चीता अपने शिकार को पकड़ लेता है, तो वह जानवर के पास जाता है और अपने दाँत से उसकी गर्दन को काटता है।

    चीता का जीवन चक्र

    एक मादा चीता एक बार में दो से आठ शावकों को जन्म देती है। चीता के शावक अपनी मां के साथ एक साल से ज्यादा समय तक रहते हैं। इस दौरान वे शिकार करना सीखते हैं। चिड़ियाघरों में कुछ चीते 19 वर्ष की आयु तक जीवित रहते हैं, लेकिन अधिकांश इतने लंबे समय तक जीवित नहीं रहते हैं।

    चीता और इंसान

    प्राचीन मिस्रवासी और भारत और यूरोप के कुछ शासक चीतों को पालते थे। वे शिकार के लिए जानवरों का इस्तेमाल करते थे। अन्य लोगों ने फर के लिए चीतों का शिकार किया। आखिरकार, भारत और कई अन्य जगहों से जंगली चीते गायब हो गए। आज चीतों के पूरी तरह खत्म होने का खतरा है। मानव बस्तियों ने उनकी अधिकांश भूमि पर कब्जा कर लिया है।


    Essay on Cheetah in Hindi - चीता पर निबंध

    चीता बहुत तेज दौड़ता है। चीता का वैज्ञानिक नाम 'एसिनोनिक्स जुबेटस' है चीता को कभी-कभी तेंदुआ समझ लिया जाता है, लेकिन चीता के धब्बे अधिक गोल होते हैं और उनकी आंखों से मुंह तक लंबी काली रेखाएं होती हैं जिन्हें आंसू कहा जाता है। अधिकांश चीता पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका में रहते हैं। चीते की कुछ संख्या (बहुत कम) में, ईरान में भी पाए जाते हैं।

    चीतों को एक लुप्तप्राय प्रजाति माना जाता है। इन दिनों जंगल में केवल 7,000 से 13000 चीता ही बचे हैं। प्राकृतिक आवास के विनाश और खाद्य स्रोतों में कमी के कारण चीता लुप्तप्राय प्रजाति बन गए हैं। ये बहुत दुख की बात है!

    चीता कैसा दिखता है?

    चीते का शरीर लगभग 50 से 60 इंच लंबा होता है। जबकि चीते की पूंछ करीब 30 इंच लंबी होती है। चीते के पतले, मांसल लंबे पैर, लचीली रीढ़ और एक छोटा गोल सिर होता है, ये सभी चीजें चीते को तेजी से दौड़ने में मदद करती हैं।

    चीता पतली फुर्तीली बिल्लियाँ होती हैं, जो शेरों और बाघों की तुलना में बहुत छोटी होती हैं। एक वयस्क चीता का वजन 75 से 150 पाउंड के बीच होता है, जिसका अर्थ है कि एक नर शेर का वजन 3 वयस्क चीतों के बराबर होता है। चीता देखने में तेंदुओं की तरह थोड़ा सा दिखता है, लेकिन ये ज्यादा दुबले-पतले होते हैं और इसमें गोल काले धब्बे होते हैं।

    चीते की रफ्तार कितनी है

    चीता पृथ्वी पर सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर होने के लिए प्रसिद्ध है। चीता सिर्फ 3 सेकंड में 60 मील प्रति घंटे (लगभग 97 किलोमीटर) की रफ्तार पकड़ सकता है। और 70 मील प्रति घंटे की गति तक पहुँच सकता है। जब एक चीता पूरी गति से दौड़ रहा होता है, तो वह प्रत्येक छलांग में लगभग 12 फीट की दूरी तय करता है। जब वे प्रत्येक छलांग के दौरान पैर फैलाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे चीता उड़ रहा हो।

    चीते अपनी लंबी पूंछ का उपयोग पतवार की तरह करते हैं, जो उन्हें तेज गति से शिकार का पीछा करते हुए तेजी से चलने और मुड़ने में मदद करता है।

    चीता का जीवनकाल 

    चीता आमतौर पर जंगल में 7 से 10 साल तक जीवित रहते हैं। लेकिन वे चिड़ियाघरों में 19 साल तक जीवित रह सकते हैं क्योंकि उन्हें शिकारियों का सामना नहीं करना पड़ता है या भोजन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है।

    चीता कहाँ रहते हैं?

    चीता पूरे पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में पाए जा सकते हैं, और घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं जहां वे तेजी से दौड़ सकते हैं और शिकार कर सकते हैं। चीता जंगल या वर्षावन में नहीं रहते हैं।

    चीतों के प्रकार

    चीतों की पाँच उप-प्रजातियाँ (प्रकार) हैं:

    1. उत्तर पश्चिमी अफ्रीकी चीता
    2. दक्षिण अफ़्रीकी चीता
    3. एशियाई चीता
    4. सूडान का चीता
    5. तंजानिया का चीता

    चीता का शावक

    चीते के बच्चे को शावक कहा जाता है। एक माँ चीता आमतौर पर 3 से 5 शावकों को जन्म देती है, लेकिन 6 से 8 शावक भी पैदा हो सकते हैं। जन्म के समय चीता के शावक अंधे होते हैं, लेकिन 10 दिनों के भीतर उनकी आंखें खुल जाती हैं और वे देख सकते हैं। उनके दांत 3 सप्ताह के होते ही दिखने लगते हैं। चीतों को हर 2 से 4 दिनों में केवल एक बार पीने की जरूरत होती है और बिना पानी के 10 दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

    जन्म के 6 महीने के भीतर, चीता शावक अपने वयस्क आकार से आधे तक पहुंच जाते हैं, और अपनी मां से शिकार करना सीखना शुरू कर देते हैं। एक माँ चीता आमतौर पर अपने शावकों के साथ 18 महीने से अधिक समय तक नहीं रहती है जिसके बाद वह उन्हें छोड़ देती है। मादा चीता अकेले रहना पसंद करती है, अगर वह अपने शावकों की देखभाल नहीं कर रही है।

    चीते क्या खाते हैं?

    चीता मांसाहारी होते हैं, यानी वे मांस खाते हैं। चीते दिन में शिकार करते हैं। वे मृग, वार्थोग, पक्षी, ज़ेबरा, चिकारे, हिरण, मृग और इम्पाला खाते हैं। वे रोजाना शिकार नहीं करते हैं और आमतौर पर 2 से 4 दिनों में एक बार शिकार करते हैं। जब मादा चीता शावकों के साथ होती है तो वह प्रतिदिन शिकार करती है क्योंकि उसे अपने शावकों को खिलाना होता है।

    चीतों की दृष्टि बहुत अच्छी होती है और वे अपने शिकार को दूर से ही देख सकते हैं। फिर वे अपने शिकार का पीछा करने के लिए अपनी तेज गति का उपयोग करते हैं, और गर्दन काटकर मार डालते हैं।

    चीता अपने शिकार (भोजन) को पकड़ने के बाद, इसे एक छायांकित छिपने के स्थान पर ले आता है ताकि अन्य शिकारी जानवर इसे न देख सकें। चीतों को लड़ना पसंद नहीं है। यदि कोई बड़ा, अधिक आक्रामक जानवर उनके पास आता है, तो वे अपना शिकार छोड़ देते हैं, ताकि उन्हें लड़ना न पड़े।

    चीता क्या आवाज करता है?

    चीता एक-दूसरे के साथ संवाद करने के लिए कई तरह की अलग-अलग आवाजें पैदा करते हैं, जिसमें गुर्राना, गड़गड़ाहट होती है जो आम तौर पर संतोष को दर्शाती है। चीता शेरों या बाघों की तरह दहाड़ते नहीं हैं। जब उन्हें खतरा महसूस होता है तो वे चहकती हुई आवाज निकालते हैं और अगर वे खुश महसूस करते हैं तो वे गड़गड़ाहट करते हैं। 

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    Wednesday, 18 May 2022

    Hindi Essay on "Swan Bird", "हंस पक्षी पर निबंध", "10 Lines on Swan in Hindi" for Students

    Hindi Essay on "Swan Bird", "हंस पक्षी पर निबंध", "10 Lines on Swan in Hindi" for Students

    Hindi Essay on "Swan Bird", "हंस पक्षी पर निबंध", "10 Lines on Swan in Hindi" for Students

      हंस पर वाक्य - 10 Lines on Swan in Hindi

      (1) हंस एक विशालकाय जलीय पक्षी है। 

      (2) एक हंस का जीवनकाल 20 से 40 वर्ष तक हो सकता है। 

      (3) हंस फिनलैंड नामक देश का राष्ट्रीय पक्षी है। 

      (4) हंस का स्वाभाव बहुत शर्मीला होता है। 

      (5) हंस आमतौर पर जलाशयों जैसे तालाबों, नालों आदि पर तैरता है।

      (6) हंस को इसकी बेमिसाल खूबसूरती के लिए जाना जाता है। 

      (7) हंस का स्वरूप बत्तख के समान होता है। 

      (8) हंस काले और सफेद हंस दो प्रकार के होते हैं।

      (9) हंस की एक चोंच और एक लंबी क पतली गर्दन होती है। 

      (10) हंस के पैर जालीदार होते हैं जो इसे तैरने में सहायता करते हैं। 

      (11) प्राचीन काल में हंस को एक दैवीय पक्षी माना था। 

      (12) हंस को ज्ञान के देवी सरस्वती का वाहन माना गया है। 

      (13) हंस वनस्पति खाता है क्योंकि यह शाकाहारी होता है।

      हंस पक्षी पर निबंध (200 शब्द ) for Class 3, 4

      हंस एक लंबी गर्दन वाला जलीय पक्षी है। जो बतख परिवार से संबंधित है। हंस  यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में पाया जाता है। हंसों के पैर जालदार होते हैं जो उन्हें काफी तेजी से तैरने में मदद करते हैं।

      हंस (Swan) अनैटिडाए कुल के सिग्नस (Cygnus) वंश के पक्षी होते हैं। वर्तमान विश्व में इसकी 6 जीवित जातियाँ हैं, हालांकि इसकी कई अन्य जातियाँ भी थीं जो विलुप्त हो चुकी हैं। हंस का बत्तख और कलहंस से जीववैज्ञानिक सम्बन्ध है, लेकिन हंस इन दोनों से आकार में बड़े और लम्बी गर्दन वाले होते हैं। नर और मादा हंस आमतौर पर जीवन-भर के लिए जोड़ा बनाते हैं।

      अपनी सुंदरता और लम्बी यात्राओं के लिए हंसों को कई संस्कृतियों में महत्व मिला है। भारतीय साहित्य में इसे बहुत विवेकशील पक्षी माना जाता है। हंस को ज्ञान के देवी सरस्वती का वाहन माना गया है। ऐसा विश्वास है कि यह पानी और दूध को अलग करने वाला विवेक से युक्त है। यह विद्या की देवी सरस्वती का वाहन है। ऐसी मान्यता है कि यह मानसरोवर में रहते हैं। हंसों को आजीवन जोड़ा बनाने के लिए भी प्रेम-सम्बन्ध और विवाह का प्रतीक माना गया है।

      हंस पक्षी पर निबंध (250 शब्द ) for Class 5, 6

      विश्व भर में हंस की कुल 6 से 7 जातियां पाई जाती है इनमें से सफ़ेद हंस, राज हंस और श्याम हंस प्रमुख हैं। हंस पक्षी गीज़ और बत्तख के करीबी रिश्तेदार हैं। हंस जोड़े में रहने वाला पक्षी है। इसलिए इसको प्रेम का प्रतीक भी कहते है। हंस मरते दम तक साथ रहते है। हंस (Swan) का औसत जीवनकाल 10 से 15 वर्ष तक होता है। वैसे अनुकूल वातावरण में यह पक्षी 30 से 40 साल भी जीवित रह सकता है। हंस सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक हैं। इनका वजन 15 किलो तक भी हो सकता है।इनकी लंबाई 56 से 62 इंच तक हो सकती है। हंस के पैर छोटे और झिल्लीदार होते है जिससे यह पानी में अच्छी तरह से तैर पाता है.

      हंस की उड़ान बहुत शानदार होती है। जब भी कभी कोई हंस उड़ता है तथा अपने पंखों को फड़फड़ाता है, तो उसके ठीक पीछे उड़ने वाले हंस को उड़ान भरने में आसानी हो जाती है। इस प्रकार जब हंसों का झुंड वी के आकार में उड़ान भरता है, तो सभी हंसों को अपने आगे वाले हंस के पंखों की फड़फड़ाहट से उत्पन्न ऊर्जा से शक्ति मिलती है।

      हंस लगभग अपना पूरा जीवन काल पानी में ही बिता देता है. हंस को जलचर पक्षी भी कहते है. हंस बहुत ही शर्मीले स्वभाव का होता है इसलिए है इंसानों के पास आने पर उनसे दूर भाग जाता है. इस पक्षी का निवास स्थान तालाब, नदिया, नहरें होता है। हंस पूरी तरह शाकाहारी होते हैं यह मुख्यतः पौधों की जड़ें, नरम तने, कलियां, पत्ते तथा छोटे फल खाते हैं।

      हंस पक्षी पर निबंध (300 शब्द ) for Class 7

      हंस को अंग्रेजी भाषा में स्वान (Swan) कहते है। हंस एक प्रवासी पक्षी है जो ठंड के मौसम में प्रवास करते हैं. हंस भारतीय पक्षी नहीं है, हंस ठन्डे इलाकों जैसे यूरोप और साइबेरिया में पाए जाते हैं। यह एक विशालकाय जलीय पक्षी होता है। हंस बहुत खूबसूरत पक्षी होता है इसके पंख मखमल के कपड़े के जैसे कोमल होते है। हंस का स्वभाव शांत होता है। यह शांति से पानी पर तैरता रहता है। हंस शर्मीला भी होता है।

      हंस की गर्दन बगुले के सामान सुराहीदार पतली और लम्बी होती है। हंस का जीवन काल 15 से 40 वर्ष का होता है। हंस सर्वाहारी पक्षी हैं लेकिन ज्यादातर शाकाहारी भोजन करते हैं। हंस एक ऐसा पक्षी है जो कि पानी पर तैरते समय भी सो सकता है। यह मुख्यतः पौधों की जड़ें, नरम तने, कलियां, पत्ते तथा छोटे फल खाते हैं। वे बीज, जामुन और कीड़े भी खाते हैं। दुनिया भर में हंसों की 7 प्रजातियां पाई जाती हैं।

      हंस स्वाभाविक रूप से शांत पक्षी है यह आमतौर पर किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है लेकिन जब कोई इसके घोंसले के पास या इस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो यह उसे को दौड़ा लेता है।  कभी-कभी यह उन्हें काट भी लेता है।  

      हंस अपने सम्पूर्ण जीवन अपने एक साथी के साथ गुजरता है। यदि साथी की मृत्यु हो जाए तो हंस अकेला ही अपना जीवन व्यतित कर देता है। इसीलिए हंस पर साहित्य में कई कविताऐ लिखी गयी है। कई हिंदी फिल्मी गीतों में हंस का जिक्र आता है। हंस को प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

      भारतीय साहित्य में इसे बहुत विवेकी पक्षी माना जाता है। और ऐसा विश्वास है कि यह नीर-क्षीर विवेक (पानी और दूध को अलग करने वाला विवेक) से युक्त है। यह विद्या की देवी सरस्वती का वाहन है। ऐसी मान्यता है कि यह मानसरोवर में रहते हैं। यह पानी मे रहता है। यह एक दुर्लभ जीव है।

      हंस पक्षी पर निबंध (400 शब्द ) for Class 8

      हंस (Swan Bird) पानी मे तैरते हुए अक्सर दिख जाते है। हंस अपना ज्यादातर समय पानी में बिताते है। यह उन चुनिंदा पक्षियों में आते है जो पानी पर तैरते है। इसीलिए हंस को जलचर पक्षी भी कहते है। इसकी मुख्य रूप से 7 प्रजाति है। हंस मुख्यतः एशिया, यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में पाये जाते है। भारत में भी हंस मिलते है। अफ्रीका महाद्वीप में हंस नही पाया जाता है।

      हंस की गर्दन बगुले की तरह लम्बी और सुराहीदार होती है। हंस पक्षी का रंग काला या सफेद होता है। सफेद रंग के हंस भारत में ही मिल जाते है। जबकि श्याम हंस ऑस्ट्रेलिया में मिलते है। अमेरिका में काले रंग की गर्दन के हंस मिलते है। एक हंस का औसत जीवनकाल 10 से 15 वर्ष तक होता है। लेकिन अनुकूल वातावरण में यह पक्षी 30 साल भी जीवित रह सकता है। हंस की चोंच काली, पीली, लाल रंगों में होती है।

      हंस का निवास स्थान पानी के आसपास होता है। यह तालाबों, नदियों, सरोवर, झीलों में पाये जाते है।

      हंस को हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक देवी सरस्वती का वाहन माना गया है। पुरातन मान्यताओं के अनुसार हंस दूध को पानी से अलग कर सकती है और केवल दूध पी सकती है। हंस हमेशा पवित्रता, स्नेह, प्रेम, महिमा और दिव्यता से जुड़ा हुआ है। मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति के लिए हिंदुओं ने प्रकृति में हर चीज का उपयोग किया।

      हंस, नल और दमयंती की पौराणिक प्रेम कहानी का हिस्सा है, जहां यह दो अजनबियों के बीच की कहानियों, ऐतिहासिक जानकारी और संदेशों को आदान प्रदान करता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में, मोती खाने और दूध पानी के मिश्रण से पानी को अलग करने के लिए हंस को माना जाता है। वैसे यह मान्यता मात्र है इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हैं।

      हंस का स्वभाव शांत होता है। यह शांति से पानी पर तैरता रहता है। हंस शर्मीला भी होता है। इसके पैर की बनावट झिल्ली युक्त होती है जिससे ये आसानी से पानी पर तैर लेते है। यह वैसे तो मनुष्य को नुकसान नही पहुँचाता है लेकिन इसके अंडों को नुकसान करने पर काट सकता है।

      नर हंस को केवल हंस कहते है। जबकि मादा हंस को हंसिनी कहते है। यह जोड़े में रहने वाला पक्षी है। मादा के साथ एक बार बनाया जोड़ा हमेशा रहता है। इसलिए इसको प्रेम का प्रतीक भी कहते है। हंस मरते दम तक साथ रहते है। हंस पर साहित्य में कई कविताऐ लिखी गयी है। कई हिंदी फिल्मी गीतों में हंस का जिक्र आता है। हंस को प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

      Essay on Swan in Hindi

      हंस एक दुर्लभ पक्षी है। हंस एक बहुत सुन्दर सफ़ेद रंग का पक्षी होता है जो कि  पक्षियों के Anatidae परिवार का सदस्य है तथा यह Cygnus वर्ग में आता है। हंस पक्षी के शरीर का वजन करीब 10 से 12 किलोग्राम तक होता है। इनकी लम्बाई करीब डेढ़ मीटर होती है। हंस पक्षी की चोंच का रंग उसकी प्रजाति के अनुसार अलग अलग होती है।

      विश्व भर में हंस की कुल 6 से 7 जातियां पाई जाती है इनमें से प्रमुख Black-necked Swan, Black Swan, Mute Swan, Trumpeter Swan, Tundra swan, हंस पक्षी गीज़ और बत्तख के करीबी रिश्तेदार हैं। ज्यादातर हंस सफेद होते हैं। वे उत्तरी गोलार्ध में पाए जाते हैं। हंस प्रवासी पक्षी होते हैं। जो कि ठंड के मौसम में प्रवास करते हैं. इसका मतलब है कि वे यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका और साइबेरिया जैसे ठन्डे इलाकों में पाए जाते हैं। हंस अक्सर बड़ी झील और तालाब के पास ही पाए जाते हैं।

      सबसे बड़े हंस का आकार डेढ़ मीटर तक हो सकता है, तथा इसका वजन 15 किलो तक होता है हंस के पंखों का फैलाव 3 मीटर तक हो सकता है mute swan, trumpeter swan, और whooper swan  प्रजाति के हंस सबसे बड़े होते हैं, यूरोप में अक्सर इनके मांस के लिए इनका शिकार किया जाता है क्योंकि इनसे काफी मात्रा में स्वादिष्ट मास प्राप्त किया जा सकता है। भेड़िया, लोमड़ी जैसे जानवर हंस का शिकार करते है। ये जानवर इनके अंडे भी खाते है।

      हंस को उड़ते हुए देखना बहुत ही शानदार नजारा होता है यह आकाश में भी V के आकार में उड़ते हैं सबसे आगे प्रमुख नर हंस उड़ता है जो पूरे समूह का रास्ता बताता है तथा उसके पीछे दो अलग अलग लाइनों में दूसरे हंस उड़ान भरते हैं. यह प्रवास करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर तक उड़ कर जाते हैं हंस 95  किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं. इनकी औसत गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा होती है.

      हंसों की औसत उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच होती है, अलग अलग प्रजाति में इसमें थोड़ा बहुत अंतर पाया जाता है उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाला trumpeter swan जो आकार में सबसे बड़ा होता है उसकी औसत उम्र 24 साल होती है,  mute swan नाम की प्रजाति का हंस 20 साल तक जिंदा रहता है, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पाए जाने वाला काला हंस सबसे ज्यादा 40 वर्षों तक जीवित रह सकता है.

      हंस पक्षी का आवास तथा भोजन

      हंस को दलदली घास के मैदान पसंद होते हैं यह झील तालाबों नदियों और जल धाराओं के पास पाए जाते हैं,  हंस पूरी तरह शाकाहारी होते हैं यह मुख्यतः पौधों की जड़ें, नरम तने, कलियां, पत्ते तथा छोटे फल खाते हैं.

      हंस 4 से 7 साल की उम्र में व्यस्क होते हैं, नर और मादा हंस बहुत लंबे समय के लिए जोड़ा बनाते हैं कभी-कभी यह पूरे जीवन काल तक साथ रहते हैं और कोई दूसरा साथी नहीं चुनते हैं, नर और मादा हंस सैकड़ों किलोमीटर का प्रवास करने के दौरान भी साथ रहते हैं.

      हंस पक्षी जमीन पर ही घोसला बनाते हैं जो की पानी के करीब रहता है,  नर और मादा हंस दोनों मिलकर घोंसला बनाते हैं तथा अंडों को बारी-बारी से सेते हैं हंस के अंडों का आकार 113 X 74 मिलीमीटर का होता है इनके अंडे का वजन 340 ग्राम होता है हमसे एक बार में 4 से 7 अंडे देते हैं,  इन अण्डों से 34 से 45 दिन तक सेया जाता है, हंस पक्षी अपने घोंसले की आक्रामकता से रक्षा करते हैं पास जाने पर यह इंसानों पर भी हमला कर देते हैं.

      क्या हंस मोती और हीरे खाते हैं ?

      हंस वास्तव में शाकाहारी पक्षी होते हैं, केवल कभी-कभी यह छोटे कीड़े खा लेते हैं, इनके भोजन में मुख्यतः पत्तियां झील में होने वाले छोटे पौधे तने फूल की कलियां इत्यादि होते हैं,  हंस की कोई भी प्रजाति मोती नहीं खाती है, ना ही हंस हीरे खाते हैं यह सब काल्पनिक बातें लोक साहित्य में लिखी गई है. साहित्य में अलग-अलग बातों का वर्णन करने के लिए उपमाओं का उपयोग किया जाता है हंस का मोती खाने की बात भी एक उपमा है इसका वास्तविकता से कुछ लेना देना नहीं है. अगर एसा होता तो लोग एक भी हंस को जीवित ना छोड़ते उनके पेट से आसानी से हीरे मोती निकलने के चक्कर में सब को मार डालते. दूसरा सबूत यह हे की हजारों हंसो को मांस के लिए यूरोप में मारा जाता हे किसी एक के पेट से भी आज तक मोती नहीं निकले.

      हंस से सम्बंधित मान्यताएं 

      हंस पक्षी की सुंदरता की वजह से इसके साथ कई कहानियां और मान्यताएं जुड़ी हुई है, कि हंस पक्षी का खाना मोती और हीरे होते हैं तथा हंस पक्षी पानी और दूध को अलग कर सकता है,  इसे नीर क्षीर विवेक कहते हैं. अक्सर किस्से और कहानियां और कविताओं में कहा गया है कि हंस दूध और पानी को अलग अलग कर देता है दूध और पानी के मिश्रण में से दूध पी लेता है पानी छोड़ देता है इसीलिए इसे काफी विवेक शील माना जाता है इस घटना को  नीर क्षीर विवेक नाम दिया गया है, लेकिन इसका वास्तविकता से कुछ लेना देना नहीं है हंस दूध और पानी अलग नहीं कर सकते किसी भी प्राणी के लिए संभव नहीं है, वास्तव में हंस की सुंदरता को देखकर हमारे पूर्वजों ने यह मान लिया कि यह  दिव्य पक्षी है इसके अंदर देवी शक्तियां होनी चाहिए और इस तरह उन्होंने हंस की शक्तियों की कल्पना की. हंस वास्तव में दूध और पानी को अलग नहीं कर पाता है

      हंस पर निबंध - Hans par Nibandh

      हंस पृथ्वी पर पाये सबसे शानदार पक्षियों में से एक है।  पक्षी प्रजाति मे सबसे श्रेष्ठ पक्षी को माना जाता है। ये सबसे सुंदर भी होता है। इसे माता सरस्वती का वाहन भी माना जाता है। हंस का आकार तथा मिलाव बत्तक के समान होता है। जल हंस का घर होता है। हंस अपना ज़्यादातर जीवन जल मे ही व्यतित करते है।

      हंस को सबसे पवित्र पक्षी भी माना जाता है। ये दिखने मे बहुत ही सुंदर है। ये बहुत ही प्यारा होता है। हंस वर्तमान मे पूरे विश्व के हर भाग मे पाये जाते है। हंस को बड़े तालाबो मे रहना अच्छा लगता है। ये पक्षी बहुत ही शांति के साथ अपना जीवन व्यतीत करता है। हमारे देश मे पाये जाने वाले हंस राजहंस प्रजाति के है।

      हंस का परिचय

      हंस बड़े आकार का होता है। इसका रंग सफ़ेद होता है। हंस बहुत ही शर्मीले स्वभाव का होता है। हंस का अपना घर नहीं होता है। ये जल मे ही तैरता रहता है। इसी कारण इसे जलचर पक्षी के नाम से भी जाना जाता है। आपने एक कहावत तो सुनी होगी। हंस मे ''दूध का दूध पानी का पानी'' करने की क्षमता रखता है। ये कहावत हंस पर ही बनाई गयी है। इस कहावत का अर्थ है। सत्य तथा असत्य मे अंतर करना इस पक्षी की खासियत है। इसलिए इसे सत्य का प्रतीक भी कहते है।

      हंस का भोजन

      हंस का प्रमुख भोजन होता है। बीज, छोटे-बड़े कीड़े- मकोड़े, ईल घास, हरे शैवाल तथा बोर खाता है। कई लोगो का मानना है। कि हंस मोती को चुनकर खाता है। इस बात को हम नहीं मान सकते है। क्योकि इसे वैज्ञानिको ने  साबित नहीं किया है।

      हंस की प्रजातियां 

      इस संसार मे हंसो की 6 प्रजातीय पायी जाती है। पहले हंसो की प्रजातियों मे कोस्कोरोबा हंस भी हुआ करते थे। जो कि वर्तमान मे हंस नहीं है। भारतीय हंसो का रंग सफ़ेद होता है। आस्ट्रेलिया मे पाये जाने वाले हंसो का रंग काला होता है। हंस का जीवनकाल 8 से 10 साल का होता है। ये ज़्यादातर समय अपने साथी के साथ ही बिताते है।

      1. राजहंस - इस प्रजाति के हंस भारत मे पाये जाते है। इन हंसो का रंग सफ़ेद होता है।

      2. काला हंस प्रजाति - ये हंस आस्ट्रेलिया मे पाये जाते है। इनका रंग काला होता है। इसलिए इनकी इस प्रजाति को ब्लैक स्वान कहते है।

      3. हूपर हंस प्रजाति - ये हंस आइसलैंड यूरोप और एशिया में पाये जाते है। ये प्रजाति वर्तमान मे विलुप्त होने की कगार पर है।

      4. टुंड्रा हंस प्रजाति - ( इस प्रजाति के हंस यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका मे पाये जाते है। इसके दो रूप है। जिन्हे उप प्रजाति भी कहा जाता है।)

      5. म्यूट हंस - ये यूरोप, दक्षिणी रूस, चीन मे रहते है।

      6. काले गले वाला हंस - काले गले वाला हंस दक्षिण अमेरिका मे पाये जाते है।

      हंस की शारीरिक बनावट

      हंस का शरीर विशालकाय होता है। जिस कारण ये ज्यादा समय तक आकाश मे नहीं उड़ सकता है। हंस कई रंगो के होते है। जिसमे प्रमुख रंग काला तथा सफ़ेद होता है। काले रंग के हंस न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया मे पाये जाते है। सफ़ेद रंग के हंस भारत मे पाये जाते है। हंस की गर्दन सबसे लंबी तथा घुमावदार होती है। एक स्वस्थ हंस का वजन 10 से 15 किलोग्राम होता है। 

      हंस के शरीर की लंबाई लगभग 145 सेमी. तक हो सकती है। हंस के दो पैर होते है। जिससे इसे पानी मे तैरने तथा जमीन पर चलने मे सहायता कराते है। हंस की आंखे काले रंग की होती है। इनकी आंखे बहुत ही तेज होती है। जिससे ये छोटे-छोटे कीड़ो को आसानी से ढूंढ पाती है। हंस के पंख सफ़ेद रंग क्के होते है। इनके पंखो आ आकार लगभग 2 मीटर तक का होता है। 

      हंस की मुख्य विशेषताएं

      पूर्व के वैज्ञानिको के आधार पर हंसो को नीर क्षीर पंछी भी माना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषता है।  हंस पर एक कहावत है कि ''दूध का दूध पानी का पानी'' यानि यानि हंस को सत्य और असत्य की परख होती है। हंस अपने सम्पूर्ण जीवन एक साथी के साथ गुजरता है। यदि साथी की मृत्यु हो जाए तो हंस अकेला ही अपना जीवन व्यतित कर देता है। हंस के एक बहुत ही तीखी चोंच होती है। जिससे ये अपने भोजन को आसानी से पकड़ता है। हंस का रंग ही सफ़ेद नहीं होता परंतु इसका दिल भी बहुत साफ होता है। हंस की आवाज बहुत ही सुरीली तथा मीठी होती है। 

      हंस का जीवन काल

      भारतीय हंसो का औसतन जीवनकाल 10-15 साल तक का होता है। हंस अपने जीवन मे हर समय मुश्किल से बिताता है। हंसिनी एक बार मे 8-10 अंडे देती है। हंस का अपना अलग ही अंदाज होता है। यह एक रचनात्मक पक्षी भी होता है। हंस अपने जीवन से भी ज्यादा अपने बच्चो का ख्याल रखता है।

      हंस के रोचक तथ्य

      हंस को जब हम हंसिनी जब साथ में विचरण करते हुए देखते है। तो वे हमे इस समय मन को बहुत ही अच्छे लगते है। हाँ-हंसनी का विचरण देखने के लिए लोग बहुत दूरी से देखने आते है। भारतीय लोगो को हंस बहुत पसंद आता है। हंस पर भारत मे कई प्रचलित कथा मे हंस का वर्णन किया जाता है। 

      हंस अपने जीवन मे एक साथी का चयन करता है। और उसके साथ ही अपना जीवन बिताता है। मादा हंस एक बार मे 5से 9 अंडे देती है। इन अंडो मे से बच्चे 35 से 42 दिन मे बाहर आते है। हिन्दू धर्म मे इसे मारना महापाप है। हंसो का मूल निवास कैलाश पर्वत है। हंस कभी भी किसी का बुरा नहीं करते है।

      धार्मिक महत्व

      हंस को भारत मे सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिन्दुओ तथा भारतीय संस्कृति मे हंस को सबसे महत्वपूर्ण पक्षी माना जाता है। हंस को विद्या की देवी माता सरस्वती का वाहन भी कहा जाता है। इसका रंग बहुत ही आकर्षित करने वाला होता है।

      हंस के स्वभाव

      हंस को शांत पक्षी माना जाता है। परंतु ये जब अपने बच्चो की रक्षा कर रहा होता है। तब हंस के पास नहीं जाना चाहिए। इस समय हंस सीधा आक्रमण करता है। हंस के सम्पूर्ण शरीर मे लगभग 3000 पंख होते है। जिससे ये पानी मे आसानी से तैर सकता है। हंस एक सर्वाहारी पक्षी है। ये फलो के साथ-साथ कीड़े-मकोड़े तथा मछलियो को भी खाता है।   

      निष्कर्ष 

      हंस बहुत ही शानदार पक्षी होते हैं। परन्तु वर्तमान में इनकी संख्या बहुत ही काम बची है। इसलिए हमें इन खूबसूरत पक्षियों की रक्षा करनी चाहिए जिससे ये  इतिहास का एक पन्ना बनकर न रह जाएँ। 

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      Tuesday, 17 May 2022

      गेंद पर निबंध - Essay on Ball in Hindi

      गेंद पर निबंध - Essay on Ball in Hindi

      गेंद पर निबंध - Essay on Ball in Hindi

        गेंद पर निबंध 150 शब्द

        गेंद एक गोलाकार खेलने की वस्तु है, जिससे सभी बच्चे बहुत पसंद करते हैं। गेंद अलग-अलग रंगों तथा आकार में आती हैं। बाजार से हम हरी, नीली, सफ़ेद जैसी चाहें और जिस आकार में चाहें गेंद खरीद सकते हैं। इन गेंदों का वजन भी अलग-अलग होता है। अलग-अलग खेलों में अलग-अलग प्रकार की गेंद का उपयोग होता है जैसे क्रिकेट में के खेल में लेदर की छोटी गेंद जबकि फुटबॉल में बड़ी गेंद का उपयोग किया जाता है। गेंद से हम विभिन्न खेल खेल सकते हैं जैसे क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल और फुटबॉल आदि।

        गेंद छोटे बच्चों से लेकर बड़ी उम्र के लोगों तक लगभग सभी को पसंद होती है। गेंद शारीरिक व्यायाम का भी श्रेष्ठ साधन है। गेंद ना सिर्फ मनुष्य बल्कि जानवरों के लिए भी मनोरंजन का एक साधन है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम कई बार कुछ ऐसे कुत्तों को देखते हैं जो मालिक द्वारा बॉल फेंकने पर उसे पकड़कर लाते हैं।

        गेंद पर निबंध 200 शब्द

        गेंद विभिन्न उपयोगों वाली एक गोल वस्तु है। गेंद का उपयोग खेलों में किया जाता है, जहां खिलाड़ी गेंद का पीछा करते हैं, लात मारते हैं या फेंकते हैं। गेंदों का उपयोग सरल गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है, जैसे कैच या बाजीगरी। एक गेंद कई अलग-अलग चीजों से बनाई जाती है जैसे कि चमड़ा, रबर और प्लास्टिक आदि।

        गेंद विभिन्न रंगों की होती है जैसे हरा, लाल, सफ़ेद और नीला आदि। एक गेंद का आकर और वजन निश्चित नहीं होता। विभिन्न खेलों के आधार पर एक गेंद का वजन और आकार घट या बढ़ सकता है। जैसे क्रिकेट के गेंद छोटी तथा हल्की होती है जबकि फूटबाल की गेंद वजनी तथा भारी होती है। 

        दुनिया भर में बड़ी संख्या में ऐसे खेल हैं जो गेंदों से खेले जाते हैं। उनमें से कुछ घर के अंदर खेले जाते हैं जबकि अन्य बड़े मैदानों में खेले जाते हैं। कई खेलों में केवल एक गेंद का उपयोग किया जाता है जबकि अन्य में, खिलाड़ी गेंदों को फेंकने के लिए रैकेट, बल्ले या क्लब का उपयोग करते हैं। कुछ सबसे प्रसिद्ध बॉल गेम्स में टेनिस, बेसबॉल, गोल्फ, क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल आदि शामिल हैं।

        प्लास्टिक बॉल हों, टेनिस बॉल हों या सॉफ्टबॉल, बच्चे उन्हें बहुत पसंद करते हैं और उन्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त बना लेते हैं। बगीचे या मैदान में गेंद के साथ खेलना एक अच्छी शारीरिक गतिविधि है। हालांकि, सभी खेलों को केवल गेंद को पकड़ने और उसे वापस फेंकने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

        Monday, 16 May 2022

        काला गिद्ध की जानकारी - Black Vulture in Hindi

        काला गिद्ध की जानकारी - Black Vulture in Hindi

        काला गिद्ध की जानकारी - Black Vulture in Hindi

        काला गिद्ध : काला गिद्ध (Coragyps atratus), जिसे अमेरिकी काला गिद्ध भी कहा जाता है, न्यू वर्ल्ड गिद्ध परिवार का एक पक्षी है। काले गिद्ध के पंख काले और चमकदार होते हैं। काले गिद्ध का सिर और गर्दन पंखहीन होते हैं जबकि त्वचा गहरे भूरे और झुर्रीदार होती है। पैर भूरे सफेद होते हैं और पैर के सामने के दो पैर लंबे होते हैं।यह उत्तरपूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका से दक्षिण अमेरिका में पेरू, मध्य चिली और उरुग्वे में पाया जाता है। 

        काला गिद्ध की जानकारी - Black Vulture in Hindi

        काला गिद्ध एक काफी बड़ा मेहतर है, जिसकी लंबाई 56-74 सेमी (22-29 इंच) है। काले गिद्ध के पंखों का फैलाव 1.33-1.67 मीटर (52-66 इंच) है। उत्तरी अमेरिका और एंडीज के काले गिद्धों का वजन 1.6 से 3 किग्रा (3.5 से 6.6 पाउंड) तक होता है, लेकिन उष्णकटिबंधीय निचले इलाकों के छोटे गिद्धों में यह 1.18–1.94 किग्रा (2.6–4.3 पाउंड) हो सकता है।

        यह जीनस कोराजिप्स का एकमात्र मौजूदा सदस्य है, जो कैथार्टिडे परिवार में है। समान नाम और शारीरिक उपस्थिति के बावजूद, यह प्रजाति यूरेशियन काले गिद्ध से बिल्कुल भी संबंधित नहीं है जो कि एक पुरानी दुनिया का गिद्ध है जैसे कि चील, बाज, गरुड़ और हैरियर। यू.एस. में, काले गिद्ध अपने लाल सिर वाले रिश्तेदारों, तुर्की गिद्धों की तुलना में कम संख्या में हैं, लेकिन वे पश्चिमी गोलार्ध में सबसे अधिक पाए जाने वाले गिद्ध हैं।

        टर्की के गिद्धों की सूंघने की क्षमता बहुत अच्छी होती है, लेकिन काले गिद्धों की सूंघने की क्षमता उनके जितनी अच्छी नहीं होती। भोजन खोजने के लिए वे आसमान में ऊंची उड़ान भरते हैं और नीचे उड़ते हुए तुर्की गिद्धों पर नजर रखते हैं। जब एक तुर्की गिद्ध की नाक सड़ते हुए मांस की स्वादिष्ट सुगंध का पता लगाती है और एक शव पर उतरती है, तो काला गिद्ध उसके पीछे पीछे आ जाता है।

        आमने-सामने एक मुठभेड़ में, काले गिद्ध थोड़े बड़े तुर्की गिद्ध से हार जाते हैं। लेकिन काले गिद्धों के झुंड जल्दी से एक शव को अपने कब्जे में ले लेते हैं और अधिक एकांतप्रिय तुर्की गिद्धों को भगा देते हैं।

        गिद्ध पक्षी पर निबंध - Essay on Vulture Bird in Hindi

        गिद्ध पक्षी पर निबंध - Essay on Vulture Bird in Hindi

        गिद्ध पक्षी पर निबंध - Essay on Vulture Bird in Hindi

        Essay on Vulture Bird in Hindi : इस लेख में गिद्ध पक्षी पर निबंध अलग-अलग शब्द सीमा जैसे 100 , 200, 300 और 500 शब्द में लिखा गया है। जिसे पढ़कर आप गिद्ध पक्षी पर निबंध लिखना सीख जायेंगे। 
        गिद्ध पक्षी पर निबंध - Essay on Vulture Bird in Hindi

        गिद्ध पक्षी पर निबंध (100 शब्द) for Class 1 and 2

        गिद्ध शिकारी पक्षियों के अंतर्गत आने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं। ये कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी हैं। गिद्ध की दृष्टि बहुत तेज होती है। अन्य शिकारी पक्षियों की तरह गिद्ध की चोंच भी टेढ़ी और मजबूत होती है, लेकिन इनके पंजे और नाखून उनके जैसे तेज और मजबूत नहीं होते। गिद्ध की उम्र 50 से 60 वर्ष तक होती है। गिद्ध पैनी नजर का पक्षी है। गिद्ध ऊंचे पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं। भारत में गिद्धों की कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से चार प्रजाति अब विलुप्ति की कगार पर हैं।

        गिद्ध पक्षी पर निबंध (200 शब्द) for Class 3 and 4

        गिद्ध एक मुर्दाखोर पक्षी है, वे शिकार नहीं करते। गिद्ध प्रकृति में विकसित एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्राणी है। गिद्ध की प्रमुख विशेषता उसकी पर्यावरण को स्वच्छ रखने की कुदरती कला है। गिद्ध एक मुर्दाखोर पक्षी है जो जंगलों में मृत जानवरों के अवशेषों और सड़े गले मांस को जल्दी से खा जाता है जिस कारण मृत अवशेषों की दुर्गन्ध जंगल में नहीं फैलने पाती और इस प्रकार पूरा वातावरण एवं इकोसिस्टम स्वच्छ बना रहता है। इसीलिए गिद्धों को 'प्राकृतिक सफाईकर्मी' की संज्ञा दी गई है 

        भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं। गिद्ध अलग-अलग प्रजातियों के होते हैं। इनका औसतन वजन 3.5 - 7.5 किलोग्राम के बीच होता है। गिद्ध की लंबाई 75 से 93 सेमी और पंखों का फैलाव 6.3 से 8.5 फीट तक होता है।  गिद्ध 7,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और एक बार में 100 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी बहुत आसानी से कवर कर सकते हैं। 

        गिद्ध हमारे पर्यावरण के संतुलन के लिए एक आवश्यक पक्षी है। आज से कुछ साल पहले गिद्ध भारत में प्रचुर मात्रा में पायी जाती थी। गिद्धों की संख्या सन 1980 तक भारत में चार करोड़ से भी ऊपर थी, परन्तु आज गिद्ध विलुप्तप्राय की सूची में हैं।

        गिद्ध पक्षी पर निबंध (300 शब्द) for Class 5 and 6

        गिद्ध मुर्दाखोर पक्षी होते हैं। जिसे अंग्रेजी में वल्चर कहा जाता है। गिद्ध पर्यावरण को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बड़े पशुओं के शवों को फटाफट चट कर जाते हैं। इस प्रकार गिद्ध सड़न से पैदा होने वाले विषाणुओं को फैलने से रोकते हैं। यह ऊँची उड़ान भरकर इंसानी आबादी के नज़दीक या जंगलों में मुर्दा पशु को ढूंढ लेते हैं और उनका आहार करते हैं। गिद्ध की आंखें बहुत तेज होती हैं। और काफ़ी ऊँचाई से यह अपना आहार ढूंढ लेते हैं।

        दुनिया भर में गिद्ध की कुल 22 प्रजातियां पाई जाती हैं। अलग-अलग प्रजाति के गिद्ध अलग-अलग तरह तापमान और जलवायु में पैदा होते हैं। गिद्ध की उम्र 50 से 60 वर्ष तक होती है। ये झुंडों में रहने वाले पक्षी हैं। गिद्ध का औसतन वजन 3.5 - 7.5 किलोग्राम के बीच होता है जबकि इनकी लंबाई 75 से 93 सेमी और पंखों का फैलाव 6.3 से 8.5 फीट तक होता है। गिद्ध 7,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और एक बार में 100 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी बहुत आसानी से तय कर सकते हैं। 

        गिद्ध पक्षी की प्रजाति को दो भागों में बाँटे जा सकते हैं। पहले भाग में अमरीका के कॉण्डर (Condor), किंग वल्चर, कैलिफोर्नियन गिद्ध (Californian Vulture), टर्की बज़र्ड और अमरीकी काले गिद्ध होते हैं और दूसरे भाग में अफ्रीका और एशिया के राजगिद्ध (King Vulture), काला गिद्ध, सफ़ेद पीठ वाला गिद्ध (White backed Vulture), बड़ा गिद्ध (Griffon Vulture) और मेहतर गिद्ध (Scavenger Vulture) मुख्य हैं।

        गिद्ध का वर्णन भारत के पौराणिक महाकाव्य रामायण में भी किया गया है जहां रावण की चंगुल से सीता को बचाने के दौरान गिद्धों के राजा जटायु ने अपनी जान गंवा दी थी। भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं। 1980 तक भारत में द्धों की संख्या चार करोड़ से भी ऊपर थी, परन्तु आज गिद्ध विलुप्तप्राय की सूची में हैं।

        गिद्ध पक्षी पर निबंध (500 शब्द) for Class 7 and 8

        गिद्ध विशाल शिकारी पक्षी हैं। अन्य शिकारी पक्षियों के विपरीत, गिद्ध आमतौर पर जीवित जानवरों का शिकार नहीं करते हैं। वे ज्यादातर मरे हुए जानवरों का मांस खाते हैं। जब एक गिद्ध को मरा हुआ या मरता हुआ जानवर मिलता है, तो दूसरे गिद्ध मीलों दूर से उड़कर भोजन करने आते हैं।

        गिद्ध सभी उड़ने वाले पक्षियों में सबसे बड़े पक्षियों में से एक हैं। गिद्ध घंटों तक उड़ सकते हैं, अपने लंबे, चौड़े पंखों के साथ इनायत से उड़ सकते हैं। उनके पंख आमतौर पर भूरे, काले या सफेद होते हैं। हालांकि, अधिकांश गिद्धों के सिर और गर्दन पर पंख नहीं होते हैं। गिद्धों की दृष्टि उत्कृष्ट होती है। वह रोज गश्त पर निकलते हैं। वह आसमान में उड़ते हुए देखते हैं कि धरती पर कहां कोई शव पड़ा हुआ है, कोई मांस जो सड़ रहा है, जिसमें वायरस पैदा होने वाले हैं। दिखाई देते ही वह तुरंत धरती पर उतरते हैं और फटाफट चट कर जाते हैं।

        दुनिया भर में गिद्ध की कुल 22 प्रजातियां पाई जाती हैं। अलग-अलग प्रजाति के गिद्ध अलग-अलग तरह तापमान और जलवायु में पैदा होते हैं और अपने इलाके को महामारी से बचाए रखते हैं। गिद्ध पक्षी दो भागों में बाँटे जा सकते हैं। पहले भाग में अमरीका के कॉण्डर, किंग वल्चर, कैलिफोर्नियन गिद्ध, टर्की बज़र्ड और अमरीकी काले गिद्ध होते हैं और दूसरे भाग में अफ्रीका और एशिया के राजगिद्ध, काला गिद्ध, चमर गिद्ध, ग्रिफिन गिद्ध और मेहतर गिद्ध मुख्य हैं। 

        प्राणी विज्ञान के विशेषज्ञ बताते हैं कि पृथ्वी पर पारिस्थितिकीय संतुलन में गिद्ध की महत्वपूर्ण भूमिका है। पूरी पृथ्वी पर केवल गिद्ध ही हैं जो बदबूदार मांस और गंदगी को फटाफट चट कर जाते हैं। यदि बदबूदार माँस को तत्काल नष्ट नहीं किया गया तो उसमें कई तरह के खतरनाक वायरस जन्म ले सकते हैं। इन वायरस के कारण दुनिया में महामारी फैल सकती है। सरल शब्दों में कहें तो गिद्ध वो जीव है जो डॉक्टरों से ज्यादा अच्छा काम करता है। डॉक्टर तो महामारी से पीड़ित लोगों का इलाज मात्र करते हैं परंतु गिद्ध महामारी को पनपने से पहले ही रोक देता है।

        ये किसी ऊँचे पेड़ पर अपना भद्दा सा घोंसला बनाते हैं, जिसमें मादा एक या दो सफेद अंडे देती है। यह जाति आज से कुछ साल पहले अपने पूरे क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में पायी जाती थी। १९९० के दशक में इस जाति का ९७% से ९९% पतन हो गया है। इसका मूलतः कारण पशु दवाई डाइक्लोफिनॅक (diclofenac) है जो कि पशुओं के जोड़ों के दर्द को मिटाने में मदद करती है। जब यह दवाई खाया हुआ पशु मर जाता है और उसको मरने से थोड़ा पहले यह दवाई दी गई होती है और उसको भारतीय गिद्ध खाता है तो उसके गुर्दे बंद हो जाते हैं और वह मर जाता है। अब नई दवाई मॅलॉक्सिकॅम आ गई है और यह हमारे गिद्धों के लिये हानिकारक भी नहीं हैं। गिद्धों की संख्या सन 1980 तक भारत में चार करोड़ से भी ऊपर थी लेकिन 2017 तक आते-आते इनकी संख्या मात्र 19 हज़ार रह गई। जब इस दवाई का उत्पादन बढ़ जायेगा तो सारे पशु-पालक इसका इस्तेमाल करेंगे और शायद हमारे गिद्ध  विलुप्त होने से बच सकें। 

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          चील पर निबंध (50 words) for Class 1, 2

          चील लगभग दो फुट लंबी चिड़िया है, जिसकी दुम लंबी ओर दोफंकी रहती है। चील का सारा शरीर  भूरा होता है, जिस पर गहरे रंग के सेहरे से पड़े रहते हैं। चील की चोंच काली और टाँगें छोटी और पीली होती हैं। चील के पंख बड़े और पंजे मजबूत होते हैं। चील उड़ने में बड़ी दक्ष होती है। यह ऐसी सफाई से झपट्टा मारती है कि देखकर ताज्जुब होता है। चील एक सर्वभक्षी तथा मुर्दाखोर चिड़िया है, जिससे कोई भी खाने की वस्तु नहीं बचने पाती। 

          चील पर निबंध (100 words) for Class 3, 4

          चील एक मांसाहारी पक्षी है। चील की 60 से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं। चील की अधिकांश प्रजातियाँ यूरेशिया और अफ्रीका में पाई जाती हैं। चील दिन में शिकार करती है। इनकी दृष्टि बहुत अच्छी होती है। चील के पंख विशाल होते है जिसकी सहायता से ये  रफ़्तार से उड़ पाती है। चील मांसाहारी होते हैं। जिसका अर्थ है कि वे अन्य पक्षियों और जानवरों का मांस खाते हैं। चील शिकारी पक्षी होते है जैसे कि गिद्ध और बाज़ । चील अपने भोजन को हथियाने के लिए अपने मजबूत पंजे का उपयोग करते हैं, और वे अपने शिकार के मांस को फाड़ने में मदद करने के लिए अपनी तेज चोंच का उपयोग करते हैं।

          चील पर निबंध (200 words) for Class 5, 6

          परिचय : चील एक विशाल पक्षी है, जो लगभग पूरे देश में पाया जाता है। चील एक मांसाहारी पक्षी है। चील अन्य पक्षियों की तुलना में बहुत ऊंची उड़ान भरती है। इसकी दृष्टि बहुत अच्छी होती है। दुनिया भर में चील की लगभग 60 विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।

          भोजन: चील एक मांसाहारी पक्षी है। यह सांप, खरगोश, मछली, मेंढक और छोटे पक्षियों आदि का शिकार करना पसंद करता है।

          जीवन काल: एक बाज का जीवनकाल लगभग 15 से 20 वर्ष का होता है। ईगल आमतौर पर ऊंचे पेड़ों या ऊंची चट्टानों पर अपना घोंसला बनाते हैं।

          चील की शारीरिक संरचना: बाज़ अन्य पक्षियों की तुलना में एक बड़ा पक्षी है। चील की दो तेज आंखें, एक मजबूत चोंच, दो विशाल पंख, दो मजबूत पैर और शक्तिशाली पंजे होते हैं। चील का पूरा शरीर छोटे पंखों से ढका होता है।

          विशेषताएं: बाज की दृष्टि बहुत अच्छी होती है, जो लगभग 5 किमी की दूरी से अपने शिकार को देख सकती है। चील की चोंच मजबूत और आगे की ओर मुड़ी हुई होती है, जिससे वह अपने शिकार के मांस को आसानी से चीर सकती है। इसकी चोंच आमतौर पर अन्य शिकारी पक्षियों की तुलना में भारी होती है। इसके पंजे बहुत मजबूत और शक्तिशाली होते हैं, जो अपने शिकार को आसानी से पकड़ सकते हैं। अधिकांश बाज जमीन पर उतरे बिना ही अपने शिकार को पकड़ लेते हैं।

          चील पर निबंध (500 शब्द )

          चील एक बहुत ही चतुर पक्षी माना जाता है। चील एक विशालकाय पक्षी है। चील की लगभग दो फुट लम्बी होती है इसका शरीर कई रंगों से बना होता है।  इसका बदन कलछौंह भूरा, चोंच काली और टांगे पीली होती है। चील की आँखे बहुत तेज होती है जिससे यह दूर से ही अपने शिकार पर घात लगाकर झपट्टा मार ले जाती है। अपने शिकार पर तेजी से झपटने के कारण चील को कुशल शिकारी पक्षी माना जाता है। 

          चील संसार के प्राय सभी गरम देशो में पाई जाती है यह बहुत तेज उड़ती है व आसमान में बहुत ऊंचाई पर चक्कर लगाती रहती है। संसारभर में चील की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें ब्रह्मनी या खैरी चील, ऑल बिल्ड चील तथा ह्विसलिंग चील मुख्य हैं. भारत में काली चील को आसानी से देखा जा सकता हैं. चील की लम्बाई लगभग 2 फुट होती हैं इसकी दुम साधारण चिड़ियाँ से बड़ी तथा दो फंकी होती हैं. इसकी शारीरिक पहचान काली चोंच एवं पीली टांगों को देखकर आसानी से की जा सकती हैं.

          उड़ान तथा अपने शिकार पर अनूठे अधिकार के लिए चील जानी जाती हैं. यह हवा में उडती हुई अपने शिकार को आसानी से पंजों में दबा लेती हैं साथ ही सैकड़ों मीटर नीचे जमीन पर चल रहे शिकार पर इतनी दक्षता से आक्रमण करती है कि उसे अपनी मौत का जरा सा भी एहसास नहीं हो पाता हैं. चील सड़े गले पदार्थों से लेकर समस्त जीवों से अपना पेट भर लेती हैं यह मानव बस्तियों में निसंकोच भाव से घौसला बनाकर रहने लगती हैं.

          Black Kite काली चील

          काली चील एक भारतीय मूल का शिकारी पक्षी हैं यह अपने शिकार की कला के लिए विख्यात हैं. यह अपना अधिकतर वक्त हवा में उड़ते हुए ही व्यतीत करती हैं. काली चील जीवित जीवों का शिकार करने की बजाय मृत जीवों के लिए विशेष आकर्षित रहती हैं. छोटे आकार की इस चील का वैज्ञानिक नाम Milvus migrans है तथा यह Accipitridae कुल से संबंधित हैं.

          इनकी सर्वाधिक तादाद एशिया खासकर भारत और इसके अतिरिक्त ऑस्टेलिया एवं यूरोप महाद्वीप में भी इन्हें देखा जा सकता हैं. बदलते मौसम और तापमान के साथ यह स्थान परिवर्तित भी करती हैं. वातावरण के साथ अनुकूलन का उत्क्रष्ट गुण इनमें देखा जा सकता हैं.

          आज के दौर में जहाँ अधिकतर पक्षियों की प्रजातियाँ अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं वही चील ने बेहतरीन अनुकूलन के चलते अपने अस्तित्व को नगरीय जीवन के अनुकूल भी बनाया हैं. जंगलो में लगने वाली आग के समय जब समस्त जीव जन्तु भागने लगते है वही चील उस समय अपने शिकार के लिए देखती हैं. मृत जानवरों एवं मनुष्य द्वारा त्यागे गये मांस के अवशेष का अपमार्जन करने में काली चील की अहम भूमिका हैं.

          कई शारीरिक विशेषताओं से युक्त काली चील आसानी से अपना भोजन ढूढ़ लेती हैं. इनके मजबूत पंजे शिकार को पकड़ने तथा उस पर पकड़ बनाने में, लम्बी पूछ इसके उतरने की गति में तीव्रता लाती हैं साथ ही चील की आँखें इतनी तेज होती है कि सौ मीटर ऊपर आसमान में उडती हुई चूहे , मेढ़क जैसे जीवों को विचरण करते देख सकती हैं. काली चील का मुख्य भोजन जानवरों का मांस, छोटी मछलियां, छोटे पक्षी, चमगादड़ हैं.

          चील पर निबंध इन हिंदी 

          अपने कभी आकाश में दूर सबसे ऊपर पक्षी को उड़ते हुए देखा होगा। चील पक्षी आकाश में काफी ऊंचाई पर उड़ता है। चील पक्षी काफी बड़े आकार का होता है लेकिन इसका वजन में काफी कम होता है। आकाश में उड़ने के बावजूद भी वो नीचे धरती पर अपने शिकार को आसानी से पकड़ लेता है। चील एक चालाक पक्षी माना जाता है। 

          चील एक शिकारी पक्षी है, जिसकी विभिन्न 25 प्रजातियाँ दुनिया भर में रहती हैं। अंटार्कटिका को छोड़कर, वे पृथ्वी पर लगभग हर भाग पर रहते हैं। ये पक्षी उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया, यूरेशिया, अफ्रीका और बहुत कुछ में रहते हैं। ये पक्षी प्रजातियों से प्रजातियों में आकार में भिन्न होते हैं। वे शिकार के पक्षी हैं ।उनके लंबे पंख और कमजोर पैर हैं। वे ज्यादातर समय उड़ने में बिताते हैं।

          चील की जातियां

          चील सर्वभक्षी पक्षी कहलाता हैं। चील की सभी प्रजातियों में काली चील, ब्राह्मनी चील, लाल चील, ऑल बिल्ड चील काफी मशहूर है। काली चील एशियाई क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है लेकिन उनकी संख्या भारत में ज्यादा है। काली चील एक मौकापरस्त पक्षी है हालाँकि एक रिपोर्ट के अनुसार इसने इंसानों के साथ जीना सिख लिया है।

          ब्राह्मनी चील को क्षेमकरी और खेमकारी नामों से भी जाना जाता है। भारत में यह चील भारतीय चील के नाम से जानी जाती है। ब्राह्मनी चील ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, चीन जैसे क्षेत्र में ज्यादा पाई जाती है। ब्राह्मनी चील धान के खेतों के आसपास ज्यादा रहती है।

          चील की शारीरिक रचना

          वैसे तो चील की आकृति देखने में चिड़ियाँ जैसी मालूम होती है लेकिन चिल 2 फुट लंबा होता है और आकार में बड़ा होता है। उसके शरीर का रंग कलछौंह भूरा होता है। चील का सर छोटा होता है। चील की चोंच छोटी लेकिन पॉइंटेड होती है।

          चील के पंजे मजबूत होते है, जिसके चलते वो अपने शिकार को आसानी से पकड़ सकते है। लम्बी पूछ उनकी उड़ने और उतरने की गति में तीव्रता लाने में मददरूप होता है। फिर एक बार उड़ने के बाद वे करीब पांच घंटे तक उड़ान भर लेते हैं।चील की आंखें बहुत तेज होती है।

          अगर वो जमीन से 200 मीटर की उड़ान भी भर रही हो तब भी जमीन पर उनके शिकार को देख सकती है और आसानी से अपने पंजे में पकड़ भी लेती है।

          चील का निवास स्थान

          चील ज्यादातर बंदरगाह और सूखे रन जैसे विस्तार में पाये जाते है। चील की विभिन्न प्रजातियां विभिन्न प्रकार के आवास में रहती हैं। कुछ गर्म तापमान और उच्च वर्षा वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं तो कुछ ठंडी हवा में रहना पसंद करते है।

          इन पक्षियों में रहने वाले कुछ अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों में सवाना, घास के मैदान, जंगल, वर्षावन, घास के मैदान और बहुत कुछ शामिल हैं। प्रत्येक प्रजाति की अलग-अलग प्राथमिकताएँ होती हैं, हालाँकि कुछ प्रजातियाँ समान निवास स्थान साझा करती हैं। काली चील पेड़ की पतली डाली पर अपना घोंसला बनाना पसंद करती है और घोंसले की सुरक्षा भी करती है।

          चील का भोजन

          चील मुख्य रूप से मांसाहारी होते हैं और विभिन्न प्रकार के शिकार पर भोजन करते हैं। प्रत्येक प्रजाति अलग-अलग शिकार का शिकार करती है और अलग-अलग क्षेत्रों में चील का आहार अलग अलग होता है।

          ये पक्षी चूहों और गिलहरियों से लेकर छिपकलियों, सांपों और मेंढकों तक कुछ भी खाते हैं। कुछ प्रजातियां बहुत विशिष्ट प्रकार के जीवों का शिकार करती है जैसे की घोंघा पतंग, जबकि कुछ प्रकार की चील मृतदेह खाना पसंद करती है।

          चील से जुड़ी मान्यता

          भारतीय पुराणों में भी चील के बारे में काफी बताया गया है। चील को अशुभ पक्षी माना जाता है। कहा जाता है कि चील जिस मकान के उपर बैठती हो, उस मकान में रहनेवालों का बुरा वक्त शुरू हो जाता है। पुराणों में बताया गया की कि अगर चील किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क के उपर से उड़ान भरे तो वो व्यक्ति को काफी कष्टदायक मौत मिलती है।

          स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपके सपने में चील दिखाई दे तो आपको आने वाले समय में बदनामी का सामना करना पड़ सकता है लेकिन सपने में उड़ती हुई चील को देखना यह एक शुभ सपना माना जाता है, जो आपकी सफलता को बताता है।

          निष्कर्ष

          अब चील पक्षी पहले की मुकाबले में कम देखने को मिलते है। चाहे पुराणों में चील को एक बुरा पक्षी बताया गया हो लेकिन हमारे पर्यावरण के लिए वो काफी मददगार साबित हुआ है।

          क्योंकि वो मृतदेहों से उत्पन होने वाले बैक्टेरिया का नाश करता है क्योंकि वो मृतदेहों का भोजन करता है। चील प्रजाति ने अपने अस्तित्व पर होने वाले संकट के कारण मानवजीवन के साथ अपना अनुकूलन बना लिया है।

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          Saturday, 14 May 2022

          तोते पर निबंध - Essay on Parrot in Hindi

          तोते पर निबंध - Essay on Parrot in Hindi

          तोते पर निबंध | Essay on Parrot in Hindi

          तोते पर निबंध | Essay on Parrot in Hindi

            तोते पर 10 वाक्य - Few Lines on Parrot in Hindi

            1. तोता एक बहुत सुन्दर और बुद्धिमान पक्षी होता है।

            2. तोते की सम्पूर्ण विश्व में लगभग 400 प्रजातियां पायी जाती हैं। 

            3. तोता औसतन 40-50 साल तक जीवित रहता हैं। 

            4. तोते विभिन्न रंगों के होते हैं जैसे हरा, पीला, लाल आदि।

            5. तोते की चोंच लाल, मोटी, घुमावदार तथा नुकीली होती है। 

            6. तोते घोसला बनाकर रहते हैं जिसे कोटर कहते हैं। 

            7. तोते मानव बोली की हूबहू नक़ल करने में माहिर होते है। 

            8. तोते शाकाहारी होते हैं ये मुख्यतः फल और सब्जी खाते हैं। 

            9. तोते अपने भोजन को पंजों से पकड़कर खाना पसंद करते हैं। 

            10. तोते की उड़ान नीची और लहरदार, लेकिन तेज होती है।

            तोते पर निबंध (100 शब्द)

            तोता मेरा पसंदीदा पक्षी है। यह बहुत ही सुंदर पक्षी है। तोते के पर हरे रंग के होते हैं जो उड़ते समय बहुत शानदार दिखते हैं। तोता छोटे फल जैसे जामुन, अंगूर आदि खाता है। तोते चावल, आम और यहां तक कि मिर्च भी खाते हैं। तोते की एक मोटी लाल चोंच होती है जो घुमावदार होती है। इसके गले में काला घेरा होता है। तोते को पालना लोगों को बहुत पसंद होता है इसका कारण यह है की तोते इंसानों की वाणी की नकल कर सकते हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि तोते बहुत बुद्धिमान और सुंदर पक्षी हैं।

            तोते पर निबंध (150 शब्द)

            तोता एक शाकाहारी पक्षी है। तोते भोजन के रूप में मुख्यतः सब्जियां और फल खाना पसंद करते हैं। तोते झुण्ड में रहना ज्यादा पसंद करते हैं, इसी कारण जब भी तोते अपने भोजन की तलाश करने जाते हैं तो झुण्ड में जाते हैं। तोता अपने भोजन की तलाश में 1000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान भर सकता है।

            तोता एक बहुत बुद्धिमान पक्षी होता है। यदि तोते को इंसानों के बीच में एक महीने के लिए रख दिया जाए तो यह इंसानों की नकल करने लगता है और इंसानों की तरह कुछ कुछ शब्द बोलने भी लगता है। तोता कोई भी भाषा आसानी से सिख लेता है और इसकी आवाज एक किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। तोते को भारत में ज्यादातर लोग पिंजरे में बंद करके घर में रखते हैं और इसको राम राम जैसे शब्द सिखाये जाते हैं। यह शब्द तोता घर में आये मेहमानों के स्वागत के लिए प्रयोग करता है।

            तोते पर निबन्ध (200 शब्द)

            तोते पक्षी-जगत का अनिवार्य हिस्सा हैं। तोते उष्ण कटिबंधीय पक्षी हैं। तोते बहुत बुद्धिमान पक्षी होते हैं। वे मानव आवाज की नकल करने में माहिर हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि जैसे कई देशों के वन्यजीवन के लिए तोते महत्वपूर्ण हैं। 

            तोता बहुत ही सुंदर पक्षी होता है। तोते शाकाहारी होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे पौधे और फल खाते हैं। तोते अंगूर, जामुन, आम आदि जैसे फलों को खाते हैं। वे पौधों की पत्तियों, अनाज और यहां तक ​​कि पके हुए चावल भी खाते हैं। तोते बहुत बुद्धिमान पक्षी हैं और वे समय के साथ मानव भाषा सीख जाते हैं। एक पालतू तोता आमतौर पर अपने मालिक की बोली की नक़ल करने में माहिर होता है। यदि तोते को बचपन से पला जाये तो वे बहुत साफ बोली बोलने लगते हैं। 

            मनुष्य का व्यव्हार इन अद्भुत पक्षियों के प्रति बहुत क्रूरतापूर्ण रहा है। जंगलों के कटने से तोतों को जंगल में रहना मुश्किल हो रहा है। तोते अक्सर बाजारों में बेचे जाते हैं और उन्हें छोटे पिंजरों में रखा जाता है, जिससे वे दुखी और उदास रहते हैं। इन गतिविधियों के कारण, तोते अब लुप्तप्राय पक्षियों की प्रजाति बन गए हैं। इसलिए हमें इन्हें विलुप्त होने से बचाना चाहिए।

            तोते पर निबंध (250 शब्द)

            तोते झुंड में रहनेवाले पक्षी हैं। तोते की अनेक प्रजातियां हैं। संसार में प्राय: 398 किस्म के तोते पाए जाते हैं। तोता बहुत प्रिय व सुंदर पक्षी है। यह हरे रंग का 10-12 इंच लंबा पक्षी है, जिसके गले पर लाल कंठ होता है। तोते के पंख पीले-हरे, चोंच लाल, ठोढ़ी पर काला धब्बा होता है। तोता औसतन २०-३० साल तक जीवित रहता हैं लेकिन अगर स्तिथि अनुकूल हो तो कुछ तोते ५० साल तक भी जीवित रह सकते हैं।

            तोता बहुत सुंदर पक्षी है और मनुष्यों की बोली की नकल बखूबी कर लेता है। इसकी कई जातियाँ हैं। लेकिन इनमें हरा तोता (Ring Necked Parakett), जो अफ्रीका में गैंबिया के मुहाने (mouth of Gambia) से लेकर, लाल सागर होता हुआ भारत, बर्मा और टेनासरिम (Tenasserim) तक फैला हुआ है, सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यह हरे रंग का 10-12 इंच लंबा पक्षी है, जिसके गले पर लाल कंठा होता है। तोते को मनुष्यों ने संभवत: सबसे पहले पालतू किया और आज तक ये शौक के साधन बने हुए हैं।

            तोते झुंड में रहने वाले शाकाहारी पक्षी हैं। इनकी उड़ान नीची और लहरदार, लेकिन तेज होती है। इनका मुख्य भोजन फल, फूल और बीज है, जिसे ये अपने पंजों से पकड़कर खाते रहते हैं। यह पक्षियों के लिये अनोखी बात है। तोते की बोली कड़ी और कर्कश होती है, लेकिन इनमें से कुछ सिखाए जाने पर मनुष्यों की बोली की हूबहू नकल कर लेते हैं। सीखे हुए तोतों की बोली बहुत मीठी होती है। अफ्रीका का स्लेटी तोता मनुष्य की बोली की नक़ल करने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 

            तोते पर निबंध (300 शब्द)

            तोते उष्णकटिबंधीय पक्षी हैं। तोते विभिन्न रंगों के होते हैं जैसे हरा, पीला, लाल, इंद्रधनुषी रंग आदि। ये उष्ण कटिबंधीय पक्षी हैं और गर्म स्थानों में रहना पसंद करते हैं। तोते के घोंसले को हिंदी में “कोटर” कहा जाता है। दुनिया में तोतों की लगभग 400 प्रजातियां हैं, जो रंग, आकार, व्यवहार और कौशल में भिन्न हैं। कुछ प्रकार के तोते मानव बोली बोलने में सक्षम होते हैं, अन्य नहीं। तोता गांव, शहर, खतों और जंगलो में हर जगह पर पाया जाता है। तोता एक आम पक्षी है जिसे शहरों, गांवों और जंगलों में आसानी से देखा जा सकता है। 

            तोते का वैज्ञानिक नाम “Psittaciformes” है और इसको इंगलिश में “Parrot” कहते है। तोते गर्म जलवायु में पाए जाते हैं। ऑस्टेलिया और न्यूजीलैंड में पाया जाने वाले तोते सतरंगी रंग के होते है। जबकि भारत में हरे तोते पाए जाते हैं। इसकी सुन्दरता के कारण तोतों को पकड़कर बेचा जाता है। 

            एक तोते का वजन 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक हो सकता है। पर कुछ तोते ऐसे भी होते हैं, जिनका वजन बिल्लियों के वजन के बराबर होता है। तोता दिखने में बहुत ही सुंदर पक्षी होता है, जिसके कारण इसे बहुत से लोग अपने घर पालना पसंद करते हैं और इसे प्यार से मिट्ठू कहा जाता है। तोता न ही ज्यादा बड़ा होता है और न ही ज्यादा छोटा होता है, यह मध्यम आकार का पक्षी होता है। 

            तोते की लम्बाई सामान्यतया 10 से 12 इंच होती है और इसके गले के चारों ओर एक काले रंग की रिंग होती है, जिसे हिंदी में तोते की कंठी कहा जाता है। इसका सर इसके शरीर के मुकाबले छोटा होता है और इसकी आँखों का रंग काला और ऑंखें चमकीली होती है। इसके साथ ही तोते की आँखों के चारों और भूरे रंग की रिंग होती है, जो तोते की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है।

            तोते पर निबंध (600 शब्द)

            प्रस्तावना

            धरती पर कई प्रकार के जीव-जन्तु रहते है जिनमें सभी की अलग-अलग विशेषताएं होती है। इन्हीं विशेषताओं के कारण इनकी पहचान भी की जाती है, इन्हीं में तोता भी एक प्रकार का पक्षी है। तोता दिखने में सुंदर और मनमोहक होता है इसी के कारण ही तोता बाकि के पक्षिओं से भिन्न होता है। तोता विश्व के लगभग सभी देशों में पाया जाता है और सभी जगह पर अलग-अलग रंगों में पाया जाता है। इन रंगों में अधिकतर हरा होता है। हरे रंग के अलावा लाल, सतरंगी, पीला, नीला आदि में भी पाया जाता है।

            तोता समझदार और बुद्धिमान पक्षियों में से एक है। यदि तोता लोगों के सम्पर्क में अधिक रहता है तो वह उनकी नकल करना सीख जाता है। इसके साथ ही बोला भी सीख लेता है। तोते को प्रशिक्षण देकर कई भाषाएँ सिखाई भी जा सकती है।

            तोता की शारीरिक संरचना

            तोता अपनी चोंच के कारण सभी पक्षियों से भिन्न होता है, इसकी चोंच अद्वितीय होती है। भारत में तोते हरे रंग के अधिक पाए जाते हैं। तोते की चोंच का रंग लाल होता है और पूरा शरीर हरे रंग का होता है। इसकी आंखे काले रंग की चमकदार होती है। इसकी आँखों के चारों ओर भूरे रंग की वलय होती है जो तोते को सबसे अलग बनाती है। तोते की चोंच का उपरी भाग मुड़ा हुआ होता है। तोते के गले भी एक वलय होती है, जिसका रंग काला होता है, जिसे तोते की कंठी कहा जाता है।

            तोते का पंजा बहुत मजबूत और छोटा होता है। तोते की आवाज कर्कश भरी होती है जो हमें 1 किलोमीटर की दूरी से भी सुनाई दे जाती है। तोता वजन में एक किलो तक हो सकता है और इसकी लम्बाई 12 इंच तक हो सकती है। इसके छोटे-छोटे पंख होते हैं जिसकी मदद से तोता एक दिन में 1000 किलोमीटर तक उड़ सकता है। एक तोता 10 से 15 वर्ष तक जीवित रहता है।

            तोता की प्रजाति

            पृथ्वी पर तोते की प्रजाति सबसे अधिक पाई जाती है। पृथ्वी पर तोते की प्रजाति लगभग 350 से भी अधिक खोजी जा चुकी है। इनमें से नीला और सुनहरा मकाओ sun conure, cilac-crowned amazon, eclectus, scarlet macaw आदि मुख्य है। पिग्मी प्रजाति का तोता सबसे छोटा तोता है, जिसकी लम्बाई हमारी एक ऊँगली के समान होती है।

            तोते की कुछ प्रजातियाँ ऐसी है, जिनका वजन बिल्ली के वजन के जितना होता है जिसके कारण वे उड़ नहीं पाते। इन्हीं वजनदार तोतो में Kakapo प्रजाति के तोते भी आते है।

            तोता का भोजन

            शाकाहारी पक्षियों में से एक तोता भी है। यह अपने भोजन में फूल, पते, बीज, सब्जी और दाना आदि लेता है। तोता फलों में आम और अमरुद सबसे अधिक पसंद करता है। तोता अपना भोजन झुण्ड में खोजने के लिए निकलते हैं।

            तोता का निवास स्थान

            तोता एक ऐसा पक्षी है, जिसे लोग अपने घरों में पालना पसंद करते हैं। लोग अपने घरों में तोते को पिंजरे में बंद करके रखते हैं। जंगलों में तोता अपना घर पेड़ों के तनों में छेद बनाकर बनाता है, जिसे हम कोटर कहते हैं तोता नीम, जामुन, अमरूद आदि के पेड़ो पर रहना अधिक पसंद करता है।

            तोता गर्म स्थानों में रहना अधिक पसंद करता है। तोता दुनिया के हर देश में पाया जाता है। लेकिन सबसे अधिक ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पाया जाता है। तोते को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड देशों से अन्य देशों में निर्यात भी किया जाता है।

            तोता की विशेषता

            नर और मादा तोते में अंतर आसानी से नहीं किया जा सकता, इनके बीच अंतर करने के लिए इनका ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसके बाद ही पता लगाया जा सकता है कि तोता नर है या मादा। एक मादा तोता 25 से 29 दिनों में अंडे देती है। तोता एक साल में 10 से 15 तक अंडे देती है।

            उपसंहार

            तोता एक सुंदर और मनमोहक पक्षी है, जो दुनिया के हर कोने में पाया जाता है। तोता एक ऐसा पक्षी है जिसे हम बोलना भी सीखा सकते है।

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              ओड़िशा, (ओड़िया: ଓଡ଼ିଶା) जिसे पहले उड़ीसा के नाम से जाना जाता था, भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक राज्य है। क्षेत्रफल के अनुसार ओड़िशा भारत का नौवां और जनसंख्या के हिसाब से ग्यारहवां सबसे बड़ा राज्य है। ओड़िआ भाषा राज्य की अधिकारिक और सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। ओडिशा उत्तर में झारखंड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्र प्रदेश, पश्चिम में छत्तीसगढ़ तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी से सीमाएं साझा करता है। 

              उड़ीसा को आस्था और धर्म की नगरी भी कहा जाता है। जगन्नाथपुरी की विशाल व अद्भुद रथयात्रा जहाँ लाखों-करोड़ों धर्मावलंबियों को 'पुरी' खीच लाती है, वहीं यहाँ के सुंदर समुद्र तट नौजवानों के लिए उड़ीसा को एक बेहतर टूरिस्ट स्पॉट बनाते हैं। एक प्रकार से उड़ीसा कला, शिल्प व सुंदरता का सुंदर संगम है।

              भुबनेश्वर : यह उड़ीसा की राजधानी व एक खूबसूरत पर्यटनस्थल है। इसे हम अतीत और वर्तमान का समावेश स्थल भी कह सकते हैं। 'भुबनेश्वर' का अर्थ है - देवताओं के रहने का स्थान। भुवनेश्वर मंदिरों का नगर है। यहाँ कई प्राचीन मंदिर व ऐतिहासिक धरोहरे है, जिनकी संख्या लगभग 500 से अधिक है। भुवनेश्वर यात्रा के दौरान आप शिशुपालग्रह, मुक्तेश्वर मंदिर, हिरापुर, अत्री, नंदकानन आदि स्थलों को देखने का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

              उड़ीसा के धार्मिक आयोजन में जगन्नाथ रथयात्रा, चंदन यात्रा, बाली यात्रा आदि प्रमुख है। यहाँ के प्रमुख त्योहार महाशिवरात्री, बसंत पंचमी, मकर संक्रांति, सावित्री व्रत, माघ सप्तमी आदि है।

              उड़ीसा वह राज्य है जहाँ महान सम्राट अशोक ऐतिहासिक कलिंग का युद्ध लड़ा था। इस युद्ध में हुए रक्तपात ने सम्राट अशोक का ह्रदय परिवर्तित कर दिया था। जिसके कारण वे बौद्ध धर्म के अनुयायी बन गए थे। 

              उड़ीसा पर हिंदी निबंध - Hindi Essay on Odisha

              उड़ीसा पर निबंध : ओडिशा, जिसे पूर्व में उड़ीसा कहा जाता था, पूर्वी भारत का एक राज्य है। उड़ीसा प्रांत की स्थापना 1 अप्रैल 1936 को हुई थी और इसकी वर्षगांठ को पूरे राज्य में उत्कल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उड़ीसा राज्य का निर्माण उड़िया भाषा के आधार पर किया गया था। उड़ीसा का क्षेत्रफल 60,162 वर्ग मील (155,820 किमी) है, और लगभग 42 मिलियन की आबादी है। उड़िया या ओडिया भाषा राज्य में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। उड़ीसा में उड़िया के साथ-साथ अंग्रेजी का प्रयोग भी आधिकारिक भाषा के रूप में प्रयोग किया जाता है। उड़ीसा में स्थित चिल्का झील भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा प्रवासी पक्षी है। ओडिशा 8 वां सबसे बड़ा भारतीय राज्य है और 11 वां सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। उड़ीसा की राजधानी शहर भुवनेश्वर है, और राज्य के अन्य प्रमुख शहर कटक, संबलपुर और राउरकेला हैं। ओडिशा की सीमा उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल, उत्तर पश्चिम में झारखंड, पश्चिम में छत्तीसगढ़, दक्षिण में आंध्र प्रदेश से लगती है और बंगाल की खाड़ी के साथ इसकी 482 किमी लंबी तटरेखा है।

              आधुनिक समय का ओडिशा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कलिंग के प्राचीन साम्राज्य पर स्थित है, इसलिए ओडिशा को अभी भी कभी-कभी कलिंग कहा जाता है। ओडिशा को उत्कल के नाम से भी जाना जाता है, और इस नाम के तहत भारतीय राष्ट्रगान, जन गण मन में इसका उल्लेख किया गया है। 

              ओडिशा में लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में कोणार्क सूर्य मंदिर, उदयगिरि और खंडगिरी गुफाएं, पुरी जगन्नाथ मंदिर और चिल्का झील शामिल हैं। ओडिशा की एक समृद्ध संस्कृति है, ओडिसी शास्त्रीय नृत्य की उत्पत्ति इसी राज्य से हुई थी और ओडिया व्यंजन अपने समुद्री भोजन और मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है। ओडिशा ने एशियाई जूनियर महिला रग्बी टूर्नामेंट, 22वीं एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप और 2018 में पुरुष हॉकी विश्व कप के रूप में कई खेल आयोजनों की सफलतापूर्वक मेजबानी की है।

              ओडिशा में ज्यादातर ओडिया लोग रहते हैं। राज्य में हिंदू धर्म प्रमुख धर्म है और ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। ओडिशा में रहने वाली एक बड़ी आदिवासी आबादी है, जिसे आदिवासी कहा जाता है, वे स्वदेशी लोग हैं और विभिन्न आदिवासी भाषाएं बोलते हैं और पारंपरिक धर्मों का पालन करते हैं, हालांकि कई ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए हैं। जैन धर्म और बौद्ध धर्म का भी ओडिशा में समृद्ध इतिहास है।

              उड़ीसा पर निबंध - Odisha Par Nibandh

              उड़ीसा पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख राज्यों में से एक है। राज्य मुख्य रूप से ग्रामीण है लेकिन औद्योगीकरण अपना चेहरा बदल रहा है। भुवनेश्वर उड़ीसा की आधुनिक राजधानी है। उड़ीसा कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और पुरी में जगन्नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है। यह आसानी से सुलभ भी है। उड़ीसा कर्क रेखा के ठीक दक्षिण में स्थित है और पूरे वर्ष बहुत गर्म रहता है। उड़ीसा घूमने का सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च तक है। उड़ीसा में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं उड़िया, हिंदी और अंग्रेजी हैं।

              उड़ीसा पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख राज्यों में से एक है। राज्य मुख्य रूप से ग्रामीण है लेकिन औद्योगीकरण अपना चेहरा बदल रहा है। भुवनेश्वर उड़ीसा की आधुनिक राजधानी है। उड़ीसा कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और पुरी में जगन्नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है। यह आसानी से सुलभ भी है। उड़ीसा कर्क रेखा के ठीक दक्षिण में स्थित है और पूरे वर्ष बहुत गर्म रहता है। उड़ीसा घूमने का सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च तक है। उड़ीसा में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं उड़िया, हिंदी और अंग्रेजी हैं।

              उड़ीसा का इतिहास

              उड़ीसा की उत्पत्ति इसके इतिहास से जानी जा सकती है। प्राचीन काल में, उड़ीसा राज्य को कलिंग के नाम से जाना जाता था, और अक्सर हिंदू महाकाव्यों में इसका उल्लेख किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक ऋषि के पांच पुत्रों में से एक कलिंग ने पूर्वी घाट की पहाड़ियों तक की यात्रा की। नीचे की घाटियों को देखते हुए, वह मोहित हो गया और उसने अपने लोगों के साथ यहाँ बसने का फैसला किया। तभी से उड़ीसा को कलिंग के नाम से जाना जाने लगा। उड़ीसा का दर्ज इतिहास 260 ईसा पूर्व से शुरू होता है। सम्राट अशोक ने भुवनेश्वर की वर्तमान राजधानी से केवल 5 किमी दूर धुली में नक्काशीदार स्तंभ स्थापित किया। यह स्तंभ लगभग 23 शताब्दियों से खड़ा है। नक्काशीदार शिलालेख बौद्ध सिद्धांतों का संदेश देते हैं। कलिंग के लोगों के साथ एक खूनी युद्ध लड़ने और उसे जीतने के बाद, सम्राट अशोक ने युद्ध के कारण हुई तबाही का पश्चाताप किया। जब मुस्लिम आक्रमणकारी उड़ीसा पहुंचे तो उन्होंने लगभग 7,000 मंदिरों को नष्ट कर दिया, जो कभी भुवनेश्वर की पवित्र झील के किनारे थे। आज केवल 500 मंदिर हैं। 1803 में अंग्रेजों ने उड़ीसा पर अधिकार कर लिया। भारत की स्वतंत्रता के बाद, राज्य को उड़ीसा के एक कॉम्पैक्ट प्रांत में मिला दिया गया था। अब, उड़ीसा एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य है।

              उड़ीसा का भूगोल

              उड़ीसा बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है, और इसका क्षेत्रफल 1,56,000 वर्ग किमी है। पश्चिम में पूर्वी घाट के मैदान हैं, केंद्रीय भाग पठार का हिस्सा हैं और बीच में बंगाल की खाड़ी में बहने वाली पांच बड़ी नदियों की हरी-भरी घाटियां हैं। ऊपरी क्षेत्र में और ऊपरी ढलानों पर हरे भरे जंगल हैं। जो जंगली हाथियों, बंगाल टाइगर और अन्य दुर्लभ प्रजातियों  के लिए प्रसिद्ध हैं। ओड़िशा का तकरीबन ३२% भूभाग जंगलों से ढका है पर जनसंख्या विस्फोट के बाद जंगल तेजी से सिकुड रहे हैं। 

              ओड़िशा का उत्तरी व पश्चिमी अंश छोटानागपुर पठार के अंतर्गत आता है। तटवर्ती इलाका जो की बंगाल की खाडी से सटा है महानदी, ब्राह्मणी, बैतरणी आदि प्रमुख नदीयों से सिंचता है। यह इलाका अत्यंत उपजाऊ है और यहां पर मुख्य रूप से चावल की खेती की जाती है।

              ओड़िशा की झीलों में चिल्का और अंशुपा मुख्य हैं। महानदी के दक्षिण में तटवर्ती इलाके में स्थित चिल्का झील एशिया महाद्वीप में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है।  जबकि अंशुपा ओड़िशा की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है जोकि कटक के समीप आठगढ में स्थित है।

              ओड़िशा सर्वोच्च पर्वत शिखर देवमाली (देओमाली) है जिसकी ऊंचाई १६७२ मी. है। दक्षिण ओड़िशा के कोरापुट जिला में अवस्थित यह शिखर पूर्वघाट का भी उच्चतम शिखर है।

              उड़ीसा के निवासी

              उड़ीसा में अधिकांश लोग जनजातियों से सम्बंधित हैं। अधिकांश जनजातियाँ मुख्य रूप से कोरापुट, फूलबनी, सुंदरगढ़ और मयूरभंज जिलों में रहती हैं। लगभग 60 जनजातियाँ हैं जो मुख्य रूप से राज्य के वन और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहती हैं। इनमें से प्रत्येक जनजाति की एक अलग भाषा, सामाजिक रीति-रिवाज और कलात्मक और संगीत परंपरा है जिसमें नृत्य, विवाह और धार्मिक समारोह शामिल हैं। आदिवासी लोक नृत्य मुख्य रूप से अक्टूबर-नवंबर और मार्च-अप्रैल में त्योहारों के दौरान पूरे वर्ष गांवों में किए जाते हैं। 

              उड़ीसा का लोकनृत्य 

              जनजातीय इलाकों में कई प्रकार के लोकनृत्य है। मादल व बांसुरी का संगीत गांवो में आम है। ओडिशा का शास्त्रीय नृत्य ओड़िशी 700 वर्षों से भी अधिक समय से अस्तित्व में है। मूलत: यह ईश्वर के लिए किया जाने वाला मंदिर नृत्य था। नृत्य के प्रकार, गति, मुद्राएं और भाव-भंगिमाएं बड़े मंदिरों की दीवारों पर, विशेषकर कोणार्क में शिल्प व उभरी हुई नक़्क़ासी के रूप में अंकित हैं, इस नृत्य के आधुनिक प्रवर्तकों ने इसे राज्य के बाहर भी लोकप्रिय बनाया है। मयूरभंज और सरायकेला प्रदेशों का छऊ नृत्य (मुखौटे पहने कलाकारों द्वारा किया जाने वाला नृत्य) ओडिशा की संस्कृति की एक अन्य धरोहर है। 1952 में कटक में कला विकास केंद्र की स्थापना की गई, जिसमें नृत्य व संगीत के प्रोत्साहन के लिए एक छह वर्षीय अवधि का शिक्षण पाठयक्रम है। नेशनल म्यूजिक एसोसिएशन (राष्ट्रीय संगीत समिति) भी इस उद्देश्य के लिए है। कटक में अन्य प्रसिद्ध नृत्य व संगीत केन्द्र है: उत्कल संगीत समाज, उत्कल स्मृति कला मंडप और मुक्ति कला मंदिर।

              उड़ीसा के त्यौहार

              मेलों और त्योहारों को मनाने का उड़ीसा का अपना तरीका है। उड़ीसा के कुछ प्रसिद्ध मेलों और त्योहारों में कालीजल द्वीप पर मकर मेला, चिल्का झील, भुवनेश्वर का जनजातीय मेला, दुर्गा पूजा, भुवनेश्वर के भगवान लिंगराज का कार उत्सव और पुरी में रथ यात्रा शामिल हैं। रथ यात्रा में देश-विदेश से विभिन्न तीर्थयात्री पुरी आते हैं। तीन देवताओं, जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को एक सप्ताह के लिए रथ में उनके ग्रीष्मकालीन मंदिर में ले जाया जाता है। उनके भव्य रथ भक्तों द्वारा खींचे जाते हैं। कटक की बाली यात्रा एक और त्योहार है जो अक्टूबर-नवंबर में कार्तिक पूर्णिमा पर मनाया जाता है।

              Friday, 13 May 2022

              वायु प्रदूषण पर निबंध​ - Hindi Essay on Air Pollution for Students

              वायु प्रदूषण पर निबंध​ - Hindi Essay on Air Pollution for Students

              वायु प्रदूषण पर निबंध​ - Hindi Essay on Air Pollution for Students

              वायु प्रदूषण पर निबंध​ - Hindi Essay on Air Pollution for Student
              वायु प्रदूषण मानव निर्मित गैसों और हवा में छोड़े गए रसायनों से उत्पन्न एक गंभीर समस्या है। वातावरण के रासायनिक प्रदूषण के सामान्य स्रोतों और अन्य प्रकार के वायु प्रदूषण के बारे में जानें, और उन तरीकों के बारे में जानें जिनसे बच्चे वायु प्रदूषण से निपटने में मदद कर सकते हैं।

                वायु प्रदूषण पर निबंध​ 100 words for Class 1 and 2

                वायु प्रदूषण से तात्पर्य प्रदूषित वायु से है। जब वायुमंडलीय हवा में हानिकारक बाह्य तत्वों मिल जाते हैं तो इसे वायु प्रदूषण कहते हैं। उद्योगों और मोटर वाहनों से उत्सर्जित हानिकारक और बिषैली गैसें मौसम, पेड़-पौधों और मनुष्य सभी को बहुत हानि पहुँचाती हैं। कुछ प्राकृतिक और मानवीय कारक वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण मानव गतिविधियों के कारण होता है जैसे: जीवाश्म, कोयला और तेल का जलना, हानिकारक गैसों को छोड़ना और कारखानों और मोटर वाहनों से निकला धुआं आदि। वनों के विकास, संरक्षण एवं संवर्धन को प्रमुखता देकर वायु प्रदूषण को को नियंत्रित किया जा सकता है। 

                वायु प्रदूषण पर निबंध​ 150 words for Class 3 and 4

                वायु प्रदूषण तब होता है जब हानिकारक गैसें, धूल, धुआं या रसायन हवा में मिल जाते हैं और इसे अशुद्ध कर देते हैं। वायु प्रदूषण मनुष्यों और जानवरों के सांस लेने और पौधों के विकास के लिए असुरक्षित है।

                पृथ्वी एक वायुमंडल से घिरी हुई है, जो गैसों की एक परत है। जब वायु प्रदूषित हो जाती है, तो यह पृथ्वी के वायुमंडल को हानि पहुँचाती है और लोगों के लिए समस्याएँ उत्पन्न करती है। वायु प्रदूषण ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को जन्म दे सकता है और अस्थमा से पीड़ित लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह बच्चों के लिए ठीक से विकसित होना भी मुश्किल बना सकता है। वायु प्रदूषण को लंबे समय से मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक खतरे के रूप में देखा जाता रहा है। बारिश होने पर हवा में मिले प्रदूषक तत्व पानी के साथ जमीन पर आ जाते हैं और धरती को प्रदूषित करते हैं। जिससे पौधों और जानवरों को नुकसान होता है। इसलिए हमें अपनी आदतों में बदलाव कर और हरित प्रौद्योगिकी को अपनाना चाहिए जिससे वायु प्रदूषण को कम किया जा सके। 

                वायु प्रदूषण पर निबंध​ 200 words for Class 5 and 6

                वायु प्रदूषण दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करता जा रहा है. वातावरण की वायु में घुली हानिकारक गैस और अशुद्ध कण वायु प्रदूषण कहलाती हैं। मानवजनित गतिविधियां वायु प्रदूषण के कारण हैं। हमारी दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली उत्पन्न करने के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है और इससे निकलने वाला धुआँ हमारे वातावरण के लिए बेहद खतरनाक होता है। 

                उद्योग, वाहन व ज्वालामुखी से उत्सर्जित गैस वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। जीवाश्म ईंधन का अधिक दोहन और जंगल की आग भी वायु प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इसके कारण हमारे देश में प्रतिवर्ष हजारों लोगों की मृत्यु हो रही है। यह प्रतिवर्ष दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है वायु प्रदूषण को लेकर ना तो सरकार की तरफ से कोई पुख्ता कदम उठाई जा रहे हैं और ना ही आम आदमी इसके बारे में कोई चिंता कर रहा है।

                वायु प्रदूषण के कारण हमारी पृथ्वी पर भी बदलाव आ रहा है जिसके कारण हमारी पृथ्वी का वातावरण बहुत तेजी से गरम हो रहा है। जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। वायु प्रदूषण हमारी पूरी पृथ्वी के वातावरण को नष्ट कर रहा है।

                पृथ्वी पर रहने वाला कोई भी जीव भोजन और जल के बिना तो कुछ दिन तक जिंदा रह सकता है लेकिन वायु के बिना एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकता है इसलिए हमें जीवनदायी वायु  को प्रदूषित नहीं करना चाहिए.

                वायु प्रदूषण पर निबंध​ 300 words for Class 7 and 8

                वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है। वायु प्रदूषण वर्तमान समय पूरे विश्व में विशेषरुप से औद्योगिकीकरण के कारण बड़े शहरों में सबसे बड़ी समस्या है। पर्यावरण में धूंध, धुआं, विविक्त, ठोस पदार्थों आदि का रिसाव शहर के वातावरण को संकेन्द्रित करता है जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरनाक बीमारी हो जाती हैं। लोग दैनिक आधार पर बहुत सा गंदा कचरा फैलाते हैं, विशेषरुप से बड़े शहरों में जो बहुत बड़े स्तर पर शहर के वातावरण को प्रदूषित करने में अपना योगदान देता है। मोटर साइकिल (बाइक), औद्योगिक प्रक्रिया, कचरे को जलाना आदि के द्वारा निकलने वाला धुआं और प्रदूषित गैसें वायु प्रदूषण में में अपना योगदान देती हैं। कुछ प्राकृतिक प्रदूषण भी जैसे पराग-कण, धूल, मिट्टी के कण, प्राकृतिक गैसें आदि वायु प्रदूषण के स्त्रोत है।

                वायु प्रदूषण के अन्य स्त्रोतों में लैंडफिल में कचरे का अपघटन और ठोस पदार्थों के निराकरण की प्रक्रिया से मीथेन गैस (जो स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक होता है) का निकलना है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, स्वचलित वाहनों के प्रयोग में वृद्धि, हवाई जहाज आदि ने इस मुद्दे को गंभीर पर्यावरण का मुद्दा बना दिया है।

                जिस हवा को हम सांस के द्वारा प्रत्येक क्षण लेते हैं, वो पूरी तरह से प्रदूषित है जो हमारे फेफड़ों और पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण के माध्यम से जाती है और अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है। प्रदूषित वायु पेड़-पौधों, पशुओं और मनुष्य के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से नष्ट करने का कारण बनती है। यदि पर्यावरण को सुरक्षित करने वाली नीतियों का गंभीरता और कड़ाई से पालन नहीं किया गया तो वायु प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर आने वाले दशकों में 1 मिलियन टन वार्षिक के आधार पर बढ़ सकता है।

                वायु प्रदूषण पर निबंध 400 शब्द for Class 9 and 10

                वातावरण की स्वच्छ वायु में विषैले अवांछित पदार्थों का लगातार बढ़ना वायु प्रदूषण कहलाता है। विभिन्न बाह्य तत्वों, जहरीली गैसों और मानवीय क्रियाकलापों के कारण स्वच्छ वायु प्रदूषित हो जाती है। जिसका नकारात्मक प्रभाव पर्यावरण, स्वस्थ्य, वनस्पति, मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर पड़ता है। वायु प्रदूषण का स्तर उन सभी प्रदूषणों पर निर्भर करता है जो विभिन्न स्त्रोतों से निकलता है। स्थलाकृति और मौसम की स्थिति प्रदूषण की निरंतरता को बढ़ा रही हैं। उद्योगों में विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल से हानिकारक गैसों के उत्सर्जन की मात्रा बढ़ती जा रही है। बढ़ता हुआ जनसंख्या घनत्व और अधिक औद्योगिकीकरण की मांग कर रहा है, जो आखिरकार वायु प्रदूषण का कारण बनता है।

                वायु प्रदूषण हानिकारक तरल बूंदों, ठोस पदार्थों और विषाक्त गैसों (कार्बन ऑक्साइड, हलोगेनटेड और गैर- हलोगेनटेड हाईड्रोकार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर गैसें, अकार्बनिक पदार्थ, अकार्बनिक और कार्बनिक अम्ल, बैक्टीरिया, वायरस, कीटनाशक आदि) का मिश्रण है, जो सामान्यतः ताजी हवा में नहीं पाये जाते और पेड़-पौधों और पशुओं के जीवन के लिये बहुत खतरनाक है। वायु प्रदूषण दो प्रकार का होता है जोकि प्राकृतिक और मानव निर्मित स्त्रोत है। वायु प्रदूषण के कुछ प्राकृतिक स्रोतों जैसे, ज्वालामुखी विस्फोट, ज्वालामुखी (राख, कार्बन डाइऑक्साइड, धुआं, धूल, और अन्य गैसें), रेत संकुचन, धूल, समुद्र और महासागर की लवणीयता, मिट्टी के कण, तूफान, जंगलों की आग, ब्रह्मांडीय कण, किरण, क्षुद्रग्रह सामग्री की बमबारी, धूमकेतु से स्प्रे , पराग अनाज, कवक बीजाणु, वायरस, बैक्टीरिया आदि है।

                वायु प्रदूषण के मानव निर्मित साधन उद्योग, कृषि, ऊर्जा सयंत्र, स्वचलित वाहन, घरेलू स्त्रोत आदि है। मानव निर्मित साधनों से कुछ वायु प्रदूषण जैसे धूम्रपान, धूल, धुएं, पार्टिकुलेट पदार्थ, रसोई से गैस, घरेलू ऊष्मा, विभिन्न वाहनों से निकलने वाला धुआं, कीटनाशकों का उपयोग, खर-पतवार को मारने के लिये प्रयोग की जाने वाली विषाक्त गैसें, ऊर्जा संयत्रों से निकलने वाली ऊष्मा, फ्लाई ऐश आदि से होता है। वायु प्रदूषण की संख्या बढ़ने के कारण इसे दो प्रकार में बांटा गया, प्राथमिक प्रदूषण, और द्वितीयक प्रदूषण। प्राथमिक प्रदूषण वो है जो प्रत्यक्ष रुप से ताजी हवा को प्रभावित करता है और धुआं, राख, धूल, धुएं, धुंध, स्प्रे, अकार्बनिक गैसों, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, नाइट्रिक ऑक्साइड और रेडियोधर्मी यौगिकों से उत्सर्जित होता है। द्वितीयक प्रदूषक वो हैं जो वायु को अप्रत्यक्ष रुप प्राथमिक कारकों के साथ रासायनिक क्रिया करके जैसे सल्फर ट्राई ऑक्साइड, ओजोन, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, आदि से प्रभावित करते हैं।

                यदि पूरी दुनिया के लोग सामूहिक प्रयास करें तो  प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए, लम्बी चिमनी का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये (फिल्टर और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स के साथ), छोटे तापमान सूचकों के स्थान पर उच्च तापमान संकेतकों को प्रोत्साहन, ऊर्जा के अज्वलनशील स्रोतों का उपयोग करना, पैट्रोल में गैर-नेतृत्वकारी एन्टीनॉक ऐजेंट के प्रयोग को बढ़ावा देना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और भी बहुत से सकारात्मक प्रयासों को करना।

                वायु प्रदूषण पर निबंध 500 words for Class 11 and 12

                वायु प्रदूषण एक प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण है जो वायु को प्रदूषित करता है और आमतौर पर धुएं या अन्य हानिकारक गैसों, मुख्य रूप से कार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण होता है। आज विश्व के अधिकांश बड़े शहरों में प्रदूषित वायु या निम्न गुणवत्ता वाली वायु है। वायु प्रदूषण को लंबे समय से मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी के कई पारिस्थितिक तंत्रों के लिए एक खतरे के रूप में देखा जाता रहा है।

                हवा की गुणवत्ता

                वायु प्रदूषक गैस, तरल या ठोस तीनों रूपों में हो सकता है। इसे रासायनिक रूप से भी वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसे ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, एसिड, या अन्य प्रदूषक।

                कई प्रदूषक प्राकृतिक स्रोतों से हवा में मिल जाते हैं। इन प्रदूषकों में धूल के कण, समुद्री नमक, ज्वालामुखी की राख और गैसें, जंगल की आग से निकलने वाला धुआं, पराग और कई अन्य सामग्री शामिल हैं। वास्तव में, मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले प्रदूषकों की तुलना में कई अधिक प्राकृतिक प्रदूषक हैं। लेकिन, मनुष्य और अन्य जीवित प्राणी इनमें से अधिकांश प्राकृतिक प्रदूषकों के अनुकूल हो गए हैं।

                प्राथमिक और माध्यमिक प्रदूषक

                वायु प्रदूषण को आमतौर पर प्राथमिक प्रदूषक या द्वितीयक प्रदूषक के रूप में वर्णित किया जाता है। प्राथमिक प्रदूषक वे प्रदूषक होते हैं जो मनुष्यों या प्राकृतिक स्रोतों द्वारा सीधे हवा में डाले जाते हैं। प्राथमिक प्रदूषकों के उदाहरण कारों से निकलने वाले धुएं (गैस), धूल भरी आंधी और ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली राख आदि हैं।

                द्वितीयक प्रदूषक वे प्रदूषक होते हैं जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनते हैं जब प्रदूषक अन्य प्राथमिक प्रदूषकों या जल वाष्प जैसे प्राकृतिक पदार्थों के साथ मिल जाते हैं। कई द्वितीयक प्रदूषक तब बनते हैं जब प्राथमिक प्रदूषक सूर्य के प्रकाश के साथ प्रतिक्रिया करता है। ओजोन और स्मॉग द्वितीयक प्रदूषक हैं। ओजोन एक गैस है जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है। हालाँकि, जब ओजोन गैस भूमि के पास होती है, तो यह लोगों और अन्य जीवों को नष्ट कर सकती है।

                मानव जनित वायु प्रदूषण 

                मानव निर्मित वायु प्रदूषण कई चीजों से होता है। आज मनुष्य द्वारा फैलाया जाने वाला अधिकांश वायु प्रदूषण परिवहन के कारण है। उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल मानव निर्मित वायु प्रदूषण का लगभग 60% हिस्सा है। कार से निकलने वाली गैसें, जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, स्मॉग और एसिड रेन बनाती हैं।

                कई औद्योगिक बिजली संयंत्र अपनी ऊर्जा प्राप्त करने के लिए जीवाश्म ईंधन जलाते हैं। हालांकि, जीवाश्म ईंधन को जलाने से बहुत सारे ऑक्साइड बनते हैं। लेकिन वास्तव में, जीवाश्म ईंधन के जलने से  96% सल्फर ऑक्साइड बनते हैं। कुछ उद्योग ऐसे रसायन भी बनाते हैं जो जहरीला धुआँ उत्पन्न करते हैं।

                वायु प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?

                वायु प्रदूषण की रोकथाम में योगदान देने के लिए लोगों द्वारा अपनाए जा सकने वाले कुछ महत्वपूर्ण उपाय नीचे दिए गए हैं।

                1. उपयोग में न होने पर लाइट बंद कर देना - हमारी अधिकांश बिजली जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न होती है, जो वायु प्रदूषण में बहुत बड़ा योगदानकर्ता है। इसलिए, वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बिजली का संरक्षण एक प्रभावी तरीका है।

                2. उत्पादों का पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण - उत्पादों का पुन: उपयोग करके (जिन्हें पुन: उपयोग किया जा सकता है), उन उत्पादों में से एक के निर्माण में जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को बचाया जा सकता है। इसके अलावा, उत्पादों का पुनर्चक्रण भी नए के निर्माण की तुलना में अधिक ऊर्जा के अनुकूल है।

                3. कचरा जलाने और धूम्रपान करने से बचना - वायु प्रदूषण में कचरा जलाने का बहुत बड़ा योगदान है। वायु प्रदूषण में एक अन्य योगदानकर्ता धूम्रपान है। इन हानिकारक गतिविधियों से बचना और उनके नकारात्मक परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाना वायु प्रदूषण की रोकथाम में बहुत मददगार हो सकता है।

                4. पटाखों के प्रयोग से बचना - पटाखों का प्रयोग आमतौर पर कुछ खास अवसरों को मनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, पटाखों से गंभीर वायु प्रदूषण होता है और इसलिए ये पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हैं। व्यक्तिगत रूप से पटाखों के उपयोग से बचना और उनके नकारात्मक परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाना वायु प्रदूषण को रोकने में मदद करने का एक शानदार तरीका है।

                वायु प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी

                वायु प्रदूषण क्या है?

                वायु प्रदूषण तब होता है जब अवांछित रसायन, गैस और कण हवा और वातावरण में प्रवेश करते हैं, जिससे जीवित प्राणियों को सांस लेने में समस्या होती है और पृथ्वी के प्राकृतिक चक्रों को नुकसान पहुंचता है।

                वायु प्रदूषण के प्राकृतिक कारण

                वायु प्रदूषण के कुछ स्रोत प्राकृतिक हैं। इनमें ज्वालामुखियों का विस्फोट, धूल भरी आंधी और जंगल की आग शामिल हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान उत्सर्जित लावा, चट्टानों के टुकड़े, जल वाष्प, राख, विभिन्न गैसें इत्यादि वायुमण्डल को दूषित करते हैं। वनों की आग के कारण राख, धुंआ गैसें इत्यादि वायु को प्रदूषित करतीं है।

                वायु प्रदूषण के मानवीय कारण

                मानव गतिविधि वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है, खासकर बड़े शहरों में। मानव जनित वायु प्रदूषण कारखानों, बिजली संयंत्रों, कारों, हवाई जहाजों, रसायनों, स्प्रे कैन से निकलने वाले धुएं और लैंडफिल से मीथेन गैस जैसी चीजों के कारण होता है।

                जीवाश्म ईंधन जलाना

                जिस तरह से मनुष्य सबसे अधिक वायु प्रदूषण का कारण बनता है वह है जीवाश्म ईंधन को जलाना। जीवाश्म ईंधन में कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। जब हम जीवाश्म ईंधन जलाते हैं तो यह सभी प्रकार की गैसों को हवा में छोड़ता है जिससे वायु प्रदूषण जैसे स्मॉग होता है।

                वायु प्रदूषण का पर्यावरण पर प्रभाव

                वायु प्रदूषण और वातावरण में गैसों के निकलने से पर्यावरण पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

                1. ग्लोबल वार्मिंग - वायु प्रदूषण का एक प्रकार हवा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की वृद्धि है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि वातावरण में बहुत अधिक कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना ग्लोबल वार्मिंग के कारणों में से एक है। इससे कार्बन चक्र का संतुलन बिगड़ जाता है।

                2. ओजोन परत - ओजोन परत हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करती है। मीथेन गैस और सीएफ़सी क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे वायु प्रदूषकों से ओजोन परत क्षतिग्रस्त हो रही है।

                3. अम्लीय वर्षा - अम्लीय वर्षा तब होती है जब सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें वातावरण में उच्च हो जाती हैं। हवा इन गैसों को मीलों तक उड़ा सकती है और जब ये बारिश के पानी के साथ नीचे आती हैं। इस वर्षा को अम्लीय वर्षा कहते हैं। यह बारिश जंगलों को नष्ट कर सकती है और मछलियों को मार सकती है।

                वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव

                वायु प्रदूषण लोगों को बीमार भी कर सकता है। यह सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है और फेफड़ों के कैंसर, श्वसन संक्रमण और हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 24 लाख लोग वायु प्रदूषण से मरते हैं। खराब स्मॉग वाले बड़े शहरों में रहने वाले बच्चों के लिए वायु प्रदूषण विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है।

                वायु गुणवत्ता सूचकांक

                वायु गुणवत्ता सूचकांक सरकार द्वारा लोगों को हवा की गुणवत्ता और किसी क्षेत्र या शहर में वायु प्रदूषण कितना खराब है, के प्रति सचेत करने का एक तरीका है। वे रंगों का उपयोग यह निर्धारित करने में आपकी सहायता के लिए करते हैं कि आपको बाहर जाना चाहिए या नहीं।

                • हरा - स्वच्छ हवा
                • पीला - मध्यम हवा
                • संतरा - बुजुर्गों, बच्चों और फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों के लिए हवा अस्वस्थ है।
                • लाल - खराब हवा
                • बैंगनी - बहुत खराब हवा
                • लाल रंग - खतरनाक

                मुख्य वायु प्रदूषक तत्व

                वायु प्रदूषण फैलाने वाली गैस या पदार्थ वायु प्रदूषक कहलाते हैं। वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रमुख प्रदूषक हैं:

                1. सल्फर डाइऑक्साइड - अधिक खतरनाक प्रदूषकों में से एक, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) कोयले या तेल को जलाने से उत्पन्न हो सकता है। यह एसिड रेन के साथ-साथ अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों का कारण बन सकता है।

                2. कार्बन डाइऑक्साइड - मनुष्य और जानवर हवा के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को बाहर निकालते हैं। जब जीवाश्म ईंधन को जलाया जाता है तो उसमे भी कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है। कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है।

                3. कार्बन मोनोऑक्साइड - यह गैस बहुत खतरनाक होती है। यह गैस गंधहीन होती है और कारों और अन्य वाहनों द्वारा छोड़ी जाती है। यदि आप इस गैस की अधिक मात्रा में सांस लेते हैं तो आपकी मृत्यु हो सकती है। यह एक कारण है कि आपको अपनी कार को गैरेज में कभी भी दौड़ते हुए नहीं छोड़ना चाहिए।

                4. क्लोरोफ्लोरोकार्बन - इन रसायनों को सीएफ़सी भी कहा जाता है। रेफ्रिजरेटर से लेकर स्प्रे कैन तक कई उपकरणों में इनका इस्तेमाल किया जाता था। इनका आज उतना उपयोग नहीं किया जाता है, लेकिन जब इनका भारी उपयोग किया जाता था, उस समय ओजोन परत को काफी नुकसान हुआ था।

                5. पार्टिकुलेट मैटर - ये धूल जैसे छोटे कण होते हैं जो वातावरण में मिल जाते हैं और जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसे गंदा कर देते हैं। उन्हें फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है।

                हम वायु प्रदूषण को कैसे कम कर सकते हैं?

                प्रदूषण को कम करने का पहला तरीका 3R नीति का पालन करना है, अर्थात् हमारी जरूरतों को कम करना, वस्तुओं का पुन: उपयोग और रीसायकल करना। नागरिकों को एयर-कंडीशनर के उपयोग को कम करना चाहिए क्योंकि यह ओजोन-क्षयकारी क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी हानिकारक गैसों को छोड़ता है। अगर हम अपनी आदतों में बदलाव करें और हरित प्रौद्योगिकी को अपनाएं, तो इससे वायु प्रदूषण कम होगा।

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