Sunday, 3 July 2022

बढ़ते अपराध पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन - Do Mitro Ke beech Apradh par Samvad Lekhan

बढ़ते अपराध पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन - Do Mitro Ke beech Apradh par Samvad Lekhan

बढ़ते अपराध पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing बढ़ते हुए अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए दो व्यक्तियों की परस्पर बातचीत को संवाद के रूप में लिखा गया है। and Do Mitro Ke beech Apradh par Samvad Lekhan for Students and teachers.

    बढ़ते हुए अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए दो व्यक्तियों की परस्पर बातचीत को संवाद के रूप में लिखिए।

    बढ़ते हुए अपराधों पर दो व्यक्तियों के बीच संवाद लेखन

    गुरमीत : क्या हुआ अमन इतने चिंतित क्यों हो ?

    अमन : मैं देश की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर थोड़ा चिंतित हूं।

    गुरमीत : सच कह रहे हो तुम। मैंने अभी सुबह का अखबार देखा तो हर जगह बस अपराध, चोरी, हत्या डकैती की ही खबरें थीं। 

    अमन : अभी कल ही सोसाइटी के पार्क में कुछ बाइक सवार आये और एक महिला की चेन लूट ली। 

    गुरमीत : अब तो हर जगह असुरक्षित लगती है। समझ नहीं आता कि जाएँ तो जाएँ कहाँ। 

    अमन : तुम सही कह रहे हो। न केवल शहरों और कस्बों में बल्कि गांवों में भी अपराध बड़े पैमाने पर हो रहे हैं.

    गुरमीत : तुम्हारे विचार से इस कानून-व्यवस्था के टूटने के क्या कारण हैं?

    अमन : युवाओं में बेरोजगारी, हताशा और नशे की लत अपराध को जन्म देती है. नशा करने वाले ज्यादातर नशेड़ी ड्रग्स खरीदने के लिए पैसे इकट्ठा करने के लिए अपराध करते हैं।

    गुरमीत : हाँ। नतीजतन, कानून लागू करने वाली एजेंसियां स्थिति से निपटने में विफल होती जा रही हैं। लेकिन वे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहाल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

    अमन : तुम सही कह रहे हो। लेकिन मेरा मानना है कि अगर हम पुलिस जैसी कानून लागू करने वाली एजेंसियों का सहयोग करें तभी हम अपराध से लड़ सकते हैं।


    बढ़ते अपराध पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन

    मनोहर : अरे सुन्दर, आज का समाचार पत्र पढ़ा क्या ?  सुना है कि हमारे मौहल्ले कुछ चोर देर रात पड़ोस की दुकान के ताले तोड़कर सारा पैसा चुराकर रफूचक्कर हो गए।

    सुन्दर : मनोहर भैया अब तो ये रोज-रोज की बात हो गई हैं। पास के मोहल्ले में भी कुछ दिन पहले ऐसा ही हुआ था।

    मनोहर : मुझे तो संदेह है की दोनों ही  घटनाओं में एक ही गैंग का हाथ है। महिलाओं के गहने झपट लेना और रात में दुकानों के ताले तोड़ देना तो जैसे आम बात हो गई हैं। पुलिस क्या कर रही हैं।

    सुन्दर : पुलिस कोशिश तो कर रही हैं किन्तु अपराधी बड़े शातिर हैं। लगता हैं कि ये कोई प्रशिक्षित गिरोह हैं। जो बड़े पेशेवर तरीके से काम रहा है।

    मनोहर : सही कह रहे हो। लोगो को भी सतर्क रहना चाहिए। सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए। पुलिस को भी गश्त बढानी चाहिए।

    सुन्दर : सही है। पुलिस को भी सादा कपड़ों में घूम-घूम कर पता करना चाहिए।

    मनोहर : बस आ गई। चलो चलते हैं।

    किसान और छात्र के बीच संवाद लेखन - Conversation Between farmer and Student in hindi

    किसान और छात्र के बीच संवाद लेखन - Conversation Between farmer and Student in hindi

    किसान और छात्र के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing किसान और विद्यार्थी के बीच संवाद लेखन and Conversation Between farmer and Student in hindi for Students and teachers.

      किसान और छात्र के बीच संवाद लेखन

      छात्र : किसान चाचा, आप कैसे हैं? क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूं?

      किसान : मैं अच्छा हूं बेटा, पूछो क्या जाना चाहता हूं?

      छात्र : दरअसल मैंने अपने शिक्षक से सुना है कि खेती करना बहुत कठिन काम है।

      किसान : तुम्हारे शिक्षक एकदम सही कह रहे हैं। किसानी कोई आसान काम नहीं है लेकिन अगर कोई दिल लगाकर किसान करे तो इसमे भी आनंद है।

      छात्र : चाचा, खेती करने में बड़ी सावधानी और देखभाल करनी पड़ती होगी क्योंकी एक फसल को पूरी तरह से विकसित होने में ही महिनों लग जाते हैं।

      किसान : बिल्कुल, इस प्रकार के काम में आपको सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, अंत में इनाम बड़ा होता है।

      छात्र : क्या आप रोज फसल की सिंचाई करते हो ?

      किसान : हाँ, हमें पौधों की रोजना देखभल करनी पड़ी है ताकी उन्हे भी समय से अपना भोजन पानी मिल सके। पौधों की भी अपनी जरूरतें होती हैं समय-समय पर उन्हें खाद देनी पड़ती है। कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। 

      छात्र : ये तो सच में बहुत कठिन काम है। इसके लिए धैर्य की आवश्यकता होगी। 

      किसान : हाँ बेटा, चलो अब हमारा खेत जोतने का समय हो गया है। 

      छात्र : धन्यवाद किसान चाचा। मैंने आज आपसे बहुत कुछ सीखा। 

      किसान और विद्यार्थी के बीच संवाद लेखन

      विद्यार्थी : अरे किसान चाचा कैसे हो आप ?

      किसान : मैं ठीक हूँ, पर इस साल फसल बहुत कम हुयी। 

      विद्यार्थी : पर औरों के खेत में तो अच्छी फसल हुई है। आपकी ही कम क्यों हुई ?

      किसान : बेटा, बाकि किसान नए बीज का प्रयोग करते हैं जबकि हमारे खेतों में देशी बीज का प्रयोग होता है। 

      विद्यार्थी : पर आधुनिक बीज तो अच्छे होते हैं न ? सुना है उनमें उत्पादन भी ज्यादा होता है। 

      किसान : नहीं बेटा देशी बीज ही श्रेष्ठ होता है। 

      विद्यार्थी : तो क्या बाकी किसान मूर्ख हैं ? मैंने खुद पढ़ा है की आधुनिक बीज देशी बीज से अच्छे होते हैं। 

      किसान : बेटा, नए बीज से उत्पादन तो ज्यादा होता है लेकिन इनके अधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इनसे उत्पन्न फलों और सब्जियों में वो स्वाद नहीं होता। 

      विद्यार्थी : ये तो आपने एकदम सही बात कही। 

      किसान : तो अब बताओ कौन सा बीज उत्तम है ?

      विद्यार्थी : देशी बीज ही सर्वोत्तम है। 

      किसान : शाबाश !

      Saturday, 2 July 2022

      रेलवे टिकट विक्रेता और यात्री के बीच संवाद - Railway Ticket Vikreta aur Yatri ke Beech mein Samvad Lekhan

      रेलवे टिकट विक्रेता और यात्री के बीच संवाद - Railway Ticket Vikreta aur Yatri ke Beech mein Samvad Lekhan

      रेलवे टिकट विक्रेता और यात्री के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing यात्री तथा टिकट विक्रेता के बीच संवाद लेखन and Railway Ticket Vikreta aur Yatri ke Beech mein Samvad Lekhan for Students and teachers.

        रेलवे टिकट विक्रेता और यात्री के बीच संवाद लेखन

        यात्री : महोदय, मुझे इलाहबाद जाना है । क्या आज की टिकट मिल जायेंगी ?

        टिकट विक्रेता : आपको कितनी टिकट चाहियें ?

        यात्री : जी, कुल पांच टिकट चाहिए।

        टिकट विक्रेता : एक मिनट प्रतीक्षा कीजिये। (कुछ समय पश्चात) लीजिये पांच टिकट ही बाकी थे ।

        यात्री : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

        टिकट विक्रेता : आप चारों लोग बड़े हैं क्या ?

        यात्री : जी नहीं। तीन बड़े हैं जबकि दो छोटे हैं।

        टिकट विक्रेता :  छोटे बच्चों की उम्र क्या होगी है ?

        यात्री : जी एक की 5 साल जबकि दूसरे की 7 वर्ष है।

        टिकट विक्रेता : ठीक है तो आपको तीन पूरे टिकट और दो आधे टिकट लेने होंगे।

        यात्री : क्या स्लीपर कोच की टिकट मिल जायेंगे ?

        टिकट विक्रेता : स्लीपर कोच फुल है। सिर्फ ए.सी. कोच और जनरल की टिकट ही बाकी है। 

        यात्री : ठीक है फिर ए.सी. कोच की टिकट ही बुक कर दीजिये। 

        टिकट विक्रेता : ये लीजिये आपकी टिकट। 

        यात्री : जी अच्छा। कुल कितने रूपये हो गए ?

        टिकट विक्रेता : कुल 1600 रूपए हुए आपके।

        यात्री : ये लीजिये सोलह सौ रूपये । वैसे रेलगाड़ी आने में अभी कितना समय है ?

        टिकट विक्रेता : जी बस 20 मिनट में आने वाली है ।

        यात्री : किस नम्बर के प्लेटफ़ॉर्म पर आएगी रेलगाड़ी ?

        टिकट विक्रेता : जी प्लेटफ़ॉर्म नम्बर चार पर ।

        यात्री : जी धन्यवाद ।

        टिकट विक्रेता : आपका स्वागत है ।


        यात्री तथा रेलवे टिकट विक्रेता के बीच संवाद लेखन

        यात्री : श्रीमान, मुझे एक टिकट चाहिए। 

        टिकट विक्रेता : कहाँ की टिकट देनी है?  

        यात्री : रायगढ़ की।

        टिकट विक्रेता : कितनी टिकट?

        यात्री : जी पांच टिकट।

        टिकट विक्रेता : ये लीजिये टिकट और 1350  रुपये दीजिये।

        यात्री : 1350  क्यों? पहले तो 1200  रुपए में आती थी पॉंच टिकट।

        टिकट विक्रेता : लेकिन अब रेट बढ़ गए हैं । लेनी है टिकट तो पैसे दो वरना दूसरों को लेने दो।

        यात्री : दे रहा हूँ पैसे। टिकट दे दो ।

        टिकट विक्रेता : जल्दी करो। पीछे लाइन लग रही है ।

        यात्री : दे रहा हूँ भाई दो मिनट तो रुको । ये लो पैसे।

        टिकट विक्रेता : ठीक है । ये लीजिये टिकट।

        यात्री : धन्यवाद ।


        Railway Ticket Vikreta aur Yatri ke Beech Mein Samvad

        यात्री : नमस्कार  

        टिकट विक्रेता : नमस्कार  

        यात्री : मुझे एक टिकट चाइए  

        टिकट विक्रेता : कहा जाना है मैडम  

        यात्री : कृपया मुझे मुंबई की टिकट दीजिये  

        टिकट विक्रेता : कितने टिकट चाइए आपको  

        यात्री : मुझे दो टिकट दीजिये  

        टिकट विक्रेता : आपको 1500 रुपए देने है  

        यात्री : ये लीजिये 1500 रुपए  

        टिकट विक्रेता : ये आपकी टिकट मैडम  

        यात्री : ट्रैन कितने बजे की है  

        टिकट विक्रेता : रात को 8 बजे चलेगी  

        यात्री : किस प्लैटफॉर्म से जाएगी  

        टिकट विक्रेता : प्लैटफॉर्म नंबर 2 पर  

        यात्री : धन्यवाद


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        रेलवे पूछताछ अधिकारी और यात्री के बीच संवाद लेखन - Yatri aur Railway Puchtach Adhikari ke Beech Samvad Lekhan

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          रेलवे पूछताछ और यात्री के बीच संवाद लेखन

          रेलवे पूछताछ : महोदय। मैं आपकी कैसे सहायता कर सकता हूँ?

          यात्री : चेन्नई एक्सप्रेस कितने बजे तक आएगी ?

          रेलवे पूछताछ : इसके आने का निर्धारित समय 5 बजे है।

          यात्री : लेकिन 5 बजकर 15 मिनट हो चुके हैं और अभी तक ट्रेन नहीं आयी है।

          रेलवे पूछताछ : ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रेन एक घंटे देर से चल रही है, हमने पहले ही रेलवे की घोषणा कर दी है।

          यात्री : मैंने ऐसी कोई घोषणा नहीं सुनी। मैं लगभग दस मिनट से रेलवे स्टेशन पर हूँ।

          रेलवे पूछताछ : शायद, आपके आने से पहले इसकी घोषणा की गई थी। मुझे जांच करने दें ... इसकी घोषणा 20 मिनट पहले 4.55 बजे की गई थी।

          यात्री : क्या आपने केवल एक घोषणा की है?

          रेलवे पूछताछ : नहीं, हमने इसे ASM कार्यालय के ठीक सामने नोटिस बोर्ड पर भी लिखा है।

          यात्री : क्या आपको नहीं लगता कि ये घोषणाएं थोड़ी और बार-बार होनी चाहिए?

          रेलवे पूछताछ : मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। उसके लिए आप चाहें तो ASM से बात कर सकते हैं।

          यात्री : बहुत अच्छा, तो अभी क्या स्थिति है? कब तक ट्रेन आने की उम्मीद है ?

          रेलवे पूछताछ : 6.10 बजे लेकिन इसमें कुछ समय लग सकता है, या इसमें और देरी हो सकती है। जब भी हमें कोई नया रेलवे अपडेट प्राप्त होगा, हम एक और घोषणा करेंगे।

          यात्री : इससे लोगों को काफी असुविधा होगी। क्या आपने इसके बारे में सोचा है?

          रेलवे पूछताछ : असुविधा के लिए मुझे खेद है। कृपया आप कुछ और समय के लिए प्रतीक्षालय इन्तजार करिये।

          यात्री : ठीक है। शुक्रिया।


          यात्री और रेलवे पूछताछ के बीच संवाद लेखन

          रेलवे पूछताछ : सर मैं आपकी कैसे मदद कर सकता हूँ?

          यात्री : यात्रा के दौरान मेरा सामान गुम हो गया है।

          रेलवे पूछताछ : आप किस ट्रेन में सवार हुए और कब?

          यात्री : कल दिल्ली से मुंबई जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में मेरा सामान गुम हो गया है।

          रेलवे पूछताछ : आपके बोर्डिंग का समय क्या था?

          यात्री : दोपहर 12 बजे

          रेलवे पूछताछ : क्या आप कृपया मुझे अपने सामान के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं?

          यात्री : मेरा अमेरिकन टूरिस्टर बैग लाल रंग का था और उस पर एक बड़ा "R" अक्षर अंकित है।

          रेलवे पूछताछ : ठीक है, कृपया मुझे अपना टिकट दिखाइये ?

          यात्री : ज़रूर सर, ये रहा।

          रेलवे पूछताछ : शिकायत पंजीकरण के लिए आपको अपना आईडी कार्ड जमा करना होगा।

          यात्री : सर, क्या मैं अपना लाइसेंस आईडी प्रूफ के रूप में जमा कर सकता हूं?

          रेलवे पूछताछ : ज़रूर। हम जांच के बाद जल्द ही आपसे संपर्क करेंगे। कृपया हमें 24 घंटे का समय दें।

          यात्री : धन्यवाद, श्रीमान।मैं आपके कॉल का बेसब्री से इंतज़ार करूँगा।


          Yatri aur Railway Puchtach Adhikari ke Beech Samvad

          यात्री : मेरा फोन ट्रेन में खो गया। क्या आप कृपया मेरी सहायता कर सकते हैं।

          रेलवे पूछताछ : हाँ, बिल्कुल, हम इस संबंध में आपकी मदद करेंगे। इस संबंध में सबसे पहले आपको स्टेशन मास्टर को पत्र लिखना होगा।

          यात्री : ठीक है, लेकिन मुझे पत्र का प्रारूप नहीं पता।

          रेलवे पूछताछ : ठीक है कोई बात नहीं। मैं आपको प्रारूप साझा कर रहा हूं।

          यात्री : ठीक है, ये रहा लेटर।

          रेलवे पूछताछ : मुझे देखने दो।

          यात्री : क्या कोई गलती है?

          रेलवे पूछताछ : नहीं, लेकिन आपको अपने व्यक्तिगत विवरण का उल्लेख करना चाहिए। ताकि हम आपके खोए हुए सामान को आप तक पहुंचा सकें। कृपया इसका उल्लेख करें।

          यात्री : ठीक है।

          रेलवे पूछताछ : अब, कृपया इस पत्र को स्टेशन मास्टर के पास जमा करें।

          यात्री : आपकी मदद के लिए धन्यवाद।


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          यात्री और टिकट बाबू के बीच संवाद लेखन - Conversation between Ticket Collector and Passenger in Hindi

          यात्री और टिकट बाबू के बीच संवाद लेखन - Conversation between Ticket Collector and Passenger in Hindi

          यात्री और टिकट बाबू के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing यात्री और टिकट चेकर के बीच संवाद लेखन and Conversation between Ticket Collector and Passenger in Hindi for Students and teachers.

            यात्री और टिकट बाबू के बीच संवाद लेखन

            टिकट चेकर : कृपया मुझे अपना टिकट दिखाओ!

            यात्री : मेरा टिकट गुम हो गया है।

            टिकट चेकर : यह बहाना मैंने पहले भी सुना है।

            यात्री : सॉरी लेकिन मेरे पास कोई टिकट नहीं है।

            टिकट चेकर : टिकट नहीं होने की वजह से आपको जुर्माना भरना होगा।

            यात्री : कितना जुर्माना है?

            टिकट चेकर : 500 रुपये।

            यात्री : यहां तक कि टिकट की कीमत भी 250 रुपये है। आप मुझसे 500 रुपये कैसे चार्ज कर सकते हैं?

            टिकट चेकर : अच्छा ठीक है, मुझे 300 रुपये दो और मामला रफा-दफा करो

            यात्री : भ्रष्टाचार करता हो? तुम सीधे से मेरी टिकट बनाओ। और अगर जुर्माना लगाना है तो उसकी रसीद दो।

            टिकट चेकर : ठीक है मैं आपकी टिकट बना देता हूं।

            यात्री और टिकट चेकर के बीच संवाद लेखन

            टिकट चेकर : अपनी टिकट दिखाइए। 

            यात्री : ये रही मेरी टिकट। 

            टिकट चेकर : पर ये टिकट तो जनरल डिब्बे की है और तुम स्लीपर डिब्बे में बैठे हो। 

            यात्री : वो क्या है की ट्रेन छूटने वाली थे इसलिए जल्दी-जल्दी में कुछ समझ नहीं आया। जो डिब्बा मिला बस उसी में चढ़ गए। 

            टिकट चेकर : पर बेटा ये कानूनन अपराध है। 

            यात्री : माफ़ कीजियेगा सर, दरअसल मेरी कल परीक्षा है और और मैं उसे मिस नहीं कर सकता था। 

            टिकट चेकर : चलो ठीक है। जैसे ही अगला स्टेशन आये तो उतारकर जनरल डिब्बे में चले जाना। 

            यात्री : जी धन्यवाद सर, आपने मेरी समस्या को समझा। 

            टिकट चेकर : बेटा हमने भी बहुत सरकारी परीक्षा दी हैं। ऐसे ही रेलवे में भर्ती नहीं हो गए। 

            यात्री : क्या आप मेरी स्लीपर की टिकट नहीं बना सकते ?

            टिकट चेकर : बना तो सकता हूँ पर सारी सीटें फुल  हैं ऐसे ही बैठकर जाना पड़ेगा। 

            यात्री : आप बस बना दीजिये कम से कम जनरल में धक्के खाने से तो बच जायेंगे। 

            टिकट चेकर : ठीक हैं 125 रुपये दो और ये रही तुम्हारी टिकट। 

            यात्री : ये लीजिये आपके पैसे। और टिकट बनाने के लिए धन्यवाद सर। 

            Conversation between Ticket Collector and Passenger in Hindi

            टिकट बाबू : चलिए, सभी यात्री अपना अपना टिकीट निकालकर रखिए।

            यात्री : टिकट बाबू, यह रहा मेरा टिकट।

            टिकट बाबू : आपका टिकट तो सिर्फ ठाणे स्टेशन तक का है। अब तो घाटकोपर स्टेशन आ गया है।

            यात्री : क्या? अरे मुझे तो ठाणे स्टेशन उतरना था।

            टिकट बाबू : ठाणे स्टेशन तो कब का चला गया।

            यात्री : अब मैं क्या करूँ?

            टिकट बाबू : जब ठाणे स्टेशन आया, तब आप क्या कर रहे थे?

            यात्री- मेरी तबियत कुछ खास ठीक नही है। इसलिए, मैं आराम कर रहा था। पता नही, कब आंँख लग गई!

            टिकट बाबू : ट्रेन में सफर करते वक्त आपको हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

            यात्री : मैं क्षमा चाहता हूँ। अब अगली बार से मुझसे ऐसी गलती नही होगी।

            टिकट बाबू : अगली बार से ऐसी गलती नही दौराना, वरना आपको फाइन भरना पड़ेगा। अब, आप कुर्ला स्टेशन पर उतर जाना।

            यात्री : ठीक है। धन्यवाद।


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            Friday, 1 July 2022

            ऑनलाइन पढ़ाई पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन - Online Padhai Par Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan

            ऑनलाइन पढ़ाई पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन - Online Padhai Par Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan

            ऑनलाइन पढ़ाई पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing दो मित्रों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई पर संवाद and Online Padhai Par Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan for Students and teachers.

              ऑनलाइन पढ़ाई पर दो मित्रों के बीच संवाद

              मारिया : कैसी हो सोनिया, तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है?

              सोनिया : मेरी पढ़ाई अच्छी चल रही है. तुम्हें पता है की महामारी के कारण मेरी सभी काक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई है।

              मारिया : हां, मैं भी ऑनलाइन क्लासेज के जरिए पढ़ाई कर रही हूं.

              सोनिया : मुझे तो लगता है की ऑनलाइन क्लास ज्यादा अच्छी होती है। पहले क्लास ऑनलाइन अटेंड करें करो और फिर उसका वीडियो भी मिल जाता है जिससे विषय को बार-बार समझा जा सकता है।

              मारिया : मुझे भी लगता है कि ये ऑनलाइन क्लासेज हम सभी के लिए बहुत अच्छी हैं। महामारी के दिनों में भी हम हर दिन कुछ नया सीखते हैं।

              सोनिया : लेकिन मुझे ऑनलाइन क्लासेज में कुछ दिक्कत भी है।

              मारिया : ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान तुम्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?

              सोनिया : भले ही मुझे ऑनलाइन क्लासेज अच्छी लगती हैं। लेकिन मैंने वह गंभीरता खो दी है जैसे हम अपनी काक्षा में पढ़ा करते हैं। कॉलेज में क्लास के दौरान, हमारे पास हर समय एक शिक्षक होता है जो हम पर नज़र रखता है। वहाँ हम जानते हैं, यदि हम ध्यान से अध्ययन नहीं करते हैं, तो हमें शिक्षक द्वारा फटकार लगाई जाएगी। इसिलिए ऑनलाइन पढाई में क्लास वाला मजा नहीं है।

              मारिया : हां तुम सही कह रही हो, लेकिन अब हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए कि हम महामारी के दौरान कॉलेज नहीं जा सकते। इसलिए हमें भी खुद से ही पढ़ाई करनी होगी।

              सोनिया : चलो, अब मेरा ऑनलाइन क्लास का समय हो गया है। कल मिलते हैं।

              मारिया : ज़रूर कोई बात नहीं, अलविदा।


              दो मित्रों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई पर संवाद

              मित्र 1 : राहुल तुम्हें ऑनलाइन पढ़ाई करने में मजा आ रहा है क्या ?

              मित्र 2 : सच्च कहूँ रोहित मुझे , ज्यादा मजा नहीं आ रहा है।

              मित्र 1 : मुझे तो बहुत परेशानी आ रही है।

              मित्र 2 : क्यों क्या हुआ ?

              मित्र 1 : मेरे घर में तो इंटरनेट का नेटवर्क नहीं आता , मैं अच्छे से ऑनलाइन कक्षा उपस्थित नहीं हो पाता।

              मित्र 2 : हाँ यार , नेटवर्क की मुश्किल तो रहती है।

              मित्र 1 : मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आता है , मुझे स्कूल की बहुत याद आती है।

              मित्र 2 : ऑनलाइन कक्षा में बच्चे बहुत शोर करते है , मैडम क्या बोलते है मुझे समझ नहीं आता।

              मित्र 1 : पता नहीं कब स्कूल खुलेंगे और हम सब फिर कक्षा में बैठकर पढ़ाई करेंगे।

              मित्र 2 : मुझे भी अपनी कक्षा में मस्ती और शरारते करने के दिन याद आ रहे है।


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              दो मित्रों के बीच कोरोना वायरस पर संवाद लेखन - Do Mitro Ke Beech Corona Virus Par Samvad Lekhan

              दो मित्रों के बीच कोरोना वायरस पर संवाद लेखन - Do Mitro Ke Beech Corona Virus Par Samvad Lekhan

              दो मित्रों के बीच कोरोना वायरस पर संवाद लेखन : In This article, We are providing दो मित्रों के बीच कोरोना महामारी पर संवाद and Do Mitro Ke Beech Corona Virus Par Samvad Lekhan for Students and teachers.

                दो मित्रों के बीच कोरोना वायरस पर संवाद

                आर्यन : इस कोरोना वायरस का प्रकोप तो बढ़ता ही जा रहा है। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। 

                सागर : डरने की बात तो है ही क्योंकि अभी तक कोरोना का कोई इलाज भी तो नहीं मिला है। 

                आर्यन : क्या कभी इस बीमारी का इलाज मिलेगा ?

                सागर : भले ही हमारे पास इसका कोई इलाज न हो लेकिन हम इससे अपना बचाव जरूर कर सकते हैं। बचाव से भी इसे फैलने से रोका जा सकता है। 

                आर्यन : इसी कारण हमारे देश में लॉकडाउन लगाया गया था ताकि यह बीमारी पूरे देश में न फैले। 

                सागर : हाँ, सही कहते हो। मैं तो जब भी बाहर निकलता हूँ तो हमेशा मास्क पहनता हूँ और 6 गज की दूरी का पालन करता हूँ।

                आर्यन : अब बस यही कामना है की जल्दी से इस बीमारी का इलाज मिले और दुनिया वापस सामान्य हो जाये। 

                सागर : हाँ, क्योंकि इस कोरोना ने पढाई का भी बहुत नुकसान किया है। मेरी भी बस यही प्रार्थना है की बस ये बीमारी किसी प्रकार ख़त्म हो और हम वापस स्कूल लौटें। 


                दो मित्रों के बीच कोरोना महामारी पर संवाद

                अशोक : रमन, मित्र क्या बात हैं, इतने भयभीत क्यों दिखाई दे रहे हों।

                रमन : मित्र, मुझे कोरोना का भय सता रहा है, हर पल यही डर लगा रहता हैं कि कहीं ये मुझे न हो जाएं।

                अशोक : क्यों, इसमें डरने वाली क्या बात है? तुम्हें नहीं पता इससे कैसे बचा जा सकता है।

                रमन : कुछ बातें तो जानता हूं फिर भी काफी बातों से अनभिज्ञ हूं। क्या तुम इस बारे में मेरी कोई सहायता कर सकते हो ?

                अशोक : हा - हा, क्यों नहीं। इतना तो तुम जानते हो कि हमें बार-बार हाथ धोते रहना है एवं स्वच्छता को बनाए रखना है। इसके अतिरिक्त अनावश्यक अपने मुंह, नाक व आंखों को छूने से बचना है।

                रमन : हा और बाहर से कुछ सामान लाए जाने पर उसे अच्छी तरह धोकर ही प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा और क्या कर सकते हैं।

                अशोक : यदि किसी व्यक्ति को खांसी - जुकाम हो रहा हो तो, ऐसे व्यक्ति से कम से कम 2 मीटर की दूरी बनाए रखनी है। और यदि तुम्हें खांसी या जुखाम हो तो हमेशा टिशु पेपर का प्रयोग करो व उसके उपरान्त उसे किसी ढक्कनदार कूड़ेदान में फेंक दो और मुंह पर मास्क लगाकर रखो और जब मास्को उतारो तुरंत साबुन से धोकर धूप में सुखा लो। पशुओं से भी दूरी बना कर रखो, चाहे वह पालतू हो या जंगली। बस इतना ही करना है और घबराना बिल्कुल नहीं है।

                रमन : धन्यवाद मित्र, तुमने मेरी परेशानी दूर कर दी है। अब मैं काफी तनाव रहित महसूस कर रहा हूं।

                अशोक : अच्छा मित्र, अब मैं चलता हूं। अपना ख्याल रखना, और अपने आसपास सफाई भी रखना।

                रमन : हां मित्र धन्यवाद, तुम भी अपना ख्याल रखना।


                दो दोस्तों के बीच कोरोना वायरस पर संवाद

                राम : तुम कोरोना महामारी के बारे में जानते हो?

                श्याम : हां यह एक बेहद खतरनाक बीमारी है। यह अब महामारी का रूप ले चुकी है।

                राम : यह कहां से शुरू हुआ?

                श्याम : यह चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ और देखते देखते दुनिया के लगभग सभी देशों में पहुंच गया।

                राम : तब तो इसका असर पूरे विश्व पर पड़ा होगा।

                श्याम : हां आज पूरा विश्व इस संकट को झेल रहा है।

                राम : अभी उसकी क्या स्थिति है?

                श्याम : पूरे विश्व में अभी तक तेरह लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं जिनमें सत्तर हजार लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा हर रोज बढ़ रहा है।

                राम : भगवान करे, जल्द इसका कोई दवाई तैयार हो ताकि ऐसे महामारी से विश्व निकल सके।


                दो दोस्तों के बीच कोरोना महामारी पर संवाद

                प्रशांत : अविनाश, इस कोरोना महामारी ने तो पूरी दुनिया का हाल-बेहाल कर दिया है।

                अविनाश : मुझे भी ऐसा ही लगता है दोस्त। इस कोरोना नाम की आफत से पूरी दुनिया परेशान है। कितने ही लोग बेरोजगार हो गए और कितने हे घर बर्बाद हो गए इस महामारी में।

                प्रशांत : इस वायरस का संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि सप्ताह भर में संक्रमित लोगों की संख्या दोगुनी हो जाती है।

                अविनाश : अरे मित्र! जो लोग पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं उनके लिए तो यह और भी ज्यादा घातक है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता तो अन्य लोगों से कमजोर ही होती है और वे इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

                प्रशांत : इस वायरस से मरने वाले लोगों के तो शव भी उनके परिवार के लोगों तक को नहीं मिल पा रहे हैं।

                अविनाश : इतना कुछ हो रहा है लेकिन तब भी लोग इस वायरस से बचने के लिए जिन बातों का ध्यान रखना चाहिए उनका पालन नहीं कर रहे हैं और संक्रमण बढ़ने में पूरा योगदान दे रहे हैं।

                प्रशांत : सही कह रहे हो मित्र। यदि इस वायरस से बचना है तो हमें दो गज की दूरी, मास्क का प्रयोग और नियमित रूप से हाथ धोने का पालन करना चाहिए। साथ ही टीकाकरण में भी भाग लेना चाहिए।


                Do Mitro Ke Beech Corona Virus Par Samvad Lekhan

                राम : यार मोहन, यह कोरोनावायरस का प्रकोप तो खत्म होने का नाम ही नही ले रहा। मुझे तो बड़ा डर लग रहा है, पता नही इसका अंत कब होगा?

                मोहन : हाँ राम, डरने की तो बात ही है। यह ऐसी महामारी है, जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। ऐसे में ये बीमारी लंबे समय हम लोगों के साथ रहने वाली है, ऐसा लगता है।

                राम : पता नही आगे क्या होगा? ऐसा संकट मैने अपने जीवन पहले कभी नही देखा।

                मोहन : भले ही अब तक इसका कोई इलाज नही निकल पाया है, लेकिन हम इस वायरस के संक्रमण को फैलने से तो बचा ही जा सकता हैं। किसी भी रोग को होने की नौबत ना आने देना यानि रोग से बचाव भी एक अच्छा उपाय है।  

                राम :  इसी कारण हमारे देश की सरकार ने लॉक डाउन किया था ताकि संक्रमण पूरे देश में ना फैल सके।  बल्कि पूरे विश्व में ऐसा हो रहा है।

                मोहन : बिल्कुल सही कहा तुमने। हमारे देश में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में लॉकडाउन चल रहा है। हालांकि बहुत से देशों ने देर से लॉकडाउन आरंभ किया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।  

                राम : परन्तु हमारे देश में तो एकदम सही समय पर लॉकडाउन का निर्णय ले लिया गया था।  लेकिन संक्रमण तो फिर भी बढ़ता जा रहा है।

                मोहन :  भले ही संक्रमण बढ़ रहे हैं, लेकिन ये भी देखो कि अगर लॉकडाउन नही किया होता तो बहुत बुरी हालत हो गयी होती। लॉकडाउन करने से हमें बचाव के लिये तैयारी करने का अवसर मिल गया। लोगों में एक समझ विकसित हो गयी और संक्रमण भी विशाल स्तर पर नही फैल पाया।

                राम : हाँ ये तो है। उम्मीद है कि जल्दी से जल्दी यह बीमारी न केवल हमारे देश से बल्कि पूरे विश्व से समाप्त हो जाएगी ताकि हम लोग अपनी पहले वाली जिंदगी सकें और सब कुछ पहले की तरह ठीक हो जाए।  

                मोहन : हाँ, हम हार मानने वाले नही हैं, फिलहाल जब तक इसका कोई सटीक उपचार नही आ जाता हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाते हुए बचाव के सारे उपायों के साथ जीवन जीना सीखना होगा।

                राम : सही कर रहे हो।


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                Thursday, 30 June 2022

                मालिक और नौकर के बीच संवाद लेखन - Malik aur Naukar ke Madhya Samvad Lekhan

                मालिक और नौकर के बीच संवाद लेखन - Malik aur Naukar ke Madhya Samvad Lekhan

                मालिक और नौकर के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing नौकर और मालिक के बीच संवाद लेखन and Malik aur Naukar ke Madhya Samvad Lekhan for Students and teachers.

                  मालिक और नौकर के बीच संवाद लेखन

                  मालिक - रामू ! तुमने पौधों को पानी क्यों नहीं दिया? ऐसे तो पौधे मुराझा जाएंगे।

                  नौकर - मलिक। मैं खाना बनाने में व्यस्त था।

                  मालिक - अच्छा जी ! खाने में क्या बनाया है?

                  नौकर - मैंने कद्दू की सब्जी, पूड़ी और साथ में रायता बनाया है।

                  मालिक - सुनकर ही मुंह में पानी आ गया। मुझे जल्दी से खाना परोस दो।

                  नौकर - ठीक है साहब। आप बस 5 मिनट रुकिए इस बीच मैं खाना परोसता हूं।

                  मालिक - और क्या-क्या किया है सबह से?

                  नौकर - (खाना परोसते हुए) साहब घर का सारा काम जैसा झाड़ू-पोंछा, कपड़े धोना आदि सब हो चुका है। बस अब पौधों में पानी डालना बाकी रह गया है।

                  मालिक - वास्तव में तुमने बहुत बढ़ियां खाना बनाया है। बस ऐसे ही लगन से काम करते रहे तो जल्दी ही तुम्हारी सैलरी बढ़ा दूंगा।

                  नौकर - (मुस्कुराते हुए) धन्यवाद मालिक!


                  नौकर और मालिक के बीच संवाद लेखन

                  नौकर - साहब ! मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है।

                  मालिक - हाँ बोलो ! क्या बात है?

                  नौकर - साहब ! मेरा वेतन बहुत कम है। बढ़ती महंगाई के मैं अपने परिवार का पालन-पोषण ठीक प्रकार से नहीं कर पा रहा हूँ।

                  मालिक - मैं इस विषय पर विचार करूँगा।

                  नौकर - मालिक, मैं पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपना काम करता हूँ, परन्तु मुझे जो वेतन मिल रहा है, उससे मेरी जरुरत आपसे अनुरोध है कि मेरे वेतन में वृद्धि कीजिए।

                  मालिक - तुम्हें तुम्हारे कार्य के अनुरूप उचित वेतन मिल रहा है।

                  नौकर - यदि मेरे वेतन में वृद्धि नहीं होगी, तो मैं विवश होकर यह नौकरी छोड़ दूँगा।

                  मालिक - ठीक है। मैं अगले महीने से तुम्हारे वेतन में 2000 रुपये बढ़ा दूँगा। तुम एक ईमानदार व्यक्ति हो और मेहनती भी।

                  नौकर - धन्यवाद साहब ! आपका बहुत-बहुत आभार।


                  नौकर और मालकिन के बीच संवाद लेखन

                  मालकिन - क्या करते हो नरेंद्र, अब तक ना तुमने सफाई की है न नाश्ता तैयार किया है। मेहमान आने वाले हैं।

                  नौकर - क्या करूँ मालकिन मेरे चाचा का टेलीफोन आ गया था |

                  मालकिन - हर समय फोन। कल तो कह रहे थे तुम्हारे चाचा शहर गए हैं ?

                  नौकर - मेम साहब वो तो चचेरे चाचा थे |

                  (तभी घंटी की आवाज़ आती है )

                  मालकिन - लगता है मेहमान आ गए।

                  नौकर - हाँ! लगता तो है।

                  मालकिन - तो खड़े-खड़े मेरा मुँह क्या देख रहा है। जाकर दरवाजा खोल।

                  नौकर - जी मालकिन !


                  Malik aur Naukar ke Madhya Samvad Lekhan

                  मालिक : रामू यह क्या कर रहे हो ?

                  नौकर : मालिक कुछ नहीं पानी दे रहा हूँ ?

                  मालिक : तुमने पानी का नलका खुला छोड़ दिया है , और पानी फालतू बह रहा है। 

                  नौकर : माफ़ कर दो मालिक मुझे ध्यान नहीं रहा। 

                  मालिक : लोगों की पीने को नसीब नहीं हो रहा और एक तुम हो बहाये जा रहे हो। 

                  नौकर : मालिक मुझे पता है , कि पानी की बहुत कमी है। 

                  मालिक : अगर हम पानी को व्यर्थ जाने देंगे तो हमारा जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा।

                  नौकर : मैं थोड़ा-थोड़ा पानी इस्तेमाल करूंगा ताकी व्यर्थ ना हो।

                  मालिक : ठीक है।


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                  दो मित्रों के बीच प्रदूषण पर संवाद लेखन - Do Mitro ke Beech Pradushan Par Samvad Lekhan

                  दो मित्रों के बीच प्रदूषण पर संवाद लेखन - Do Mitro ke Beech Pradushan Par Samvad Lekhan

                  पर्यावरण प्रदूषण के विषय पर दो मित्रों के बीच वार्तालाप लिखिए : In This article, We are providing दो मित्रों के बीच प्रदूषण पर संवाद लेखन and पर्यावरण प्रदूषण के विषय पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन for Students and teachers.

                    दो मित्रों के बीच प्रदूषण पर संवाद लेखन 

                    सागर : हाय, तारक, कैसे हो?

                    तारक : मैं ठीक हूं सागर, तुम कैसे हो?

                    सागर : हाँ, मैं भी ठीक हूँ। क्या तुम कल प्रदूषण जागरुकता शिविर में शमिल हुए थे?

                    तारक : हाँ, मैं वहाँ गया था क्योंकि प्रदूषण उन कुछ सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है जिसका हम सामना कर रहे हैं।

                    सागर : हाँ तुम सही कह रहे हो। कल मैंने बढ़ते प्रदूषण के खतरों के बारे में बहुत कुछ जाना। अब समय आ गया है की लोग बढ़ते प्रदूषण के प्रति सचेत हो जाएं।

                    तारक : तुम्हारे विचार से प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण क्या है?

                    सागर : मुझे तो प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण गाड़ियां लगती हैं।

                    सागर : मुझे भी यही लगता है। वायु प्रदूषण सबसे बुरा होता है। प्रदूषित हवा हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

                    तारक : हाँ, तुम सही कह रहे हो और मैं तुम्हारी बात से सहमत हूँ। वायु प्रदूषण बड़ा खतरनाक होता है। इंजन के काले धुएं के कारण हवा प्रदूषित हो जाती है। दिन-ब-दिन मोटर इंजन वाले वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, यह अगली पीढ़ी के लिए एक स्पष्ट खतरा है।

                    सागर : हाँ वाहनों के इंजिन से निकलने वाला धुआं ही वायु प्रदुषण के लिए  रूप से जिम्मेदार है। 

                    तारक : हाँ, हमें अभी से जागरूक होने की जरूरत है। नहीं तो हमें भविष्य में कुछ बहुत ही बुरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। दुनिया में ऐसे बहुत से देश हैं, जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सफल रहे हैं। विशेष रूप से, नॉर्वे और जापान, वे बहुत अधिक मोटर इंजन का उपयोग नहीं करते हैं। वे साइकिल से काम करने के लिए वहां जाना पसंद करते हैं। 

                    सागर : हाँ, हमें भी उनका अनुसरण करना चाहिए।


                    प्रदूषण पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन 

                    अंकित : क्या हुआ रमेश, तुम उदास क्यों हो?

                    रमेश : अंकित, मेरी माँ की हालत ठीक नहीं है।

                    अंकित : क्या हुआ उन्हें?

                    रमेश : हमारे शहर में इतना प्रदूषण हो गया है जिसकी वजह से माँ आज अस्पताल में भर्ती हैं।

                    अंकित : उनको तो सांस की बीमारी है ना?

                    रमेश : हाँ मित्र, शहर की जहरीली गैस ने माँ के शरीर में ऐसा घर कर लिया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

                    अंकित : हम छात्रों को प्रदूषण की समस्या का ठोस निदान निकालने के लिए सड़कों पर उतरना होगा, आंदोलन करना होगा। तभी लगता है सरकार जागेगी और शहर को प्रदूषण से मुक्ति मिल पाएगी।

                    रमेश : ठीक कहते हो मित्र।


                    पर्यावरण प्रदूषण के विषय पर दो मित्रों के बीच संवाद

                    पहला मित्र - मित्र, बहुत दुखी दिखाई दे रहे हो।

                    दूसरा मित्र - हाँ मित्र, बढ़ते प्रदूषण ने जीना मुश्किल कर दिया है। जिसको देखो वही बीमार। 

                    पहला मित्र - सही कह रहे हो। पता नहीं मनुष्य को क्या हो गया है कि बस पेड़ काट-काटकर कॉन्क्रीट का जंगल बनाता जा रहा है। 

                    दूसरा मित्र - जबकि पर्यावरण के लिए वृक्ष से बड़ा मित्र तो हो ही नहीं सकता। पर मनुष्य का दुर्भाग्य कि वह विकास के नाम पर इसकी कटाई करता जा रहा है।

                    पहला मित्र - हाँ, पर बढ़ती मोटर वाहनों की संख्या और कारखानों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक पदार्थ भी प्रदूषण बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।

                    दूसरा मित्र - मित्र, अगर ऐसा ही चलता रहा, तो मानव स्वयं अपने विनाश का कारण बनेगा। (चिंतित होते हुए) क्या यह मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है उसे पर्यावरण की जरा सी भी चिंता नहीं ?

                    पहला मित्र - मित्र, ऐसा नहीं है, कुछ लोग प्रदूषण से सुरक्षा के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।

                    दूसरा मित्र - यह तो अच्छी बात है। चलो, साथ मिलकर हम भी प्रयास करते हैं तथा सरकार से आग्रह करेंगे कि वह भी कुछ सहयोग करें।


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                    Wednesday, 29 June 2022

                    पिता और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन - Pita aur Putra ke Beech Mobile ko Lekar samvad Lekhan

                    पिता और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन - Pita aur Putra ke Beech Mobile ko Lekar samvad Lekhan

                    पिता और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन : In This article, We are providing पिता और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन and माँ और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन for Students and teachers.

                      पिता और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन

                      पिता : हिमांशु , मोबाइल चलाना बंद करो और इधर मेरे पास आकर बैठो।

                      पुत्र : जी, पापा अभी आया।

                      पिता : आजकल तुम मोबाइल बहुत चलाने लगे हो, जब देखो टीवी से ही मोबाइल रहते हो, तुम्हारा मन अब पढ़ाई में बिल्कुल भी नही लगता।

                      पुत्र : नही पापा, मैं ज्यादा मोबाइल नहीं चलता हूँ।

                      पिता : ओह तो अब तुम झूठ भी बोलने लगे हो। मैं जब भी घर में घुसता हूँ तुम्हें मोबाइल चलाते ही पाता हूँ, तुम्हारी मम्मी भी तुम्हारी शिकायत कर रही थीं कि दिन भर मोबाइल चलाता रहता है।

                      पुत्र : (सिर झुकाते हुये) जी।

                      पिता : देखो बेटा, मोबाइल को सिर्फ बात करने तक सीमित रखो, इसे अपनी आदत मत बनाओ। मैं ये नही कह रहा कि मोबाइल बिल्कुल भी न चलाओ। लेकिन तुम्हारे लिये अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

                      पुत्र : जी, पापा।

                      पिता : तुमने मोबाइल को अपनी आदत बना लिया है, ये ठीक नही है। जब पढ़ाई करके तुम थक जाओ तो रिलैक्स होने के लिये थोड़े समय मोबाइल चला लो। ​लेकिन तुम इसका उल्टा कर रहे हो दिनभर मोबाइल चलाते हो और पढ़ाई के लिये नाम-मात्र का समय देते हो।

                      पुत्र : पापा, सॉरी। गलती हो गयी। मैं आज से मोबाइल चलाना कम कर दूंगा।

                      पिता : यही मैं चाहता हूँ। तुम्हारे लिये अभी अच्छी पढ़ाई करके अपने करियर बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है, मोबाइल चलाकर बर्बाद करना अपने भविष्य से खिलवाड़ करने के समान है।

                      पुत्र : जी पापा। मैं आज से एक टाइम-टेबल बनाता हूँ और आप जैसा कहेंगे वैसा ही करूंगा।


                      माँ और पुत्र के बीच मोबाइल को लेकर संवाद लेखन

                      माँ : बेटा, मोबाइल का इतना प्रयोग मत किया करो, यह तुम्हारी आँखों और सेहत के लिए हानिकारक है।

                      बेटा : माँ, मैं तो मोबाइल का बहुत काम प्रयोग करता हूँ। बस अभी-अभी मोबाइल उठाया था।

                      माँ :  झूठ क्यों बोल रहे हो, जब देखो मोबाइल से चिपके हो।

                      बेटा : माँ, मैं तो बस मोबाइल पर गेम खेलता हूँ। मुझे लगता है जैसे मैंने गेम खेलकर कोई गुनाह कर दिया हो। 

                      माँ : बेटा ज्यादा गेम खेलने और हमेशा मोबाइल चलाते रहने से तुम्हारी सेहत पर ही बुरा असर पड़ेगा। तुम्हारी आँखें कमजोर हो जाएँगी। क्या तुम्हे अच्छा लगेगा की तुम्हें हर वक़्त मोटा चश्मा पहनना पड़े ?

                      पुत्री : माँ, आखिर आप चाहती क्या हो?

                      माँ : बेटा मैं तो बस तुम्हारा भला चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मोबाइल प्रयोग करो लेकिन सिर्फ उतना जितना जरुरी हो। थोड़ा घर का काम करो और चलो-फिरो, घूमो, बाहर जाकर खेलो, इससे तुम्हारा सेहत भी सही रहेगी।

                      पुत्री : ठीक है माँ, मैं आज से मोबाइल सीमित समय के लिए उपयोग करा करूंगा और आपकी बात मानूंगा।


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                      मोबाइल के दुरुपयोग पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन : In This article, We are providing मोबाइल के दुष्परिणाम को लेकर दो मित्रों के बीच संवाद and Do Mitro ke Beech Mobile Ke Durupyog Par Samvad Lekhan for Students and teachers.

                        मोबाइल के दुष्परिणाम को लेकर दो मित्रों के बीच संवाद​ लेखन

                        राहुल : सुप्रभात सौरव! कैसे हो ?

                        सौरव : सुप्रभात राहुल! मैं अच्छा हूँ। तुम कैसे को ?

                        राहुल : मैं भी ठीक हूँ। आजकल एक प्रोजेक्ट में व्यस्त हूँ। 

                        सौरव : अच्छा किस प्रकार का प्रोजेक्ट है तुम्हारा। 

                        राहुल : प्रोजेक्ट की थीम है मोबाइल का दुरुपयोग। 

                        सौरव : मोबाइल तो आज के युग की गंभीर समस्या है। 

                        राहुल : हाँ, इसीलिए तो इस पर प्रोजेक्ट बनाना है जिससे लोगों को मोबाइल से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक किया जा सके। 

                        सौरव : आजकल तो मोबाइल का दुरुपयोग इतना बढ़ गया है की लोग मोबाइल के कारण अपनी जान तक गँवा रहे हैं। 

                        राहुल : हाँ, मैंने भी न जाने कितने ही ऐसे लोगों को देखा है जो मना करने के बाद भी सड़क पर या रेलवे की पटरी पर मोबाइल पर बातें करते हुए चलते रहते हैं। 

                        सौरव : कितने लापरवाह हो गए हैं लोग! मोबाइल तो विद्यार्थियों की पढाई में भी बाधक बन रहा है। 

                        राहुल : बहुत से विद्यार्थी तो दिन भर मोबाइल पर ही लगे रहते हैं जिसके कारण परीक्षा में उनके काम नंबर आते हैं। और आँखें भी कमजोर होती हैं। 

                        सौरव : सच तो है की मोबाइल को एक ऐसी जादू की पुड़िया बताकर बेचा जा रहा हो जो सगुटकी बजाते ही आपकी सारी समस्याओं को फुर्र कर देगा। 

                        राहुल : जबकि सच्चाई ये है की जो लोग ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करते हैं उनका आई क्यू कम पाया गया है। 

                        सौरव : हाँ, सही कह रहे हो दोस्त। तुम्हारा प्रोजेक्ट बहुत अच्छा है, अगर मेरी कोई सहायता चाहिए हो तो बताना। 

                        राहुल : अवश्य मित्र ! तुम्हारे बिना ये प्रोजेक्ट पूरा ही नहीं हो सकता। 

                        सौरव : बिलकुल ! हमे शीघ्र इस मोबाइल के प्रलय से मुक्त होना होगा।


                        मोबाइल के दुरुपयोग पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन

                        दो मित्र रोहन और सोहन मोबाइल के दुष्प्रभावों को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

                        रोहन : मोहित, मोबाइल के उपयोग के बारे में तुम्हारे क्या विचार हैं?

                        सोहन : मोबाइल हम सब के लिये एक उपयोगी यंत्र बन कर आया था पर अब इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं, खासकर जब से स्मार्टफोन प्रचलन में आया है।

                        रोहन : आज न्यूज में तुमने सुना कि एक लड़की ने सेल्फी लेते समय दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गवां दी।

                        सोहन : हां मैंने आज न्यूज़ में सुना था कि एक लड़की सेल्फी ले रही थी, समुंदर की लहरों के पास और उसका ध्यान सेल्फी लेने में था कि समंदर की लहरों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। सेल्फी लेने का यह क्रेज जो हम सभी युवाओं में हो गया है उसके दुष्परिणाम अब भयावह हो गए हैं।

                        रोहन : केवल सेल्फी लेना ही नहीं बल्कि मोबाइल के बहुत सारे दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। आजकल सोशल मीडिया पर बहुत सारी फेक न्यूज़ चलने लगी है जिससे लोगों में गलतफहमियां पैदा होती हैं और दो समुदायों के बीच नफरत फैलती है।

                        सोहन : हाँ, बिल्कुल ठीक कह रहे हो। आजकल सबके पास मोबाइल है इस कारण सबके पास खबरे पहुँच जाती हैं, जिससे इन फेक न्यूज का दायरा बढ़ता है। मेरे व्हाट्सएप पर आजकल बहुत सारे ऐसे मैसेज आते हैं जिसमें किसी दूसरे समुदाय के प्रति नफरत भरी बातें होती हैं। मैं तो अब ऐसे मैसेज को इग्नोर कर देता हूं। किसी मैसेज के बारे में कोई शक होता है तो मैं किसी विश्वसनीय सूत्र से उसकी पुष्टि करता हूं।

                        रोहन : ये सब आजकल मोबाइल के ज्यादा प्रचलन के कारण हुआ है।

                        सोहन : बिल्कुल तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो स्मार्टफोन के उपयोग से जहाँ हमें कई लाभ हुए हैं उससे हमें कई हानियां भी होने लगी है। हम लोग  दिन भर अपने मोबाइल से चिपके रहते हैं। बार-बार मोबाइल पर मैसेज चेक करते रहते है। सिर झुकाये घंटों मोबाइल की स्क्रीन को देखते रहते हैं या कान से लगाये बातें करते रहते हैं उससे गर्दन में दर्द, कान दर्द आदि समस्यायें होने लगती हैं। मोबाइल के रेडियेशन का अलग नुकसान होता है।

                        रोहन : इसीलिये मैंने अपने मोबाइल का सीमित उपयोग करना शुरु कर दिया है। सोशल मीडिया से दूरी बना ली है। इयर फोन द्वारा गाने भी कम ही सुनता हूँ। जब फोन पर लंबी बात करनी हो तो इयर फोन से बात करता हूँ।

                        सोहन : तुम बिल्कुल ठीक कर रहे हो। हम सब को सचेत हो जाना चाहिये और मोबाइल के उपयोग की एक मर्यादा तय करनी चाहिये।


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                          मोबाइल और चार्जर के बीच संवाद

                          मोबाइल : क्या बात है चार्जर भाई ? बड़े थके-थके लग रहे हो ?

                          चार्जर : एक तो मुझे आराम नहीं करने देते और फिर पूछते हो की थके क्यों हो। 

                          मोबाइल : भला मैंने क्या किया ?

                          चार्जर : जब भी मैं आराम करने जाता हूँ बस तभी तुम्हे चार्ज करने की याद आती है। 

                          मोबाइल : दरअसल मेरी बैटरी खराब हो गयी थी इसलिए चार्जिंग टिक ही नहीं रही थी। 

                          चार्जर : अगर ऐसा है तो नयी बैटरी पड़ा लो। 

                          मोबाइल : आज मोनू गया है मेरे लिए नयी बैटरी लेने। बस एक बार नयी बैटरी आ जाए तो फिर एक बार चार्ज करोगे तो दो दिन तक मै तुम्हे परेशान नहीं करूँगा। 

                          चार्जर : ये तो तुमने बहुत बढियाँ खबर सुनाई। 

                          मोबाइल : तो इसी बात एक बार चार्ज कर दो। वो क्या है न की बैटरी शाम को आएगी। 

                          चार्जर : चल आ जा!तू भी क्या याद करेगा। 


                          Mobile aur Charger ke Beech Samvad Lekhan

                          मोबाइल : और भाई चार्जर कैसे हो?

                          चार्जर : मैं तो सही हूँ?

                          मोबाइल : तो फिर मुझे चार्ज क्यों नहीं कर रहे?

                          चार्जर : तुम अपने मालिक को कहो कि बिजली का प्लग ठीक करवाएं।

                          मोबाइल : तुम्हे बहुत जानते हो कि प्लग ठीक नहीं है ?

                          चार्जर : हाँ क्योंकि प्लग से मुझे बिजली मिलती है जिससे तुम चार्ज होते हो।

                          मोबाइल : अच्छा चलो कोई बात नहीं। तुम गुस्सा न हो ।

                          चार्जर : मैं गुस्सा नहीं हूँ। बस प्लग खराब होने की वजह से थोड़ा सा गर्म हूँ। 


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                          Tuesday, 28 June 2022

                          पिता और पुत्र के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन - Pita aur Putra Ke Beech Mein Picnic par Samvad Lekhan

                          पिता और पुत्र के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन - Pita aur Putra Ke Beech Mein Picnic par Samvad Lekhan

                          पिता और पुत्र के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन : In This article, We are providing पिता और बेटे के बीच संवाद पिकनिक पर संवाद लेखन and माँ और बेटी के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन for Students and teachers.

                            पिता और पुत्र के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन

                            बेटा : मेरा आपसे एक निवेदन है।

                            पिता : प्लीज बताओ।

                            बेटा : मेरी क्लास के स्टूडेंट पिकनिक पर आगरा जा रहे हैं..

                            पिता : ठीक है, क्या तुम भी उनके साथ जाना चाहते हो?

                            बेटा : अगर आप मुझे उनके साथ पिकनिक पर जाने की इजाज़त दें तो मुझे बहुत खुशी होगी।

                            पिता : तुम्हारे साथ पिकनिक पर कौन-कौन जा रहे हैं ?

                            बेटा : राहुल, फैज, अंकुर, पूजा सब पिकनिक पर जा रहे हैं।

                            पिता : तुम्हारी क्लास कितने दिन के लिए आगरा जा रही है ?

                            बेटा : सिर्फ एक हफ्ते के लिए।

                            पिता : तुम्हारी क्लास कब पिकनिक पर जाएगी?

                            बेटा : अगले हफ्ते।

                            पिता : ओके तुम जा सकते हो। पिकनिक के लिए कितनी फीस जमा करनी होगी स्कूल में ?

                            बेटा : सिर्फ एक हजार रुपये।

                            पिता : ठीक है माँ के पास जाओ और पैसे ले लो। और मोबाइल को हर समय अपने पास रखना ताकि हम तुमसे संपर्क कर सकें।

                            बेटा : पापा, क्या मैं आपका कैमरा ले सकता हूं ताकि मैं फोटो ले सकूं।

                            पिता : ज़रूर। लेकिन सावधानी से इस्तमाल करना। और इधर-उधर रखकर भूल न जाना।


                            पिता और बेटे के बीच संवाद पिकनिक पर संवाद लेखन

                            पुत्र : पिताजी मेरे स्कुल में अगले शनिवार पिकनिक का आयोजन किया जा रहा है।

                            पिता : ये तो बहुत अच्छी बात है, रोज की पढाई से छुट्टी पाकर पिकनिक जाने से शरीर और दिमाग को नई स्फूर्ति मिलती है।

                            पुत्र जी पिताजी, में ही पिकनिक में जाना चाहता हूँ और इसके लिए मुझे 300 रुपये पिकनिक के शुल्क के रूप में स्कूल में जमा करने हैं।

                            पिता : हाँ तो माँ से लेलो और जमा करा दो।

                            पुत्र धन्यवाद पिताजी।

                            पिता : परन्तु बेटा एक बात का ख्याल रहे कि पिकनिक में मास्टर साहब को तंग नहीं करना और न ही ऐसी कोई शरारत करना जिससे किसी को चोट लगे।

                            पुत्र जी पिताजी मैं ख्याल रखूंगा।

                            पिता : और हाँ जाने से पहले 10 रुपये जेब खर्च के लिए भी ले लेना परन्तु कोई दूषित वस्तु न खाना।

                            पुत्र धन्यवाद पिताजी। मैं आपकी बात का पूरा ध्यान रखूंगा।


                            Pita aur Putra Ke Beech Mein Picnic par Samvad Lekhan

                            पुत्र : पिता जी मैं आपसे के बात करना चाहता हूँ।

                            पिता : हाँ पुत्र बोलो।

                            पुत्र : पिता जी हमें स्कूल की तरह से पिकनिक पर ले जा रहे है।

                            ​पिता : अच्छा।

                            पुत्र : पिता जी मैंने भी अपने कक्षा के साथियों के साथ जाना चाहता हूँ।

                            ​पिता : पुत्र, कौन सी जगह पर ले जा रहे है।

                            पुत्र : पिता जी दो के लिए शिमला लेकर जा रहे है।

                            ​पिता : शिमला तो बहुत अच्छी जगह है और साथ में कितने अध्यापक जा रहे है।

                            पुत्र : हांजी पिता जी , शिमला बहुत अच्छी जगह , मैं जाना चाहता हूँ , हमारे साथ हमारी कक्षा के दो अध्यापक जा रहे है।

                            ​पिता : फिर तो अच्छा है , ठीक है चले जाना | अपना ध्यान रखना | अकेले मत घूमना हमेशा अपनी कक्षा के साथियों के साथ रहना।

                            पुत्र : धन्यवाद पिता जी , मैं ध्यान रखूंगा।

                            ​पिता : आप पिकनिक में कैसे जा रहे हो ?

                            पुत्र : हम सब स्कूल की बस से जा रहे है।


                            माँ और बेटी के बीच पिकनिक पर संवाद लेखन

                            इंदू : मम्मी मम्मी आज मेरी अध्यापिका ने हम सभी बच्चों को एक बात बतायी है।

                            मम्मी : कैसी बात इंदू ?

                            इंदू : मम्मी मैडम ने बोला है की अगले हफ़्ते हमारा स्कूल पिकनिक पर जा रहा है।

                            मम्मी : अच्छा जी ! और क्या बताया आपकी मैडम ने ?

                            इंदू : मम्मी मैडम ने बताया की वहाँ बहुत से झूले होंगे। पढ़ाई से सम्बंधित बातें बतायी जाएँगी और भी कई मज़ेदार चीज़ें भी होंगी जानने के लिए।

                            मम्मी : अच्छा?

                            इंदू : हाँ मम्मी , और मैं भी जाना चाहती हु मम्मी। मुझे केवल १०० रुपए देने होंगे। प्लीज मम्मी।

                            मम्मी :ठीक है इंदू तुम कल स्कूल जाते समय मुझसे रुपए लेती जाना।

                            इंदू : धन्यवाद मम्मी। आप बहुत अच्छी है ।


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