Saturday, 7 December 2019

Few Sentences on Pineapple in Hindi

Few Sentences on Pineapple in Hindi

Few Sentences on Pineapple in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 20 easy lines on Pineapple in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े अनानास  पर 5 से 10 तथा 20 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Pineapple in Hindi


  1. अनानास एक खट्टा-मीठा तथा रसीला फल होता है।
  2. यह मूलतः पैराग्वे एवं दक्षिणी ब्राज़ील का फल है।
  3. अनानास का पौधा 3 से 5 फीट ऊंचा होता है।
  4. अनानास एक बहुवर्षीय एक बीजपत्री पौधा है।
  5. इसका वैज्ञानिक नाम अनानास कोमोसस है।
  6. अनानास की 30 से अधिक किस्में पायी जाती हैं।
  7. यह भारत के त्रिपुरा राज्य का राजकीय फल है।

10 Sentences on Pineapple in Hindi


  1. अनानास एक खट्टा-मीठा तथा रसीला फल होता है। 
  2. यह मूलतः पैराग्वे एवं दक्षिणी ब्राज़ील का फल है। 
  3. अनानास का पौधा 3 से 5 फीट ऊंचा होता है। 
  4. अनानास एक बहुवर्षीय एक बीजपत्री पौधा है। 
  5. इसका वैज्ञानिक नाम अनानास कोमोसस है। 
  6. अनानास की 30 से अधिक किस्में पायी जाती हैं। 
  7. यह भारत के त्रिपुरा राज्य का राजकीय फल है। 
  8. पौधों को रोपने के 15 से 18 महीने इसमें बाद पुष्प आते हैं। 
  9. अनानास वास्तव में कई फलों का एक गुच्छा होता है। 
  10. अनानास को पकने में लगभग 3 वर्ष का समय लगता है। 
  11. इसका छिलका प्राकृतिक रूप से कठोर होता है। 
  12. अनानास के फल का 80 प्रतिशत भाग जल होता है। 
  13. अनन्नास का जैम बहुत ही स्वादिष्ट होता है। 
  14. गर्मी में इसके उपयोग से ताजगी व ठंडक मिलती है। 

20 Sentences on Pineapple in Hindi


  1. अनानास मुख्य रूप से मानव आहार में उपयोग किया जाता है।
  2. अनानास एक खट्टा-मीठा तथा रसीला फल होता है।
  3. अनानास का पौधा 3 से 5 फीट ऊंचा होता है।
  4. अनानास एक बहुवर्षीय एक बीजपत्री पौधा है।
  5. इसका वैज्ञानिक नाम अनानास कोमोसस है।
  6. अनानास की 30 से अधिक किस्में पायी जाती हैं।
  7. यह भारत के त्रिपुरा राज्य का राजकीय फल है।
  8. यह मूलतः पैराग्वे एवं दक्षिणी ब्राज़ील का फल है।
  9. पौधों को रोपने के 15 से 18 महीने इसमें बाद पुष्प आते हैं।
  10. अनानास वास्तव में कई फलों का एक गुच्छा होता है।
  11. अनानास को पकने में लगभग 3 वर्ष का समय लगता है।
  12. इसका छिलका प्राकृतिक रूप से कठोर होता है।
  13. अनानास के फल का 80 प्रतिशत भाग जल होता है।
  14. अनन्नास का जैम बहुत ही स्वादिष्ट होता है।
  15. गर्मी में इसके उपयोग से ताजगी व ठंडक मिलती है।
  16. भारत में असम और केरल इसके उत्पादन में अग्रणी है।
  17. अनन्नास के औषधीय गुण भी बहुत होते हैं।
  18. भारत में इस फल को पुर्तग़ाली लोग लेकर आये थे।
  19. अनन्नास में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है।
  20. भारत में जुलाई से नवम्बर के मध्य अनन्नास काफ़ी मात्रा में मिलता है।
  21. अनानास का उपयोग सिरका बनाने में किया जाता है। 
Few Sentences on Guava in Hindi

Few Sentences on Guava in Hindi

Few Sentences on Guava in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 20 easy lines on Guava in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े अमरूद पर 5 से 10 तथा 20 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Guava in Hindi

  1. अमरूद को अंग्रेजी में ग्वावा कहा जाता है। 
  2. इसका वैज्ञानिक नाम सीडियम ग्वाजवा है।
  3. दुनियाभर में अमरूद की लगभग 150 प्रजातियां हैं।
  4. अमरूद को जामफल के नाम से भी जाना जाता है। 
  5. अमरुद की उत्पत्ति संस्कृत के अमरुद्ध शब्द से हुई है। 
  6. अमरूद एक मीठा और अत्यंत स्वादिष्ट फल होता है। 
  7. अमरूद के फल में 100 से 500 तक लघु बीज होते हैं।
  8. अमरूद में चमकदार, गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं।

10 Sentences on Guava in Hindi

  1. अमरूद को अंग्रेजी में ग्वावा कहा जाता है। 
  2. इसका वैज्ञानिक नाम सीडियम ग्वाजवा है।
  3. दुनियाभर में अमरूद की लगभग 150 प्रजातियां हैं।
  4. अमरूद को जामफल के नाम से भी जाना जाता है। 
  5. अमरुद की उत्पत्ति संस्कृत के अमरुद्ध शब्द से हुई है। 
  6. १७वीं शताब्दी में पुर्तगाली इस फल  को भारत लाये।
  7. अमरूद स्वाद में मीठा और अत्यंत स्वादिष्ट होता है। 
  8. अमरूद के फल में 100 से 500 तक लघु बीज होते हैं।
  9. अमरूद में चमकदार, गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं।
  10. फूल सफेद होते हैं, जिसमें पाँच पंखुड़ियाँ होती हैं
  11. फूलों में कई पुंकेसर और छोटे-छोटे पिस्टल होते हैं।
  12. अमरुद के पेड़ की आयु लगभग 30 से 40 वर्ष होती है। 
  13. यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है। 
  14. इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं।

20 Sentences on Guava in Hindi

  1. अमरूद मैरेल वर्ग का एक उष्णकटिबंधीय फल है। 
  2. अमरूद को अंग्रेजी में ग्वावा कहा जाता है। 
  3. इसका वैज्ञानिक नाम सीडियम ग्वाजवा है। 
  4. दुनियाभर में अमरूद की लगभग 150 प्रजातियां हैं। 
  5. अमरूद को जामफल के नाम से भी जाना जाता है। 
  6. अमरुद की उत्पत्ति संस्कृत के अमरुद्ध शब्द से हुई है। 
  7. भारत विश्व में सबसे बड़ा अमरुद उत्पादक देश है। 
  8. अमरूद स्वाद में मीठा और अत्यंत स्वादिष्ट होता है। 
  9. अमरूद के फल में 100 से 500 तक लघु बीज होते हैं। 
  10. अमरूद में चमकदार, गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं। 
  11. इसके फूल सफेद होते हैं, जिसमें पाँच पंखुड़ियाँ होती हैं। 
  12. फूलों में कई पुंकेसर और छोटे-छोटे पिस्टल होते हैं। 
  13. अमरुद के पेड़ की आयु लगभग 30 से 40 वर्ष होती है। 
  14. लोग अमरूद की खेती भोजन के स्रोत के रूप में करते हैं। 
  15. बलुई दोमट मिट्टी अमरुद की खेती के लिए आदर्श होती है। 
  16. अमरूद के लिए गर्म तथा शुष्क जलवायु आदर्श होती है। 
  17. अमरूद की जेली तथा बर्फी (चीज) बनाई जाती है। 
  18. अमरूद को काटकर या सलाद के रूप में खाया जाता। 
  19. यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है। 
  20. इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं।
  21. अमरूद विटामिन सी, ए और ई के का समृद्ध स्रोत है।
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Friday, 6 December 2019

Few Sentences on Apple in Hindi

Few Sentences on Apple in Hindi

Few Sentences on Apple in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 20 easy lines on Apple in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े सेब पर 5 से 10 तथा 20 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Apple in Hindi

  • सेब एक खट्टा-मीठा स्वादयुक्त खाद्य फल है। 
  • सेब में गहरे हरे तथा अंडाकार पत्ते होते हैं। 
  • सेब का वैज्ञानिक नाम मेलस डोमेस्टिका है। 
  • यह पेड़ मध्य एशिया में उत्पन्न हुआ माना जाता है। 
  • सेब यूरोप में स्थित जर्मनी नामक देश का राष्ट्रीय फल है। 
  • सेब का रंग हरा होता है पकने पर यह लाल हो जाता है। 
  • भारत में जम्मू-कश्मीर सबसे बड़ा सेब उत्पादक है। 

10 Sentences on Apple in Hindi

  • सेब एक खट्टा-मीठा स्वादयुक्त खाद्य फल है। 
  • सेब में गहरे हरे तथा अंडाकार पत्ते होते हैं। 
  • सेब का वैज्ञानिक नाम मेलस डोमेस्टिका है। 
  • यह पेड़ मध्य एशिया में उत्पन्न हुआ माना जाता है। 
  • सेब का पेड़ रोसैसी परिवार के अंतर्गत आता है। 
  • सेब का रंग हरा होता है पकने पर यह लाल हो जाता है। 
  • सेब के पेड़ में में गुलाबी-सफेद रंग के फूल होते हैं। 
  • इसके प्रत्येक फूल में 5 पंखुड़ियाँ होती हैं। 
  • सेब के पेड़ पर चौथे वर्ष से फल लगने शुरू होते हैं। 
  • चीन दुनिया में सेब का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। 
  • सेब प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का समृद्ध स्रोत हैं। 
  • कई देशों में सेब के फल से सिरका भी बनाया जाता है। 

20 Sentences on Apple in Hindi

  • सेब एक खट्टा-मीठा स्वादयुक्त खाद्य फल है। 
  • सेब में गहरे हरे तथा अंडाकार पत्ते होते हैं। 
  • सेब का वैज्ञानिक नाम मेलस डोमेस्टिका है। 
  • यह पेड़ मध्य एशिया में उत्पन्न हुआ माना जाता है। 
  • सेब यूरोप में स्थित जर्मनी नामक देश का राष्ट्रीय फल है। 
  • सेब का पेड़ रोसैसी परिवार के अंतर्गत आता है। 
  • सेब का रंग हरा होता है पकने पर यह लाल हो जाता है। 
  • भारत में जम्मू-कश्मीर सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है। 
  • दुनिया भर में सेब की 7500 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। 
  • सेब के पेड़ में में गुलाबी-सफेद रंग के फूल होते हैं। 
  • इसके प्रत्येक फूल में 5 पंखुड़ियाँ होती हैं। 
  • मानव आहार में बड़े सेब का उपयोग किया जाता है। 
  • सेब के पेड़ पर चौथे वर्ष से फल लगने शुरू होते हैं। 
  • चीन दुनिया में सेब का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। 
  • सेब का पेड़ अधिकतम 30 फीट तक ऊँचा हो सकता हैं। 
  • सेब का पेड़ 8-10 साल के बीच पूर्ण विकसित हो जाता है। 
  • सेब का पेड़ 100 साल की उम्र तक पहुंच सकता है। 
  • सेब को सबसे स्वास्थ्यवर्धक फलों में से एक माना जाता है। 
  • सेब प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का समृद्ध स्रोत हैं। 
  • कई देशों में सेब के फल से सिरका भी बनाया जाता है। 
  • सेब का प्रयोग मुरब्बा तथा चटनी बनाने में किया जाता है। 
  • कहा जाता है एन एपल ए डे, कीप्स द डॉक्टर अवे। 
Few Sentences on Carrot in Hindi

Few Sentences on Carrot in Hindi

Few Sentences on Carrot in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 20 easy lines on Carrot in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े गाजर पर 5 से 10 तथा 20 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Carrot in Hindi

  • गाजर एक पौष्टिक तत्वों से भरपूर सब्ज़ी है। 
  • गाजर सर्दियों के मौसम में आने वाली सब्जी है। 
  • इसके पौधे में खाने योग्य भाग इसकी जड़ होती है। 
  • गाजर आमतौर पर नारंगी रंग का होता है। 
  • गाजर की उत्पत्ति अफगानिस्तान में हुई मानी जाती है। 
  • गाजर का पौधा 1 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। 
  • दुनिया का सबसे बड़ा गाजर उत्पादक चीन है। 

10 Sentences on Carrot in Hindi

  • गाजर एक पौष्टिक तत्वों से भरपूर सब्ज़ी है। 
  • गाजर सर्दियों के मौसम में आने वाली सब्जी है। 
  • इसके पौधे में खाने योग्य भाग इसकी जड़ होती है। 
  • गाजर आमतौर पर नारंगी रंग का होता है। 
  • इसकी बैंगनी, सफेद और पीले रंग की किस्में भी। 
  • गाजर की उत्पत्ति अफगानिस्तान में हुई मानी जाती है। 
  • गाजर द्विवार्षिक पौधा है इसकी आयु 2 वर्ष होती है। 
  • गाजर का पौधा 1 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। 
  • गाजर का आकार प्रजातीय विविधता पर निर्भर करता है। 
  • दुनिया का सबसे बड़ा गाजर उत्पादक चीन है। 
  • कैरोटीन के कारण गाजर को कैरेट कहा जाता है। 
  • इसको विभिन्न प्रकार से पकाया और खाया जाता है। 
  • गाजर खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। 

20 Sentences on Carrot in Hindi

  • गाजर एक पौष्टिक तत्वों से भरपूर सब्ज़ी है। 
  • गाजर सर्दियों के मौसम में आने वाली सब्जी है। 
  • गाजर की उत्पत्ति अफगानिस्तान में हुई मानी जाती है। 
  • गाजर का पौधा 1 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। 
  • गाजर द्विवार्षिक पौधा है इसकी आयु 2 वर्ष होती है। 
  • दुनिया का सबसे बड़ा गाजर उत्पादक चीन है। 
  • इसके पौधे में खाने योग्य भाग इसकी जड़ होती है। 
  • गाजर आमतौर पर नारंगी रंग का होता है। 
  • गाजर बैंगनी, लाल, सफेद व पीले रंग का भी होता है। 
  • नारंगी गाजर की खेती पहली बार नीदरलैंड में की गई थी। 
  • गाजर शीर्ष पर चौड़े होते हैं और अंत में पतले होते हैं। 
  • दुनियाभर में गाजर की 100 से अधिक खाद्य प्रजातियां हैं। 
  • गाजर को कच्चा, भुना या उबला हुआ खाया जा सकता है। 
  • भारत में गाजर का हलवा, सब्जी व अचार बनाया जाता है। 
  • गाजर का आकार प्रजातीय विविधता पर निर्भर करता है। 
  • कैरोटीन के कारण गाजर को कैरेट कहा जाता है। 
  • अन्य सब्जियों के विपरीत, गाजर चीनी में समृद्ध है। 
  • गाजर खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। 
  • कच्ची गाजर फाइबर और विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। 
  • यह दुनिया में दूसरी सबसे अधक खायी जाने वाली सब्जी है। 

Thursday, 5 December 2019

Few Sentences on Neem Tree in Hindi

Few Sentences on Neem Tree in Hindi

Few Sentences on Neem Tree in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 15 easy lines on Neem Tree in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े नीम के पेड़ पर 5 से 10 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Neem Tree in Hindi

  1. नीम का वृक्ष सदियों से गुणों की खान माना जाता है। 
  2. नीम भारतीय मूल का एक पर्ण- पाती वृक्ष है। 
  3. नीम भारत के आँध्रप्रदेश राज्य का राजकीय वृक्ष है। 
  4. नीम के फूल सफेद रंग के और सुगन्धित होते हैं। 
  5. नीम का आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। 
  6. नीम के पेड़ की ऊंचाई 15-30 मीटर तक होती हैं। 

10 Sentences on Neem Tree in Hindi

  1. नीम का वृक्ष सदियों से गुणों की खान माना जाता है। 
  2. नीम भारतीय उपमहाद्वीप का एक पर्ण- पाती वृक्ष है। 
  3. नीम भारत के आँध्रप्रदेश राज्य का राजकीय वृक्ष है। 
  4. यह उष्ण तथा उपउष्णकटिबंधीय जलवायु में फलने वाला वृक्ष है। 
  5. नीम का वैज्ञानिक नाम 'Azadirachta indica’ है। 
  6. नीम के फूल सफेद रंग के और सुगन्धित होते हैं। 
  7. इसकी पत्तियों का स्वाद कड़वा या कषैला होता है। 
  8. नीम का फल छोटा व गोलाकार होता है जिसे निंबोली कहते हैं। 
  9. इसकी छाल कठोर तथा दरारयुक्त या शल्कीय होती है। 
  10. इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। 
  11. नीम की छाल का प्रयोग दातुन के रूप में भी किया जाता है। 
  12. नीम के पेड़ की ऊंचाई 15-30 मीटर तक होती हैं। 
  13. भारत में इस पेड़ का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। 

15 Sentences on Neem Tree in Hindi

  1. नीम का वृक्ष सदियों से गुणों की खान माना जाता है। 
  2. नीम भारतीय उपमहाद्वीप का एक पर्ण- पाती वृक्ष है। 
  3. नीम भारत के आँध्रप्रदेश राज्य का राजकीय वृक्ष है। 
  4. यह उष्ण तथा उपउष्णकटिबंधीय जलवायु में पाया जाता है। 
  5. नीम का वैज्ञानिक नाम 'Azadirachta indica’ है। 
  6. अरबी- फारसी नाम ' आज़ाद दरख़्त ए हिन्द'से व्युत्पन्न है। 
  7. इसकी छाल कठोर तथा दरारयुक्त या शल्कीय होती है। 
  8. इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। 
  9. नीम की छाल का प्रयोग दातुन के रूप में भी किया जाता है। 
  10. नीम के फूल सफेद रंग के और सुगन्धित होते हैं। 
  11. इसकी पत्तियों का स्वाद कड़वा या कषैला होता है। 
  12. नीम का फल छोटा व गोलाकार होता है जिसे निंबोली कहते हैं। 
  13. भारत में इस पेड़ का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। 
  14. नीम के पेड़ की ऊंचाई 15-30 मीटर तक होती हैं। 
  15. नीम का पेड़ बहुत हद तक चीनीबेरी के पेड़ जैसा दिखता है। 
  16. नीम का आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। 
  17. नीम के पत्ते रक्त शोधन में सहायता करते हैं। 
  18. नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं।

Wednesday, 4 December 2019

Few Sentences on Marigold Flower in Hindi

Few Sentences on Marigold Flower in Hindi

Few Sentences on Marigold Flower in Hindi

In this article, we are providing 5 and 10 easy lines on Marigold flower in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े मैरीगोल्ड के फूल पर 5 से 10 वाक्य का निबंध।

5 Sentences on Marigold flower in Hindi

  1. गेंदा को अंग्रेजी में मेरी गोल्ड कहा जाता हैं। 
  2. मैरीगोल्ड का वैज्ञानिक नाम टैगेटेस इरेक्टा है।
  3. इसके प्रत्येक फूल में बड़ी संख्या में पंखुड़ियाँ होती हैं।
  4. मैरीगोल्ड के पौधे की ऊंचाई 3 से 4 फुट के करीब होती है।
  5. अधिकांश प्रकार के मैरीगोल्ड में मसालेदार सुगंध होती है।
  6. गेंदा की अधिकांश प्रजातियां गर्मियों के दौरान खिलती हैं। 
  7. गेंदे के फूल भँवरे तथा मधुमक्खियों को आकर्षित करता है। 

10 Sentences on Marigold flower in Hindi

  1. गेंदा को अंग्रेजी में मेरी गोल्ड कहा जाता हैं। 
  2. मैरीगोल्ड का वैज्ञानिक नाम टैगेटेस इरेक्टा है
  3. इसके प्रत्येक फूल में बड़ी संख्या में पंखुड़ियाँ होती हैं
  4. मैरीगोल्ड के पौधे की ऊंचाई 3 से 4 फुट के करीब होती है।
  5. गेंदे के पौधे का औसत जीवनकाल 4 महीने का होता है।
  6. भारत में ज्यादातर अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदा की खेती की जाती है। 
  7. अधिकांश प्रकार के मैरीगोल्ड में मसालेदार सुगंध होती है।
  8. गेंदा की अधिकांश प्रजातियां गर्मियों के दौरान खिलती हैं। 
  9. गेंदा की खेती आमतौर पर सजावटी उद्देश्यों में की जाती है।
  10. इसके फूलों का धार्मिक एवं सामाजिक उत्सवों में बड़ा महत्व है।
  11. मैरीगोल्ड विभिन्न रंगों में आते हैं, पीले और नारंगी सबसे आम हैं।
  12. गेंदे के फूल भँवरे तथा मधुमक्खियों को आकर्षित करता है। 
  13. इसके फूल से निकले तेल का इस्तेमाल सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है।
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Few Sentences on Daisy Flower in Hindi

Tuesday, 3 December 2019

Few Sentences on Daisy Flower in Hindi

Few Sentences on Daisy Flower in Hindi

Few Sentences on Daisy Flower in Hindi

In this article, we are providing 5 and 10 easy lines on Daisy flower in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े डेज़ी के फूल पर 5 से 10 वाक्य का निबंध

5 Sentences on Daisy flower in Hindi

  1. डेज़ी को हिंदी में गुलबहार के नाम से जाना जाता है। 
  2. डेज़ी का वैज्ञानिक नाम बेलिस पेरेनिस है। 
  3. डेज़ी का पुष्प अत्यंत सुन्दर व खुशबूदार होता है। 
  4. इसके फूल में सफेद पंखुड़ियों और एक पीला केंद्र होता है। 
  5. विश्व भर में डेज़ी की लगभग 4000 पाई जाती हैं। 
  6. इसके फूल भँवरे,तितली तथा मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। 
  7. इसके तेल का प्रयोग दवाइयां बनाने में किया जाता है। 

10 Sentences on Daisy flower in Hindi

  1. डेज़ी को हिंदी में गुलबहार के नाम से जाना जाता है। 
  2. डेज़ी का वैज्ञानिक नाम बेलिस पेरेनिस है। 
  3. डेज़ी का पुष्प अत्यंत सुन्दर व खुशबूदार होता है। 
  4. इसके फूल में सफेद पंखुड़ियों और एक पीला केंद्र होता है। 
  5. डेज़ी की उत्पत्ति एंग्लो सेक्सन शब्द "डेज़ ईज" से हुई है। 
  6. विश्व भर में डेज़ी की लगभग 4000 पाई जाती हैं। 
  7. प्रजाती के आधार पर इसकी उंचाई ३ इंच से 4 फीट तक हो सकती है। 
  8. ये प्रजातियाँ आकार, संरचना और रंग के आधार पर भिन्न होती हैं। 
  9. डेज़ी एक द्विवार्षिक पौधा है इसका जीवनकाल दो वर्ष का होता है। 
  10. डेज़ी का फूल सुबह खिलता है और रात बंद हो जाता है। 
  11. इसके फूल भँवरे,तितली तथा मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। 
  12. डेज़ी शुद्धता और मासूमियत का प्रतीक माना जाता है।
  13. इसके तेल का प्रयोग दवाइयां बनाने में किया जाता है। 

Monday, 2 December 2019

Few Lines on Jasmine Flower in Hindi

Few Lines on Jasmine Flower in Hindi

Few Lines on Jasmine Flower in Hindi

In this article, we are providing 5, 10 and 15 easy lines on Jasmine flower in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4 and 5. इस लेख में पढ़े चमेली के फूल पर 5 से 10 वाक्य का निबंध

5 Lines on Jasmine Flower in Hindi

  1. चमेली एक अत्यंत सुन्दर व खुशबूदार फूल है।
  2. इसका वैज्ञानिक नाम जैस्मीनम ऑफ़िसिनेल है। 
  3. चमेली इंडोनेशिया का राष्ट्रीय फूल है। 
  4. चमेली के फूल सफेद तथा पीले रंग के होते हैं। 
  5. चमेली के फूल में 5 से 6 पत्तियां होती हैं। 
  6. चमेली का प्रयोग सजावट में भी किया जाता है। 

10 Lines on Jasmine Flower in Hindi

  1. चमेली एक अत्यंत सुन्दर व खुशबूदार फूल है।
  2. इसका वैज्ञानिक नाम जैस्मीनम ऑफ़िसिनेल है। 
  3. चमेली इंडोनेशिया का राष्ट्रीय फूल है। 
  4. विश्व भर में चमेली की लगभग 200 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 
  5. चमेली के फूल सफेद तथा पीले रंग के होते हैं। 
  6. जैस्मीन बेल पर उगने वाला पुष्प है। 
  7. इसकी बेल दस से पंद्रह फुट तक लम्बी होती है। 
  8. इसे घरों, बगीचों, उद्यानों में आसानी से देखा जा सकता है। 
  9. भारत में चमेली के फूल से माला तथा गजरा बनाया जाता है। 
  10. चमेली की बेल पर ग्रीष्म तथा वसंत ऋतू में फूल आते हैं। 
  11. चमेली का तेल से साबुन, इत्र व क्रीम बनायी जाती है। 

15 Lines on Jasmine Flower in Hindi

  1. चमेली एक अत्यंत सुन्दर व खुशबूदार फूल है।
  2. इसका वैज्ञानिक नाम जैस्मीनम ऑफ़िसिनेल है। 
  3. चमेली इंडोनेशिया का राष्ट्रीय फूल है। 
  4. जैस्मीन शब्द की उत्पत्ति इरानी शब्द यास्मीन से हुई है। 
  5. जैस्मीन बेल पर उगने वाला पुष्प है। 
  6. इसकी बेल दस से पंद्रह फुट तक लम्बी होती है। 
  7. चमेली की बेल पर ग्रीष्म तथा वसंत ऋतू में फूल आते हैं। 
  8. चमेली के फूल सफेद तथा पीले रंग के होते हैं। 
  9. विश्व भर में चमेली की लगभग 200 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 
  10. चमेली के फूल में 5 से 6 पत्तियां होती हैं। 
  11. जैस्मीन की मूल रूप से हिमालय में पाया जाता है। 
  12. इसे घरों, बगीचों, उद्यानों में आसानी से देखा जा सकता है। 
  13. चमेली का प्रयोग सजावट में भी किया जाता है। 
  14. चमेली का तेल से साबुन, इत्र व क्रीम बनायी जाती है। 
  15. चीन में चमेली को ख़ुशी तथा भव्यता का प्रतीक माना जाता है। 
  16. चीन में चमेली के फूल की चाय बनायी जाती है। 
विनोबा भावे पर निबन्ध - Essay on Vinoba Bhave in Hindi

विनोबा भावे पर निबन्ध - Essay on Vinoba Bhave in Hindi

विनोबा भावे पर निबन्ध - Essay on Vinoba Bhave in Hindi

In this article, we are providing Long and short essay on Vinoba Bhave in Hindi language for students of class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12. इस लेख में पढ़े आचार्य विनोबा भावे पर छोटा व बड़ा निबंध। 

विनोबा भावे पर छोटा निबन्ध Short Essay on Vinoba Bhave in Hindi

विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को गाहोदे, गुजरात, भारत में हुआ था। आचार्य विनोबा भावे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा गांधीजी के अनुयायी थे। वह गांधीजी की तरह ही अहिंसा के पुजारी थे। उनके पिता का नाम नरहरि शम्भू राव और माता का नाम रुक्मिणी देवी था। विनोबा भावे का मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। उनकी मां उन्हें प्यार से विन्या कहकर बुलातीं थीं। विनोबा भावे भागवत गीता से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। वो कहते थे कि गीता उनके जीवन की हर एक सांस में है। उन्होंने अपने जीवन के दौरान कई किताबें लिखीं जिनमे स्वराज्य शास्त्र, गीता प्रवचन, तीसरी शक्ति प्रमुख हैं। उन्होंने भूदान आन्दोलन चलाया। विनोबा से पहली ही मुलाकात में प्रभावित होने पर गांधी जी ने सहज-मन से कहा था, "बाकी लोग तो इस आश्रम से कुछ लेने के लिए आते हैं, एक यही है जो हमें कुछ देने के लिए आया है।" 1958 में  विनोबा को प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 15 नवम्बर  1982, वर्धा, महाराष्ट्र में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये।

विनोबा भावे पर निबन्ध Long Essay on Vinoba Bhave in Hindi

भावे विनोबा भावे जन्म से महाराष्ट्रीय सारस्वत ब्राह्मण हैं। इनका जन्म 11 सितंबर, 1895 को गागोदा ग्राम में हुआ। माता पिता ने इनका नाम विनायक राव भावे रखा था। विनोबा नाम महात्मा गाँधी का दिया हुआ है। वे इन्हें इसी नाम से पुकारते थे।

इनके तीन छोटे भाई और एक बहन है। भाई बहनों में ये सबसे बड़े हैं। इनकी माता बड़ी धर्मपरायण और भक्त महिला थीं। विनोबा पर माता के चरित्र और शिक्षाओं का बहुत प्रभाव पड़ा है। माता द्वारा सुनाई गई कहानियों से प्रभावित हो कर ही विनोबाजी ने आजन्म ब्रह्मचारी रहने का व्रत लिया था और वे बचपन से ही कठोर जीवन बिताने लगे।

गणित और संस्कृत की ओर इनकी विशेष रुचि थी। ये बड़े कुशाग्र बद्धि के थे। स्मरण शक्ति इनकी आश्चर्यजनक थी। युनिवर्सिटी की परीक्षा देने के लिए वम्बई जाते हुए भुसावल स्टेशन पर उतर कर संस्कृत पढ़ने के लिए बनारस चल दिये। वनारस में हिन्दू विश्वविद्यालय के समारोह पर महात्मा गाँधी का जो भाषण हुआ उससे यह बहुत प्रभावित हुए और महात्मा गाँधी के दर्शनों के लिए साबरमती आश्रम पहुँचे और वहाँ महात्मा गाँधी के रंग में ही रँग गये। अपने कठोर और तपस्वी जीवन से इन्होंने महात्मा गाँधी को भी बहुत प्रभावित किया। इनके सम्बन्ध में महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था-"इस छोटी सी अवस्था में जो तेज और वैराग्य विनोवा ने प्राप्त किया है उसे पाने में मुझे कितने ही वर्ष लगे थे।

वर्धा आश्रम खोलने के लिए महात्मा गाँधी ने इन्हें ही भेजा था। इन्होंने वहाँ आश्रमवासियों के लिए बड़े ही कठोर नियम बनाये थे। प्रातः ४ बजे से रात १० वजे तक सबको काम करना पड़ता था। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शरीर-श्रम, अस्वाद, अभय, सब के लिए समान भाव, स्वदेशीपन और छूत-पात का भेद न करना इन ग्यारह व्रतों का पालन आश्रम में आवश्यक था।

सत्याग्रह आंदोलन में ये कई बार जेल गये । 1948 में महात्मा गाँधी के स्वर्गवास के बाद उनके सर्वोदय आन्दोलन के कार्य को इन्होंने ही संभाला। विनोबाजी की विशेष प्रसिद्धि उनके भूदान आन्दोलन से हुई है। यह आंदोलन सन् 1951 में हैदराबाद में शुरू हुआ। विनोबाजी वहाँ अपने साथियों सहित सर्वोदय सम्मेलन के लिए गये थे। पर वहाँ के गाँवों के किसानों की हालत देख कर वे आश्चर्य में आ गये। वहाँ भूमि के मालिक कुछ थोड़े से ज़मींदार थे। किसानों को खेती की मजदूरी में उपज का बीसवाँ भाग, वर्ष भर में एक कम्बल और एक जूता मिलता था। उनकी दुर्दशा देख विनोबा काँप उठे। बातचीत के दौरान में उन्हें पता लगा कि यदि उस गाँव के हरिजनों को 80 एकड़ भूमि मिल जाय तो उनका निर्वाह हो सकता है और उनकी हालत सुधर सकती है। पहले तो उन्होंने सोचा भारत सरकार को इस सम्बन्ध में कह कर कोई कानून बनवाया जाय पर फिर उन्हें ध्यान आया कि इसमें तो बहुत समय लगेगा। पता नहीं सरकार इस सम्बन्ध में कुछ कर भी सके या नहीं। अतः उन्होंने स्वयं ही बड़े-बड़े जमींदारों से भूमि दान करने की प्रार्थना की। २ मास में उन्हें 12 हजार एकड़ भूमि दान में मिली। उसके बाद यह आंदोलन सारे देश में ही शुरू हो गया। विनोबा जी अपने साथियों सहित हर एक प्रान्त में घूम घूम कर भूमिदान माँगने लगे। मार्च 1955 तक उन्हें 37 लाख एकड़ भूमि दान में मिल चुकी थी। भूमि-दान के साथ ही सम्पत्ति-दान का आंदोलन भी शुरू हुआ।

1958 में  विनोबा को प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अंतिम दिनों में खाना या दवा लेने से इनकार कर दिया था। 15 नवम्बर  1982, वर्धा, महाराष्ट्र में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये।

Sunday, 1 December 2019

हिंदी साहित्य में आदर्शवाद और यथार्थवाद पर निबंध

हिंदी साहित्य में आदर्शवाद और यथार्थवाद पर निबंध

 हिंदी साहित्य में आदर्शवाद और यथार्थवाद पर निबंध

हिंदी साहित्य में आदर्शवाद और यथार्थवाद पर निबंध Hindi sahitya mein Adarshwad aur Yatharthwad par nibandh : साहित्य में आदर्शवाद और यथार्थवाद पर निबंध समाज की नवचेतना और नवजागरण के साथ साहित्यिक विचारधारा में भी परिवर्तन हुए, दिशायें बदलीं और विद्वानों ने अपने-अपने सिद्धान्तों का प्रबल समर्थन किया और वादों की परम्परा चल पड़ी। किसी ने छायावाद को जन्म दिया तो किसी ने रहस्यवाद को। किसी ने प्रगतिवाद का समर्थन किया तो किसी ने प्रतीकवाद का। किसी ने प्रत्यक्षवाद की प्रशंसा की, तो किसी ने परोक्षवाद की। इसी प्रकार यथार्थवाद और आदर्शवाद भी साहित्यिक अखाड़े में कूद आये। कुछ दर्शक यथार्थवाद को प्रोत्साहित करने के लिए तालियाँ बजाने लगे और कुछ आदर्शवाद को। कुछ महानुभवों ने तटस्थता की नीति को अपनाया और दोनों के समन्वय में वाह-वाह करने लगे। आज का युग परीक्षण-काल है। साहित्य रूपी वृक्ष में से नित्य नवीन शाखायें फूट रही हैं, कुछ पल्लवित और कुसुमित हो जाती है, कुछ स्वयं सूखकर निष्प्राण हो जाती हैं और किन्हीं को लोग तोड़कर ले जाते हैं। यथार्थ और आदर्श की भी साहित्य के बाजार में बहुत कुछ धूम रही है। Read also : हिन्दी साहित्य में कहानी का उद्भव और विकास

कुछ विद्वान् इस बात के पक्षधर हैं कि साहित्य आदर्शवादी होना चाहिए। उनका विचार है कि मानव-जीवन और संसार में जो श्रेष्ठ है और श्रेयस्कर है, उसी को साहित्य में स्थान मिलना चाहिए। इसी से जन-कल्याण सम्भव है। समाज की कुरीतियों के दिग्दर्शन से, उसके दुश्चरित्रों के नग्न-चित्रण से, उसके गर्हित, घृणित एवं निन्दनीय स्वरूपों को सिखाने का एक माध्यम बन जायेगा। उदाहरणस्वरूपचलचित्रों के सभी चित्र किसी विशेष शिक्षा के आधार पर बनाए जाते हैं, परन्तु दृष्टा उन शिक्षाओं पर ध्यान न देकर चोरी करना, जेब काटना, अश्लील प्रेम में फंसना सरलता से सीख जाते हैं। अतः यह आवश्यक है कि साहित्य में आदर्श की ही प्रस्तुति की जाये। उधर यथार्थवादियों का विचार है कि मानव-जीवन और संसार का वास्तविक स्वरूप भी साहित्य में होना चाहिए। साहित्यकारों का कर्तव्य है कि जैसा देखें वैसा लिखें। मनुष्य को वास्तविक जगत् से दूर कल्पना के संसार में ले जाकर खड़े कर देने से मनुष्य का कल्याण नहीं हो सकता। वह जिस भूमि पर रहता है, उसी के वातावरण में उसका हित और अहित सम्भव है। उसे यदि स्वर्ग का काल्पनिक चित्र दिखाया जाये, तो उससे उसकी आत्म-संतुष्टि नहीं हो सकती। हम जिस संसार में रहते हैं। उसमें सुख भी है और दुःख भी है, अच्छाई भी है और बुराई भी है। यहाँ सुगन्धित पुष्पों के साथ काँटे भी हैं और मधु के साथ विष भी, यथार्थवादियों का दृढ़ विश्वास है कि वास्तविकता की ओर से आँख बन्द कर लेने से कल्याण नहीं हो सकता। हमारे जीवन में सत्य का जितना महत्त्व है, उतना कल्पना या स्वप्नों का नहीं। आदर्शवादी अपनी कल्पना द्वारा संसार की कुरूपता को अपनी बदि से ढककर एक सुन्दर और पवित्र जगत् की रचना करता है, जबकि यथार्थवादी साहित्य समाज का प्रतिबिम्ब है' के आधार पर साहित्य में समाज का नग्न, कुत्सित और वीभत्स चित्र प्रस्तुत करता है। Read also : गीतिकाव्य परम्परा का उद्भव और विकास

साहित्य जीवन की व्याख्या है, आलोचना है उसमें जीवन के भिन्न-भिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है, जीवन-निर्वाह के सिद्धान्त निश्चित किये जाते हैं। साहित्य समाज का मार्ग-प्रदर्शन करता है, उसे असत् से हटाकर सत् की ओर लगाता है। इसीलिये हमारे प्राचीन साहित्य में अन्त में पाप और दुराचार की पराजय और उस पर सत्य, न्याय, धर्म आदि सद्गुणों की विजय दिखाई गई है। काव्य प्रकाशमें काव्य के लक्षण गिनाते समय काव्य प्रकाशकार ने शिवेतरक्षतयेको ही प्रतिपादित किया है। अशिव की क्षति साहित्य का पवित्र कर्तव्य है। अशिव की क्षति करना साहित्यकार का प्रधान लक्ष्य होना चाहिए। अशिव का अर्थ अमंगल या अकल्याण है। कहने का तात्पर्य है कि साहित्य जन-कल्याण करने वाला कहा जा सकता है। दूसरे लोगों का विचार है कि साहित्य समाज का दर्पण है। उनके अनुसार साहित्य समाज का वास्तविक और यथार्थ रूप ही हमारे सामने प्रस्तुत करेगा। परन्तु प्रश्न यह है कि इस प्रकार साहित्य से लाभ क्या? जो वैद्य केवल मरीज के मर्ज को सामने रख दे क्या उस वैद्य से रोगी का कल्याण हो सकता है? कल्याण तो ऐसे वैद्य से हो सकता है जो उस मर्ज की अच्छी-से-अच्छी औषधि रोगी को दे और रोगी को यह अनुभव न होने दे कि वह इतने भयानक रोग से आक्रांत है। ठीक यही बात साहित्य के विषय में है। जीवन और समाज के केवल पापमय चित्र को प्रस्तुत करने वाला साहित्य, साहित्य नहीं हो सकता। साहित्य से तो सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् की रक्षा होनी चाहिए। यह निश्चय है कि संसार में उत्तम और अधम सभी प्रकार के प्राणी रहते हैं, पाप और पुण्य भी रहता है। साहित्य में सभी का थोड़ा-थोडा प्रतिनिधित्व सम्भव है, परन्तु लोक कल्याण के लिए नितान्त आवश्यक है कि पाप व पुण्य की विजय दिखाई जाए। इससे समाज में धर्मबुद्धि उद्बुद्ध होगी और अधार्मिक प्रवृत्ति के मनुष्य समाज की अधिक क्षति न कर सकेंगे। साहित्य में पूर्ण सत्य की रक्षा होनी चाहिए। Read also : जीवन में हास्य रस का महत्व हिंदी निबंध

साहित्य के उद्देश्य की पूर्ति इसी प्रकार के आदर्शवाद से होती है, क्योंकि कोरे आदर्शवाद का भी कोई मूल्य नहीं होता। सौन्दर्य का अस्तित्व कुरूपता पर आधारित है। यदि संसार में कुरूपता नहीं होती तो सौन्दर्य का न तो इतना महत्त्व होता और न आकर्षण। इसी प्रकार पुण्य का अस्तित्व पाप पर है, धर्म का अधर्म पर। साहित्य में लोकोपयोगी आदर्श, उच्च कोटि के सिद्धान्त, आत्मोन्नति के साधन तथा लोक-कल्याणकारी पीयूष धारा हो, परन्तु उसे अधार्मिक प्रवृत्तियों के द्वन्द्व द्वारा स्पष्ट किया जाये। लोकोपयोगी साहित्य स्रष्टा इन दो रूपों का अपने साहित्य में विश्लेषण करता है। मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वह काव्य में सत्य-पक्ष की ही विजय देखना चाहता है चाहे स्वयं कितना ही दुष्ट हो। असत् पक्ष के साथ उसकी सहानुभूति नहीं होती। प्राचीन भारतीय कवियों ने सच्चरित्र नायक और नायिकाओं को लेकर अनेक काव्यों और नाटकों की रचनायें कीं। इन नायक और नायिकाओं के सामने अनेक विघ्न-बाधाएँ आईं किन्तु उन्हें न गिनते हुए वे अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते चले गए, अन्त में उनकी निश्चित रूप से विजय हुई। पाठक के हृदय पर इसका प्रभाव यह पड़ता है कि सत्य की असत्य पर विजय होती है। Read also : रीतिकाल की सामान्य प्रवृत्तियां और विशेषतायें

हमारे प्राचीन साहित्यकार पूर्णतः आदर्शवादी थे, समाज में क्या हो रहा है इसकी नग्न विवेचना उनके काव्यों में नहीं होती थी, अपितु यदि ऐसा हो तो हमें क्या करना चाहिए, इस बात का ध्यान रखते थे। वे साहित्य सृजन तो करते थे इस भूमि पर रहकर, परन्तु आदर्श होता था स्वर्गीय। जिनके पवित्र वचनामृत से अधर्म और पाप में डूबी हुई जनता अपने उद्धार की आशा करती है, उन सत् काव्यों के अध्ययन से मनुष्य का हृदय पवित्र होने लगता है। तुलसी की रामायण ने आज संसार का कितना उपकार किया यह सर्वविदित है। संसार सागर में डूबने वाले कितने दराचारियों की इन महाकाव्यों ने रक्षा की? विश्रृंखलित समाज को सुसंगठित होने की चेतना दी? कितने मार्ग-अष्टों का पथ-प्रदर्शन किया? क्या आज के यथार्थवादी नाटक और उपन्यासों में यह क्षमता है? रामायण में भी सत और असत् दोनों में द्वन्द्व दिखाकर पुण्य की पाप पर विजय उद्घोषित की गई है। इस प्रकार हमारा प्राचीन साहित्य आदर्शवाद की शिला पर आधारित है। उस अमृत के समुद्र में आज तक जिसने भी स्नान किया उसने स्वर्गीय देवत्व प्राप्त किया, यह निःसन्देह सत्य है। अतः आदर्शवादी साहित्य स्रष्टा की दृष्टि में सदैव कल्याण होता है। वह जगत् का वीभत्स  नग्न चित्रण करके समाज में आग लगाना नहीं चाहता। मैथिलीशरण गुप्त ने आदर्शवाद के समर्थन में एक स्थान पर लिखा-
हो रहा है जो जहाँ सो हो रहा, यदि वही हमने कहा तो क्या कहा।
किन्तु होना चाहिए कब क्या कहाँ, व्यक्त करती है कला ही यह यहाँ ।।
भारतीय नकल करने में प्रसिद्ध हैं। अंग्रेजों की सभ्यता, संस्कृति और वेशभूषा की नकल करने में उन्होंने अपने को सौभाग्यशाली समझा, उन्होंने उनके साहित्य का भी अनुकरण किया। लन्दन की सामाजिक समस्याओं, प्रेम-लीलाओं, गर्भपात आदि का नग्न चित्र आज बाजारों में मिलता है। भारतीय नवयुवक उन्हें पढ़कर आनन्द लेते हैं और अपने चरित्र को दूषित बनाते हैं। हमारे साहित्यकार भी पाश्चात्य साहित्य के प्रभाव से प्रभावित हैं। आज जितने उपन्यास और कहानियाँ लिखी जा रही हैं, सभी यथार्थवादी हैं, समाज के प्रेमी और प्रेमिकाओं का सर्वांग नग्न चित्र उपस्थित करके लेखनी को सफल मान रहे हैं। इनसे समाज का पतन हो रहा है उत्थान नहीं। राजनैतिक विषयों में यथार्थवाद अवश्य लाभ करता है। ऐसे विषयों में 'यथार्थवादी साहित्य' की क्रान्ति की भूमिका होती है। जब कोई देश या समाज दीर्घकाल से अन्याय और अत्याचारों से ग्रस्त रहता है, तब कुछ प्रतिभाशाली यथार्थवादी लेखक अपनी ओजस्विनी लेखनी से उन दोषों की ओर संकेत करके जनता का ध्यान आकर्षित करते हैं। शनैशनैः उन बुराइयों के विरुद्ध लोकमत संगठित होता है। अन्त में जनता उन दोषों को एकदम समाप्त करने के लिए देश में क्रान्ति उपस्थित कर देती है। देशभक्त अपने प्राणों तक का बलिदान करने को तैयार हो जाते हैं। फ्रांस और रूस की क्रान्तियाँ इसी यथार्थवाद का परिणाम थीं। परन्तु आजकल नकलची भारत में यथार्थवाद के नाम पर ऐसा कुत्सित साहित्य लिखा जा रहा है जिसको पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो सारे संसार में अच्छाई और नैतिकता का नाम तक नहीं रहा है। यह एक-पक्षीय यथार्थवाद सर्वथा पतन की ओर ले जाना वाला है। Read also : हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान

तात्पर्य यह है कि जीवन को शक्ति को प्रेरणा देने वाला साहित्य ही 'सत्यम्, 'शिवम्, सुन्दरम्' बन सकता है और लोक कल्याण कर सकता है। यह तभी होगा जब हमारा साहित्य आदर्शोन्मुख होगा। यथार्थवादी साहित्य में अपना स्थान रखें, परन्तु एकांगी बनकर नहीं। उन्हें अपने साथ आदर्शवाद भी रखना होगा अन्यथा यह केवल हास्यास्पद बनकर रह जायेगा। प्रेमचन्द जैसा यथार्थवादी ही संसार में आदर प्राप्त कर सकता है। वे भी कोरे यथार्थवादी नहीं थे, वे थे आदर्शोन्मुख यथार्थवादी। अतः दोनों के सम्मिश्रण में ही समाज का कल्याण है।
10 Lines about Albert Einstein in Hindi

10 Lines about Albert Einstein in Hindi

10 Lines about Albert Einstein in Hindi

In this article we are providing A few or 10 Lines about Albert Einstein in Hindi for class 1, 2, 3, 4, 5. इस लेख में पढ़ें हिंदी में अल्बर्ट आइंस्टीन पर दस वाक्य। 
10 Lines about Albert Einstein in Hindi

  1. अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म जर्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में हुआ।
  2. उनके पिता हरमन आइंस्टीन एक इंजिनियर और सेल्समन थे। 
  3. अल्बर्ट आइंस्टीन को विश्‍व का महानतम वैज्ञानिक माना जाता है।
  4. आइंस्टीन बचपन में पढाई में और बोलने में कमजोर हुआ करते थे। 
  5. आइंस्टीन ने विशेष सापेक्षिकता और सामान्य आपेक्षिकता के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  6. सम्पूर्ण विश्व में आइंस्टीन" शब्द को "बुद्धिमान" का पर्याय माना जाता है। 
  7. उनकी मातृभाषा जर्मन थी और बाद में उन्होंने इतालवी और अंग्रेजी भी सीखी। 
  8. आइंस्टीन ने 300 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्रों का प्रकाशन किया। 
  9. अपने पूरे जीवनकाल में, आइंस्टीन ने सैकड़ों किताबें और लेख प्रकाशित किये। 
  10. आइंस्टीन ने द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच एक समीकरण प्रमाणित किया। 
  11. उन्होंने बताया की ऊर्जा एवं द्रव्यमान एक ही चीज के अलग रूप हैं। 
  12. 1922 में उन्हें "प्रकाशवैधुत प्रभाव की खोज के लिए" नोबेल पुरस्कार मिला। 

Saturday, 30 November 2019

10 Lines about Thomas Alva Edison in Hindi

10 Lines about Thomas Alva Edison in Hindi

10 Lines about Thomas Alva Edison in Hindi

In this article we are providing A few or 10 Lines on Thomas Alva Edison in Hindi for class 1, 2, 3, 4, 5. इस लेख में पढ़ें हिंदी में थॉमस अल्वा एडिसन पर दस वाक्य। 

10 Lines about Thomas Alva Edison in Hindi

10 Lines about Thomas Alva Edison in Hindi
  1. थॉमस अल्‍वा एडिसन को विश्‍व का महान आविष्‍कारक माना जाता है।
  2. उनके आविष्कारों ने लोगों का जीवन सुगम बना दिया था।
  3. एडिसन का जन्म अमेरिका के ओहायो राज्य में 11 फ़रवरी 1847 को हुआ।
  4. उनके माता-पिता का नाम क्रमशः समुअल एडिसन तथा नैन्सी एडिसन था। 
  5. वे अपने माता-पिता की सातवीं और आखिरी संतान थे।
  6. एडिसन ने दो बार शादी की और छह बच्चों के पिता बने। 
  7. उनकी दोनों पत्नियों के नाम क्रमशः मैरी स्टिलवेल और मीना मिलर था। 
  8. एडिसन ने अपने करियर की शुरुआत एक टेलीग्राफ ऑपरेटर के रूप की।
  9. उनका पहला आविष्कार इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर मशीन थी।
  10. एडिसन के सर्वाधिक प्रसिद्ध आविष्‍कारों में से एक ग्रामोफोन था
  11. इलेक्ट्रिक बल्ब की वजह से इन्हें पूरी दुनिया में पहचान मिली।
  12. एक हजार से ज्यादा आविष्कार तो उनके नाम से पेटेंट है।
  13. अपने जीवन काल में उन्होंने करीब 14 कंपनियां स्थापित की थीं।
  14. 1927 ई. में एडिसन नैशनल ऐकैडमी ऑव साइंसेज़ के सदस्य निर्वाचित हुए।
  15. 1931 में अपनी मृत्‍यु तक वह सक्रिय रूप में संलग्‍न रहे।
  16. 18 अक्टूबर, 1931 को वेस्ट ऑरेंज, न्यू जर्सी में उनका निधन हुआ। 
10 Lines on Post Office in Hindi and English

10 Lines on Post Office in Hindi and English

10 Lines on Post Office in Hindi and English

In this article we are providing 10 Lines on Post office in Hindi and English language for class 1, 2, 3, 4, 5. इस लेख में पढ़ें हिंदी तथा अंग्रेजी में पोस्ट ऑफिस पर 10 वाक्य। 

10 Lines on Post Office in Hindi

  1. पोस्ट ऑफिस को हिंदी में डाकघर कहते हैं। 
  2. भारत में डाकसेवा की शुरुआत 1 अप्रैल 1854 को हुई। 
  3. वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में प्रथम डाकघर स्थापित किया.
  4. पोस्ट ऑफिस एक महत्वपूर्ण कार्यालय होता है। 
  5. डाकघर प्रत्येक जिले, कस्बे व गाँव में होता है। 
  6. डाकघर के द्वारा पत्रों का आदान-प्रदान किया जाता है। 
  7. डाकघर के बाहर पत्र जमा करने की एक पेटी होती है। 
  8. इस पत्र पेटी का रंग लाल होता है। 
  9. डाकघर पत्रों को भेजने के लिए पिनकोड प्रयोग करते हैं। 
  10. भारत में रेलवे तथा सेना के अपने अलग डाकघर होते हैं। 
  11. यहां डाकिया, पोस्टमॉस्टर क्लर्क व चपरासी आदि काम करते हैं। 
  12. प्रत्येक पोस्ट ऑफिस में एक टिकट काउंटर होता है। 
  13. टिकट काउंटर पर टिकट व स्टाम्प खरीदी जाती हैं। 
  14. डाकघर में पत्रों को जमा करने, छांटने व पहुंचाने का कार्य होता है।
  15. डाकघर से पार्सल व मनीआर्डर आदि भी भेजे जाते हैं। 
  16. कई लोग डाकघरों में अपने पैसे भी जमा करते हैं। 

10 Lines on Post Office in English

  1. Postal services is the cheapest mode of communication.
  2. Postal service started in India on 1 April 1854.
  3. Post offices are found in every city, town, and village.
  4. Post office carries our letters from one place to the other
  5. Here the postman, postmaster clerk and peon are working.
  6. There is a red box to collect letters outside the post office.
  7. People put their letters into the letter box.
  8. Each post office has a ticket counter and inquiry counter .
  9. Tickets and stamps are purchased at the ticket counter.
  10. Postcode is used to send letters to the post office.
  11. Railways and the army have their own post offices in India.
  12. The post office has the task of collecting, sorting and delivering letters.
  13. Parcel and money orders are also sent from the post office.
  14. Many people deposit their money also  in post offices.
  15. Post offices offer services such as acceptance of letters and parcels.
  16. The postal network in India is the largest in world

Friday, 29 November 2019

હોળી મહોત્સવ વિશે નિબંધ ગુજરાતી Essay on Holi in Gujarati

હોળી મહોત્સવ વિશે નિબંધ ગુજરાતી Essay on Holi in Gujarati

Holi Nibandh Gujarati Ma : Today, we are providing હોળી મહોત્સવ વિશે નિબંધ ગુજરાતી For class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12. Students can Use Essay on Holi in Gujarati to complete their homework.

હોળી મહોત્સવ વિશે નિબંધ ગુજરાતી Essay on Holi in Gujarati

ફાગણ સુદ પુનમને દિવસે હોળીનો ઉત્સવ ઊજવવામાં આવે છે.
હિરણ્યકશિપુ નામે એક રાક્ષસ રાજા હતો. તેના કુંવરનું નામ પ્રહલાદ હતું. પ્રહલાદ પ્રભુનો ભક્ત હતો. તેના પિતા ભગવાનના વેરી હતા. તેમને પ્રહલાદ પ્રભુને ભજે એ ન ગમે. હિરણ્યકશિપુની એક બહેન હતી. તેનું નામ હોલિકા હતું. તેને અગ્નિ બાળી ન શકે એવું વરદાન હતું. પ્રહલાદને મારી નાંખવા હોલિકા તેને ખોળામાં બેસાડી લાકડાંઓની ચિતા પર બેઠી. ચિતા સળગાવવામાં આવી ચમત્કાર થયો. હોલિકા બળીને ભસ્મ થઈ ગઈ. પ્રહલાદ ઊગરી ગયો. આમ સત્ય અને પ્રભુની ભક્તિનો વિજય થયો. આ પૌરાણિક પ્રસંગથી હોળીનો તહેવાર ઊજવવામાં આવે છે.

પ્રલાદ ઊગરી ગયો તેના આનંદમાં સૌ આનંદ ઉત્સવ ઊજવે છે. તેઓ એકબીજા પર ગુલાલ છાંટે છે. પછી તો આ સમગ્ર તહેવાર રંગનો ઉત્સવ બની ગયો.

ગામને પાદરે કે શેરીને નાકે સાંજે હોળી પ્રગટાવવામાં આવે છે. સહુ હોળીની પૂજા કરે છે. હોળીના દિવસે લોકો હારડા, ધાણી-ચણા અને ખજૂર ખાય છે.

હોળી પછીના બીજા દિવસને સૌ ધુળેટી તરીકે ઊજવે છે. આ દિવસે લોકો એકબીજા પર રંગ અને ગુલાલ છાંટે છે. બાળકો રંગની પિચકારીઓથી એકબીજાને રંગે છે. કલાકો સુધી લોકો રંગની છોળોમાં રગદોળાય છે.

હોળીનો તહેવાર બાળકોને અતિ પ્રિય છે.
हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान

हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान

हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान - Hindi Sahitya Mein Nari ka Yogdan 

हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान Hindi Sahitya Mein Nari ka Yogdan: जीवन के सभी क्षेत्रों में स्त्री ने पुरुष का साथ दिया है। साहित्य के क्षेत्र में, जहाँ महाकवियों ने साहित्य को एक नवीन दिशा प्रदान की वहाँ महिलाओं ने भी अपनी अमूल्य कृतियों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया, परन्तु वह भारत माँ का दुर्भाग्य था, कि यहाँ पुरुषों की भाँति स्त्रियों की शिक्षा-दीक्षा का अभाव रहा अन्यथा यहाँ जितने पुरुष साहित्यकार हए उनसे अधिक महिला साहित्यकार होतीं। हिंदी साहित्य में महिला साहित्यकारों का योगदान को निम्नलिखित शीर्षकों से समझा जा सकता है:

वीरगाथा काल

हिंदी साहित्य का आदिकाल वीरगाथा काल कहा जाता है। यह एक प्रकार से राजनैतिक आँधी और तुफान का युग था। राजपूत राजे-महाराजे अपने-अपने अस्तित्व की रक्षा में लगे हुए थे। यवनों के भयानक आक्रमण भारतवर्ष पर हो रहे थे। और वे शनैः शनैः अपना अधिकार जमाते आ रहे थे। वह समय महिलाओं की कोमल भावनाओं के अनुकूल भी नहीं था। अत: हिन्दी साहित्य के आदिकाल में तो कोई महिला साहित्यकार प्रकाश में नहीं आई। परन्तु उसके पश्चात् अन्य सभी कालों में महिलाओं ने साहित्य की वृद्धि में यथाशक्ति योगदान दिया है।

भक्तिकाल

भक्तिकाल की मधुर एवं कोमल साहित्यिक प्रवृत्तियाँ महिलाओं की रुचि के अनुकूल थीं। इस काल में कई उच्चकोटि की महिला कवियित्रियों के दर्शन होते हैं। इन्होंने निराकार ब्रह्म और साकार ब्रह्म श्रीकृष्ण को पति के रूप में स्वीकार करके अपने अन्तर्मन की भावनाओं को कोमलकान्त पदावली द्वारा व्यक्त किया। भक्तिकालीन महिला काव्यकारों में सहजोबाई, दयाबाई और मीराबाई का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सहजोबाई चरणदास की शिष्या थी। उन्होंने निराकार प्रियतम के प्रति अनूठी उक्तियाँ कही है। प्रियतम की भक्ति-माधुरी में प्रेमोन्मत्त होकर सहजो कहने लगतीं-
बाबा नगरु बसाओ ।
ज्ञान दृष्टि सूं घट में देखौ, सुरति निरति लौ लावो ।।
पाँच मारि मन बसकर अपने, तीनों ताप नसावौ ।।
दयाबाई भी चरणदास की शिष्या थीं। उनका विषय वर्णन भी सहजोबाई निराकार प्रियतम का आह्वान और विरह निवेदन दी है। मृतपाय हिंदू जाति पर इन कवियित्रियों ने अपनी रसमयी काव्य धारा द्वारा ऐसी पीयूष वर्षा की कि वह आज तक सानन्द जीवित है।

मीराबाई

दयाबाई के पश्चात् मीरा का नाम आता है। मीरा भक्ति साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कवियित्री थीं। मीरा की कोमल वाणी ने भारतीय साहित्य में प्रेम और आशा से भरी हुई वह पावन सरिता प्रवाहित की जिसकी वेगवती धारा आज भी भारतीय अन्तरात्मा में ज्यों की त्यों अबाध गति से बह रही है। मीरा ने अपने अनुभूत प्रेम और विरह वेदना को साहित्य में स्थान दिया। कितना लालित्य और माधुर्य है, इनके पदों में, सभी जानते हैं। आज भारत के घर-घर में इनके पदों का आदर है। स्त्री-पुरुष सभी इन पदों को समान भाव से गाकर आज भी आनन्द-विभोर हो उठते हैं। श्रीकृष्ण के साथ मीरा का प्रेम दाम्पत्य-भाव का प्रेम था, श्रीकृष्ण उनके प्रियतम थे, जन्म-जन्म के साथी थे। और वह उनकी विरहिणी प्रेयसी थी। यह स्पष्ट घोषणा करते हुए मीरा को न कोई संकोच था और न कोई लोकलाज-
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई,
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई ।
सन्तन ढिंग बैठि-बैठि, लोक लाज खोई,
अब तो बेलि फैलि गई, अमृतफल होई।।
मीरा की-सी वेदना, टीस और कसक सम्भवतः हिन्दी की किसी अन्य कवियित्री में नहीं मिल सकती। मीरा के पद हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि हैं। एक दूसरा पद देखिए-
हे री मैं तो प्रेम दीवानी, मेरा दरद न जाने कोय,
दरद की मारी बन-बन डोले वैद मिला नहि कोय।
सली ऊपर सेज पिया की किस विधि मिलना होय,
मीरा की प्रभु पीर मिटै जब, वैद सँवरिया होय।

मीरा के उपरान्त

मीरा के उपरान्त हिन्दी साहित्य में छत्र वरि, विष्णु कुँवर, राय प्रवीण तथा ब्रजवासी अनेक महिला कवियित्रियों के दर्शन होते हैं। इन सभी महिलाओं ने अपनी पुनीत मधुर भावनाओं द्वारा हिन्दी साहित्य को समृद्धिशाली बनाने में पूर्ण योगदान दिया। विष्णु कुँवरि का सुन्दर पद उदाहरणार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पद में वे अपने प्रियतम भगवान श्रीकृष्ण के विरह की व्याकुलता करती हैं
निरमोही कैसो हियौ तरसावै ।
पहिले झलक दिखाव कै हमकें, अब क्यों देगि न आवै ।।
कब सौं तड़फत तेरी सजनी, वाको दरद न जावै ।
विष्णु कुँवर उर में आ करके, ऐसी पीर मिटावै ।।
अकबर के शासनकाल में राय प्रवीण' एक वेश्या थी। नृत्य और गीत के साथ वह सुन्दर कविता भी करती थी। वह महाकवि केशव की शिष्या थी। केशवदास जी ने कविप्रिया' में इसका इन भी किया है। अकबर इसके रूप-लावण्य पर मुग्ध था। उसने एक दिन इनसे भरी सभा में गाने को कहा। पहले तो इसने मना किया, परन्तु बाद में विवश होकर इन्हें गाना पड़ा। इसके तत्काल निम्नलिखित दोहा बनाकर सुनाया, जिससे अकबर बहुत लज्जित हुआ-
विनती राव प्रवीण की सुनिए शाह सुजान ।
जूठी पातर चखत है, बारी बायस स्वान ।।

मुसलमान महिला साहित्यकारों का योगदान

इनके बाद ताज का नाम आता है। यद्यपि ये मुसलमान थीं फिर भी इन्हें श्रीकृष्ण से प्रेम हो गया था। इनकी कविता भक्ति रस से ओत-प्रोत है। ताज श्रीकृष्ण के चरणारविंद में अपना न मन, धन समर्पित करने को उत्सुक है
सुनो दिलजानी मेरे दिल की कहानी तुम
दस्त हौं बिकानी, बदनामी भी सहूँगी मैं ।
देव पूजा ठानी हों नमाज हैं भुलानी,
तज कलमा कुरान, सारे गुनन कहूँगी मैं।
साँवला सलोना सरताज सिर कुल्लेदार,
तेरे नेह दाग में निदाग है दहूँगी मैं।
नन्द के कुमार, कुरबान तेरी सूरत पै,
हों तो मुसलमानी, हिन्दुवानी है रहँगी मैं।
ताज के पश्चात् शेख का नाम आता है। ये रंगरेजिन महिला थीं, इन्होंने एक ब्राह्मण कवि से विवाह कर लिया था और उसका नाम आलम रखा था। दोनों पति-पत्नी आनन्द से कविता किया करते थे। शेख की कविता शृंगार रस में अद्वितीय हैं। निम्नलिखित उदाहरण पति-पत्नी के प्रश्नोत्तर के रूप में। प्रथम पंक्ति में पति प्रश्न करते हैं, दूसरी पंक्ति से शेख उसका उत्तर देती है-
कनक छरी सी कामिनी, काहे को कटि छीन ।
कटि को कंचन काटि कै, कुचन मध्य धरि दीन ।।
हिन्दी के प्रसिद्ध 'कुण्डलियाँ' लेखक गिरधर कविराय की पत्नी का नाम 'साँई' था। अपने पति की भाँति वे भी नीतिपूर्ण छन्दों में रचना किया करती थीं। उदाहरण देखिए-
साँई अवसर के परे, को न सहे दुःख द्वन्द्व ।
जाय बिकाने डोम घर, वे राजा हरिचन्द ।।

आधुनिक काल

आधुनिक काल में नव-जागृति और नव-चेतना का उदय हुआ। महिलाओं की शिक्षा-दीक्षा प्राम्भ हुई उनके हृदय में नवीन भावनाओं ने जन्म लिया। साहित्य की सभी विधाओं पर महिलाओं ने लेखनी चलाई। आधनिक युग की महिला कवियित्रियों में प्रथम नाम श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान आता है। इन्होंने देश-भक्ति पूर्ण रचनायें की। झांसी की रानी' तथा 'वीरों का कैसा हो वसन्त इनकी अत्यन्त प्रसिद्ध रचनायें हैं। इनकी रचना का एक उदाहरण देखिए-
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने प्रकटी तानी थी।
बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नई जवानी थी।।
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी।
दूर फिरंगी को करने की, सबने मन में ठानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
इसके अनन्तर छायावादी युग की प्रमुख कवियित्री महादेवी वर्मा का नाम आता है। महादेवी जी के गीत अपनी सहज सहनशीलता, भावविधता के कारण सजीव हैं। विरह की आग में अनजान कविता उनके हृदय से बह निकलती है। देखिए उनकी करुणातुर प्रार्थना कितनी नारी सुलभ है-
जो तुम आ जाते एक बार !
कितनी करुणा कितने सन्देश, पथ में बिछ जाते बन पराग।
गाता प्राणों का तार-तार, अनुराग भरा उन्माद राग।
आँसू लेते वे पद पखार, जो तुम आ जाते एक बार ।।
महादेवी जी के गीत लोकप्रिय एवं हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि हैं। उनकी अपनी शैली है, अपनी प्रवृत्ति है। इस करुणा के अनन्त, असीम सागर में वे केवल नीर भरी दुःख की क्षणिक बदली ही हैं-
मैं नीर भरी दुःख की बदली !
विस्तृत नभ का कोना-कोना मेरा न कभी अपना होना।
परिचय इतना इतिहास येही, उमड़ी कल थी मिट आज चली ।।
वे जीवन के शून्य क्षणों में विकल होकर गा उठती हैं
अलि ! कैसे उनको पाऊँ।
ये आँसू बनकर भी मेरे इस कारण ढल-ढले जाते,
इन पलकों के बन्धन में मैं बाँध-बाँध पछताऊँ ।।
आधुनिक युग में महिला साहित्यकारों ने साहित्य की सभी विधाओं पर लिखना प्रारम्भ किया। कोई भी विधाक्या कहानी, क्या उपन्यास, क्या आलोचना, ऐसी नहीं है, जिस पर महिला ने लेखनी न चलाई हो। इन महिला साहित्यकारों में श्रीमती विद्यावती कोकिला, तारा पाण्डेय, सुमित्रा कुमारी सिन्हा, राजेश्वरी देवी, रजनी पणिक्कर, कंचनलता, सब्बरवाल तथा शची रानी गुर्टू आदि के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं। कविता के क्षेत्र में श्रीमती सुमित्रा कुमारी सिन्हा ने अधिक ख्याति प्राप्त की है। इनकी रचना का एक उदाहरण देखिए-
क्या तुम अकेले मन !
देखो जल, रेती साथ रहे, हैं भिन्न, किन्तु कस हाथ गहे ।
वे तो जड़ हैं, पर तुम चेतन, क्या तुम्हीं अकेले हो, ओ मन ।।
आधुनिक युग में महिला साहित्यकारों की उत्तरोत्तर वृद्धि होती जा रही है। आशा है कि निकट भविष्य में हिन्दी साहित्य को इनकी नवीन साहित्य कृतियाँ और भी अधिक समृद्धिशाली बनायेंगी।
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