मेसोपोटामिया की दुनिया को सबसे बड़ी देन क्या है?

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मेसोपोटामिया की दुनिया को सबसे बड़ी देन क्या है? 

मेसोपोटामिया पश्चिमी एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। संभवतः मेसोपोटामिया की दुनिया को सबसे बड़ी देन है उसकी कालगणना और गणित की विद्वत्तापूर्ण परंपरा है। लेखन कला भी मेसोपोटामिया सभ्यता का एक बड़ी योगदान है। 1800 ई.पू. के आसपास की कुछ पट्टिकाएँ मिली हैं जिनमें गुणा और भाग की तालिकाएँ, वर्ग तथा वर्गमूल और चक्रवृद्धि ब्याज की सारणियाँ दी गई हैं। उनमें 2 का वर्गमूल यह दिया गया है:

1 + 24/60 + 51/602 + 10/603 अगर आप इसे हल करें तो इसका उत्तर 1.41421296 होगा जो इसके सही उत्तर 1.41421356 से थोड़ा-सा ही भिन्न है। उस समय के विद्यार्थियों को इस प्रकार के सवाल हल करने होते थे: अगर एक खेत का क्षेत्रफल इतना-इतना है और वह एक अंगुल गहरे पानी में डूबा हुआ है तो संपूर्ण पानी का आयतन बताओ।

पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा के अनुसार एक पूरे वर्ष का 12 महीनों में विभाजन, एक महीने का 4 हफ्तों में विभाजन, एक दिन का 24 घंटों में और एक घंटे का 60 मिनट में विभाजन-यह सब जो आज हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का अचेतन हिस्सा है, मेसोपोटामियावासियों से ही हमें मिला है। समय का उपर्युक्त विभाजन सिकंदर के उत्तराधिकारियों ने अपनाया, वहाँ से वह रोम और फिर इस्लाम की दुनिया को मिला और फिर मध्ययुगीन यूरोप में पहुँचा

जब कभी सूर्य और चंद्र ग्रहण होते थे तो वर्ष, मास और दिन के अनुसार उनके घटित होने का हिसाब रखा जाता था। इसी प्रकार रात को आकाश में तारों और तारामंडल की स्थिति पर बराबर नजर रखते हए उनका हिसाब रखा जाता था।

मेसोपोटामियावासियों की इन महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक भी उपलब्धि संभव नहीं होती यदि लेखन की कला और विद्यालयों जैसी उन संस्थाओं का अभाव होता जहाँ विद्यार्थीगण पुरानी लिखित पट्टिकाओं को पढ़ते और उनकी नकल करते थे और जहाँ कुछ छात्रों को साधारण प्रशासन का हिसाब-किताब रखने वाले लेखाकार न बनाकर, ऐसा प्रतिभासंपन्न व्यक्ति बनाया जाता था जो अपने पूर्वजों की बौद्धिक उपलब्धियों को आगे बढा सकें।

यह सोचना गलत होगा कि मेसोपोटामिया के शहरी लोग आधुनिक तौर-तरीकों से परिचित नहीं थे। अंत में, हमें उन दो प्रकार के प्रारंभिक प्रयत्नों का अवलोकन करना चाहिए जिनके द्वारा अतीत के प्रलेखों एवं परंपराओं को खोजने और सुरक्षित रखने की कोशिश की गई थी। 

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