मेसोपोटामिया की लेखन कला के बारे में आप क्या जानते हैं

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मेसोपोटामिया की लेखन कला के बारे में आप क्या जानते हैं ?

मेसोपोटामिया की लेखन कला : जब लेखन या लिपि के बारे में बात की जाती है तो उसका अर्थ है उच्चरित ध्वनियाँ, जो दृश्य संकेतों या चिह्नों के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं। मेसोपोटामिया में जो पहली पट्टिकाएँ (Tablet) पाई गई हैं वे लगभग 3200 ई.पू. की हैं। उनमें चित्र जैसे चिह्न और संख्याएँ दी गई हैं। वहाँ बैलों, मछलियों और रोटियों आदि की लगभग 5000 सूचियाँ मिली हैं, जो वहाँ के दक्षिणी शहर उरुक के मंदिरों में आने वाली और वहाँ से बाहर जाने वाली चीज़ों की होंगी। स्पष्टतः, लेखन कार्य तभी शुरू हुआ जब समाज को अपने लेन-देन का स्थायी हिसाब रखने की ज़रूरत पड़ी क्योंकि शहरी जीवन में लेन-देन अलग-अलग समय पर होते थे, उन्हें करने वाले भी कई लोग होते थे और सौदा भी कई प्रकार के माल के बारे में होता था।

मेसोपोटामिया के लोग मिट्टी की पट्टिकाओं पर लिखा करते थे। लिपिक चिकनी मिट्टी को गीला करता था और फिर उसको गूंध कर और थापकर एक ऐसे आकार की पट्टी का रूप दे देता था जिसे वह आसानी से अपने एक हाथ में पकड़ सके। वह सावधानीपूर्वक उसकी सतहों को चिकना बना लेता था फिर सरकंडे की तीली की तीखी नोक से वह उसकी नम चिकनी सतह पर कीलाकार चिह्न (cuneiform*) बना देता था। जब ये पट्टिकाएँ धूप में सूख जाती थीं तो पक्की हो जाती थीं और वे मिट्टी के बर्तनों जैसी ही मज़बूत हो जाती थीं। जब उन पर लिखा हुआ कोई हिसाब, जैसे धातु के टुकड़े सौंपने का हिसाब असंगत या गैर-ज़रूरी हो जाता तो उस पट्टिका को फेंक दिया जाता था। ऐसी पट्टी जब एक बार सूख जाती थी तो उस पर कोई नया चिह्न या अक्षर नहीं लिखा जा सकता था। इस प्रकार प्रत्येक सौदे के लिए चाहे वह कितना ही छोटा हो, एक अलग पट्टिका की जरूरत होती थी। इसीलिए मेसोपोटामिया के खुदाई स्थलों पर सैकड़ों पट्टिकाएँ मिली हैं। और इस स्रोत-संपदा के कारण ही आज हम मेसोपोटामिया के बारे में इतना कुछ जानते हैं।

लगभग 2600 ई.पू. के आसपास वर्ण कीलाकार हो गए और भाषा सुमेरियन थी। अब लेखन का इस्तेमाल हिसाब-किताब रखने के लिए ही नहीं, बल्कि शब्द-कोश बनाने, भूमि के हस्तांतरण को कानूनी मान्यता प्रदान करने, राजाओं के कार्यों का वर्णन करने और कानून में उन परिवर्तनों को उद्घोषित करने के लिए किया जाने लगा जो देश की आम जनता के लिए बनाए जाते थे। मेसोपोटामिया की सबसे पुरानी ज्ञात भाषा सुमेरियन का स्थान, 2400 ई.पू. के बाद, धीरे-धीरे अक्कदी भाषा ने ले लिया। अक्कदी भाषा में कीलाकार लेखन का रिवाज ईसवी सन् की पहली शताब्दी तक अर्थात् 2000 से अधिक वर्षों तक चलता रहा।

मेसोपोटामिया की लेखन प्रणाली की विशेषता

मेसोपोटामिया के लिपिक को सैकड़ों चिह्न सीखने पड़ते थे और उसे गीली पट्टी पर उसके सूखने से पहले ही लिखना होता था। लेखन कार्य के लिए बड़ी कुशलता की आवश्यकता होती थी, इसलिए लिखने का काम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। जिस ध्वनि के लिए कीलाक्षर या कीलाकार चिह्न का प्रयोग किया जाता था वह एक अकेला व्यंजन या स्वर नहीं होता था (जैसे अंग्रेजी वर्णमाला में m या a) लेकिन अक्षर (Syllables) होते थे (जैसे अंग्रेजी में -put-, या -la- या -in- )। इस प्रकार, इस प्रकार, किसी भाषा-विशेष की ध्वनियों को एक दृश्य रूप में प्रस्तुत करना एक महान बौद्धिक उपलब्धि माना जाता था। 

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