मेसोपोटामिया के उर नगर की विशेषताएं बताइए

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मेसोपोटामिया के उर नगर की विशेषताएं बताइए

प्राचीन मेसोपोटामिया में उर नगर एक महत्वपूर्ण सुमेरियन शहर था, जो दक्षिण इराक के धीकर प्रांत में आधुनिक "टेल अल-मुकय्यार" के पास स्थित है। उर नगर 1922 में तब प्रसिद्ध हुआ जब सर लियोनार्ड वूली ने खंडहरों की खुदाई की और द ग्रेट डेथ पिट एवं रॉयल टॉम्ब्स की खोज की। यद्यपि ऊर कभी फारस की खाड़ी पर फरात नदी के मुहाने के पास एक तटीय शहर था, परन्तु समुद्र तट स्थानांतरित हो गया और अब यह शहर अब अच्छी तरह से स्थल मार्ग से जुड़ा है। यह शहर का सम्बन्ध लगभग 3800 ईसा पूर्व उबायद काल से है, और 26 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से उर नगर का में लिखित इतिहास में दर्ज किया गया है।  इसका पहला राजा मेसनपेडा था। शहर का संरक्षक देवता नाना, सुमेरियन और अक्कडियन (अश्शूर-बेबीलोनियन) चंद्रमा देवता था, और माना जाता है शहर का नाम मूल रूप से भगवान के नाम से लिया गया है। स्थल को उर के जिगुरत के आंशिक रूप से बहाल खंडहरों द्वारा चिह्नित किया गया है। 

उर नगर की विशेषताएं 

  1. टेढ़ी-मेढ़ी तथा संकरी घुमावदार गलियाँ 
  2. कुशल जल निकासी का अभाव 
  3. उर नगर की सफाई व्यवस्था 
  4. कमरों में खिड़कियों का अभाव 
  5. अंधविश्वास का प्रचलन 
  6. शवों को दफ़नाने के लिए कब्रिस्तान

(1) टेढ़ी-मेढ़ी तथा संकरी घुमावदार गलियाँ - उर नगर की टेढ़ी-मेढ़ी तथा घुमावदार गलियों तथा घरों के भूखंडों का एक जैसा आकार न होने से यह पता चलता है की नगर नियोजन की पद्धति का अभाव था। नगर की गलियाँ इतनी संकरी थीं कि वहां के घरों तक पहियों वाली गाड़ियां नहीं पहुंच सकती थी। अनाज के बोरे, ईंधन तथा अन्य सामग्री को संभवतः गधों पर लादकर घरों तक लाया जाता था।

(2) कुशल जल निकासी का अभाव - वहां गलियों के किनारे जल निकासी के लिए उस तरह की व्यवस्था नहीं थी जैसी समकालीन नगर मोहनजोदड़ो में पाई गई हैं । बल्कि जल निकासी नालियां और मिट्टी की नलीकाएं उर नगर के घरों के भीतरी आंगन में पाई गई हैं जिससे यह समझा जाता है कि घरों की छतों का ढलान भीतर की ओर होता था और वर्षा के पानी का निकास नालियों के माध्यम से भीतरी आंगनों में बने हुए हौजों में ले जाया जाता था । शायद यह इसलिए किया गया था कि तेज वर्षा आने पर घर के बाहर की कच्ची गलियां कीचड़ से न भर जाए ।

(3) उर नगर की सफाई व्यवस्था - उर शहर की सफाई व्यवस्था उत्तम नहीं थी। लोग अपने घरों का सारा कूड़ा कचरा गलियों में डाल देते थे। यह कचरा आने- जाने वाले राहगीरों के पैरों के नीचे आता था। कूड़ा डालने के कारण गलियों का समतल पृष्ठ ऊँचा उठ जाता था जिसके कारण वहां के निवासियों को अपने घरों की दहलीज को भी उठाना पड़ता था।

(4) कमरों में खिड़कियों का अभाव - कमरों में खिड़कियां नहीं होती थी । प्रकाश आंगन में खुलने वाले दरवाजे से होकर कमरे में आता था। इससे घरों के परिवारों की गोपनीयता बनी रहती थी ।

(5) अंधविश्वास का प्रचलन - घरों में कई तरह के अंधविश्वास प्रचलित थे। ज़ो पट्टिकाओं पर लिखे मिले हैं। जैसे- घर की दहलीज उठी हुई है तो वह घर के अंदर धन दौलत लाती है ।

(6) शवों को दफ़नाने के लिए कब्रिस्तान - नगर वासियों के लिए कब्रिस्तान था जिसमें शासकों तथा जनसाधारण की समाधियां पाई गई हैं परंतु कुछ लोग घरों के फर्श के नीचे दफनाए जाते थे ।

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