Thursday, 13 January 2022

भारतीय संसद में विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।

भारतीय संसद में विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।

भारतीय संसद में विपक्ष की भूमिका

भारत में संसदीय प्रणाली को अपनाया गया है। इस प्रणाली में संसद में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारतीय संसद में भी विपक्ष की सक्रिय व महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई पड़ती है। प्रश्नकाल, शून्य काल, संसदीय समितियों, इत्यादि साधनों के माध्यम से विपक्ष सरकार को जवाबदेह बनाता है। विपक्ष द्वारा कई बार त्याग स्थगन इत्यादि का भी प्रयोग किया जाता है। परन्तु भारत के संसदीय इतिहास में विपक्ष एक प्रभावपूर्ण व सकारात्मक भूमिका निभाने में अब तक अधिक सफल दिखाई नहीं पड़ता है। नेहरु से लेकर इन्दिरा शासन तक तो विपक्ष प्रभावशून्य था। तत्पश्चात् इसके प्रभाव व संख्या में वृद्धि हुई परन्तु एक नकारात्मक प्रवृत्ति भी उभर आयी। इसके तहत भारतीय संसद में विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध करने पर ही सारा ध्यान केन्द्रित कर रहा है। इससे सरकार की वास्तविक आलोचना एवं सराहना व सहयोग विपक्ष द्वारा नहीं किया जाता है। अतः वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय संसद में विपक्ष की भूमिका केवल विरोध व असहयोग करने वाले वर्ग के रूप में बताई जा सकती है।

सम्बंधित प्रश्न :

  1. संसद में बजट पारित होने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  2. संसदीय समितियों से क्या तात्पर्य है ? कुछ प्रमुख संसदीय समितियों का वर्णन कीजिए।
  3. संसद में कानून निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
  4. संसदीय व्यवस्था की विशेषताएँ बताइये।
  5. संसद के सदस्यों के विशेषाधिकारों का मूल्यांकन कीजिए।
  6. भारतीय संसद किस प्रकार मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?
  7. संसद की अवमानना से आप क्या समझते हैं?
  8. क्या भारतीय संसद संप्रभु है समझाइए
  9. संसद और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की व्याख्या करें।
  10. संसद की समिति पद्धति पर टिप्पणी कीजिए।

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