Monday, 10 January 2022

संसद की समिति पद्धति पर टिप्पणी कीजिए।

संसद की समिति पद्धति पर टिप्पणी कीजिए।

संसद की समिति पद्धति

संसद के पास प्रत्येक मामले पर विचार करने के लिए समय, दक्षता व परीक्षण करने का अभाव होता है। अतः संसद अपने कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न समितियों का सहयोग लेती है। समितियाँ सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा नियुक्त की जाती हैं।

भारत में संसदीय समितियाँ दो प्रकार की होती हैं .

  1. स्थायी समिति
  2. तदर्थ समिति

1. स्थायी समिति - स्थायी समितियाँ प्रत्येक वर्ष या समय-समय पर परिस्थिति के अनुसार सदन द्वारा निर्मित की जाती हैं अथवा लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा अध्यक्ष द्वारा नामांकित की जाती है। ऐसी समितियों के उदाहरण हैं - लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति, सरकारी उपक्रम समिति इत्यादि।

2. तदर्थ समिति - तदर्थ समितियाँ किसी विशेष मामले पर विचार करने तथा रिपोर्ट देने के लिए सदन अथवा लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति द्वारा नियुक्त की जाती है तथा कार्य समाप्ति के पश्चात समाप्त हो जाती हैं। ऐसी समितियों के उदाहरण हैं - प्रवर समिति, संयुक्त प्रवर समिति इत्यादि।

सम्बंधित प्रश्न :

  1. संसद और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की व्याख्या करें।
  2. संसद की अवमानना से आप क्या समझते हैं?
  3. क्या भारतीय संसद संप्रभु है समझाइए
  4. लोकसभा अध्यक्ष के कार्य एवं अधिकार संक्षेप में बतायें।
  5. राज्यसभा के मुख्य पदाधिकारी कौन कौन होते हैं?
  6. राज्य सभा के गैर संघीय तत्वों पर टिप्पणी कीजिए।
  7. संघीय व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में राज्य सभा की प्रासंगिकता समझाइये।
  8. लोकसभा का गठन एवं शक्तियों एवं लोकसभा के कार्यकाल की विवेचना कीजिए।
  9. भारत के राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  10. उपराष्ट्रपति के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।
  11. राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  12. मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री की विशिष्ट स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।
  13. भारत में प्रधानमन्त्री के शक्तियों में वृद्धि के कारणों का उल्लेख कीजिए। 
  14. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच संबंध पर चर्चा करें
  15. प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालक के रूप में टिप्पणी लिखिए।

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