Wednesday, 12 January 2022

संसद के सदस्यों के विशेषाधिकारों का मूल्यांकन कीजिए।

संसद के सदस्यों के विशेषाधिकारों का मूल्यांकन कीजिए।

संसद तथा संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संविधान के अधीन एक जैसे विशेषाधिकार प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के खण्ड (1) और (2) वाक् स्वातंत्र और प्रकाशन से सम्बन्धित हैं। प्रत्येक सदन के सदस्यों के विशेषाधिकारों को दो समूहों में विभाजित किया जाना चाहिए

  1. वे विशेषाधिकार जो सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से उपभोग किये जाते हैं तथा
  2. वे विशेषाधिकार जो संसद के प्रत्येक सदन के सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से उपभोग किये जाते हैं।

सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत उपभोग किये जाने वाले विशेष अधिकार एवं उन्मुक्ति

  1. गिरफ्तारी से उन्मुक्ति - सन् 1976 के अधिनियम (104) द्वारा यथा संशोधित सिविल प्रक्रिया की संहित की धारा 135 (A) सदस्य को सदन या उसकी किसी समिति जिसका वह सदस्य है अधिवेशन के चलते रहने के पूर्व या पश्चात 40 दिन की अवधि के दौरान गिरफ्तारी से छूट देती है। यह उन्मुक्ति सिविल मामलों में गिरफ्तारी तक ही सीमित है, अपराधिक मामले में या निवारक निरोध की विधि के अधीन गिरफ्तारी में नहीं।
  2. साक्षी के रूप में हाजिरी से मुक्ति - संविधान के अधीन यह प्रावधान किया गया है कि जब सदन सत्र चल रहा हो तो सदन की अनुमति के बिना किसी सदन के सदस्य को किसी न्यायिक मामले में साक्ष्य देने के लिए समन नहीं किया जा सकता।
  3. वाक-स्वातंत्र - ब्रिटेन के अनुसार भारत में भी प्रत्येक सदन तथा उसकी समितियों के अंदर वाक् स्वतंत्रता होगी अर्थात यहाँ कही गई किसी बात के लिए सम्बन्धित सदस्य पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती। इसका अर्थ यह नहीं कि सदस्यगण सदन की प्रतिष्ठा की परवाह किये बिना इच्छानुसार कुछ भी कह सकने के लिए निर्बाध रूप से स्वतंत्र है। यह वाक् स्वतंत्रता सदन द्वारा अपनी आन्तरिक प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति के प्रयोग में बनाये गये नियमों के अधीन है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद (121) में यह भी प्रावधान है कि उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश के अपने कर्त्तव्य के निर्वहन में किये गये आचरण के विषय में संसद में कोई भी मर्यादा कार्यवाही की प्रार्थना करने वाले समावेदन की राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करने के प्रस्ताव पर ही होगी, अन्यथा नहीं।

सदन के सदस्यों के सामूहिक विशेषाधिकार

सदन को तथा सदस्यों को सामूहिक रूप से भी कुछ विशेषाधिकारों का प्रावधान संविधान में किया गया है -

  1. चर्चा व कार्यवाहियाँ प्रकाशित करने तथा उच्च व्यक्तियों को प्रकाशित करने से रोकने का विशेषाधिकार।
  2. अन्य व्यक्तियों को अपवर्जित करने का विशेषाधिकार।
  3. सहन के आन्तरिक मामलों को विनियमित करने का और सदन के अन्दर उत्पन्न होने वाले मामलों को निपटाने का अधिकार।
  4. संसदीय सदाचार को प्रकाशित करने का अधिकार।
  5. सदन के सदस्यों को और बाहरी शक्तियों को सदन के विशेषाधिकारों को भंग करने के लिए दण्डित करने का अधिकार ।

सम्बंधित प्रश्न :

  1. संसद में बजट पारित होने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  2. संसदीय समितियों से क्या तात्पर्य है ? कुछ प्रमुख संसदीय समितियों का वर्णन कीजिए।
  3. संसद में कानून निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
  4. संसदीय व्यवस्था की विशेषताएँ बताइये।
  5. भारतीय संसद में विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।
  6. भारतीय संसद किस प्रकार मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?
  7. संसद की अवमानना से आप क्या समझते हैं?
  8. क्या भारतीय संसद संप्रभु है समझाइए
  9. संसद और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की व्याख्या करें।
  10. संसद की समिति पद्धति पर टिप्पणी कीजिए।


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