Thursday, 15 September 2022

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ - बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना, अनाड़ी आदमी को सफलता प्राप्त होना, अयोग्य के हाथ अनायास अच्छी वस्तु का लगना। 

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग: पढाई में कमजोर रहने वाले रजनीश की बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी लग गई, यह तो वही बात हुई अंधे के हाथ बटेर लगना। 

वाक्य प्रयोग: संदीप इस पद के योग्य ही नहीं था किन्तु साक्षात्कार में छात्रों की संख्या का अभाव था। अतः उसे नौकरी मिल ही गयी, समझो अंधे के हाथ बटेर लग गयी। 

वाक्य प्रयोग: मोहन कई महीनों से अपने घर का किराया चुका नहीं पा रहा था किन्तु आज घर लौटते समय उसे पैसों से भरा पर्स मिल गया मानो अंधे के हाथ बटेर लग गई। 

वाक्य प्रयोग: अखबार में तो मंत्री जी के बारे में बड़ी-बड़ी बातें छापी गयी है और आप कहते हैं अंधे के हाथ बटेर लग गयी। 

वाक्य प्रयोग: पंडित जी की लॉटरी क्या लगी माने अंधे के हाथ बटेर लग गयी। 

वाक्य प्रयोग: इस अनपढ़ रघु की इतनी पढ़ी-लिखी लड़की से शादी आखिर हो कैसे गयी ? ये तो अंधे के हाथ बटेर लग गयी। 

यहाँ हमने अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग समझाया है। अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ होता है- बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना, अनाड़ी आदमी को सफलता प्राप्त होना, अयोग्य के हाथ अनायास अच्छी वस्तु का लगना। जब किसी व्यक्ति को संयोग से या बिना किसी परिश्रम के कोई चीज मिल जाती है तो कहा जाता है कि अंधे के हाथ बटेर लग गयी। परन्तु ऐसे व्यक्ति को कुछ भी मिल जाये वह उसे संभलकर नहीं रख पता क्योंकि वह अयोग्य होता है। 

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