अंधों में काना राजा मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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अंधों में काना राजा मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

अंधों में काना राजा मुहावरे का अर्थ - मूर्खों में थोड़ा समझदार होना, बेवकूफों में थोड़ा होशियार, अज्ञानियों के बीच अल्पज्ञानी, गुणहीनों में कम गुणी, मूखों के बीच थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला।

अंधों में काना राजा मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग: मूर्खों या अनपढ़ों में साधारण या कम पढ़े-लिखे व्यक्ति भी आदर पाते हैं। ऐसे ही लोगों को अंधों में काना राजा कहा जाता है। 

वाक्य प्रयोग: गांव में जब लोगों ने देखा कि कोई भी अच्छा उम्मीदवार खड़ा नहीं है तो उन्होंने पांचवी पास श्यामलाल को ही गांव का मुखिया बना दिया जैसे अंधों में काना राजा। 

वाक्य प्रयोग: शहर का कम्पाउंडर गांव में अस्पताल खोलकर बैठ गया और गांव के भोले-भाले लोगों के बीच अंधों में काना राजा बन बैठा। 

वाक्य प्रयोग: गांव में मोहन ने थोड़ी संस्कृत क्या सीख ली वह तो खुद को पंडित समझने लगा, ऐसे ही लोगों को अंधों में काना राजा कहते हैं। 

वाक्य प्रयोग: दूर-दराज के क्षेत्रों में नीम-हकीम भी खुद को वैद्य बताकर अंधों में काना राजा बने बैठे हैं। 

यहाँ हमने अंधों में काना राजा मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग समझाया है। अंधों में काना राजा मुहावरे का अर्थ होता है - मूर्खों में थोड़ा समझदार होना, बेवकूफों में थोड़ा होशियार, अज्ञानियों के बीच अल्पज्ञानी, गुणहीनों में कम गुणी, मूखों के बीच थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला। ऐसा व्यक्ति जो काम ज्ञान होने पर भी अनपढ़ों के बीच ज्ञानी बनने का दिखावा करता है उनके लिए इस कहावत का प्रयोग किया जाता है। 

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