आगे नाथ न पीछे पगहा मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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आगे नाथ न पीछे पगहा मुहावरे का अर्थ - बेसहारा, जिसके आगे-पीछे कोई न हो, जिसका कोई न हो, निरा अकेला होना, किसी तरह की जिम्मेदारी न होना। 

Aage Nath na Piche Pagha Muhavare ka arth - Besahara, Jiske aage-piche koi na ho, Jiska koi na ho, Nira akela hona, Kisi tarah ki jimmedari na hona.

आगे नाथ न पीछे पगहा मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग: संजू को इससे क्या लेना-देना, वह तो सदा निश्चिन्त ही रहता है, क्योंकि उसके आगे नाथ न पीछे पगहा। 

वाक्य प्रयोग: एक ही बेटा था, वह भी चल बसा। अब क्या है न आगे नाथ न पीछे पगहा। 

वाक्य प्रयोग: मुन्ना के माँ-बाप दोनों बीमारी में मर चुके है अब तो उसके आगे नाथ न पीछे पगहा। 

वाक्य प्रयोग: तलाक के बाद रमेश को उसके पत्नी-बच्चे भी छोड़ देंगे, फिर तो उसकी स्थिति आगे नाथ न पीछे पगहा वाली हो जाएगी। 

यहाँ हमने "आगे नाथ न पीछे पगहा मुहावरे का अर्थ" और उसका वाक्य प्रयोग समझाया है। आगे नाथ न पीछे पगहा मुहावरे का अर्थ होता है - बेसहारा, जिसके आगे-पीछे कोई न हो, जिसका कोई न हो, निरा अकेला होना, किसी तरह की जिम्मेदारी न होना। यदि कोई एकदम अकेला रह जाये या किसी के आगे पीछे कोई न हो तो ऐसे व्यक्ति के लिए कहा जाता है कि उसके न आगे नाथ न पीछे पगहा है। कभी-कभी इस मुहावरे का उनके लिए भी किया जाता है जिनके ऊपर किसी की जिम्मेदारी नहीं होती। 

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