Saturday, 5 February 2022

व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद में अंतर बताइए।

व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद में अंतर बताइए।

20वीं सदी के पूर्वाद्ध में राजनीति विज्ञान व राजनीति सिद्धान्त के क्षेत्र में व्यवहारवादी क्रान्ति का सूत्रपात हुआ परन्तु शीघ्र ही सदी के मध्यवर्ती चरण में यह उत्तर व्यवहारवाद में परिवर्तित हो गयी। व्यवहारवादी व उत्तरव्यवहारवादी दोनों ही धारणाओं का प्रमुख प्रणेता 'डेविड ईस्टन' की माना जाता है। इन दोनों धारणाओं में निम्नलिखित प्रमुख अंतर बताए जा सकते हैं - 

व्यवहारवाद एवं उत्तर व्यवहारवाद में अंतर


व्यवहारवादउत्तर-व्यवहारवाद
1व्यवहारवाद अति-तथ्यवाद पर आधारित  है और इसके अन्तर्गत राजनीतिक अध्ययनों में मूल्यों से पूर्ण प्रथकता व  केवल तथ्यपरकता पर बल दिया गया।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत तथ्यों के साथ-साथ मूल्यों के महत्व को भी समझा गया और 'तथ्य-मूल्य सापेक्षवाद' को अपनाया गया।
2व्यवहारवाद राजनीति सिद्धान्त की एक कोरा व विशुद्ध विज्ञान बनाने हेतु तत्पर है तथा इस हेतु दर्शन व काल्पनाकित  की पूर्ण उपेक्षा करता है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत मध्यम मार्ग का अनुसरण करते हुए राजनीति-शास्त्रीय अध्ययनों में वैज्ञानिकता को भी पर्याप्त महत्व दिया जाता है। 
3व्यवहारवादी राजनीति-शास्त्रीय अध्ययनों को केवल व अनुभव परकता पर आधारित रखना चाहते हैं। जबकि उत्तर-व्यवहार में इस प्रवृत्ति में शिथिलता दिखाई पड़ती है। तथा वास्तविकता, अनुभावपरकता के साथ ही मूल्यों व दर्शना के समावेश पर भी बल दिया जाता है। 
4व्यवहारवाद की धारणा संकुचित प्रतीत प्रतीत होती है क्योंकि यह राजनीतिक अध्ययनों को कुछ पूर्व-निर्धारित सीमाओं में ही बाँधकर रखना चाहती है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद की धारणा इस संदर्भ में व्यापक होती है क्योंकि उत्तर-व्यवहारवादी ऐसी किन्हीं सीमाओं में बंधे हुए अध्ययन पर बल नहीं देते।
5व्यवहारवादी अध्ययन अत्यधिक खर्चीले व अप्रासंगिक सिद्ध हुये तथा ये अपने  उद्देश्य की पूर्ति में पूर्णतया असफल रहे।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत व्यवहारवाद की असफलता से सबक लेते हुए राजनीतिक अध्ययनों को कम खर्चीला, समसामयिक व प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। 
6राजनीति विज्ञान में व्यवहारवाद की धारणा वर्तमान में अस्त हो चुकी है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद की धारणा का राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रसार हो रहा रहे।

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