व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद में अंतर बताइए।

Admin
0

व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद में अंतर बताइए।

20वीं सदी के पूर्वाद्ध में राजनीति विज्ञान व राजनीति सिद्धान्त के क्षेत्र में व्यवहारवादी क्रान्ति का सूत्रपात हुआ परन्तु शीघ्र ही सदी के मध्यवर्ती चरण में यह उत्तर व्यवहारवाद में परिवर्तित हो गयी। व्यवहारवादी व उत्तरव्यवहारवादी दोनों ही धारणाओं का प्रमुख प्रणेता 'डेविड ईस्टन' की माना जाता है। इन दोनों धारणाओं में निम्नलिखित प्रमुख अंतर बताए जा सकते हैं - 

व्यवहारवाद एवं उत्तर व्यवहारवाद में अंतर


व्यवहारवादउत्तर-व्यवहारवाद
1व्यवहारवाद अति-तथ्यवाद पर आधारित  है और इसके अन्तर्गत राजनीतिक अध्ययनों में मूल्यों से पूर्ण प्रथकता व  केवल तथ्यपरकता पर बल दिया गया।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत तथ्यों के साथ-साथ मूल्यों के महत्व को भी समझा गया और 'तथ्य-मूल्य सापेक्षवाद' को अपनाया गया।
2व्यवहारवाद राजनीति सिद्धान्त की एक कोरा व विशुद्ध विज्ञान बनाने हेतु तत्पर है तथा इस हेतु दर्शन व काल्पनाकित  की पूर्ण उपेक्षा करता है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत मध्यम मार्ग का अनुसरण करते हुए राजनीति-शास्त्रीय अध्ययनों में वैज्ञानिकता को भी पर्याप्त महत्व दिया जाता है। 
3व्यवहारवादी राजनीति-शास्त्रीय अध्ययनों को केवल व अनुभव परकता पर आधारित रखना चाहते हैं। जबकि उत्तर-व्यवहार में इस प्रवृत्ति में शिथिलता दिखाई पड़ती है। तथा वास्तविकता, अनुभावपरकता के साथ ही मूल्यों व दर्शना के समावेश पर भी बल दिया जाता है। 
4व्यवहारवाद की धारणा संकुचित प्रतीत प्रतीत होती है क्योंकि यह राजनीतिक अध्ययनों को कुछ पूर्व-निर्धारित सीमाओं में ही बाँधकर रखना चाहती है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद की धारणा इस संदर्भ में व्यापक होती है क्योंकि उत्तर-व्यवहारवादी ऐसी किन्हीं सीमाओं में बंधे हुए अध्ययन पर बल नहीं देते।
5व्यवहारवादी अध्ययन अत्यधिक खर्चीले व अप्रासंगिक सिद्ध हुये तथा ये अपने  उद्देश्य की पूर्ति में पूर्णतया असफल रहे।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद के अन्तर्गत व्यवहारवाद की असफलता से सबक लेते हुए राजनीतिक अध्ययनों को कम खर्चीला, समसामयिक व प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। 
6राजनीति विज्ञान में व्यवहारवाद की धारणा वर्तमान में अस्त हो चुकी है।जबकि उत्तर-व्यवहारवाद की धारणा का राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रसार हो रहा रहे।

सम्बंधित लेख : 

  1. व्यवहारवाद के अर्थ, विशेषता एवं उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।
  2. व्यवहारवाद की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  3. उत्तर व्यावहारवादी क्रान्ति के उदय के कारण बताइए।
  4. व्यवहारवाद की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. व्यवहारवाद के उदय का कारण लिखिए।
  6. व्यवहारवाद के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
  7. व्यवहारवाद की सीमाएं बताइये। 
  8. राजनीति शास्त्र में वैज्ञानिक पद्धति के प्रयोग की सीमाएं बताइए।
  9. मूल्य निरपेक्षता के परिणाम बताइये।
  10. मूल्य निरपेक्षता का अर्थ बताइए।

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !