Sunday, 6 February 2022

व्यवहारवाद के उदय का कारण लिखिए।

व्यवहारवाद के उदय का कारण लिखिए।

राजनीतिक चिन्तन के इतिहास में व्यवहारवादी मान्यताओं के कुछ सूत्र प्लटो और अरस्तू के विचारों से मिलते हैं, परन्तु सैद्धांतिक दृष्टिकोण से व्यवहारवाद वर्तमान शाताब्दी की उत्पत्ति है। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् ‘सरकार और राजनीति' के अध्ययन में व्यवहारवादी अध्ययन पद्वति को अधिक महत्त्व दिया गया है। यह अध्ययन प्रणाली वर्तमान शताब्दी के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुई है। इसे विकास के मार्ग पर ले जाने का श्रेय अमेरिका के राजनीतिज्ञ को है। आधुनिक रूप में व्यवहारवाद के उदय के कुछ कारण निहित रहे हैं। जो निम्नवत हैं -

व्यवहारवाद के उदय का कारण

  1. सन् 1930 ई० के दशक में कुछ यूरोपीय छात्रों ने अमेरिका में समाजशास्त्रीय विधियों द्वारा राजनीतिक समस्याओं का अध्ययन प्रारम्भ किया। अतः व्यवहारवाद की ओर विद्वानों का ध्यान गया।

  2. अनेक राजनीतिक विद्वानों को परम्परागत राजनीतिशास्त्र की अध्ययन पद्धतियों के परिणामों से बड़ी निराशा हई। अतः उन्होंने जीवन की वास्तविकताओं को स्पष्ट करने के लिए व्यवहारवाद की पद्धति को नये रूप में समझने का प्रयत्न किया।

  3. अमेरिका के कुछ विश्वविद्यालयों में राजनीतिशास्त्र के विद्वानों ने राजनीतिक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक तथा मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर विशेष बल दिया।

  4. आधुनिक युग में अन्य सामाजिक विज्ञानों में अध्ययन के नवीन ढंग तथा उपकरणों के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। तो राजनीतिशास्त्र को इससे दूर रखना उचित नही था। सन् 1925 ई० में में चार्ल्स मेरियम ने 'अमेरिकन पॉलिटिकल साइन्स एसोसिएशन' के अधिवेशन में कहा था कि राजनीतिक व्यवहार राजनीतिक अन्वेषण का आवश्यक विषय है। अतः इस ओर तुरन्त ध्यान दिया जाना चाहिए। यह व्यवहारवाद के विकास की एक नींव थी।

  5. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् राजनीतिशास्त्र के क्षेत्र में विस्तृत रूप में यह विचार बल पकड़ता गया कि राजनीतिशास्त्र में नवीन अध्ययन पद्वतियों को स्थान देना होगा।

  6. द्वितीय विश्व यद्ध के उपरान्त उत्पन्न राजनीतिक घटनाक्रमों ने व्यवहारवाद को गति प्रदान थी। युद्धकालीन घटनाओं ने राजनीतिशास्त्रियों के मन में यह बात बैठा दी कि राजनीतिक जीवन की कठिनाइयों को पूर्ण रूप से समझने के लिए मानव व्यवहार के तहत आने वाली बातों का अध्ययन करना चाहिए।

राजनीतिशास्त्र में व्यवहारवादी दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का श्रेय आर्थर एफ० बैटले तथा ग्राम वैलास को दिया जाता है। शिकागो स्कूल में व्यवहारवाद की ओर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। इसके पश्चात् अनेक निजी संस्थाओं ने सामाजिक विज्ञानों के विकास पर पर्याप्त धन व्यय करके व्यवहारवादी दृष्टिकोण को लोकप्रियता प्रदान की। गोसनेल, लासवेल, हेरिंग, पेडलटन आदि ने व्यवहारवादी पद्वति के साहित्य में उल्लेखनीय वृद्धि की।

डेविड ईस्टन ने इस क्षेत्र में बहुत महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। वह उत्तर-व्यवहारवादी विचारधारा का भी उद्घोषक बना। व्यवहारवादियों में अभी कुछ वर्षों से एक नए गुट का जन्म हुआ है। जिसका कहना है कि व्यवहारवाद के अन्तर्गत शोध परिणाम प्रायः विलम्ब से मिलते हैं और जब तक मिलते हैं तब तक उनका महत्त्व समाप्त हो चुका होता है, इसलिए व्यवहारवाद के उद्भव की आवश्यकता महसूस हुई। 

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