Sunday, 6 February 2022

उत्तर व्यावहारवादी क्रान्ति के उदय के कारण बताइए।

उत्तर व्यावहारवादी क्रान्ति के उदय के कारण बताइए।

'उत्तर व्यवहारवाद' का उदय व्यवहारवादी, रूढ़िवादिता, जड़ता तथा दिशा-हीनता के कारण हआ। डेविड ईस्टन ने सन 1969 ई० में 'अमेरिकन पॉलिटिकल साइन्स एसोसियेशन' के अपने भाषण में कहा था. "व्यवहारवादी क्रान्ति से हम अपने विश्लेषण को सार्थकता नहीं दे सकते हैं, अतः हमें उत्तर व्यवहारवादी बनना होगा।"

उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति के उदय के कारण 

  1. उत्तर व्यवहारवादी. व्यवहारवादी, शोध के प्रति असन्तोष परिणाम है। व्यवहारवादी शोध से तथ्य-मूल्य विच्छिन्नता पर बल दिया गया है। व्यवहारवाद में मूल्यों के अध्ययन को वैज्ञानिकता की दुर्बलता माना गया है तथा तथ्य प्रधान अध्ययन को विज्ञान का पर्याय माना गया है तथ्य प्रधान अध्ययन वस्तुस्थिति का 'यथार्थ' अध्ययन है, मूल्य प्रधान अध्ययन की तरह आदर्श स्थिति का नहीं, किन्तु उत्तर-व्यवहारवादियों का मानना है कि तथ्य तथा मूल्य दोनों ही व्यक्ति के सन्दर्भ में प्रासंगिक हैं। अतः इन दोनों में भेद करना अनुचित है।

  2. व्यवहारवादी क्रान्ति के साथ ही समाज, राजव्यवस्थाएँ तथा विश्व अनेक संकटों तथा समस्याओं से ग्रसित हो गए थे। आण्विक युद्ध की आशंका अमेरिका में गृह संकट, तानाशाही शासन की बढती हुई सम्भावनाएँ, वियत नाम में अघोषित युद्ध, जनसंख्या विस्फोट आदि। परन्तु 'राजनीति को विशुद्ध विज्ञान' बनाने की अभिलाषा म व्यवहारवादियों ने समाज तथा विश्व मानवता के प्रति अपने दायित्वों की उपेक्षा की। उत्तर व्यवहारवारदियों को जो प्रश्न चिन्तित कर रहा था, वह यह था कि उच्च तकनीकी पर्याप्तता तथा परिष्कृत शोध उपकरणों के प्रयोग की उपयोगिता क्या थी, यदि राज वैज्ञानिक इस स्थिति में भी नहीं थे कि वे समकालीन सामाजिक तथा राजनीतिक संकटों को समझ सके तथा उनके समाधान की दिशा में योगदान कर सके ?

  3. ऐसा माना गया है कि सामाजिक विज्ञानों की अध्ययन-पद्धतियों को प्राकृतिक विज्ञान के समान लागू करना घातक है, क्योंकि समाज एवं व्यक्ति की प्रकृति परिवर्तनशील है, अतः उनका अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों के समान सम्भव नहीं है, अतः व्यवहारवाद द्वारा किया गया यह विभाजन कृत्रिम है कि व्यक्ति का औपचारिक व्यवहार एवं उनकी अचेतन की आकांक्षाएँ अविच्छिन्न रूप से जुड़ी हैं। 

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