संरचनात्मक प्रकार्यवाद दृष्टिकोण का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

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संरचनात्मक प्रकार्यवाद दृष्टिकोण का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

संरचनात्मक प्रकार्यवाद की आलोचना

  1. रूढ़िवादी और सामाजिक परिवर्तन के विरुद्ध पूर्वाग्रही- इस दृष्टिकोण में व्यवस्था के स्थायित्व और उसके बने रहने पर इतना बल दिया गया है कि यह तथ्य इस दष्टिकोण के प्रमुख केन्द्र से लगते हैं। इससे अप्रकट रूप से इसकी रूढ़िवादिता स्पष्ट झलकती है. क्योंकि इस उपागम में स्थायित्व और व्यवस्था अनुरक्षण की परिस्थितियों पर अत्यधिक ध्यान दिया गया है। अतः यह आलोचना सैद्धान्तिक है और व्यावहारिक दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं लगती।
  2. प्रकार्यों की निष्पादनता को जाँचने की कठिनाई - आमण्ड तथा पावेल ने जिन कार्यों का विवेचन किया है वे कार्य राजनीतिक व्यवस्था के द्वारा पूरी तरह निष्पादित होते हैं या नहीं, इसका निश्चय करने का कोई आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है।
  3. संरचनाओं की अन्तःनिर्भरता की प्रकृति का सुनिश्चय नहीं करना - संरचनात्मक प्रकार्यवादी यह तो स्पष्ट करते हैं कि एक संरचना में परिवर्तन से कोई प्रकार्य किस प्रकार निष्पादित होता है, इसमें भी परिवर्तन आ जाता है तथा इसका सम्पूर्ण व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ता है, किन्तु संरचनाओं की अन्तःनिर्भरता की प्रकृति का सुनिश्चय नहीं करता है।
  4. व्यवस्था के अनुरक्षण का कोई वस्तुनिष्ठ मानदण्ड नहीं देता - व्यवस्था के अनुरक्षण का कोई वस्तुनिष्ठ मानदण्ड दे सकना वैसे ही कठिन है; किन्तु संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक विश्लेषण ने इस दिशा में विशेष ध्यान नहीं देकर व्यवस्थाओं के बारे में यह कहना कठिन बना दिया कि स्थायित्व वाली व्यवस्था, जो पूरी तरह अनुरक्षित लगती है, वास्तव में फल-फूल रही है या पतन के खन्दक में गिरती जा रही है।
  5. राजनीतिक व्यवस्था की प्रकार्यात्मक अपेक्षाओं को स्पष्ट करने की कठिनाई - यह उपागम प्रमुखतः राजनीतिक व्यवस्था की प्रकार्यात्मक अपेक्षाओं के आधार-स्तम्भ पर आधारित है। इसमें यह माना गया है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में अपेक्षित प्रकार्यों की विविधता होती है। इससे प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था के अपेक्षित प्रकार्यों का एक अलग सेट हो जाता है जो अन्ततः हमे इस निष्कर्ष पर पहुँचने को मजबूर करता है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था के अध्ययन में यह अपेक्षित प्रकार्यों का सेट विचित्र या अलग होगा। 

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