Thursday, 6 January 2022

भारत में प्रधानमन्त्री के शक्तियों में वृद्धि के कारणों का उल्लेख कीजिए।

भारत में प्रधानमन्त्री के शक्तियों में वृद्धि के कारणों का उल्लेख कीजिए।

भारतीय मन्त्रिमण्डलीय व्यवस्था के अनुसार प्रधानमन्त्री मन्त्रिपरिषद का प्रमुख होता है उसी के नेतत्व में मन्त्रिमण्डल कार्य करती है। मन्त्रिमण्डल के सभी सदस्य प्रधानमन्त्री की कृपा के पात्र होते हैं। वहीं मन्त्रियों के विभागों का बटवारा करता है। ब्रुकवी ने अपनी पुस्तक The Power of the Prime Minister' मे लिखा है कि "व्यवहार में संसद संप्रभु नहीं है। प्रधानमन्त्री ही यथार्थ सम्प्रभु रहा है और आज भी है।

भारत के प्रधानमन्त्री की शक्तियों में वृद्धि के निम्न कारण हैं -

  1. सर्वप्रथम कारण यह है कि भारतीय संसदीय शासन प्रणाली का ढाँचा ऐसा है, जिसमें वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मन्त्रिमण्डल में निश्चित होती है तथा मन्त्रिमण्डल का प्रमुख होने के कारण प्रधानमन्त्री ही इन शक्तियों का उपयोग एवं प्रयोग रहता है।।
  2. भारत में अधिकांश निर्णयों का स्रोत प्रधानमन्त्री सचिवालय ही रहा है और इसका प्रभावी प्रचलन श्रीमती इन्दिरा गाँधी के प्रधानमन्त्रित्व काल से अधिक रहा है।

सम्बंधित लेख :

  1. प्रधानमन्त्री की शक्ति, स्थिति एवं प्रमुख कार्य तथा उसकी भूमिका की समीक्षा कीजिए।
  2. अनुच्छेद 352 का वर्णन कीजिये तथा इसके प्रावधानों का उल्लेख कीजिये।
  3. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच संबंध पर चर्चा करें
  4. प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालक के रूप में टिप्पणी लिखिए।
  5. मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री की विशिष्ट स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।
  6. भारत में प्रधानमन्त्री की नियुक्ति किस प्रकार होती है? प्रधानमन्त्री के कार्य और शक्तियाँ का वर्णन कीजिये।


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