Wednesday, 29 December 2021

इंग्लैंड की महारानी की घोषणा के प्रमुख बिंदुओं का वर्णन कीजिए

इंग्लैंड की महारानी की घोषणा के प्रमुख बिंदुओं का वर्णन कीजिए

महारानी विक्टोरिया की घोषणा पत्र एवं 1858 के अधिनियम पर प्रकाश डालिए - इस लेख में महारानी विक्टोरिया के घोषणा-पत्र के प्रमुख बिंदुओं का वर्णन करते हुए भारत सरकार अधिनियम, 1858 के सभी प्रावधान बताये जा रहे हैं।

महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र

लार्ड कैनिंग ने ब्रिटेन की साम्राज्ञी द्वारा भारत सरकार के उत्तरदायित्व धारण करने की घोषणा करने के लिये इलाहाबाद में एक दरबार किया। यह घोषणा-पत्र 1 नवम्बर, सन 1858 ई. का रानी के नाम पर निकाला गया तथा कैनिंग ने भारत के लोगों तथा राजाओं के नाम महारानी का घोषणा-पत्र पढ़ा। रानी ने इस घोषणा-पत्र को भारतीय जनता का महान अधिकार पत्र कहा जाता है। इस महारानी की घोषणा-पत्र में के प्रमुख बिंदु (आश्वासन निम्नलिखित थे

घोषणा पत्र के प्रमुख बिंदु

  1. इस घोषणा-पत्र ने भारतीय राजाओं के साथ ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा किये गये समझौतों व संधियों का सम्पुष्ट किया। इस घोषणा में स्पष्ट रूप से कहा गया कि, "हम भारत के देशी नरेशों के प्रति घोषणा करते हैं कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ उनके जो समझौते व संधियाँ हई हैं उनको हम स्वीकार करते हैं तथा उनका विश्वास विधिवत् पूर्ण रूप से उसी प्रकार पालन किया जायेगा जिस प्रकार कम्पनी उनका पालन करती थी देशी राजाओं के अधिकारों, प्रतिष्ठा व सम्मान का आदर करने का भी वचन दिया गया।
  2. भारत की प्राचीन धार्मिक क्रियाओं, रस्मों व प्रथाओं के प्रति उचित ध्यान देने का भी वायदा किया गया। घोषणा में कहा गया कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं तथा विश्वासों के कारण पक्षपात उपेक्षा, घृणा व अयोग्यता की दृष्टि से नहीं देखा जायेगा और कानून की ओर से सभी को समान तथा पक्षपातहीन सुरक्षा प्राप्त होगी। जनसाधारण के धार्मिक विश्वासों तथा पूजा आदि में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करने के सम्बन्ध में प्रशासन द्वारा सम्बन्धित आदेश अधिकारियों को दिये गये इस घोषणा में यह इच्छा भी व्यक्त की गई कि बिना किसी जाति अथवा वर्गगत भेदभाव के समस्त प्रजाजनों को बिना किसी पक्षपात के सार्वजनिक सेवाओं में विभिन्न पदों पर प्रतिष्ठित किया जाये, जिन पदों के लिये उनमें शिक्षा, क्षमता, ईमानदारी और योग्यता हो। रानी ने यह भी कहा कि "हम अपने आपको अपने भारतीय प्रदेशों के निवासियों के प्रति उस कर्त्तव्य भावना से बंधा हुआ समझते हैं जिस प्रकार हम अपने अन्य प्रजाजनों से बंधे हुये हैं।'
  3. दूसरों के राज्यों में अनाधिकार हस्ताक्षेप द्वारा भारत में ब्रिटिश राज्य के विस्तार की इच्छा को अस्वीकार किया गया। घोषणा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "हम अपनी वर्तमान सीमाओं को अधिक बढ़ाने की इच्छा नहीं रखते जिस प्रकार हम अपने प्रदेशों पर किसी प्रकार के आक्रमण की आज्ञा नहीं देंगे और अपने अधिकारों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे और न ही किसी प्रकार की आक्रमणात्मक भावना रखेंगे।

उन समस्त भारतीयों को क्षमा तथा मुक्ति का वचन दिया गया जिनके विरूद्ध किसी ब्रिटिश प्रजाजन की हत्या में भाग लेने का आरोप नहीं था।

घोषणा के अन्त में कहा गया था कि, "जब भगवान की कृपा से आभयन्तिक शांति की स्थापना हो जायेगी तब हमारी हार्दिक इच्छा यह होगी कि शान्तिपूर्ण उद्योग को प्रोत्साहन दिया जाये, सार्वजनिक उपयोगिता के कार्यों को प्रगति प्रदान की जाये तथा प्रशासन की व्यवस्था में इस प्रकार सुधार किया जाए जिससे हमारे सब देशवासी प्रजाजनों का हित हो। उनकी समृद्धि में ही हमारी शाक्ति उनके संतोष में हमारी सुरक्षा तथा कृतज्ञता से ही हमारा सबसे बड़ा पुरस्कार है।"

सम्बंधित प्रश्न

  1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना की भूमिका से क्या आशय है ? भारतीय संविधान की प्रस्तावना उद्देश्य तथा महत्व बताइये।
  2. सन् 1942 ई. क्रिप्स मिशन की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। तथा क्रिप्स मिशन की असफलता के दो कारण बताइये।
  3. 1935 भारत सरकार अधिनियम के अन्तर्गत गर्वनरों की स्थिति व अधिकारों का परीक्षण कीजिए।
  4. भारतीय संविधान की प्रस्तावना के स्वरूप की विश्लेषणात्मक व्याख्या कीजिए।
  5. सविनय अवज्ञा आंदोलन से आप क्या समझते हैं? इसे आरम्भ करने के क्या कारण थे?
  6. भारत सरकार अधिनियम 1935 की प्रमुख विशेषताएं बताइए।
  7. क्रिप्स मिशन से आप क्या समझते हैं ? क्रिप्स मिशन को भारत भेजने का कारण बताइये।
  8. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  9. भारत सरकार अधिनियम 1935 के दोष बताते हुए आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  10. सविनय अवज्ञा आन्दोलन का प्रारम्भ कब और किस प्रकार हुआ सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कार्यक्रम पर प्रकाश डालिए।

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