Friday, 31 December 2021

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

सम्बन्धित लघु उत्तरीय

  1. भारतीय संविधान की संसदीय व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
  2. भारत को एक समाजवादी राज्य क्यों कहा जाता है ?
  3. भारत एक गणराज्य क्यों है ?
  4. संविधान के आपात उपबन्धों पर टिप्पणी कीजिए।
  5. संविधान के नीति-निदेशक तत्वों का उद्देश्य समझाइये।
  6. सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक क्यों बनाया गया ?
  7. भारत में नागरिकों को एकल नागरिकता क्यों दी गयी है ?
  8. भारतीय संविधान की विशालता पर प्रकाश डालें।
  9. संविधान कठोरता एवं लचीलेपन का समन्वय है। पुष्टि कीजिए।
  10. संविधान में नागरिकों का कितने मौलिक अधिकार दिये गये हैं ?
  11. सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्नता एवं लोकतान्त्रिक गणराज्य भारतीय संविधान की विशेषता।
  12. समाजवादी राज्य टिप्पणी लिखें।

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ

भारत में संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था। संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने अपना कार्य समाप्त किया था। यह संविधान भारत में 26 जनवरी, 1950 को लाग किया गया। भारत के संविधान के प्रमुख विशेषतायें निम्नलिखित हैं -

  1. सर्वाधिक विशाल एवं लिखित संविधान - आइवर जेनिग्स का यह कहना बिल्कुल सही है कि, "भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा एवं विस्तृत संविधान है" मूल भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद 22 भाग तथा 8 अनुसूचियाँ थीं, किन्तु वर्तमान समय के संविधान में 444 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ हैं, जोकि 26 भागों में वर्णित हैं। विश्व का कोई भी अन्य संविधान भारतीय संविधान की भांति विशाल नहीं है।
  2. सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न राज्य - प्रभुत्व संपन्न राज्य उसे कहते हैं जो बाह्य नियंत्रण से सर्वथा मुक्त हो और अपनी आन्तरिक तथा विदेशी नीतियों को स्वयं निर्धारित करता हो। आज भारत 'राष्ट्र मंडल' ग सदस्य होते हुए भी एक प्रभुत्व संपन्न राज्य है।
  3. लोकतंत्रात्मक राज्य - संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'हम भारत के लोग' से स्पष्ट है 1- भारत एक लोकतांत्रिक राज्य है। भारत इसलिए भी लोकतंत्रात्मक राज्य है क्योंकि भारत की सम्प्रभुता जा ता में नि । है तथा भारत का शासन जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों के द्वारा चलाया जाता है, जोकि जनता ति उत्तरदायी होते हैं।
  4. पंथ निरपेक्ष राज्य - भारतीय संविधान में 'पंथ निरपेक्ष' शब्द 42 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। इसलिए एक पंथ निरपेक्ष राज्य है क्योंकि भारत का नेपाल, पाकिस्तान, इत्यादि देशों की भांति अन्य कोई राजधर्म नहीं है। यहाँ सभी धर्मों को पूर्ण स्वतंत्रता तथा समान आदर प्राप्त है।
  5. समाजवादी राज्य - संविधान में 'समाजवाद' शब्द 42 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। 'समाजवादी' शब्द का आशय, सरकार की ऐसी नीति से है, जिसमें 'मिश्रित व्यवस्था' का पालन करते हुए सरकार ऐसी लोक कल्याणकारी नीति बनायेगी जिसमें राष्ट्रीय धन का संकेन्द्रण मात्र कुछ हाथों में न होकर उसका समान वितरण हो तथा सभी नागरिकों को अपने विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
  6. गणराज्य - 'गणराज्य', उस राज्य को कहा जाता है, जिसका राज्याध्यक्ष अथवा प्रधान आनुवांशिक न होकर, जनता द्वारा निर्वाचित होता है। चूंकि भारत का राष्ट्रपति, जोकि राज्याध्यक्ष होता है, जनता द्वारा चुना जाता है, इसलिए भारत एक गणराज्य है। भारत का संविधान 1950 में लागू हुआ था। इसलिए कहा जा सकता है कि भारत 1950 में गणराज्य बना।
  7. संसदीय शासन प्रणाली - भारत में संसदीय शासन प्रणाली की व्यवस्था केन्द्र एवं राज्यों दोनों के लिए की गयी है। इस प्रणाली में कार्यपालिका, विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। इस व्यवस्था में कार्यपालिका के दो प्रकार होते हैं। एक, नाममात्र की कार्यपालिका दूसरी, वास्तविक कार्यपालिका। भारत में नाममात्र की कार्यपालिका राष्ट्रपति को कहा जाता है, जिसके पास शासन की औपचारिक शक्तियाँ होती हैं। जबकि वास्तविक शक्तियाँ, मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होता है।
  8. संघात्मक शासन व्यवस्था - संविधान द्वारा भारत में संघात्मक शासन प्रणाली की व्यवस्था की गयी है। संघात्मक शासन के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकारों की शक्तियाँ संविधान द्वारा ही अलग-अलग निर्धारित कर दी जाती है। भारत में संविधान के द्वारा ही केन्द्र को अधिक शक्तियाँ प्रदान कर उसे राज्यों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाया गया है।
  9. मौलिक अधिकारों का समावेश - मौलिक अधिकारों से तात्पर्य, ऐसे अधिकारों से होता है. जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं। संविधान सभा के अधिकांश सदस्यों ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय जिन अधिकारों के लिए ब्रिटिश सरकार से वर्षों संघर्ष किया था और अन्ततः उन्हें प्राप्त किया था। भारत में सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों का संरक्षक बनाया गया है।
  10. राज्य के नीति-निदेशक तत्व - संविधान के भाग - 4 में राज्य नीति के कुछ ऐसे निदेशक तत्वों का वर्णन किया गया है, जिनका पालन करना राज्य का पवित्र कर्त्तव्य है।
  11. स्वतंत्र न्यायपालिका - स्वतंत्र न्यायपालिका प्रत्येक संघात्मक राज्य की एक प्रमरत तिपोपता होती है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय को संघात्मक प्रणाली का संरक्षक बनाया गया है, ताकि वह राज्यों के मध्य उठने वाले विवादों का समाधान कर सके।

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  1. इंग्लैंड की महारानी की घोषणा के प्रमुख बिंदुओं का वर्णन कीजिए
  2. भारतीय संविधान की प्रस्तावना की भूमिका से क्या आशय है ? भारतीय संविधान की प्रस्तावना उद्देश्य तथा महत्व बताइये।
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  6. सविनय अवज्ञा आंदोलन से आप क्या समझते हैं? इसे आरम्भ करने के क्या कारण थे?
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