Thursday, 31 March 2022

भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिये।

भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिये।

    भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति

    प्राचीन काल से स्त्री को इस संसार की जन्मदात्री माना जा रहा है। भारतीय समाज के सन्दर्भ में महिलाओं की स्थिति अधिक उत्तम रही है। हिन्दू समाज में स्त्रियों को देवी के रूप में माना जाता है, इसीलिए लक्ष्मी, सरस्वती तथा दुर्गा के रूप में स्त्रियों की पूजा की जाती है। स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक होते हैं। अतः एक स्त्री के बिना पुरुष अधूरा होता है तथा पुरुष के बिना सी। हिन्दू समाज में महिलाओं को श्रीज्ञान व शक्ति का द्योतक माना जाता है। मनुष्य के जीवन में स्त्रियों का महत्वपूर्ण योगदान हैं। 

    भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिये।

    एक स्त्री के बिना पुरुष न तो अपनी गृहस्थी बसा सकता है और न ही उसे चला सकता है। मनुस्मृति में भी स्त्रियों के महत्व को निम्नलिखित श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है .

    "यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता।

    यत्र एतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः" 

    उपरोक्त श्लोक में यह बताया गया है कि "जहाँ नारी का मान-सम्मान होता है, वहाँ पर देवता वास करते हैं। जहाँ इसका मान-सम्मान नहीं होता है, वहाँ पर समस्त क्रियायें विफल हो जाती हैं" 

    प्रश्न 1. प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति क्या थी ?

    प्राचीनकाल में स्त्रियों की स्थिति : प्राचीनकाल में स्त्रियों का भारतीय समाज में महत्वपूर्ण स्थान था तथा उन्हें बहुत मान-सम्मान दिया जाता था। स्त्रियों को पुरुषों के समान माना जाता था। प्राचीनकाल के समय स्त्रियों के अधिकारों के विरुद्ध पुरुष कोई कार्य नहीं करता था। उस समय स्त्रियों को शिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता था तथा उनकी शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाती थी। लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव नहीं माना जाता था। अतः उन्हें लड़कों के समान शिक्षा की सुविधाएँ प्रदान की जाती थीं। उन्हें विभिन्न प्रकार के कला सम्बन्धी प्रशिक्षण भी प्रदान किए जाते थे। 

    प्रश्न 2. मध्यकाल में महिलाओं की स्थिति क्या थी ?

    मध्यकाल में स्त्रियों की स्थिति मध्यकाल से ही स्त्रियों की स्थिति गिरने लगी। मध्यकाल में धर्म तथा जाति को अधिक महत्व दिया जाने लगा, जिससे हिन्दू धर्म काफी सशक्त हो गया। इसके परिणामस्वरूप बाल-विवाह, दहेज प्रथा. सती प्रथा, बहु-विवाह आदि प्रथाओं को लागू कर दिया गया जिसके कारण स्त्रियों की दशा और बिगडती गई। स्त्रियों पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध लगाये जाने लगे, उनको समाज में समारोह आदि में भाग लेने से राक दिया गया। स्त्रियों के वे सभी अधिकार छीन लिए गए जो उसे प्राचीन काल में प्राप्त थे। स्त्रियों की शिक्षा को भी महत्वहीन कर दिया गया. जिससे स्त्रियाँ शिक्षा से भी वंचित हो गई। 

    प्रश्न 3. आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति क्या है। 

    आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति : महिलाओं की स्थिति मध्यकाल से ही बिगड़ती चली आ रही है और आधुनिक काल में भी महिलाओं की दशा बहुत खराब है। पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव से भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति में कुछ सुधार आया है, लेकिन वे पूर्णरूप से स्वतन्त्र नहीं हैं। स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त नहीं है, वे आज भी मध्यकाल की भाँति अपने पिता, पति, भाई या पुत्र पर आश्रित हैं। स्त्रियों को शिक्षा व प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भी स्वतन्त्रता नहीं प्राप्त है, जिसके कारण स्त्रियाँ अपनी इच्छानुसार शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती हैं और वे अशिक्षित रह जाती हैं। मध्यकाल से चली आ रही पर्दा प्रथा से भारतीय स्त्रियाँ आज भी पीड़ित है। इसके अतिरिक्त भी उन्हें कई कुरीतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे - बाल-विवाह, अनमेल विवाह, दहेज प्रथा आदि। दहेज प्रथा के कारण तो स्त्रियों की दशा अत्यन्त दयनीय एवं शोचनीय हो गई है। दहेज के लिए पति अपनी पत्नी पर अत्याचार करते हैं और अधिकांश यह देखने को मिलता है कि एक सी को दहेज के कारण उसके पति व सास-ससुर मिलकर उसे मार डालते हैं।

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