भारतीय समाज में स्त्रियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

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भारतीय समाज में स्त्रियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

भारतीय समाज में स्त्रियों की समस्याएं

भारतीय समाज में स्त्रियों की समस्याएं

  1. पारिवारिक समस्याएं
  2. वैवाहिक समस्याएं
  3. राजनैतिक समस्याएं
  4. स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं
  5. पर्दा प्रथा सम्बन्धी समस्याएं
  6. वेश्यावृत्ति सम्बन्धी समस्याएं

1. पारिवारिक समस्याएं - भारत के हिन्दू समाज में वर्षों से चली आ रही पितृसत्तात्मक संयुक्त परिवार प्रथा का प्रचलन है। संयुक्त परिवार में पुरुष प्रधान होता है। संयुक्त परिवार में पुरुष सदस्यों को अनेक अधिकार एवं सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, जबकि स्त्री सदस्यों को इस तरह के कोई अधिकार एवं सुविधाएँ प्राप्त नहीं होती हैं। संयुक्त परिवार में स्त्रियाँ एक दासी की तरह जीवन व्यतीत करती हैं।

2. वैवाहिक समस्याएं - भारतीय स्त्रियों की पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ कई वैवाहिक समस्याएँ हैं, जो निम्नलिखित हैं -

(i) बाल-विवाह का प्रचलन - प्राचीन काल से ही बाल-विवाह प्रथा का प्रचलन रहा है बल्कि प्राचीनकाल में कम आयु में लड़की का विवाह कर देना ही माता-पिता का धार्मिक कर्तव्य माना जाता था और धार्मिक ग्रन्थों में भी इसका उल्लेख है।

(ii) विधवा-पुनर्विवाह का अभाव - भारतीय समाज में हिन्दुओं में पति को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपनी पत्नी की मृत्यु के पश्चात दूसरा विवाह कर सकता है। - (iii) अन्तर्जातीय विवाह का अभाव - हिन्दू समाज में अन्तर्जातीय विवाह का अभाव पाया जाता है। हिन्दू समाज में अपनी ही जाति में विवाह करने के कारण विवाह का क्षेत्र बहुत सीमित हो गया है, जिसके कारण बेमेल विवाह तथा दहेज की समस्याओं को प्रोत्साहन मिलता है तथा इसी कारण से विधवाओं को पुनर्विवाह की अनुमति नहीं मिल पाती है। इन सब स्थितियों से स्त्रियों के जीवन में अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

(iv) अनमेल विवाह की समस्या - हिन्दू समाज में लोग लडकियों की योग्यता को ध्यान में न रखते हुए अनुपयुक्त लड़के से विवाह कर देते हैं। बाद में वर-वधू में शैक्षिक स्तर में असमानता, वैचारिकभिन्नता, व्यक्तित्व-भिन्नता के कारण उनके जीवन में अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जिनका सामना स्त्रियों को ही करना पड़ता है। अतः बेमेल विवाह सफल नहीं होते हैं तथा स्त्रियों को अनेक कष्ट सहन करने पडते हैं।

(v) दहेज प्रथा - दहेज प्रथा एक बहु प्रचलित सामाजिक कुरीति है। दहेज के कारण बहत से लोग तो लड़की का जन्म होते ही उसे मार डालते हैं ताकि उन्हें दहेज न देना पडे । वर्तमान में तो बिना दहेज के विवाह होना असम्भव हो गया है।

पारिवारिक तथा वैवाहिक समस्याओं के अतिरिक्त भी अन्य कई सामाजिक समस्याएँ हैं, इनमें एक समस्या स्त्री-पुरुष में भेदभाव रखने की है।

3. राजनैतिक समस्याएं - स्त्रियों का कार्य क्षेत्र घर तक ही सीमित हो जाने के कारण ही भारतीय स्त्रियों में राजनैतिक चेतना ही नहीं रही है। स्त्रियों की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई सुधार आन्दोलनों का प्रयास भी स्त्रियों को परिवार में एक अच्छी स्थिति प्रदान करना रहा है। सन् 1917 में सरोजनी नायडू ने ब्रिटिश पार्लियामेंट में स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करने की मांग की।

4. स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं - हमारे देश में गरीबी, बेरोजगारी चिकित्सा सुविधाओं के अभाव, स्वास्थ्य के नियमों के प्रति अज्ञानता आदि के कारण कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

5. पर्दा प्रथा सम्बन्धी समस्याएं - भारतीय समाज में पर्दा प्रथा का प्रचलन प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। पर्दा प्रथा स्त्रियों की शिक्षा तथा उनके व्यक्तित्व विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

6. वेश्यावृत्ति सम्बन्धी समस्याएं - वेश्यावृत्ति प्राचीनकाल से ही चली आ रही एक सामाजिक बुराई है। वर्तमान में भी इसका बहुत प्रचलन है।

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