भारतीय समाज में स्त्रियों की निम्न स्थिति के कारण

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भारतीय समाज में स्त्रियों की निम्न स्थिति के कारण बताइये।

भारतीय समाज में स्त्रियों की निम्न स्थिति के कारण

भारतीय समाज में स्त्रियों की निम्न स्थिति के कारण

  • संयुक्त परिवार की प्रथा
  • स्त्री शिक्षा की उपेक्षा
  • अशिक्षा एवं अज्ञानता
  • बाल-विवाह का प्रचलन
  • विवाह सम्बन्धी कुरीतियाँ

1. संयुक्त परिवार की प्रथा - संयुक्त परिवार की प्रथा से स्त्रियों की स्थिति बहुत खराब रही है। संयुक्त परिवार में मुखिया के ही आदेशों का पालन किया जाता है, जहाँ पर स्त्रियों की स्वतंत्रता तथा अधिकारों को कोई महत्व नहीं दिया जाता। घर-परिवार के सभी सदस्यों की सेवा करना ही स्त्रियों का परम धर्म माना जाता है। संयुक्त परिवार में स्त्रियों को पुरुषों पर आश्रित रहना पड़ता था।

2. स्त्री शिक्षा की उपेक्षा - प्राचीन काल के पश्चात से ही स्त्रियों की शिक्षा की उपेक्षा की जा रही है तथा स्त्रियों की शिक्षा को अनावश्यक माना जाता था जबकि शिक्षा के अभाव में स्त्रियों के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं हो पाता और न ही वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो पायीं जिसके कारण उनकी स्थिति बिगड़ती गई तथा उनका कार्य क्षेत्र सीमित होता गया।

3. अशिक्षा एवं अज्ञानता - हिन्दू समाज में स्त्रियों की स्थिति निम्न होने का एक कारण अशिक्षा व अज्ञानता भी है। अशिक्षा के कारण स्त्रियाँ अन्धविश्वास तथा रूढ़िवादिता में घिरी रहीं जिसके फलस्वरूप वे सामाजिक कुरीतियों में फँसती गईं। अज्ञानता के कारण स्त्रियों को कई समस्याओं एवं कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

4. बाल-विवाह का प्रचलन - बाल-विवाह का प्रचलन प्राचीन काल से चला आ रहा है। प्राचीन काल के स्मृतिकारों का कहना है कि कम आयु में ही लड़की का विवाह कर देना माता-पिता का धार्मिक कर्तव्य है।

5. विवाह सम्बन्धी कुरीतियाँ - हिन्दू समाज में बहत सी ऐसी कुरीतियों का प्रचलन था, जिनसे स्त्रियों की दशा धीरे-धीरे निम्न होती गई। इन कुरीतियों में अन्तर्विवाह, दहेज प्रथा, कुलीन विवाह, विधवा पुनर्विवाह पर रोक आदि मुख्य हैं।

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