Tuesday, 29 March 2022

आधुनिक युग में भारतीय स्त्रियों की स्थिति में हुए सुधार या परिवर्तन के कारण लिखिए।

आधुनिक युग में भारतीय स्त्रियों की स्थिति में हुए सुधार या परिवर्तन के कारण लिखिए।

आधुनिक युग में भारतीय स्त्रियों की स्थिति में परिवर्तन के कारण

आधुनिक युग में भारतीय स्त्रियों की स्थिति में परिवर्तन के कारण

1. औद्योगीकरण
2. अन्तर्जातीय विवाह
3. वर-मूल्य प्रथा
4. संयुक्त परिवार का विघटन
5. प्रेसमीडिया, टेलीविजन व संचार साधनों की उन्नति

1. औद्योगीकरण - औद्योगीकरण के साथ-साथ भारत में अगणित उद्योग-धन्धे का जन्म हुआ जिसके कारण न केवल पुरुषों के लिए बल्कि स्त्रियों के लिए भी नौकरी के पर्याप्त अवसर बढ़ गए। फलस्वरूप स्त्रियाँ भी पुरुषों की भॉति घर के बाहर नौकरी करने लगी, वहाँ उनको पुरुषों के साथ भी काम करना पड़ा। इससे उनकी पुरुषों पर आर्थिक निर्भरता घटी, अन्तर्जातीय और प्रेम-विवाहों को प्रोत्साहन मिला, पर्दा-प्रथा घटी, साथ ही पुरुषों का स्त्रियों के प्रति मनोभाव भी पर्याप्त रूप से बदला।

2. अन्तर्जातीय विवाह - आधुनिक समय में सहशिक्षा और साथ ही स्त्री-पुरुष को एक साथ नौकरी करने की सुविधा आदि ऐसे कारण हैं जिनके फलस्वरूप प्रेम-विवाह का विस्तार भारत में उतरोत्तर होता रहा है। इन विवाहों में सामान्यतः जाति-पाति का कोई बन्धन नहीं होता है। इस प्रकार इन अन्तर्जातीय विवाहों से स्त्रियों का एक ओर समाज से सम्पर्क बढता है तो दूसरी ओर वर-मूल्य प्रथा भी घट जाती है। इससे लड़कियों को परिवार का बोझ समझने की भावना का अन्त होता है और परिवार में स्त्रियों की स्थिति सुधरती है। वैसे भी जातीय विवाह के फलस्वरूप पति-पत्नी में सहयोग और समानता की भावनाएँ पनपती है और पुरुष स्त्री को 'दासी' न समझकर 'साथी' समझने लगता है। यह भी स्त्रियों को उन्नत करने की अनुकूल परिस्थिति है।

3. वर-मूल्य प्रथा - अत्यधिक वर-मूल्य प्रथा का प्रचलन भी अप्रत्यक्ष रूप से स्त्रियों की स्थिति को सुधारने में सहायक ही हुआ है। मध्यम वर्ग के माता-पिता के सामने वर-मूल्य प्रथा की वृद्धि ने एक विकट समस्या उत्पन्न कर दी है। इससे एक तो विलम्ब-विवाह हो रहे हैं। दूसरे जब तक लड़की का विवाह नहीं हो जाता, तब तक माता-पिता लड़की को खाली बैठाने की अपेक्षा स्कूल या कालेज में शिक्षा प्राप्त करने भेजना उचित समझते हैं। इससे पढ़ी-लिखी लड़कियों अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए नौकरी कर लेती हैं। ये सभी बातें उनकी स्थिति में सुधारक सिद्ध होती हैं।

4. संयुक्त परिवार का विघटन - संयुक्त परिवार सामाजिक परम्पराओं पर एक अखाड़ा है जहाँ पर नाना प्रकार के अन्धविश्वास और धार्मिक विश्वासों में जकड़े बड़े-बूढ़ों का जमघट होता है, किसी भी मूल्य पर पुराने तरीकों और विचारों को नहीं त्यागना चाहते हैं। इन बड़े-बूढों के विरोध के कारण भी स्त्रियों की स्थिति में सुधार सम्भव नहीं होता था, साथ ही बाल-विवाह भी एक रुकावट था। पर अब संयुक्त परिवार के धीरे-धीरे टूटने से यह बाधा समाप्त हो रही है।

5. प्रेसमीडिया, टेलीविजन व संचार साधनों की उन्नति - वर्तमान समय में प्रेस ने काफी उन्नति की है जिसके कारण नाना प्रकार की प्रगतिशील पुस्तकों, पुस्तिकाओं, समाचार-पत्रों आदि का अखिल भारतीय आधार पर मुद्रण और वितरण सम्भव हुआ है। यह वितरण यातायात और संचार साधनों में उन्नति के कारण ही सम्भव हुआ है। इसके अतिरिक्त संचार के उन्नत साधनों टेलीविजन, इण्टरनेट तथा वीडियो कान्फ्रेंसिंग ने देश और दुनिया की स्त्रियों को एक-दूसरे से घनिष्ट सम्बन्ध स्थापित करने में सहायता प्रदान की है। प्रेस, यातायात व संचार के साधनों के द्वारा नारी-आन्दोलन को चलाने, नारी समस्या के प्रति स्वस्थ जनमत निर्माण करने, नारी नेताओं के विचार दूर-दूर तक फैलने में जो सहायता मिली है वह भारतीय नारी की वर्तमान उन्नत स्थिति का एक महत्वपूर्ण कारक है।

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