महिलाओं की समस्याओं के निराकरण के लिए क्या प्रयास किये गये ?

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महिलाओं की समस्याओं के निराकरण के लिए क्या प्रयास किये गये ?

महिलाओं की समस्या के निराकरण के प्रयास

  • 1. सुधारात्मक आन्दोलन (Reformator Movements) 
  • 2. वैधानिक सुविधाएँ (Legal Facilities) 
  • 3. कल्याणकारी योजनाएँ और कार्यक्रम (Welfare Scheme and Programmes) 

1. सुधारात्मक आन्दोलन (Reformator Movements) - स्वतन्त्रता के पश्चात स्त्रियों की स्थिति सुधारने के लिए अनेकों प्रयत्न किये गये। इस प्रारम्भिक आन्दोलन के प्रवर्तक ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, केशव चन्द्र सेन, राजा राममोहन राय, महर्षि कार्वे, स्वामी विवेकानन्द, महादेव गोविन्द रानोड आदि थे। सर चार्ल्स वुड ने अपनी प्रसिद्ध पत्रिका में स्त्रियों की शिक्षा में जोर दिया तथा बाद में आर्य समाज एवं ब्रह्म समाज में ईसाई मिशनरियों के द्वारा स्त्रियों की शिक्षा के प्रसार पर प्रयत्न किया गया । पहली बार 1883 में एक महिला ग्रेजुएट बनी।

(i) शिक्षा-सम्बन्धी सुधार आन्दोलन, 

(ii) सामाजिक अधिकारों के लिए सुधार-आन्दोलन, 

(iii) आर्थिक अधिकारों के लिए सुधार-आन्दोलन, 

(iv) नागरिक और राजनैतिक अधिकारों के लिए सुधार-आन्दोलन।

2. वैधानिक सुविधाएँ (Legal Facilities) - महिलाओं की समस्याओं के निवारण के लिए सरकार ने अनेक कानून पारित किये जिसके द्वारा महिलाएं समस्याओं से दूर हो सकें और अपने अधिकार और कर्तव्यों के लिए लड़ सकें और उन्हें उनका अधिकार प्राप्त हो सके। इस प्रकार कानून की तरफ से काफी प्रोत्साहन मिला और बाल-विवाह को रोकने के लिए बाल-विवाह निरोधक अधिनियम किया गया। सरकार ने कानून बनाया, जिसमें कोई विवाह, जिसमें लड़के की उम्र 18 वर्ष से कम और लडकी की उम्र 15 वर्ष से कम है तो विवाह नहीं किया जा सकता। हिन्दू स्त्री का अधिकार अधिनियम 1937 में पारित करके सरकार ने मृत पत्नी की सम्पत्ति पर पत्नी का अधिकार दिलाया।

3. कल्याणकारी योजनाएँ और कार्यक्रम (Welfare Scheme and Programmes) - भारत में महिलाओं की समस्या के निवारण के लिए सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाएं और कार्यक्रमों का निर्माण किया है। प्रमुख, महिला कल्याण कार्यक्रम और कल्याणकारी सेवाएँ निम्न प्रकार की हैं -

1. महिलाओं के लिए सामाजिक आर्थिक कार्यक्रम, 

2. स्वास्थ्य एवं आवास सम्बन्धी कार्यक्रम, 

3. शिक्षा सम्बन्धी कार्यक्रम, 

4. पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण केन्द्र, 

5. कार्यरत महिलाओं के लिए होस्टल, 

6. सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए परियोजनाएँ, 

7. स्वैच्छिक कार्यवाही विभाग।

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