Thursday, 14 April 2022

सांस्कृतिक विविधता का क्या अर्थ है? भारत में सांस्कृतिक विविधता का वर्णन कीजिये।

सांस्कृतिक विविधता का क्या अर्थ है? भारत में सांस्कृतिक विविधता का वर्णन कीजिये।

सांस्कृतिक विविधता का अर्थ - Cultural Diversity Meaning in Hindi

सांस्कृतिक विविधता का अर्थ - Cultural Diversity Meaning in Hindi

सांस्कृतिक विविधता का अर्थ है किसी भू-भाग में विविध प्रकार की संस्कृतियों का पाया जाना। अर्थात जब किसी क्षेत्र विशेष में दो से अधिक संस्कृतियों का सह-अस्तित्व पाया जाता है तो उसे सांस्कृतिक विविधता कहते हैं। ऐसे क्षेत्र के निवासियों की बोली, रहन-सहन, खान-पान और वेशभूषा आदि सभी में विविधता पायी जाती है। 

भारत में सांस्कृतिक विविधता - Cultural Diversity in India in Hindi

भारतीय संस्कृति विश्व के मानव-इतिहास की एक अमूल्य निधि है। मानव इतिहास में करोड़ों मानवों की असंख्य कृतियाँ मूर्त रूप में स्थापित हैं और सैकड़ों अध्यायों में उन कृतियों की कथाएँ बिखरी पड़ी हैं। उन बिखरे हुए मोतियों को समेटकर एक परिपूर्ण माला को पिरोकर इस देश के दुलारों ने भारत माँ के गले में पहनाकर उसे गौरवान्वित किया है। उस गौरव का हिस्सेदार बनने का अधिकार है क्योंकि सभी को लेकर ही भारत का इतिहास है। भारत ने, भारतीय संस्कृति व सामाजिक व्यवस्था ने, कभी अपने को अपने तक ही सीमित नहीं रखा है - विश्व का कोई भी भाग कोई भी जाति या समप्रदाय इसके स्नेहमय आह्वान से कभी वंचित नहीं रहा। गौरवमयी भारत की यह गौरवमयी परम्परा है। भारत की गौरवमयी संस्कृति की सबसे अनुपम और महत्वपूर्ण विशेषता है - इसकी विविधता । वास्तव में संस्कृति किसी देश या समाज की परम्परा होती है। इससे उस जटिल समग्रता का बोध होता है जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, आचार, कानून, प्रथा, भाषा, संगीत तथा ऐसी ही अन्य क्षमताओं और आदतों का समावेश रहता हैं। भारतीय संस्कृति की यह एक निरापद विशेषता है कि भारत में विभिन्न समूह हिन्द. मसलमान, सिख, ईसाई, पारसी आदि निवास करते हैं जिनकी अपनी भाषा, अपना रहन-सहन, अपने रीति-रिवाज, अपने आचार-विचार-व्यवहार, अपने-अपने धर्म तथा अपने आदर्श हैं इस अर्थ में भारत विभिन्न समूह हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई की विभिन्न संस्कृतियों का लघु महाद्वीप है। डॉ राधा कुमुद मुखर्जी के अनुसार,"भारत विभिन्न प्रकार के सम्प्रदायों, रीति-रिवाज, धर्मों, संस्कृति, विश्वासों, भाषाओं, जातियों तथा सामाजिक व्यवस्थाओं का एक संग्रहालय है। इसी प्रकार भाषा भी संस्कृति का एक प्रमुख तत्व है। पूरे भारत में एक नहीं, लगभग 1652 मातृभाषाओं का प्रचलन है जिन्हें 826 भाषाओं के अन्तर्गत लाया जा सकता है। इन भाषाओं में भी 103 अभारतीय भाषाएँ भी सम्मिलित हैं। हिन्दी भाषा को बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है . 32, 72, 72, 114। इसके बाद क्रमशः तेलग व बांग्ला भाषाओं का स्थान आता है। इसके बाद भाषा को बोलने वालों की संख्या के आधार पर हम देश की भाषाओं को इस क्रम से प्रस्तुत कर सकते हैं - मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, बिहारी, उड़िया, बांग्ला, राजस्थानी, पंजाबी, आसामी, संथाली, भीली, कश्मीरी, गोंड तथा सिंधी। संस्कृत बोलने वाले लोगों की संख्या सबसे कम है। 49,736 इन भाषाओं को चार अलग-अलग भाषा परिवारों - आर्यन, द्रविड़यन, आस्ट्रिक और चीनी-तिब्बती से सम्बद्ध किया जा सकता है। वास्तव में भाषा बोलने वालों की संख्या को उचित नहीं माना जा सकता, क्योंकि एक व्यक्ति एकाधिक भाषाएँ भी बोल सकता है। इसी प्रकार भारत में 1600 से अधिक जनजातियाँ निवास करती है। लगभग सभी जनजातियों की 'बोलियाँ अलग-अलग हैं। साथ ही सभी जनजातियों के आचार-विचार, रीति-रिवाज, पारिवारिक परम्पराएँ, विवाह के तरीके, धर्म आदि भी विविधता लिए हुए हैं जिससे भारतीय समाज की सांस्कृतिक विविधताओं की स्पष्ट झलक देखने को मिलती हैं।

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