Saturday, 26 March 2022

भारत में भाषाई विविधता पर निबंध - Bharat mein Bhasha Vividhata par Nibandh

भारत में भाषाई विविधता पर निबंध - Bharat mein Bhasha Vividhata par Nibandh

Bharat mein Bhasha Vividhata par Nibandh : भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है। भारत में जनसंख्या, प्रजाति, धर्म एवं संस्कृति के आधार पर ही विविधता नहीं पाई जाती वरन् भाषा की दृष्टि से भी अनेक भिन्नताएं विद्यमान हैं। भाषायी सर्वेक्षणों से यह ज्ञात हुआ है कि यहां लगभग 179 भाषाएं तथा 544 बोलियां प्रचलित हैं। भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के अध्ययन में जार्ज ग्रियर्सन का नाम उल्लेखनीय है। कुछ विद्वानों का मत है कि भारत में 1,650 भाषाएं एवं बोलियां पाई जाती हैं। प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र या उप-क्षेत्र की अपनी एक भाषा या बोली है। भारत के ग्रामीण क्षेत्र में भाषा की विविधता एवं बहुलता को प्रकट करने वाली एक कहावत प्रचलित है - 'पांच कोस में बदले पानी, दस कोस में बानी। प्रत्येक दस कोस (20 मील) के बाद भाषा में बदलाव आ जाता है। भाषा के साथ-साथ सांस्कृतिक विशेषताओं में भी अन्तर देखने को मिलता है। भापायी क्षेत्र ने भारतीयों के सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया है और एक भाषा का प्रयोग करने वालों ने अपने सम्बन्ध अपने भाषायी क्षेत्र तक ही सीमित रखे हैं। यदि हम भारतीय संस्कृति को समझना चाहते हैं तो हमें जाति एवं परिवार के साथ-साथ यहां के भाषायी क्षेत्र का भी अध्ययन करना होगा। भाषा के साथ संस्कृति एवं धर्म भी जुड़े हुए हैं, विभिन्न धर्मावलम्बी अपनी-अपनी अलग-अलग भाषा मानते हैं, जैसे हिन्दू संस्कृत एवं हिन्दी भाषा को, मुसलमान अरबी एवं उर्दू को, सिक्ख गुरुमुखी को और बौद्ध प्राकृत एवं पाली भाषा को।

भारत में भाषाई विविधता पर निबंध - Bharat mein Bhasha Vividhata par Nibandh

भारत में कुछ भाषाएं तो बहुत समृद्ध हैं, उनमें से हिन्दी, पंजाबी, कश्मीरी, सिन्धी, मराठी, गुजराती, तमिल, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, उड़िया, बंगाली और असमिया प्रमुख हैं। भारत में जितनी भी भाषाएं पाई जाती हैं, उन्हें प्रमुखतः तीन भाषा परिवारों में बांटा गया है -

(1) इण्डो-आर्यन परिवार – इसके अन्तर्गत हिन्दी, उर्दू, बंगला, असमिया, उड़िया, पंजाबी, सिन्धी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, बिहारी, हिमाली, आदि भाषाएं आती हैं।

(2) द्रविड़ भाषा परिवार - द्रविड़ भाषा परिवार के अन्तर्गत तेलुगु, कन्नड़, तमिल, मलयालम एवं गोंडी, आदि भाषाएं आती हैं।

(3) आस्ट्रिक भाषा परिवार - आस्ट्रिक भाषा परिवार में मुण्डारी, संथाली, खासी, हो, खरिया, बिरहोर, भूमिज, कोरबा, कोरकू एवं जआंग, आदि भाषाएं प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त चीनी-तिब्बती परिवार की भापाएं; जैसे मणिपुरी, नेवाड़ी, लेपचा एवं नगा भाषा का प्रयोग भी किया जाता है।

भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है, वे हैं - असमिया, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिन्धी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोड़ो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली। इनमें से प्रत्येक की अपनी एक लिपि हैं। इनमें हिन्दी का सर्वप्रथम स्थान है। इनके अतिरिक्त मालवी, भोजपुरी, मारवाड़ी एवं पहाड़ी भाषाएं भी महत्वपूर्ण हैं। कुछ भाषाओं को बोलने वालों की संख्या पांच-पांच लाख हैं, तो कुछ को बोलने वालों की लगभग एक-एक लाख।

हिन्दी भाषा को बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। 33.72 करोड़ व्यक्ति इस भाषा को बोलते हैं और इसे बोलने वाले विशेषकर उत्तर प्रदेश में रहते हैं। इसके बाद क्रमशः बंगला व तेलुगु भाषाओं का स्थान है। उन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या क्रमशः 6.95 करोड़ तथा 6.60 करोड़ है। इसके बाद भाषा को बोलने वालों की संख्या के आधार पर हम इस देश की विभिन्न भाषाओं को इस क्रम से प्रस्तुत कर सकते हैं - मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, बिहारी, उड़िया, राजस्थानी, पंजाबी, असामी, संथाली, भीली, कश्मीरी, गोंड़ी यथा सिंधी। संस्कृत भाषा को बोलने वालों की संख्या केवल 4,664 है। इन भाषाओं को चार अलग-अलग भाषा-परिवारों आर्यन, द्राविड़यन, आस्ट्रिक और चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार से सम्बद्ध किया जा सकता है।


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