Friday, 15 March 2019

पशु पक्षी संरक्षण पर निबंध / जानवरों पर अत्याचार पर निबंध

पशु पक्षी संरक्षण पर निबंध / जानवरों पर अत्याचार पर निबंध

मानव विभिन्न उद्देश्यों के लिए कई जानवरों को रखता है और उनका उपयोग करता है। जानवर भी हमारी तरह ही जीवित प्राणी हैं। वे प्यार और सहानुभूति भी चाहते हैं। वे भी अपने जीवन का खुलकर आनंद लेना चाहते हैं लेकिन अपनी इच्छा व्यक्त करने के लिए उनके पास भाषा नहीं है। लेकिन अगर हम उनके व्यवहारों पर गहराई से ध्यान दें, तो हम महसूस कर सकते हैं। वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता का आनंद लेना चाहते हैं।

हम इंसान जानवरों के प्रति बहुत क्रूर हैं। हम उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं। हम उनकी जरूरतों और इच्छाओं की परवाह नहीं करते हैं। हम अपने लाभ और मनोरंजन के लिए उन्हें घर पर पालते हैं। हम उन्हें प्रशिक्षित करते हैं, उनका उपयोग करते हैं और जब वे बूढ़े हो जाते हैं तो हम उन्हें छोड़ देते हैं। हम उन्हें नगण्य गलतियों के लिए दंडित करते हैं। लेकिन जानवर बहुत मिलनसार और प्यारे हैं। उन्होंने हमें कभी धोखा नहीं दिया, बल्कि हमने उन्हें धोखा दिया। हम उन्हें निर्दयतापूर्वक मारते हैं और उनका मांस खाते हैं। हम अपने भोजन के लिए अन्य जीवित प्राणियों को मारते हैं। हम उन्हें भगवान और देवी-देवताओं को पूजा के नाम पर बलि चढ़ाते हैं। ऐसा लगता है कि जानवरों के साथ हमारे शत्रुतापूर्ण व्यवहार ने उनके अधिकारों का उल्लंघन किया है।

पशु−उत्पीड़न कोई नई समस्या नहीं है। सदियों से पशुओं के साथ बुरा व्यवहार होता आया है। इतिहास की पुस्तकों से पता चलता है कि मानव का पहला साथी कुत्ता बना क्योंकि इसकी स्वामिभक्ति पर आज तक किसी प्रकार का संदेह नहीं व्यक्त किया गया है। जैसे−जैसे मानव घर बसाकर रहने लगा, उसे खेती करने की आवश्यकता हुई और वैसे−वैसे पशुओं का महत्व भी बढ़ता गया। आर्य संस्कृति में गौ−जाति का बड़ा महत्व था, जिसके पास जितनी अधिक गाएँ होती थीं वह उतना ही प्रतिष्ठित और संपन्न माना जाता था। ऋषि−मुनि भी गौ पालते थे, वनों में घास की उपलब्धता प्रचुर थी। समय के साथ−साथ मनुष्य की आवश्यकताओं का विस्तार हुआ, तब उन्होंने गाय, भैंस, बैल, बकरी, ऊँट, घोड़ा, गदहा, कुत्ता आदि पशुओं को पालना आरंभ किया।

कई लोगों को पक्षी पालने का शौक होता है। भारत के ग्रामीण इलाकों में तोता, मैना और कबूतर आदि आमतौर पर पाले जाते हैं। लोग इन्हें मनोरंजन के लिए पालते है। जरा सोचिये अगर आपको आजीवन एक पिंजड़े की कैद में रखा जाये तो आपको कैसा लगेगा ? परन्तु उत्पीडन यहीं नहीं ख़त्म होता। जो प्राणी खुले आकाश में उड़ने के लिए बना है, उससे हम आजीवन उड़ने का अधिकार ही छीन लेते हैं। इसी प्रकार कई देशो में मुर्गे की लडाइयां करवाई जाती हैं। कबूतरों की रेस करवाई जाती हैं। अफगानिस्तान ईरान और कुछ अन्य देशों में ये मुकाबले आज भी होते हैं। स्पेन में तो बुल फाइटिंग करवाई जाती है जिसमें बैलों पर अत्याचार किया जाता है। उन्हें भूखा रखा जाता है जिससे वो आक्रामक हो जाये। इस प्रतिस्पर्धा में प्रतिवर्ष न जाने कितने बैलों की जान जाती है। 

पशु के संरक्षण के लिए हमें अपनी प्रकृति और आदतों में सुधार करना होगा। हमें उनके साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। हमें यह महसूस करना चाहिए कि उनमें दर्द, प्रेम, भूख, मित्रता, शत्रुता आदि की भावना भी होती है, हमें उनसे प्यार करना चाहिए क्योंकि वे हमसे प्यार करते हैं। स्वभाव से, मनुष्य मांसाहारी नहीं हैं। यह जरूरी नहीं है कि हम जानवरों को उनके मांस के लिए मारें। हम जानवरों के भोजन और रहने के स्थानों को नष्ट कर रहे हैं। हमने जंगल नष्ट कर दिए हैं। जंगल उनका निवास स्थान है। वनों का क्षेत्र सीमित रह जाने तथा वन्य प्राणियों के अंधाधुंध शिकार के कारण उनकी कई प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित करने के लिए, हमें जंगल को संरक्षित करना होगा। जंगल उनका निवास स्थान है। जिस भूखंड का जलवायु जीवन के अनुकूल हो और वहाँ पर हरी−भरी वनस्पतियाँ पाई जाती हों, वहाँ पशु−पक्षी और जीव−जन्तुओं का पाया जाना एक नैसर्गिक सत्य है।

पशु अधिकारों का संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। यदि हम प्राकृतिक रूप से पशुओं को संरक्षित करना चाहते हैं, तो हमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना होगा। इसके लिए हमें पारिस्थितिकी और पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए। प्रकृति को बचाना स्वयं को संरक्षित करना है। अंततः, अगर हम जानवरों को बचाते हैं, तो हम प्राकृतिक आपदाओं को कम कर सकते हैं। यह कहा जा सकता है कि जानवरों का संरक्षण हमारा अपना संरक्षण है।

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