Tuesday, 12 March 2019

विद्यार्थी का दायित्व पर निबंध - Duties of A Student Essay in Hindi

विद्यार्थी का दायित्व पर निबंध - Duties of A Student Essay in Hindi

Duties of A Student Essay in Hindi
अध्ययन, चिंतन और मनन द्वारा विद्या अर्जित करना विद्यार्थी का दायित्व है। गुरुजनों का आज्ञाकारी बनना तथा विद्यालय अनुशासन में रहना विद्यार्थी का दायित्व है। धार्मिक संस्कारों को अपने हृदय में विकसित करना विद्यार्थी का दायित्व है। समाज और राष्ट्र के क्रियाकलापों से अवगत रहना विद्यार्थी का दायित्व है। समाज अथवा राज्य पर कोई भी संकट आने पर राष्ट्र रक्षा के लिए अपने को समर्पित करना विद्यार्थी का दायित्व है।

दायित्व का शाब्दिक अर्थ है जिम्मेवारी। दूसरे शब्दों में किसी कार्य की पूर्ति का भार। दायित्व के निर्वाह से शिक्षा मिलती है और बल की प्राप्ति होती है, जीवन का विकास होता है। मुंशी प्रेमचंद के शब्दों में जब हम राह भूलकर भटकने लगते हैं तो दायित्व का ज्ञान हमारा विश्वसनीय पथ प्रदर्शक बनता है।

विद्यार्थी अर्थात विद्या का अभिलाषी। विद्या प्राप्ति का इच्छुक। विद्या पढ़ने वाला विद्यार्थी कहलाता है इसलिए अपने नाम के अर्थ के अनुरूप उसका सर्व प्रथम दायित्व है विद्या ग्रहण करना। 

विद्या ग्रहण के लिए चाहिए निरंतर ध्यान, चिंतन और मनन। अध्ययन ज्ञान का द्वार खोलता है, मस्तिष्क को परिष्कृत करता है तथा हृदय को सुसंस्कृत बनाता है। बेकन के शब्दों में अध्ययन आनंद, अलंकरण और योग्यता का काम करता है। चिंतन और मनन अध्ययन की परिचायिका हैं। इनके द्वारा ही विषय मानसिक माला में गुंथते हैं।

अध्ययन चिंतन तथा मनन के लिए नीति के चाणक्य ने विद्यार्थी को आठ बातें छोड़ने की सलाह दी है

कामं क्रोधं तथा लोभं स्वादं श्रृंगारकौतुके।
अतिनिद्रातिसेवा च, विद्यार्थी ह्यष्ट वर्जयेत्।।

अर्थात काम, क्रोध, लोभ, स्वाद, श्रंगार, तमाशे, अधिक निद्रा और अत्यधिक सेवा विद्यार्थी के लिए वर्जित है। विद्यार्थी के अनुशासन को स्वीकार करना विद्यार्थी का प्रमुख दायित्व है। इस दायित्व निर्वाह से विद्यालय का वातावरण अध्ययन अनुकूल बनेगा जो विद्यार्थी के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, मन को परिष्कृत करेगा, प्रतिभा को योग्यता में परिणत करेगा, भावी जीवन की सफलता और उज्ज्वलता में सहायक होगा।

गुरुजनों की आज्ञा का पालन करना और विद्यालय के अनुशासन को बनाए रखना विद्यार्थी का दूसरा दायित्व है। कक्षा में अध्ययन करते हुए गुरु के वचनों को एकाग्रचित होकर सुनना, ग्रहण करना तथा घर पर प्रदत्त पाठ कार्य की पूर्ति विद्यार्थी का महत्वपूर्ण दायित्व है। इससे पाठ पर पकड़ बढ़ेगी, पाठ मस्तिष्क में पूरी तरह बैठ जाएगा।

केवल विद्या अर्जन ही विद्यार्थी का दायित्व नहीं है। विद्यार्थी जीवन संस्कार काल भी है। अन्तःकरण में संस्कारों को उद्दीप्त करने का स्वर्ण अवसर है। कारण विद्यार्थी जीवन के संस्कार हृदय में बद्धमूल हो जाते हैं जो जीवन पर्यंत साथ नहीं छोड़ते। यह संस्कार ही धर्म, समाज तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य पूर्ति की प्रेरणा देते हैं, जीवन समर्पण और उत्सर्ग के लिए प्रेरित करते हैं। अतः सुसंस्कारों का विकास विद्यार्थी का दायित्व बन जाता है। विद्यार्थी विद्याध्ययन के प्रति समर्पित होते हुए भी परिवार, समाज और नगर से दूर गुरुकुल का छात्र नहीं है जिसे दीन दुनिया की कोई खबर ना हो। आज का विद्यार्थी परिवार के कार्यों में हाथ बंटाता है। समाज सेवा में रुचि लेता है। धार्मिक कृत्यों और उत्सवों में भाग लेता है। देश की समस्याओं के समाधानार्थ अपने को प्रस्तुत करता है। राजनीति को उड़ाता है। चुनाव में भाग लेकर प्रांत का कर्णधार बनता है। इस रूप में विद्यार्थी के दायित्व का क्षेत्र विस्तृत और विशाल हो जाता है।

राष्ट्र सेवा और राज्यसेवा विद्यार्थी का दायित्व नहीं। राजनीति के पंक में फसना विद्यार्थी के लिए उचित नहीं। कारण राजनीति वेश्या की भांति अनेक रूपिणी है जो विद्यार्थी के मूल दायित्व को अपने आकर्षण से भस्म कर देती है, कर्तव्य से च्युत कर देती है। लोकेषणा के पंख पर उड़ा कर उसको आत्मविस्मृत कर देती है।

किंतु आपातकालीन मर्यादा नास्ति। परिवार, समाज संस्कृति या राष्ट्र पर आपत्ति आ जाए तो आपत्ति रूपी अग्नि में कूदना अनुचित नहीं। गुलामी के प्रति कार के लिए गांधीजी के आवाहन पर आपातकाल में लोकनायक जयप्रकाश के आव्हान पर छात्रों का राजनीति में कूदना अपने समर्पण से भारत माता का भारत का प्रथम दायित्व था। असमी संस्कृति पर संकट आने पर असम के छात्र छात्राओं का राजनीति में कूदना मातृभूमि के प्रति अपरिहार्य दायित्व था।

विद्या का अर्जन विद्यार्थी का प्रथम और महत्वपूर्ण कर्तव्य है। अध्ययन, मनन और चिंतन इस दायित्व पूर्ति की सीढ़ियां हैं। मन की एकाग्रता, एकांतता और एक निश्चित लक्ष्य पूर्ति के साधन है
Related Essays : 
आदर्श विद्यार्थी पर निबंध।
छात्र और अनुशासन पर निबंध
विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व - 1
विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व - 2
विद्यार्थी जीवन पर निबंध
विद्यार्थी जीवन का अनुभव
विद्यार्थी और राजनीति पर निबंध

SHARE THIS

Author:

I am writing to express my concern over the Hindi Language. I have iven my views and thoughts about Hindi Language. Hindivyakran.com contains a large number of hindi litracy articles.

0 comments: