होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का अर्थ– योग्य व्यक्ति के लक्षण बचपन में ही पहचाने जाते हैं; उन्नतिशील के लक्षण प्रारम्भ से ही अच्छे होते हैं; होनहार के लक्षण बचपन से ही प्रकट होने लगते हैं; गुणवान के लक्षण पहले ही स्पष्ट हो जाते हैं।

होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग– रवींद्रनाथ ठाकुर छोटी-सी आयु से ही कविता लिखने लगे थे, बाद में उन्हें मिला नोबेल पुरस्कार। सच है, होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

वाक्य प्रयोग– अपने उम्र के प्रारम्भिक पड़ाव में ही राजा राममोहन राय ने विभिन्न भाषाओं तथा धर्मग्रन्थों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। होनहार बिरवान के होत चीकने पात की कहावत को चरितार्थ करता उनका व्यक्तित्व उन्हें समाज में एक अग्रणी समाज सुधारक के रूप में स्थापित करता है

वाक्य प्रयोग– पलक अपने जीवन में कुछ बड़ा जरूर करेगी। आज उसका निडर होकर आतंकवादियों से भिड़ जाना साबित करता है- 'होनहार बिरवान के होत चिकने पात'।

वाक्य प्रयोग– प्रियंका की सुंदरता को देखकर बचपन में ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि यह विश्व सुंदरी का खिताब जीतेगी और जब वह बड़ी हुई तो उसने इसी को कहते हैं कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात।

यहां हमने “होनहार बिरवान के होत चीकने पात” जैसे प्रसिद्ध मुहावरे का अर्थ और उसका वाक्य प्रयोग समझाया है। होनहार बिरवान के होत चीकने पात मुहावरे का अर्थ होता है― योग्य व्यक्ति के लक्षण बचपन में ही पहचाने जाते हैं; उन्नतिशील के लक्षण प्रारम्भ से ही अच्छे होते हैं; होनहार के लक्षण बचपन से ही प्रकट होने लगते हैं; गुणवान के लक्षण पहले ही स्पष्ट हो जाते हैं। जो व्यक्ति दूसरों से अलग या श्रेष्ठ होता है उसके गुण बचपन से ही प्रकट होने लगते हैं और ऐसे ही व्यक्ति के लिए इस कहावत का प्रयोग किया जाता है। 

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