Saturday, 25 December 2021

महारानी विक्टोरिया के घोषणा पत्र का महत्व लिखिए

महारानी विक्टोरिया के घोषणा पत्र का महत्व लिखिए

इस लेख में हम आपको महारानी विक्टोरिया के वर्ष 1858 के घोषणा पत्र का क्या महत्व है तथा  इस घोषणा पत्र के माध्यम से महारानी ने अपनी नीतियों में क्या परिवर्तन किये, बताया जा रहा है। 

महारानी के घोषणा-पत्र का महत्त्व व मूल्यांकन

महारानी विक्टोरिया की यह घोषणा एक महत्त्वपूर्ण घटना मानी जाती है। मांटेग्यू घोषणा 1917 ई. में मांटेग्यू ने भारत के सम्बन्ध में की। महारानी की घोषणा ने भारतवर्ष के विभिन्न वर्गों के लोगों की शिकायतों, नाराजगियों व आशंकाओं के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। जिन-जिन कारणों से जनता के मन में असंतोष इकट्ठा हो रहा था जिसकी अभिव्यक्ति सन् 1857 ई. के गदर के रूप में हुई, उन सबके सम्बन्ध में रानी ने घोषणा-पत्र में आश्वासन प्रदान किये। सर्वाधिक असंतोष था डलहौजी द्वारा विभिन्न अनुचित तरीकों से भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार व देशी राजाओं की गोद लेने के अधिकार से वंचित करना यह अधिकार उन्हें पुनः वापिस दे दिया गया तथा दूसरों के राज्यों में अनाधिकर हस्तक्षेप द्वारा भारत में ब्रिटिश राज्य के विस्तार की नीति के परित्याग की घोषणा कर दी गई। साम्राज्य के भारतीयों को अन्य प्रजाजनों के समान समझना, भारतीयों के धार्मिक विश्वासों का आदर करना व जाति और धर्म के आधार पर नौकरियों आदि में भेदभाव न करना कुछ अन्य ऐसे आश्वासन थे जिन्होंने भारतीय जनता को मानसिक राहत पहुँचाई। घोषणा के अन्त में सार्वजनिक उपयोगिता के कार्य तथा प्रजाजन के हित सम्बन्धी कार्य करने की बात कही गई थी। इस प्रकार महारानी की इस घोषणा में कही गई बातें अब तक कम्पनी के द्वारा भारत में अपनाई जाने वाली नीति व सिद्धान्तों से बहुत भिन्न थीं।

इस घोषणा के महत्त्व के सम्बन्ध में विद्वानों के मतभेद हैं। सैद्धान्तिक आधार पर तो सभी ने इसको एक महत्त्वपूर्ण घोषणा माना है परन्तु फिर भी बहुत सारे विद्वानों का यह विचार है कि घोषणा किसी भी प्रकार से इस बात की पुष्टि नहीं करती कि भारत के सम्बन्ध में ब्रिटिश सरकार की नीतियों में कोई वास्तविक पतिवर्तन आया था। उनका विचार है कि सन् 1857 ई. के गदर ने ब्रिटिश सरकार को इतना हिला दिया था कि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो जाये इसलिये सरकार द्वारा जनता को आश्वासन देना आवश्यक हो गया था। इसलिये महारानी की घोषणा की कोई वास्तविक हृदय परिवर्तन न मानकर समयानुसार चली गई एक कूटनीति चाल मानी। जो भी हो अपने आप में यह घोषणा महत्त्वपूर्ण थी।

भारतीय रियासतों के राजाओं के दृष्टिकोण से इस घोषणा का विशेष महत्त्व था। बहुत सारे देशी राजाओं के द्वारा सन् 1857 ई. के दौरान ब्रिटिश सरकार को मदद दी गई उसने इनकी स्थिति को सुदृढ़ कर दिया। उसके सहयोग के कारण ब्रिटिश सरकार इनके महत्त्व को स्वीकार करने के लिये बाध्य हुई और इसलिए इन्हें भारत में ब्रिटिश शासन का मजबूत आधार स्तम्भ माना जाने लगा। महारानी ने उनके अधिकारों, प्रतिष्ठा और सम्मान का आदर करने के वचन से न केवल देशी राजाओं के मन में जो संदेह व असुरक्षा की भावना थी वह निकल गई अन्यथा यह भी उम्मीद बन्ध गई कि भविष्य में उन्हें प्रशासन में भी भाग मिलेगा। इस प्रकार भारतीय रियासतों के प्रति नीति में परिवर्तन के दृष्टिकोण से महारानी की यह घोषणा भी अधिक महत्त्वपूर्ण थीं।

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