Tuesday, 8 February 2022

पर्यावरणवाद पर एक लेख लिखिए।

पर्यावरणवाद पर एक लेख लिखिए।

  1. पर्यावरणवाद का सैद्धान्तिक आधार।
  2. परिस्थितिवाद क्या है?
  3. पर्यावरणवाद की राजनीति को स्पष्ट कीजिए।
  4. पर्यावरणवाद की विशेषताएं 

पर्यावरणवाद : पर्यावरणवाद का विचार 1970 के दशक में उभरकर सामने आया है। पर्यावरणवाद कोई स्वाधीन राजसिद्धान्त न होकर एक विचारधारात्मक आन्दोलन है। वातावरण के विज्ञान से गहरे सरोकार के कारण पर्यावरणवादियों को परिस्थितिज्ञानवादी (Ecologists) भी कहा जाता है। फिर, चूँकि इस आन्दोलन के अन्तर्गत वातावरण में हरियाली कायम रखने पर बल दिया जाता है, इसलिये इससे प्रेरित राजनीति को हरित राजनीति (Green Politics) की संज्ञा दी जाती है। कुछ देशों - जैसे कि न्यूजीलैण्ड, पश्चिमी जर्मनी और ब्रिटेन में - ‘हरित राजनीति' के लक्ष्यों की सिद्धि के लिये राजनीतिक दल बनाये गये, चुनाव भी लड़े गये, हालांकि उन्हें कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल पायी है।

पर्यावरणवाद की राजनीति

पर्यावरण की राजनीति का सैद्धान्तिक आधार 'सामाजिक न्याय' (Social Justice) है। इसके समर्थक यह तर्क देते हैं कि धरती किसी की निजी सम्पत्ति (Private Property) नहीं है। यह हमें अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिली बल्कि यह हमारे पास भावी पीढ़ियों की धरोहर है। अतः हम वर्तमान प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resources) को सुरक्षित रखने के दायित्व से बँधे हैं। वर्तमान पीढियों को यह अधिकार नहीं है कि वे अपने उपभोग के लिये इसके सारे संसाधनों को निचोड़ कर भावी पीढ़ियों के जीवन को खतरे में डाल दें। अतः पर्यावरण की रक्षा के लिये सजग होना हमारा परम कर्तव्य है। परिस्थितिविज्ञान (Ecology) ने सिद्ध कर दिया है कि आर्थिक विकास की अन्धी दौड़ में हमारे पर्यावरण को कितनी क्षति पहुँची है। खनिज पदार्थों की खोज में अन्धाधुन्ध खनन (Mining) के कारण इतने अम्ल बहाये गये हैं जिन्होंने निर्मल जल स्रोतों को विषाक्त कर दिया है। दूर-दूर इतना वायु-प्रदूषण (Air-Pollution) पैदा किया है जिसमें मनुष्यों, जीव-जन्तुओं और पेड़-पौधों के स्वास्थ्य की अपार क्षति हुई है। उद्योगों से पैदा होने वाले रासायनिक कूड़े-कचरे (Chemical waste) और न्यूक्लीय शक्ति (Nuclear Power) के प्रयोग में पैदा होने वाले रेडियोधर्मी रिसाव (Radioactive Leakage) के कारण धरती रहने योग्य नहीं बची है। इन सब तथ्यों की ओर ध्यान खींचते हुए पर्यावरणवाद ‘जीवन की गुणवत्ता' (Quality of Life) को 'आर्थिक संवृद्धि' (Economic Growth) से ऊँचा स्थान देता है, और प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resources), प्राकृतिक सौन्दर्य (Natural Beauty), वातावरण की स्वच्छता (Atmospheric Cleanliness) तथा नगरों एवं उपनगरों के स्वरूप को कायम रखने पर बल देता है। इन सब उद्देश्यों को वह राजनीतिक कार्यक्रम के मुद्दे बनाता है, और इनके लिये उपयुक्त नीतियाँ और कायदे-कानून बनाने के लिये सरकार पर दबाव डालता है।

परन्तु पर्यावरणवादियों की माँगें सरकारी विनिमयन (Government Regulation) तक सीमित नहीं हैं। वे यह तर्क देते हैं कि धरती के संसाधनों, प्राकतिक सुषमा और स्वच्छ जल एवं वायु कायम रखने के लिये उन्नत देशों के लोगों को अपने उपभोग के प्रतिमानों (Consumption Patterns) एवं जीवन-शैली (Life-Styles) को भी बदलना होगा। उदाहरण के लिये, अमरीका के लोग विश्व की जनसंख्या का 6% हिस्सा हैं. परन्तु वे सम्पूर्ण विश्व में निर्मित माल (Manufactured Goods) के करीब-करीब आधे और सम्पूर्ण विश्व की तिहाई ऊर्जा (Energy) की खपत के लिये जिम्मेदार हैं। इससे विश्व के निर्धन राष्ट्रों के हिस्से में तो बहुत कम आता ही है, स्वयं अमरीकियों के स्वास्थ्य के लिये भी यह स्थिति ठीक नहीं है। पर्यावरणवादियों का सुझाव है कि उन्नत देशों के लोगों को निजी वाहनों का प्रयोग कम करके सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) और साइकिलों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये; माँस-मछली की जगह हरी सब्जियों और दालों के प्रयोग की ओर बढ़ना चाहिये; कोयले, बिजली और न्यूक्लीज ऊर्जा की जगह पवन-ऊर्जा (Wind Energy) और सौर-ऊर्जा (Solar Energy) के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये। वस्ततः पर्यावरणवादी आन्दोलन में अमरीकियों में दौड़ने, साइकिल चलाने, प्राकृतिक भोजन लेने और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर रहने की अभिरुचि को बढ़ावा दिया है। विश्व के अन्य देशों में भी इसी दिशा में रुझान बढ़ रहा है। पर्यावरणवादी चाहते हैं कि मनुष्य प्रकृति के साथ सन्तुलन की अवस्था में रहे, उसे नष्ट न करे।

निष्कर्ष - निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि जहाँ साधारण राजनीति का सरोकार विभिन्न समूहों के स्वार्थों की लड़ाई से है, और इसमें सामंजस्य स्थापित करने के तरीके ढूंढे जाते हैं वहाँ पर्यावरणवाद सम्पूर्ण मानव-जाति के कल्याण को अपना लक्ष्य बनाता है। इस दृष्टि से यह राजनीति का उदात्त पक्ष प्रस्तुत करता है। परन्तु इस उद्देश्य से जब वह उद्योगों के विस्तार और उपभोग के स्तर को संयत करने की माँग करता है तो उससे निहित स्वार्थों (Vested Interests) पर आँच आती है। उनके मुनाफे (Profits) में कटौती होती है। ये निहित स्वार्थ बहुत शक्तिशाली, संगठित और साधनसम्पन्न हैं, अतः वे पर्यावरणवादियों के रास्ते में रुकावटें पैदा करते हैं। कुछ वामपन्थी राजनीतिक दल इस आधार पर पर्यावरणवाद का विरोध करते हैं कि यह उत्पादन की गतिविधियों पर रोक लगाता है जिससे बेरोजगारी (Unemployment) की समस्या बढ़ने का भारी खतरा है। पर्यावरणवादियों के पास अपने विरोधियों का मुकाबला करने के लिये यथेष्ट शक्ति और साधन नहीं हैं क्योंकि इसका लाभ दूर-दूर तक बिखरे हुए लोगों को बहुत ६ ीिरे-धीरे और बहुत देर से मिल पायेगा, जिन्हें संगठित करना बहुत मुश्किल है। यही कारण है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में पर्यावरणवादियों को विशेष सफलता नहीं मिल पायी है।


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