Tuesday, 1 February 2022

हेरोल्ड लासवेल को राजनीति में मनोवैज्ञानिक और अनुभववादी सिद्धांत का प्रवक्ता माना जाता है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।

हेरोल्ड लासवेल को राजनीति में मनोवैज्ञानिक और अनुभववादी सिद्धांत का प्रवक्ता माना जाता है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।

मनोवैज्ञानिक विचारक के रूप में - लासवेल राजनीतिशास्त्र में मूल्यों को महत्त्व, देता है। इसमें व्यक्तियों की मनोवैज्ञानिक स्थिति का अध्ययन करता है। वह कहता है कि यदि कोई व्यक्ति बचपन में अपने माता-पिता से घृणा करता है तो आगे चलकर वह सत्ता विरोधी हो जाता है। इसी प्रकार किसी राजनीतिक व्यक्ति में अराजकतावादी अभिवृत्ति बचपन में उसके पिता से घृणा का परिणाम हो सकती है। लासवेल ने उन मनोवैज्ञानिक कारणों का अध्ययन किया है जिनमें व्यक्ति, नेता व अच्छे राजनीतिक कार्यकर्ता बनते हैं।

एक राजनीतिक वैज्ञानिक के रूप में - लासवेल एक व्यवहारवादी विचारक है। उसने राजनीतिशास्त्र को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। इसने मनोवैज्ञानिक तथ्यों का प्रयोग किया है। वह राजनीति में शक्ति को काफी महत्त्व देता है। लासवेल का विचार है कि, “राजनीति में शक्ति का स्थान सर्वोच्च है। इसलिए अच्छी सरकार का शक्ति सम्पन्न होना अनिवार्य है। राजनीति विज्ञान की मुख्य समस्या यह है कि प्रजातन्त्रीय शासन में शक्ति ऐसे लोगों के हाथों में निहित होती है जो उसका ठीक प्रकार प्रयोग नहीं करते हैं।

वितरणात्मक विश्लेषण की प्रकृति - लासवेल के अनुसार वितरणात्मक विश्लेषण के मुख्यतः दो कार्य हैं-एक तो वर्णन करना और दूसरा पूर्वकथन या भविष्यवाणी करना। इस सम्बन्ध में यह तथ्य भी विशेष महत्त्व का है कि प्रथम उद्देश्य विज्ञान से सम्बन्धित है और द्वितीय का नियन्त्रण से। लासवेल का प्रमुख उद्देश्य राजनीतिक गतिविधियों में निहित मूल्यों और उन मूल्यों के वितरण का अध्ययन प्रस्तुत करना है। इस विश्लेषण का आधार लासवेल की एक पुस्तक के शीर्षक से ही स्पष्ट हो जाता है कि “राजनीति, कौन, कब, क्या और कैसे प्राप्त करता है।" लासवेल ने राजनीति के क्षेत्र को प्रभाव और प्रभावशाली का अध्ययन बताया है और प्रक्रिया के रूप में शक्ति और प्रभाव दोनों को ही मान्यता प्रदान की है। लासवेल ने इन दोनों में बहत ही सूक्ष्म अन्तर बताया है जिसको स्पष्ट करना पर्याप्त कठिन है। वह राजनीति विश्लेषण को कुछ निश्चित संस्थाओं तक ही सीमित न रखकर समस्त समाज तक विस्तृत करता है। लासवेल के अनुसार, शक्ति की प्रक्रिया को राजनीति प्रक्रिया से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसी कारण वितरणात्मक विश्लेषण को शक्ति और प्रभाव दोनों पर लागू माना जा सकता है।

मूल्यों की निश्चित संख्या का अभाव - लासवेल ने पहले अपनी पुस्तक में केवल तीन मूल्यों का ही वर्णन किया था, किन्तु दूसरी पुस्तक में इनकी संख्या आठ कर दी। उसके पश्चात् उसने यह भी प्रतिपादित किया कि इनकी संख्या और भी बढ़ सकती है। 


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