डेविड ईस्टन के उत्तर व्यवहारवाद की क्या उपयोगिता है?

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डेविड ईस्टन के उत्तर व्यवहारवाद की क्या उपयोगिता है? 

उत्तर व्यवहारवाद की उपयोगिता

उत्तर-व्यवहारवाद के विकास ने विभिन्न प्रकार की राजनीतिक विज्ञान की जालि क्रियाओं को हल हेतु बढ़ावा दिया। उत्तर व्यवहारवाद, व्यवहारवाद की कमियों को दूर करने का प्रयास है और साथ ही इसमें बुद्धिजीवियों से यह अपेक्षा की गई है कि वह अपने ज्ञान के माध्यम से समाज में सुधार करने का प्रयास करेंगे। उत्तर व्यवहारवादी चाहते हैं कि राजनीतिक वैज्ञानिकों द्वारा अपने ज्ञान की छाप अपने युग के सामाजिक प्रश्नों और समस्याओं पर अंकित किया जाना अनिवार्य उत्तरदायित्व है। इसके विश्लेषण के आधार पर डेविड ईस्टन ने अपने विचारों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि “इस क्रान्ति की मूल प्रवृत्ति अभी हाल में अंकुरित होने लगी तथा इसके आधार सिद्धान्त संगति एवं क्रियाशील हैं। वर्तमान हमारे विश्वविद्यालय अध्यापन कार्य इसकी आलोचना के विषय हैं यह क्रान्ति अभी शैशवावस्था में है। इसे निश्चितता से वर्णित करना कठिन है, परन्तु हम इसे इतिहास का संयोग कहकर एक संक्रमण दशा नहीं कह सकते जो हमें यथास्थिति में छोड़कर चुपचाप विलुप्त हो जायेगी यदि वह अन्य विज्ञानों के इतिहास में नहीं तो कम-से-कम हमारे राजनीति विज्ञान विषय के इतिहास की तो एक निश्चित एवं महत्त्वपूर्ण घटना है।" 

1970 ई. के बाद व्यवहारवादियों तथा उत्तर व्यवहारवादियों के बीच पारस्परिक विरोध की स्थिति समाप्त हो गई है। व्यवहारवाद की इस बात को स्वीकार कर लिया गया है कि राजनीति विज्ञान में अधिकाधिक मात्रा में अनुभाविक अध्ययन और परिशुद्ध परिणाम देने वाली पद्धतियों को अपनाते हुए इसे सही अर्थों में विज्ञान की स्थिति प्रदान करने की चेष्टा की जानी चाहिए। लेकिन इसके साथ ही यह भी मान लिया गया है कि राजनीति का ज्ञान वास्तविक राजनीतिक जीवन की समस्याओं और जटिलताओं से अलग रहकर नहीं किया जा सकता तथा समस्त राजनीतिक अध्ययन में मूल्यों को केंद्रीय स्थिति प्राप्त होनी चाहिए।

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