Friday, 28 January 2022

राजनीति से आप क्या समझते हैं ? संक्षेप में वर्णन करो।

राजनीति से आप क्या समझते हैं ? संक्षेप में वर्णन करो।

राजनीति का अर्थ

राजनीति (Politics) दो शब्दों का एक समूह है "राज+नीति" अर्थात शासन करने की कला। किसी विशेष उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु नीति विशेष के द्वारा शासन करना राजनीति कहलाती है। 'राजनीति' (Politics) आधुनिक समय में सबसे अधिक प्रचलित शब्द है परन्तु इसके अर्थ के विषय में अलग-अलग लोगों के अलग-अलग मत हैं। प्रायः इस शब्द का प्रयोग ऐसी क्रियाओं अथवा कार्यों के लिए किया जाता है जिन्हें अच्छा नहीं समझा जाता। उदाहरणतः जब यह कहा जाता है कि “विद्यार्थियों को राजनीति में भाग नहीं लेना चाहिए" अथवा "मित्रों को आपस में पॉलिटिक्स नहीं खेलना चाहिए" आदि तो ऐसे कथनों में 'राजनीति' का अर्थ नकारात्मक तथा संकुचित रूप में लिया जाता है। वास्तव में 'राजनीति' एक ऐसी क्रिया है जिस में हम सभी किसी-न-किसी रूप में अवश्य भाग लेते हैं। लोकतन्त्र में रहते हुए तो इससे अलग हुआ ही नहीं जा सकता। अतः हमारे लिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम इस शब्द का अर्थ भली प्रकार समझें।

बहुत समय पहले विद्वान् अरस्तू ने कहा है कि, "मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।" समाज में रहना उसकी स्वाभाविक प्रकृति तथा आवश्यकता है। वह समाज में दूसरों के साथ मिल कर रहता है तथा अपना विकास करता है। समाज में रहता हुआ वह दूसरों से कई प्रकार के सम्बन्ध स्थापित करता है। परन्तु इन सम्बन्धों के साथ-साथ समाज में मतभेद तथा संघर्ष की भी उत्पत्ति होती है क्योंकि मनुष्य समाज में अपनी-अपनी आवश्यकताएं पूर्ण करने के प्रयत्न भी करते हैं। इस कारण समान आवश्यकताओं वाले मनुष्य आपस में मिल कर संघ, समुदाय तथा दल बना लेते हैं तथा ऐसे संगठनों के द्वारा वे अपनी-अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने का यत्न करते हैं। अतः इन संगठनों में संघर्ष तथा समाज में मतभेद पैदा हो जाते हैं। सामाजिक प्राणी होने के कारण मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये क्रांति तथा शक्ति का सहारा न लेकर शांतिपूर्ण संघर्ष (Peaceful Struggle) के द्वारा मतभेदों को दूर करने का प्रयत्न करते हैं। इस संघर्ष द्वारा ये राज्य-सत्ता पर अधिकार प्राप्त कर अपने-अपने विचारों का समाज में राज्य-शक्ति के द्वारा लागू करने के कार्य में जुट जाते हैं। इस रूप में जो क्रिया उत्पन्न होती है उसे राजनीति कहा जाता है। अतः राजनीति एक स्वाभाविक क्रिया है जो प्रत्येक समाज में पाई जाती है।

राजनीतिक क्रिया में लगा हुआ मनुष्य जो सम्बन्ध स्थापित करता है, उन्हें राजनीतिक सम्बन्ध कहा जाता है। राजनीति में हम इसी राजनीतिक क्रिया तथा सम्बन्धों को शामिल करते हैं। अतः 'राजनीति' समाज में विद्यमान राजनीतिक क्रिया तथा सम्बन्धों का सामूहिक नाम है।

व्यापक रूप में 'राजनीति' का यही अर्थ है। परन्तु परम्परागत रूप में 'राजनीति' शब्द का प्रयोग अभी तक संकुचित रूप से किया जाता है। साधारण तौर से इसका अभिप्राय राज्य के कार्यों, सरकार की नीतियों तथा कार्यों अथवा राजनीतिक दलों के कार्य से लिया जाता है।

राजनीतिक कार्यों तथा संगठनों का अध्ययन करने वाले विषय को कुछ लोग राजनीति (Politics), तो कुछ लोग राजनीति-शास्त्र (Political Science) का नाम देते हैं।

'राजनीति-शास्त्र' को 'राजनीति' का नाम देने वाले विचारक अपने को अरस्तू का अनुयायी मानते हैं। अरस्तू की पुस्तक, जिसमें उन्होंने राज्य का अध्ययन किया है, का नाम 'पॉलिटिक्स' (Politics) है। यह शब्द यूनानी शब्द Polis से लिया गया है। Polis का अर्थ है 'नगर-राज्य' (City state)। अतः राज्य के अध्ययन करने वाले विषय का नाम 'पॉलिटिक्स' उचित ही है। इस प्रकार का तर्क जेलीनेक, हाल, जेण्डार्फ, ट्रिटेश, बेन तथा सिजविक ने दिया है। फ्रेडरिक पोलक ने भी इसी नाम को उचित माना है। परन्तु, उन्होंने इस विषय को दो भागों में विभाजित कर दिया है

पोलक द्वारा दिये गये इस विभाजन को मिला कर राजनीति-शास्त्र के अध्ययन का क्षेत्र तो पूर्ण हो जाता है, परन्तु उसका इस विषय को इस आधार पर राजनीति कहना उचित नहीं माना जा सकता। 'राजनीति' शब्द का प्रयोग एक विशेष प्रयोजन से किया जाता रहा है। साधारणतः 'राजनीति' के अर्थों में सब वर्तमान राजनीतिक समस्याएँ ली।

अतः इस रूप में हम राजनीति-शास्त्र को केवल राजनीति नहीं कह सकते। राजनीति-शास्त्र का सम्बन्ध राज्य के मूल आधार, उसकी वास्तविक प्रकृति, उसकी अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों तथा उनके विकास से है। राजनीति से अभिप्राय राज्य के व्यावहारिक संचालन की कला से है। इसी कारण वर्तमान समय के अधिकतर विचारक राजनीति विज्ञान को राजनीति-शास्त्र ही कहते हैं। ब्राईस, बर्गेस, सीले तथा विलोबी ने इसे इसी नाम से सुशोभित किया है। प्राचीन काल में राजनीति-शास्त्र को स्रोत के आधार पर 'राजनीति' कहना ठीक था, परन्तु 'राजनीति' शब्द के ऐसे प्रयोग को देखते हुए हम राजनीति-शास्त्र को केवल 'राजनीति' के नाम से ही सम्बोधित नहीं कर सकते।

कई-एक विचारक इस पक्ष में नहीं हैं कि राज्य के अध्ययन करने वाले विषय को 'राजनीति' का नाम दिया जाए क्योंकि परम्परागत रूप में 'राजनीति' शब्द का प्रयोग एक विशेष रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग समाज में विद्यमान राजनीतिक समस्याओं (Political issues) के लिए सामूहिक रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग सक्रिय राजनीतिक कार्यों अथवा राजनीतिक दलों के कार्यों में भाग लेने के लिये भी किया जाता है। विभिन्न राजनीतिक दलों के दांव-पेचों को भी इसी नाम से जाना जाता है। जब हम यह कहते हैं कि विद्यार्थियों को राजनीति में भाग नहीं लेना चाहिए तो हमारा अभिप्राय यही होता है कि उन्हें राजनीतिक दलों के कार्यों से अलग रहना ही चाहिए। राजनीतिक आन्दोलनों में भाग नहीं लेना चाहिए।

इसी प्रकार इस शब्द का प्रयोग एक देश की नीतियों का दूसरे देशों की नीतियों से भेद प्रकट करने के लिये भी किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, जब हम भारतीय राजनीति (Indian Politics) का नाम लेते हैं तो हमारा अभिप्राय भारतीय राज्य की नीतियों तथा भारत में विद्यमान राजनीतिक क्रियाओं से होता है तथा जो अन्य देशों में प्रचलित राजनीतिक क्रियाओं से भिन्न होती हैं। इन सभी बातों से यह स्पष्ट होता है कि परम्परागत रूप में 'राजनीति' शब्द का प्रयोग एक विशेष रूप में किया जाता है तथा इसके साथ जो भावना प्रकट होती है उसे अच्छा नहीं समझा जाता। इस कारण राज्य के अध्ययन करने वाले विज्ञान के लिये 'राजनीति' कोई उचित नाम नहीं माना जाता है।

'राजनीति' से अभिप्राय व्यावहारिक समस्याओं से लिया जाता रहा है तथा इसका प्रयोग राज्य के संगठन, कार्यों आदि के अध्ययन करने वाले विज्ञान के लिये नहीं किया जा सकता है। इस विज्ञान के लिए उचित नाम राजनीति-शास्त्र (Political Science) ही है। यह नाम एक ओर तो विषय की सैद्धान्तिक प्रकृति (Theoretical Nature) को प्रकट करता है तो दूसरी ओर इस विषय के अध्ययन के वैज्ञानिक स्वरूप को भी प्रकट करता है। 


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