Friday, 5 July 2019

अब्राहम लिंकन द्वारा बेटे के स्कूल के प्रधानाध्यापक को लिखे हुए पत्र

अब्राहम लिंकन द्वारा बेटे के स्कूल के प्रधानाध्यापक को लिखे हुए पत्र

अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के स्कूल के प्रिंसिपल ( प्रधानाध्यापक )को एक पत्र लिखा। जिसमें लिंकन ने उन सभी बातों का जिक्र किया जो वे अपने बेटे को सिखाना चाहते थे। उन्होंने इस पत्र के माध्यम से यह बताया की एक आदर्श शिक्षक को कैसा होना चाहिए तथा उसे अपने शिष्य को दुनिया में अच्छे और बुरे का भेद करना सिखाना चाहिए। अब्राहम लिंकन ने इस पत्र के माध्यम से अपने बेटे में नैतिकता, ईमानदारी, सदाचार और अहिंसा जैसे गुणों को विकसित करने के लिए शिक्षक को प्रेरित किया है। पत्र पढ़ें... 
अब्राहम लिंकन द्वारा बेटे के स्कूल के प्रधानाध्यापक को लिखे हुए पत्र
सम्माननीय सर,
मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे बेटे को भी सीखना होगी। पर मैं चाहता हूँ कि आप उसे यह बताएँ कि हर बुरे आदमी के पास भी अच्छा हृदय होता है। हर स्वार्थी नेता के अंदर अच्छा लीडर बनने की क्षमता होती है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे सिखाएँ कि हर दुश्मन के अंदर एक दोस्त बनने की संभावना भी होती है। ये बातें सीखने में उसे समय लगेगा, मैं जानता हूँ। पर आप उसे सिखाइए कि मेहनत से कमाया गया एक रुपया, सड़क पर मिलने वाले पाँच रुपए के नोट से ज्यादा कीमती होता है। 

आप उसे बताइएगा कि दूसरों से जलन की भावना अपने मन में ना लाएँ। साथ ही यह भी कि खुलकर हँसते हुए भी शालीनता बरतना कितना जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि आप उसे बता पाएँगे कि दूसरों को धमकाना और डराना कोई अच्‍छी बात नहीं है। यह काम करने से उसे दूर रहना चाहिए।

आप उसे किताबें पढ़ने के लिए तो कहिएगा ही, पर साथ ही उसे आकाश में उड़ते पक्षियों को धूप, धूप में हरे-भरे मैदानों में खिले-फूलों पर मँडराती तितलियों को निहारने की याद भी दिलाते रहिएगा। मैं समझता हूँ कि ये बातें उसके लिए ज्यादा काम की हैं।

मैं मानता हूँ कि स्कूल के दिनों में ही उसे यह बात भी सीखना होगी कि नकल करके पास होने से फेल होना अच्‍छा है। किसी बात पर चाहे दूसरे उसे गलत कहें, पर अपनी सच्ची बात पर कायम रहने का हुनर उसमें होना चाहिए। दयालु लोगों के साथ नम्रता से पेश आना और बुरे लोगों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। दूसरों की सारी बातें सुनने के बाद उसमें से काम की चीजों का चुनाव उसे इन्हीं दिनों में सीखना होगा।

आप उसे बताना मत भूलिएगा कि उदासी को किस तरह प्रसन्नता में बदला जा सकता है। और उसे यह भी बताइएगा कि जब कभी रोने का मन करे तो रोने में शर्म बिल्कुल ना करे। मेरा सोचना है कि उसे खुद पर विश्वास होना चाहिए और दूसरों पर भी। तभी तो वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा।

ये बातें बड़ी हैं और लंबी भी। पर आप इनमें से जितना भी उसे बता पाएँ उतना उसके लिए अच्छा होगा। फिर अभी मेरा बेटा बहुत छोटा है और बहुत प्यारा भी।
आपका 

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