Thursday, 6 June 2019

संयुक्त उद्यम प्रस्तावित करने हेतु मित्र के लिए पत्र

103, असीम विला,
आगरा-282003
दिनांक 25-4-2019

विषय : संयुक्त उद्यम प्रस्तावित करने हेतु मित्र के लिए पत्र।

प्रिय मित्र वटवर्धन,
  आपका 18 जुलाई का पत्र प्राप्त हुआ, कृपया इसके लिए आपको धन्यवाद। मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि तुम अभी बेरोजगार हूं। मैं भी ऐसी स्थिति में हूं। मैंने बहुत अधिक प्रयास किया है किंतु कोई उपयुक्त नौकरी प्राप्त करने में सफल नहीं हो सका हूं। मैंने प्रतियोगिता लिखित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है किंतु प्रत्येक बार में असफलता का सामना करना पड़ा है। मुझे यह जानकर अत्यंत कष्ट हुआ कि मेरे बहुत से मित्र जिनके लिखित परीक्षा में मुझसे बहुत कम अंक थे, साक्षात्कार में मुझसे अच्छे अंक होने के कारण चुन लिए गए। मुझे आरक्षण की नीति के कारण और नुकसान उठाना पड़ा है। तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक अनुसूचित जाति का अभ्यर्थी जिसका स्थान मेरे स्थान से 100 स्थान नीचे था, मुख्य पी.सी.एस में चुन लिया गया जबकि मुझे निम्नतम पद भी नहीं दिया गया। हम तथाकथित ऊंची जातियों के साथ कैसा अन्याय किया जा रहा है। प्रिय मित्र, हम अपने समाज की अन्यायपूर्ण स्थिति को बदलने में कुछ नहीं कर सकते। हम केवल यह कर सकते हैं कि हम वैकल्पिक मार्ग अपनाएं और कोई अपना निजी उद्यम चलाएं ।

   जहां तक मुझे जानकारी है प्रतियोगिता परीक्षाओं में मेरी भांति तुम्हें भी भाग्य की विडंबना झेलनी पड़ी है और तुम भी समाज द्वारा दिए गए न्याय के प्रति वास्तविकता से परिचित हो चुके हो। इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि हम दोनों एक छोटी पूंजी से एक संयुक्त उद्यम चालू करें। क्योंकि मेरा जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ है जिसमें व्यापार की परंपराएं रही हैं। मुझे ऐसा लगता है कि मुझे इस कार्य में अच्छी सफलता प्राप्त हो सकती है और फिर उसके साथ ही ईश्वर द्वारा प्रदत्त तुम्हारी होशियारी और सूझबूझ भी तो हमारे साथ हैं। मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि हम प्रकाशन व्यापार में अच्छी सफलता प्राप्त कर सकेंगे। 

   मुझे आशा है कि तुम मेरे प्रस्ताव से सहमत होंगे और इस संबंध में मुझे शीघ्र ही पत्र लिखोगे। तत्पश्चात हम आगे की कार्यवाही के बारे में निर्णय कर सकते हैं जिससे कि बैंकों से आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सके। 

  कृपया अतिशीघ्र उत्तर देने का कष्ट करें। शेष सब ठीक है। आंटी और अंकल को प्रणाम पहुंचाना और नन्हीं सी बहन उषा के लिए स्नेह। 

शुभकामनाओं सहित,
तुम्हारा प्रिय मित्र 
अविनाश

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