दाल भात में मूसलचंद मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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दाल भात में मूसलचंद मुहावरे का अर्थ

दाल भात में मूसलचंद मुहावरे का अर्थ है– व्यर्थ में दखल देने वाला; अनावश्यक हस्तक्षेप करना, कबाब में हड्डी; दो व्यक्तियों की बातों में तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप करना; दो के बीच में तीसरे का बिना काम के घुस जाना।

दाल भात में मूसलचंद मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग- हम दोनों के बीच में तर्क वितर्क हो ही रहा था कि जयदेव का दाल भात में मूसरचंद की भाँति बीच में बोलना मुझे अच्छा नहीं लगा।

वाक्य प्रयोग- शंकर हर जगह दाल-भात में मूसलचन्द की तरह आ जाता है। यदि उसे रोका न गया तो एक दिन वह बड़ी समस्या में फंस जायेगा। 

वाक्य प्रयोग- जुआ खेलते समय पुलिस पहुंच कर दाल भात में मूसलचंद हो गयी।

वाक्य प्रयोग- पूरा परिवार पिकनिक पर जाने की तयारी कर रहा था कि तभी एक अनचाहा मेहमान आ गया ये तो ऐसा हुआ जैसे दाल भात में मुसल चंद।

वाक्य प्रयोग- दाल-भात में मूसलचंद बनने वालों को कोई भी पसंद नहीं करता।

दाल भात में मूसलचंद एक प्रसिद्ध हिन्दी मुहावरा/लोकोक्ति है जिसका का अर्थ है– व्यर्थ में दखल देने वाला; अनावश्यक हस्तक्षेप करना, कबाब में हड्डी; दो व्यक्तियों की बातों में तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप करना; दो के बीच में तीसरे का बिना काम के घुस जाना। जब कोई व्यक्ति बेवजह दो लोगों के बीच कबाब में हड्डी बनता है तो इस मुहावरे का प्रयोग करते है। 

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