चादर के बाहर पैर पसारना का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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चादर के बाहर पैर पसारना का अर्थ

चादर के बाहर पैर पसारना मुहावरे का अर्थ होता है– आय से अधिक व्यय करना;सीमा से बाहर जाना; अपनी हैसियत से बढ़कर खर्च करना। 

चादर के बाहर पैर पसारना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

वाक्य प्रयोग- मध्यम वर्गीय परिवार समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए चादर से बाहर पैर फैलाने लगता है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

वाक्य प्रयोग- मैं अपनी सामर्थ्य से अच्छी तरह परिचित हूँ, इसीलिए चादर से बाहर पाँव पसारने की धृष्टता नहीं कर सकता।

वाक्य प्रयोग- जो लोग अपनी चादर देखकर पैर पसारते हैं वे हमेशा चैन की वंशी बजाते हैं। 

वाक्य प्रयोग- जो लोग अपनी चादर से अधिक पैर पसारते हैं, उन्हें जीवन में भिखारी बनने से कोई रोक नहीं सकता। 

वाक्य प्रयोग- रवि किसी तरह 3000 रुपये महीना कमाकर पूरे घर का पैसे माँग-माँग कर यहाँ-वहाँ खर्च करता रहता है। उसे समझाना पड़ेगा कि चादर से बाहर पाँव पसारना ठीक नहीं है। 

वाक्य प्रयोग- एक आदर्श गृहिणी कभी भी चादर के बाहर पैर नहीं पसारती, सोच-समझकर पैसे को खर्च करती है। 

वाक्य प्रयोग- एक आदर्श गृहिणी कभी भी चादर के बाहर पैर नहीं पसारती, सोच-समझकर पैसे को खर्च करती है। 

चादर के बाहर पैर पसारना एक प्रसिद्ध हिन्दी मुहावरा है जिसका का अर्थ है– आय से अधिक व्यय करना;सीमा से बाहर जाना; अपनी हैसियत से बढ़कर खर्च करना। जब कोई व्यक्ति अपनी हैसियत से बढ़कर काम करता है, या आय से ज्यादा खर्च करता है तो इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं। 

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