अक्ल चरने जाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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अक्ल चरने जाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

अक्ल चरने जाना मुहावरे का अर्थ — बुद्धिमत्ता गायब हो जाना; बुद्धिहीनता का काम करना; समझ का अभाव होना; मति भ्रम होना; बुद्धि भ्रष्ट होना। 

Akal charne jana muhavare ka arth — Buddhimatta gayab ho jana; Buddhihinta ka kaam karna; Samajh ka abhaav hona; Mati bhram hona; Buddhi bhrasht hona.

अक्ल चरने जाना मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग — तुमने साठ साल के बूढ़े से 18 वर्ष की लड़की का विवाह कर दिया। लगता है तुम्हारी अक्ल चरने गई थी। 

वाक्य प्रयोग — अनिल पश्चात्ताप करते हुए मोहन से कह रहा था कि मेरी तो अक्ल ही चरने गई थी कि निखिल की बातों में आकर अपना नुकसान कर बैठा। 

वाक्य प्रयोग — आज तो तुम्हारी बुद्धि घास चरने गई लगती है; हर काम उलटा कर रहे हो। 

वाक्य प्रयोग — क्या तुम्हारी अक्ल चरने गई थी, जो तुम खली पहलवान से जा भिड़े ? कहाँ तुम और कहाँ खली। 

वाक्य प्रयोग — लगता है बॉलीवुड निर्देशकों की अक्ल चरने चली गयी है, तभी ऐसी फ़िल्में बना रहे हैं कि सिनेमा हॉल में एक भी दर्शक झाँकने नहीं आ रहा। 

वाक्य प्रयोग — रमेश की अक्ल चरने गयी है क्या जो अच्छी-भली सरकारी नौकरी को छोड़कर दुकान खोल ली। 

वाक्य प्रयोग — कभी-कभी प्रकाश को छोटी-छोटी बातें भी समझ नहीं आती, ऐसा लगता है उसकी अक्ल चरने गई हो।

वाक्य प्रयोग — कल तो कुशाल अध्यापक जी के सामने ऐसे तन के खड़ा हो गया मानो उसकी अक्ल चरने गई हो।

यहाँ हमने अक्ल चरने जाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग का उदहारण देकर समझाया है। अक्ल चरने जाना मुहावरे का अर्थ होता है — बुद्धिमत्ता गायब हो जाना; बुद्धिहीनता का काम करना; समझ का अभाव होना; मति भ्रम होना; बुद्धि भ्रष्ट होना। जब जरुरत पड़ने पर या सही समय पर किसी व्यक्ति की बुद्धि काम नहीं करती तो उसके लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है। 

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