चूहे का बच्चा बिल खोदता है मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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चूहे का बच्चा बिल खोदता है मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

चूहे का बच्चा बिल ही खोदता है मुहावरे का अर्थ है- बच्चों में पैतृक गुण आ ही जाते हैं; जातीय स्वभाव नहीं छूटता; जातीय संस्कार जीवन भर रहते हैं।

चूहे का बच्चा बिल खोदता है मुहावरे का वाक्य प्रयोग

  1. रमेश के पिता पुरोहिताई करते हैं। वह तो इंजीनियर बन गया किन्तु जातीय गुणों के वशीभूत होकर वह अतिरिक्त समय में पुरोहिताई भी करने लगा है। सत्य ही कहा गया है कि चूहे का जाया बिल ही खोदता है।
  2. इतना पढ़ने-लिखने के बाद भी अर्जुन को अपने पिता के सामान किसानी करना ही पसंद है क्योंकि चूहे का बच्चा बिल ही खोदेगा। 
  3. लाला जी के लड़के में लगी-लगाई सरकारी नौकरी छोड़  अब पिता जी  संभाल रहा है। किसी ने सही ही कहा है कि चूहे का बच्चा बिल ही खोदता है। 
  4. अध्यापक जी शिवम् को समझते रहे कि पढाई कर लो परन्तु वो नहीं माना और आज अपने पिता के मजदूरी कर रहा है क्योंकि  चूहे बच्चा बिल ही खोदता है। 
चूहे का जाया बिल ही खोदता है एक प्रचलित लोकोक्ति या मुहावरा है जिसका अर्थ होता है- बच्चों में पैतृक गुण आ ही जाते हैं; जातीय स्वभाव नहीं छूटता; जातीय संस्कार जीवन भर रहते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने पैतृक या जातिगत स्वाभाव का आचरण कर कार्य करता है तो इस लोकोक्ति का प्रयोग करते हैं। 

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