Thursday, 14 July 2022

शहर में बढ़ते यातायात की समस्या पर दो मित्रों के बीच संवाद - Shahar Mein Badhte Yatayat Ki Samasya Par Do Mitro Ke Beech Samvad

शहर में बढ़ते यातायात की समस्या पर दो मित्रों के बीच हुआ संवाद लिखिए : In This article, We are providing शहर में बढ़ते यातायात की समस्या पर दो मित्रों के बीच संवाद and Shahar Mein Badhte Yatayat Ki Samasya Par Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan for Students and teachers.

    शहर में बढ़ते यातायात की समस्या पर दो मित्रों के बीच संवाद

    अंकुर : क्या बात है संजय, बड़े थके-थके लग रहे हो ?

    संजय : मैं अपने शहर के ट्रैफिक जाम से बुरी तरह ऊब चूका हूँ। 

    अंकुर : सिर्फ तुम्हीं नहीं, हर किसी का यही हाल है। 

    संजय : तुम्हे अंदाजा भी है की इसकी वजह से कितना समय बर्बाद होता है ? अभी कल ही मैं जाम में फंस गया और पूरे दो घंटे देर से स्कूल पहुंचा। 

    अंकुर : मैं भी आजकल समय से कोचिंग नहीं पहुँच पा रहा हूँ। 

    संजय : अपने बारे में छोड़ो, मैं तो ये सोचकर ही डर जाता हूँ की जो लोग रोज ऑफिस जाते हैं उन पर क्या बीतती होगी। सोचो अगर किसी मरीज को फ़ौरन इलाज़ की जरुरत हो और एम्बुलेंस ट्रैफिक जाम में फँस जाए तो क्या होगा ?

    अंकुर : तुम्हारे अनुसार इस ट्रैफिक जाम के लिए कौन जिम्मेदार हैं ?

    संजय : मुझे तो लगता है की ट्रैफिक की समस्या के लिए बढ़ती आबादी ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है। 

    अंकुर : सही कहते है। एक तो बढ़ती आबादी ऊपर से हर किसी को गाड़ी चाहिए। अब गाड़ियाँ बढ़ेंगी तो यातायात की समस्या तो आएगी ही। 

    संजय : अब मेरी कोचिंग का समय हो गया है। फिर मिलते हैं दोस्त। 


    ट्रैफिक की समस्या पर दो मित्रों के बीच संवाद लेखन 

    विक्रम : और भाई सुशांत, कैसे हो ?

    सुशांत : मैं तो ठीक हूँ लेकिन शहर के हाल मुझे कुछ ठीक नहीं लगते।

    विक्रम : क्यों, क्या इस समस्या है इस शहर में ? मुझे तो सब ठीक-ठाक लगता है। 

    सुशांत : लगता है कि तुमने शहर की ख़राब सड़कें नहीं देखी। इनकी वजह से जहाँ देखो वहाँ ट्रैफिक जाम लगा रहता है। 

    विक्रम : पर भाई इसके लिए सिर्फ सड़कें ही जिम्मेदार नहीं हैं। कुछ बस चालाक और ऑटो चालक तो जहाँ देखो वहीँ गाडी रोक देते हैं, इस वजह से भी ट्रैफिक जाम लगता है। 

    सुशांत : सिर्फ यही नहीं, कुछ लोगों ने तो सडकों को तो पार्किंग समझ रखा है। सडकों के किनारे इतनी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं की वाहनों के  निकलने के लिए जगह ही नहीं रह जाती। 

    विक्रम : बहुत से गाड़ी चलाने वाले तो ऐसे हैं की उनके पास ड्राइविंग लइसेंस भी नहीं है। 

    सुशांत : इस सब के बीच ट्रैफिक पुलिस वाले पता नहीं क्या कर रहे हैं ? मुश्किल से ही किसी चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही खड़ा मिलता है। 

    विक्रम : क्यों न हम इस सम्बन्ध में न्यूज पेपर के संपादक को पत्र लिखें ?

    सुशांत : नेक काम में देरी कैसी। मैं आज ही इस विषय पर पत्र लिखूंगा। 


    Shahar Mein Badhte Yatayat Ki Samasya Par Do Mitro Ke Beech Samvad

    राम : अक्षय! आज तुम परीक्षा भवन में देर से क्यों पहुँचे?

    अक्षय : मैं तो समय पर ही घर से निकला था लेकिन रास्ते में ट्रैफिक जाम में फँस गया।

    राम : हाँ, ये तो आजकल बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है।

    अक्षय : कुछ लोग यातायात के नियमों का पालन भी नहीं करते, जहाँ देखो वहीँ गाड़ी घुसेड़ देते हैं। इसी वजह से यातायात बाधित होता है। 

    राम : तुम ठीक कह रहे हो। करता कोई और है और झेलना सबको पड़ता है। लेकिन इसका एक कारण महानगरों में बढ़ती वाहनों की संख्या है।

    अक्षय : सही कहा आज हर घर में वाहन है। कोई पैदल चलना ही नहीं चाहता, दो कदम भी जाना है तो गाड़ी चाहिए। 

    राम : मुझे तो इस समस्या का कोई अंत दिखाई नहीं देता। 

    अक्षय : तुम सही कहते हो। अच्छा मिलता हु जल्दी अभी चलता हूँ। 


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