प्रदूषण पर निबंध - Hindi Essay on Pollution for Students

Admin
1

प्रदूषण पर निबंध - Hindi Essay on Pollution for Students

    प्रदूषण पर निबंध 100 शब्द for Class 1, 2

    पर्यावरण वह परिवेश है जिसमें हम रहतें हैं। प्रदूषकों द्वारा हमारे पर्यावरण का प्रदूषित होना पर्यावरण प्रदूषण है।प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं-ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण। पर्यावरण प्रदूषण के कारण पृथ्वी अपना संतुलन खो सकती है। प्रदूषण के कारण अनेक प्रकार के रोगों का जन्म होता है। वायु प्रदूषण के कारण साँस और आँखों के रोग, खाँसी, दमा आदि होते हैं। प्रदूषित जल के सेवन करने से पेट के रोग हो सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव बढ़ता है। यही नहीं प्रदूषण से उच्च रक्त चाप, हृदय रोग, एलर्जी, चर्म रोग भी हो जाते हैं। मनुष्य की स्वार्थ भावना की वजह से प्रदूषण जैसी समस्याएं उतपन्न हो रही है।

    प्रदूषण पर निबंध 200 शब्द for Class 3, 4

    विश्व की सबसे गंभीर समस्या है प्रदूषण। ‘प्रदूषण’ शब्द का अर्थ है-हमारे आसपास का वातावरण गंदा होना। आज प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं-ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण। प्रदूषण कई प्रकार से होते हैं जैसे जब गाड़ी हॉर्न बजाती है तो उससे आवाज आती है जब हम नदी में कपड़े धोते हैं तो पानी गंदा हो जाता है और हम उसे जब पीते हैं तो बीमार पड़ जाते हैं यह जानवरों के लिए भी हानिकारक है और गाड़ियों की जो स्मोक होती है वह हवा को गंदा कर देती है और जब हम सांस ले लेते हैं तो वह हानिकारक दुआ हमारे नाकों में जाता है और हम बीमार हो जाते हैं। वृक्षों को अंधा-धुंध काटने से मौसम का चक्र बिगड़ा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली न होने से भी प्रदूषण बढ़ा है। आज के समय में हर जगह पर्यावरण प्रदूषित नजर आता है। जैसे कि आप देख सकते हैं कि आसपास के पेड़ सूखते जा रहे हैं और नदियों का पानी भी कम होता जा रहा है। नदिया खत्म हो जाएंगी तो पानी नहीं मिल पाएगा। पेड़ खत्म हो जाएंगे तो शुद्ध हवा नहीं मिल पाएगी। जिससे दिन पर दिन मानव जाति में गिरावट आती जाएगी। बिना जल और शुद्ध हवा के कोई नहीं बच सकता है। मेरा तो यही कहना है कि पर्यावरण बचाओ और जितना ज्यादा हो सके पेड़ लगाएं।

    प्रदूषण पर निबंध 300 शब्द for Class 5, 6

    प्रदूषण की समस्या एक महात्रासदी का रूप धारण कर चुकी है। प्रदूषण, जिसे पर्यावरण प्रदूषण भी कहा जाता है, को पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों (ठोस, तरल या गैस) या ऊर्जा के किसी भी रूप (जैसे गर्मी, ध्वनि या रेडियोधर्मिता) की उपस्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। 

    वायु में प्रदूषण कारखानों, वाहनों और घरों के चूल्हों से फैलता है। यह प्रदूषण मानव जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। इसके कारण नगरों में रहने वाले लोग फेफड़ों के कैंसर, दमा, आंखों के रोगों और धर्मरोगों के शिकार बनते जा रहे हैं। 

    आज सम्पूर्ण भारत में कारखानों, घरों और गंदे नालों से निकला कचरा नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। गंगा जैसे पवित्र नदी एक दूषित जलधारा बन गई है। अन्य मुख्य नदियों जैसे यमुना, गोमती, गोदावरी का भी यही हाल है। जब दूषित जल को पीने के पानी के रूप में, भोजन पकाने या नहाने में प्रयोग किया जाता है तो हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस ए, टाइफाइड और पोलियो जैसे भयंकर रोग मानव को जकड़ लेते हैं। विषाक्त जल भोजन को भी दूषित करता है। 

    ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक प्रकोप शहरों व मुख्य राज्यमागों पर नजर आता है। अधिक शोर की वजह से हजारों व्यक्ति अपनी श्रवण शक्ति खो बैठे हैं या कम सुनने लगे हैं। उच्च शोर के स्तरों से दिमागी बीमारियां और उच्च रक्तचाप हो सकते हैं। व्यक्ति अपना संतुलन भी खो सकता है। 

    प्रदूषण को रोकने के कई उपाय किये गये हैं। दुपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों व मोटरकारों तथा ट्रकों के प्रदूषण स्तरों की नियमित जांच हो रही है। वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण अभियान समय-समय पर आयोजित होते हैं। ये प्रयास सराहनीय हैं। विद्युत चालित वाहनों और सूर्य की ऊर्जा पर अधिक निर्भर करना होगा। यह प्रवृत्ति विश्व भर के लोगों द्वारा अपनायी जानी चाहिए। सरकारें, संयुक्त राष्ट्र संघ और गैर-सरकारी संस्थान इस विषय में काफी कार्य कर रहे हैं।

    प्रदूषण पर निबंध 400 शब्द for Class 7, 8

    प्रदूषण, विषैले तत्वों या प्रदूषकों के वातावरण में मिश्रण को कहा जाता है। जब यह प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनो में मिल जाते है। तो इसके कारण कई नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है। प्रदूषण मानवीय और प्राकृतिक दोनों गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होते है। वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है। मानव कृतियों से निकलने वाले कचरे को नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है। लोंगों द्वारा बनाये गये अवशेष को पृथक न करने के कारण बने कचरे को फेंके जाने से भूमि (जमीन) प्रदूषण होता है। यह हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। पर्यावरण प्रदूषण के कुछ ऐसे कारण है जो प्राकृतिक है, जैसे सूखा, बाढ़, भूकम्प, लावा, सुनामी आदि से जब वनस्पति नष्ट होती है, जल स्त्रोत नष्ट होते है, जीव-जन्तुओं की मृत्यु होती है तथा बहुत सी बाधाएँ उत्पन्न होती है, जिससे मानव हानि होती है।

    बचपन में हम जब भी गर्मी की छुट्टियों में अपने दादी-नानी के घर जाते थे, तो हर जगह हरियाली ही हरियाली फैली होती थी। हरे-भरे बाग-बगिचों में खेलना बहुत अच्छा लगता था। चिड़ियों की चहचहाहट सुनना बहुत अच्छा लगता था। अब वैसा दृश्य कहीं दिखाई नहीं देता। आजकल के बच्चों के लिए ऐसे दृश्य केवल किताबों तक ही सीमित रह गये हैं। ज़रा सोचिए ऐसा क्यों हुआ। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य, जल, वायु, आदि सभी जैविक और अजैविक घटक मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। सभी का पर्यावरण में विशेष स्थान है।

    प्रदूषण का अर्थ

    जब वायु, जल, मृदा आदि में अवांछनीय तत्व घुलकर उसे इस हद तक गंदा कर देते है, कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगे तो उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है। साथ ही यह मानव जीवन के लिए भी खतरे की घंटी है।

    मनुष्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसने जितनी नासमझी से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, अब उतनी ही समझदारी से प्रदूषण की समस्या को सुलझाये। वनों की अंधाधुंध कटाई भी प्रदूषण के कारको में शामिल है। अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर इस पर काबू पाया जा सकता है। इसी तरह कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

    उपसंहार

    अगर हमें अपनी आगामी पीढ़ी को एक साफ, सुरक्षित और जीवनदायिनी पर्यावरण देना है, तो इस दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे। और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना सिर्फ हमारे देश ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी के लिए आवश्यक है। ताकि सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवन रह सके।

    प्रदूषण पर निबंध 450 शब्द for Class 9, 10

    प्रस्तावना : विज्ञान के इस युग में मानव को जहां कुछ वरदान मिले है, वहां कुछ अभिशाप भी मिले हैं। प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप हैं जो विज्ञान की कोख में से जन्मा हैं और जिसे सहने के लिए अधिकांश जनता मजबूर हैं।

    प्रदूषण का अर्थ : प्रदूषण का अर्थ है -प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना।

    प्रदूषण कई प्रकार का होता है! प्रमुख प्रदूषण हैं - वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि-प्रदूषण ।

    वायु-प्रदूषण : महानगरों में यह प्रदूषण अधिक फैला है। वहां चौबीसों घंटे कल-कारखानों का धुआं, मोटर-वाहनों का काला धुआं इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दूभर हो गया है। मुंबई की महिलाएं धोए हुए वस्त्र छत से उतारने जाती है तो उन पर काले-काले कण जमे हुए पाती है। ये कण सांस के साथ मनुष्य के फेफड़ों में चले जाते हैं और असाध्य रोगों को जन्म देते हैं! यह समस्या वहां अधिक होती हैं जहां सघन आबादी होती है, वृक्षों का अभाव होता है और वातावरण तंग होता है।

    जल-प्रदूषण : कल-कारखानों का दूषित जल नदी-नालों में मिलकर भयंकर जल-प्रदूषण पैदा करता है। बाढ़ के समय तो कारखानों का दुर्गंधित जल सब नाली-नालों में घुल मिल जाता है। इससे अनेक बीमारियां पैदा होती है।

    ध्वनि-प्रदूषण : मनुष्य को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए। परन्तु आजकल कल-कारखानों का शोर, यातायात का शोर, मोटर-गाड़ियों की चिल्ल-पों, लाउड स्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है।

    प्रदूषणों के दुष्परिणाम: उपर्युक्त प्रदूषणों के कारण मानव के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है। खुली हवा में लम्बी सांस लेने तक को तरस गया है आदमी। गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियां पैदा करती हैं। भोपाल गैस कारखाने से रिसी गैस के कारण हजारों लोग मर गए, कितने ही अपंग हो गए। पर्यावरण-प्रदूषण के कारण न समय पर वर्षा आती है, न सर्दी-गर्मी का चक्र ठीक चलता है। सुखा, बाढ़, ओला आदि प्राकृतिक प्रकोपों का कारण भी प्रदूषण है।

    प्रदूषण के कारण : प्रदूषण को बढ़ाने में कल-कारखाने, वैज्ञानिक साधनों का अधिक उपयोग, फ्रिज, कूलर, वातानुकूलन, ऊर्जा संयंत्र आदि दोषी हैं। प्राकृतिक संतुलन का बिगड़ना भी मुख्य कारण है। वृक्षों को अंधा-धुंध काटने से मौसम का चक्र बिगड़ा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली न होने से भी प्रदूषण बढ़ा है।

    सुधार के उपाय : विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए चाहिए कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं, हरियाली की मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हों। आबादी वाले क्षेत्र खुले हों, हवादार हों, हरियाली से ओतप्रोत हों। कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए और उनसे निकले प्रदूषित मल को नष्ट करने के उपाय सोचना चाहिए।

    प्रदूषण पर निबंध 500 शब्द for Class 11

    प्रदूषण आज की दुनिया की एक गंभीर समस्या है। वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और जल प्रदूषण पर्यावरण प्रदूषण के तीन प्रमुख घटक हैं। प्रदूषण का हर प्राणी पर नकारात्मक और खतरनाक प्रभाव पड़ता है। प्रदूषित वातावरण मानव स्वास्थ्य को विभिन्न तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। प्रदूषण के कारण हरितगृह (ग्रीनहाउस) प्रभाव और वैश्विक ताप में वृध्दि, ओजोन परत का क्षय होना, अम्लीय वर्षा होना, भूस्खलन, मृदा का क्षरण आदि चीजें होती हैं। 

    प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है-गंदगी। वह गंदगी जो हमारे चारों ओर फैल गई है और जिसकी गिरफ्त में पृथ्वी के सभी निवासी हैं उसे प्रदूषण कहा जाता है। प्रदूषण को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। ये तीनों ही प्रकार के प्रदूषण मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं।

    वायु और जल प्रकृति-प्रदत्त जीवनदायी वस्तुएँ हैं। जीवों की उत्पत्ति और जीवन को बनाए रखने में इन दोनों वस्तुओं का बहुत बड़ा हाथ है। वायु में जहाँ सभी जीवधारी साँस लेते हैं वहीं जल को पीने के काम में लाते हैं।वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिल जाना है। वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं। जल में नगरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदा पानी प्रवाहित किया जाता रहा है। इससे जल के भंडार; जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है।

    वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिल जाना है। वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं। जल में नगरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदा पानी प्रवाहित किया जाता रहा है। इससे जल के भंडार; जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है। ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है – बढ़ती आबादी के कारण निरंतर होनेवाला शोरगुल। महानगरों में तो ध्वनि-प्रदूषण अपनी ऊँचाई पर है।

    महानगरों में तो ध्वनि-प्रदूषण अपनी ऊँचाई पर है। प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर नजर आते हैं। प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं। गंदा जल, जल में निवास करने वाले जीवों के लिए भी बहुत हानिकारक होता है। आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना टेढ़ी खीर हो गई है। अनेक प्रकार के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास अब तक नाकाफी सिद्ध हुए हैं।

    अत: स्पष्ट है कि जब तक जन-समूह निजी स्तर पर इस कार्य में सक्रिय भागीदारी नहीं करता, तब तक इस समस्या से निबटना असंभव है। हरेक को चाहिए कि वे आस-पास कूड़े का ढेर व गंदगी इकट्‌ठा न होने दें।

    निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है । प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है। सामूहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

    प्रदूषण पर निबंध 1000 शब्द  for Class 12

    प्रदूषण (Pollution )

    मनुष्य के वातावरण में हानिकारक, जीवन नाशक, विषैले पदार्थों के एकत्रित होने को प्रदूषण कहते हैं । साधारणतः प्रदूषण ५ प्रकार के होते है जैसे की – वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणी ताज़ी हवा और पानी की आपूर्ति पर निर्भर हैं। जब ये संसाधन प्रदूषित होते हैं, तो जीवन के सभी रूपों को खतरा होता है।

    प्रदूषक

    वे पदार्थ जो प्रदूषण फैलाते हैं प्रदूषक कहलाते हैं। प्रदूषक एक हानिकारक रसायन या पदार्थ है जिसका पर्यावरण पर अवांछित प्रभाव पड़ता है। प्रदूषक प्राकृतिक या मानव निर्मित भी हो सकते हैं, जैसे ज्वालामुखी राख, कचरा या कारखानों द्वारा उत्पादित अपवाह। प्रदूषक हवा, पानी और जमीन की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कीटनाशक आदि।

    बहुत सी चीजें जो लोगों के लिए उपयोगी हैं, प्रदूषण पैदा करती हैं। कार और मोटरसाइकिलें प्रदूषण फैलाती हैं। बिजली बनाने के लिए कोयला जलाने से हवा प्रदूषित होती है। उद्योग और घर कचरा और सीवेज उत्पन्न करते हैं जो भूमि और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं। कीटनाशक-रासायनिक जहर जो खरपतवार और कीड़ों को मारते थे-जलमार्ग में रिसते हैं और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। 

    प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है। हालाँकि शहरी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक प्रदूषित हैं, लेकिन प्रदूषण उन दूरस्थ स्थानों तक फैल सकता है जहाँ कोई नहीं रहता है। उदाहरण के लिए, अंटार्कटिक बर्फ की चादर में कीटनाशक और अन्य रसायन पाए गए हैं। उत्तरी प्रशांत महासागर के मध्य में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों का एक विशाल संग्रह पाया गया है जिसे ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच के नाम से जाना जाता है।

    हवाएँ परमाणु रिएक्टर से गलती से रिसने वाले रेडियोधर्मी प्रदुषण को अपने प्रवाह के साथ इसे दुनिया भर में ले जाती हैं। एक देश में एक कारखाने से निकलने वाला धुआं दूसरे देश में चला जाता है।

    वायु प्रदूषण

    वायु प्रदूषण से तात्पर्य है जब ऐसे प्रदूषक वायु में मिल जाते हैं जो मानव स्वास्थ्य और संपूर्ण ग्रह के लिए हानिकारक होते हैं। कभी-कभी वायु प्रदूषण देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति बड़े ट्रकों या कारखानों के निकास पाइपों से गहरा धुंआ निकलता देख सकता है। हालाँकि, वायु प्रदूषण ज्यादातर अदृश्य होता है।

    प्रदूषित हवा खतरनाक हो सकती है, भले ही प्रदूषक अदृश्य हों। इससे लोगों की आंखें जल सकती हैं और उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। यह फेफड़ों के कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकता है। 1984 में, भारत के भोपाल में एक कीटनाशक संयंत्र में एक दुर्घटना ने हवा में एक घातक गैस छोड़ी। कुछ ही दिनों में कम से कम 8,000 लोग मारे गए। सैकड़ों हजारों लोग स्थायी रूप से घायल हो गए।

    जल प्रदूषण

    जल प्रदूषण ऐसे पदार्थों द्वारा जल स्रोतों का संदूषण है जो पानी को पीने, खाना पकाने, सफाई, तैराकी और अन्य गतिविधियों के लिए अनुपयोगी बनाते हैं। प्रदूषकों में रसायन, कचरा, बैक्टीरिया और परजीवी शामिल हैं। प्रदूषण के सभी रूप अंततः पानी में अपना रास्ता बना लेते हैं।

    सामान्यतः प्रदूषित पानी गंदा दिखता है, उसमें बदबू आती है और कचरा तैरता रहता है। कुछ प्रदूषित पानी साफ दिखता है, लेकिन हानिकारक रसायनों से भरा होता है जिसे आप देख या सूंघ नहीं सकते।

    प्रदूषित पानी पीने और तैरने के लिए असुरक्षित है। कुछ लोग जो प्रदूषित पानी पीते हैं, वे खतरनाक रसायनों के संपर्क में आते हैं जो उन्हें सालों बाद बीमार कर सकते हैं। अन्य बैक्टीरिया और अन्य छोटे जलीय जीवों का सेवन करते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं। 

    कई बार प्रदूषित पानी लोगों को परोक्ष रूप से नुकसान पहुंचाता है। वे बीमार हो जाते हैं क्योंकि प्रदूषित पानी में रहने वाली मछलियाँ खाने के लिए असुरक्षित होती हैं। उनके मांस में बहुत अधिक प्रदूषक होते हैं।

    भूमि प्रदूषण

    जल को दूषित करने वाले अनेक प्रदूषक भूमि को भी हानि पहुँचाते हैं। खनन के परिणामस्वरूप मिट्टी खतरनाक रसायनों से दूषित हो जाती है। कचरा भूमि प्रदूषण का एक और रूप है। दुनिया भर में, कागज, डिब्बे, कांच के जार, प्लास्टिक उत्पाद और बेकार कारें और उपकरण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। कचरे में अक्सर तेल, रसायन और स्याही जैसे खतरनाक प्रदूषक होते हैं। ये प्रदूषक मिट्टी में मिल सकते हैं और पौधों, जानवरों और लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    कई बार कूड़ा उठाकर लैंडफिल में दबा दिया जाता है। कई बार लोग इतना कचरा पैदा कर देते हैं कि उनके लैंडफिल भर जाते हैं।

    कभी-कभी, लैंडफिल को उनके आसपास की भूमि से पूरी तरह से सील नहीं किया जाता है। लैंडफिल से प्रदूषक पृथ्वी में रिसते हैं जिसमें वे दबे होते हैं। वहां उगने वाले पौधे दूषित हो जाते हैं और पौधों को खाने वाले जीव भी बीमार हो जाते हैं।

    कुछ शहरों में उनका कूड़ा-करकट जला दिया जाता है या जला दिया जाता है। कचरा जलाने से इससे छुटकारा तो मिलता है, लेकिन यह खतरनाक भारी धातुओं और रसायनों को हवा में छोड़ता है। इसलिए जहां कचरा जलाने से भूमि प्रदूषण की समस्या में मदद मिल सकती है, वहीं वे कभी-कभी वायु प्रदूषण की समस्या को भी बढ़ा देते हैं।

    कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग किया जाता है। कुछ फल और सब्जियां कीटनाशकों को अवशोषित करती हैं जो उन्हें बढ़ने में मदद करती हैं। जब लोग फलों और सब्जियों का सेवन करते हैं, तो कीटनाशक उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। कुछ कीटनाशक कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण बन सकते हैं। 

    प्रदूषण को कम करना

    दुनिया भर में लोग और सरकारें प्रदूषण से निपटने के लिए प्रयास कर रही हैं। उदाहरण के लिए, बेकार सामान का पुनर्चक्रण अधिक आम होता जा रहा है। रीसाइक्लिंग में, कचरे को संसाधित किया जाता है ताकि इसे फिर से इस्तेमाल किया जा सके। कांच, एल्यूमीनियम के डिब्बे और कई प्रकार के प्लास्टिक को पिघलाकर पुन: उपयोग किया जा सकता है। कागज को तोड़ा जा सकता है और नए कागज में बदला जा सकता है।

    पुनर्चक्रण कचरे की मात्रा को कम करता है। ऑस्ट्रिया और स्विट्ज़रलैंड में रीसाइक्लिंग दर सबसे ज्यादा है। ये देश अपने कचरे का 50 से 60 प्रतिशत के बीच पुनर्चक्रण करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका अपने कचरे का लगभग 30 प्रतिशत पुनर्चक्रण करता है।

    Post a Comment

    1Comments
    1. There's an excellent no deposit bonus out there to play the Viking Age Slot machine by Betsoft. Let's end this journey with one of the best basic video games you 온라인카지노 can to|you possibly can} play online. The one hundred pc match bonus (capped at $500) is a superb alternative to discover the nice variety of Roulette video games on PartyCasino. With an account at 888Casino you know your cash is protected, the video games are fair, and support reps are there to make your gaming expertise pretty much as good} as it can be be}.

      ReplyDelete
    Post a Comment

    #buttons=(Accept !) #days=(20)

    Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
    Accept !