अल्पसंख्यकों की समस्याओं का वर्णन कीजिए

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अल्पसंख्यकों की समस्याओं का वर्णन कीजिए

अल्पसंख्यकों की समस्याओं का वर्णन कीजिए

अल्पसंख्यकों की समस्याएं - Alpsankhyak ki Samasya in Hindi

  • 1. पारिवारिक समस्याएं
  • 2. धार्मिक समस्याएं
  • 3. सामान्य जीवन से सम्बन्धित समस्याएं
  • 4 भाषायी समस्याएं
  • 5. विसंगति की समस्या
  • 6. राजनीतिक समस्याएं

1. पारिवारिक समस्याएं - पाश्चात्य जगत के प्रभाव से भारतीय समाज में हानिकारक परिवर्तन हो रहे हैं। आज का व्यक्ति परिवार की तुलना में व्यक्तिगत समस्याओं पर विशेष ध्यान देता है जिसके कारण परिवारों में विघटन बढ़ने लगा है। पाश्चात्य जगत के प्रभाव से अल्पसंख्यकों में देर से विवाह, प्रेमविवाह, अन्तरजातीय विवाह, तलाक की प्रवृत्तियाँ आदि समस्याएँ बढ़ रही हैं। परिणामस्वरूप व्यक्ति में एकाकीपन बढ़ रहा है जिससे मानसिक अवसाद बढ़ता है। इस मानसिक अवसाद से प्रेरित होकर व्यक्ति आत्महत्या जैसा अपराध कर बैठता है।

2. धार्मिक समस्याएं - भारत में विभिन्न प्रकार के धर्मों के लोग निवास करते हैं। भारत के मुगल शासनकाल में मुसलमानों का वर्चस्व था तथा उन्हें शासन की ओर से विशेष सुविधाएँ प्राप्त थीं। इसी । कारण भारत के कई हिन्दुओं ने अपने धर्म में परिवर्तन करके मुस्लिम धर्म अपना लिया। इसी प्रकार अंग्रेजों के आगमन होने के पश्चात यहाँ ईसाई धर्म का आगमन हुआ, फलस्वरूप हजारों परिवारों ने ईसाई धर्म को अपनाया। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों में पूरी तरह से भारतीयता समाप्त नहीं होती है। इस प्रकार उनके सामने गम्भीर समस्या उत्पन्न हो गयी है कि भारतीय न तो पूरी तरह से हिन्द रह गये और न ही दूसरे धर्मो के आदर्शों को पूरी तरह से अंगीकार कर सके।

3. सामान्य जीवन से सम्बन्धित समस्याएं - अल्पसंख्यकों को अपने सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामाना करना पड़ता है। खान-पान, रहन-सहन, पोशाक, जूता, हेयर स्टाइल आदि प्रत्येक चीजों में बदलाव के बाद संसार में परिवर्तन नजर आता है। भले ही उन चीजों से इन्सान को कोई फायदा न होता हो लेकिन आजकल नया बनने की चाह में पश्चिमी देशों की भाँति. फैशन सा हो गया है। पहले के समय में लोग नमस्कार या प्रणाम किया करते थे तथा अब वे हाय किया करते है। डिस्को क्लब, राक एन रोल' संस्कृति ने सामान्य जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है जिसका भुगतान बाल-अपराध, यौन अपराध, आत्महत्या और हिंसा के रूप में समाज को करना पट या

4. भाषायी समस्याएं - अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेजी भाषा का अधिक महत्व था। जो लोग मैकाले की शिक्षा नीति एवं अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान रखते थे उन्हें सरकारी नौकरी जल्दी मिल जाती थी। दक्षिण भारत से सम्पर्क अंग्रेजी के माध्यम से होने लगा और उसके साथ ही साथ हिन्दी की लगातार उपेक्षा की जाने लगी। राष्ट्रभाषा हिन्दी का महत्व इसलिए कम होने लगा क्योंकि अंग्रेजी भाषा ने एक राष्ट्र का दूसरे राष्ट्र के साथ सम्पर्क सूत्र स्थापित किया है। संविधान के लागू होने के पश्चात् भारत में अधिकांशतः अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है। जो राज्य गैर-हिन्दी भाषीय हैं वे किसी भी कीमत पर हिन्दी भाषा को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं बल्कि इसके स्थान पर अंग्रेजी के इस विवाद ने अनेकों समस्याओं को जन्म दिया है।

5. विसंगति की समस्या - नवयुवकों को पाश्चात्य जगत का आकर्षण शीघ्र ही आकर्षित कर लेता है और उसे पाने के लिए वे 'शार्टकट' शाखा अपनाने को तैयार हो जाते हैं जबकि एक ओर समाज स्वीकृत समाज के मानदण्ड और अपने सदस्यों के अनुकूल व्यवहार की अपेक्षा करता है, यही विसंगति है।

6. राजनीतिक समस्याएं - स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात लोकतन्त्र की स्थापना हुई किन्तु यहाँ के व्यक्ति अपने को इसके अनुरूप ढाल नही पाये क्योंकि यह लोकतन्त्र नहीं है बल्कि भीड़तन्त्र या भ्रष्टतन्त्र है। आजकल चुनाव में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है। विधायकों एवं सांसदों को अनेक प्रकार के लालच ने भ्रष्ट बना दिया है। इस प्रकार अनेक राजनीतिक समस्याएँ जन्म लेती हैं।

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