भारतीय गाँव एक इकाई के रूप में वर्णन कीजिए।

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भारतीय गाँव एक इकाई के रूप में वर्णन कीजिए।

भारतीय गाँव एक इकाई के रूप में : विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा यह पूर्णतः स्पष्ट किया गया है कि भारतीय गाँव एक इकाई समान है। भारत के गाँवों का अवलोकन करने पर यह पता चलता है कि गाँव में व्यक्ति सामूहिक जीवन-यापन करता है और गाँव एक निश्चित भू-भाग में एक समूह के रूप में बसा होता है। भारत में बसे हए प्रत्येक गाँव की अपनी अलग पहचान होती है। गाँव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि होता है जिस पर सभी ग्रामवासियों का जीवन निर्भर करता है। प्रत्येक गाँव की पृथकता वहाँ के यातायात साधन और सड़कों की कमी तथा कृषि पर निर्भरता स्पष्ट करती है गाँव में उत्सव एवं त्योहार सभी आपस में मिलकर मनाते हैं। इन अवसरों पर गाँवों में पूर्ण एकता दिखाई पड़ती है। विभिन्न दृष्टियों से भारतीय गाँव की इकाई के रूप में समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि लगान वसूलने की दृष्टि से भी सरकारी खातों में राजस्व के खसरे और खतौनी में एक गाँव की मान्यता प्रदान की गई है। इसी आधार पर यह कहा जाता है कि अमुक खेत अमुक गाँव का है और इसी आधार पर उस गाँव के लगान का निर्धारण किया जाता है। डाकघर की दृष्टि से प्रत्येक गाँव एक इकाई माना जाता है, क्योंकि डाकिया प्रत्येक गाँव की अलग-अलग डाक छांटकर एक इकाई के रूप में रखता है और उसका वितरण करता है। धार्मिक दृष्टि से देखने पर भी गाँव एक इकाई के रूप में दिखाई पड़ता है, क्योंकि प्रत्येक गाँव का एक ग्रामदेवता होता है और गाँव वालों को उस पर पूरा विश्वास होता है। प्रत्येक गाँव की अपनी एक विशिष्टता होती है. जिसके आधार पर उसे पहचाना जाता है।

इस प्रकार एक गाँव इकाई के रूप में दिखाई पड़ता है और इनकी एकता आपत्ति व विपत्ति के समय देखने को मिलती है। उपरोक्त विवेचन के आधार पर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि प्रत्येक गाँव एक इकाई है। 

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