भारतीय नागरिक के मूल कर्तव्य कौन-कौन से हैं ?

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भारतीय नागरिक के मूल कर्तव्य कौन-कौन से हैं ?

भारतीय नागरिकों के मूल कर्त्तव्य : मौलिक कर्तव्यों को नैतिक दायित्वों के रूप में परिभाषित किया गया है।मूल कर्तव्यों का उद्देश्य देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने तथा भारत की एकता को बनाए रखना है। संविधान के चतुर्थ भाग में वर्णित ये कर्तव्य व्यक्तियों और राष्ट्र से संबंधित हैं। निदेशक सिद्धांतों की तरह, इन्हें कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। हमारे संविधान में भारतीय नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों के बारे में प्रकाश नहीं डाला गया था। -2वें संविधान संशोधन में एक अध्याय भाग 4क तथा एक नया अनुच्छेद 51क जोड़कर 10 मूल कर्तव्यों को परिभाषित किया गया ये मूल कर्त्तव्य निम्न हैं

भारतीय नागरिक के मूल कर्तव्य 

  1. प्रत्येक नागरिक का मूल कर्त्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे तथा उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज तथा राष्ट्रगीत का आदर करें।
  2. प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि हमारे राष्ट्रीय आन्दोलनों को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों को हृदय में संजोये तथा उसका अनुसरण करें।
  3. भारत की एकता, प्रभुता व अखण्डता की रक्षा करे व उसे बनाये रखें। 
  4. देश की रक्षा करें तथा आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
  5. भारत के सभी लोगों में समरसत्ता व सामान्य भाई-चारे की भावना को बढ़ावा दे, जो धर्म-भाषा, प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेद-भाव से दूर हो। ऐसी प्रथाओं का परित्याग करें जो स्त्रयों की गरिमा के लिए अपमानजनक हों।
  6. प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है कि हमारी मिली-जुली संस्कृति की समृद्ध परम्परा का महत्व समझे व उसको बनाये रखें।
  7. जंगलों, झीलों, नदियों व जंगली जीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा व उन्नति करें। जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखें।
  8. वैज्ञानिक रुझान, मानववाद तथा ज्ञान व सुधार की भावना का विकास करें। 
  9. सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करें व हिंसा से दूर रहें।
  10. व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर प्रयास करें, जिससे राष्ट्र लगातार प्रयत्न व उपलब्धि के उच्च स्तरों को पायें। 

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