विकास की चुनौतियों को स्पष्ट कीजिए

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विकास की चुनौतियों को स्पष्ट कीजिए

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विकास की मुख्य चुनौतियां : विकास की समस्या प्रारम्भ से ही भारत में एक मुख्य समस्या रही है। भारत को प्रारम्भ से ही विकास की परम आवश्यकता रही है। अंग्रेजों के शासन काल में भारत का आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक विकास पूर्ण रूप में रुक गया था। भारत के विकास के स्वप्न को जिस रूप में देखा गया था वह स्वप्न पूर्ण नहीं हो पाया। भारत के विकास में आज इतनी अधिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं, जिनकी गणना करना सम्भव नहीं है। यह समस्याएँ आज अनेक रूपों में विद्यमान हैं।

विकास की मुख्य चुनौतियां

(1) जनसंख्या की समस्या - भारत के विकास में जनसंख्या की समस्या एक मुख्य समस्या के रूप में विद्यमान है। भारत की जनसंख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है जिसके परिणामस्वरूप गरीबी, बेरोजगारी जैसी गम्भीर समस्याएँ भी उत्पन्न हो गई हैं। इन समस्याओं का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होता है जिसका धीरे-धीरे पतन होता जा रहा है। भारत की तीव्र बढ़ती जनसंख्या के कारण साधनों का अभाव होता जा रहा है। बेरोजगारी में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है आर्थिक रूप से पिछड़ने के कारण भारत की प्रगति भी रुक रही है।

(2) गरीबी - भारत में गरीबी की समस्या भी विकराल रूप में उपस्थित है। भारत में बेरोजगारी जिस प्रकार से निरन्तर बढ़ती जा रही है। उसका कारण गरीबी है। गरीबी का सबसे मुख्य कारण आय तथा व्यय का असमान वितरण है क्योंकि व्यक्तियों में आर्थिक असमानता दिन-प्रतिदिन व्यापक रूप में फैलती ही जा रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर भी निम्न है, जिससे गरीबी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यह गरीबी आज भारतीय विकास की सबसे बड़ी बाधा है।

(3) आर्थिक पिछड़ापन - आर्थिक समृद्धि किसी भी देश के लिए अत्यधिक आवश्यक है क्योंकि आर्थिक रूप से विकसित देश ही प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। लेकिन भारत में आर्थिक समृद्धि उस रूप में नहीं हो पा रही है जिस रूप में समृद्धि होनी चाहिए। आज आर्थिक विकास के लिए यद्यपि नये साधनों का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन आर्थिक रूप से प्रगति के लिए नये-नये प्रयोग तथा तकनीकी की आवश्यकता होती है। भारत में इन तकनीकों का अभाव पाया जाता है। इसी कारण भारत आज आर्थिक रूप से अत्यन्त निर्बल है।

(4) साधनों की कमी - भारत में साधनों की कमी है। कृषि प्रधान देश होते हुए भी भारत कृषि के क्षेत्र में अधिक तकनीकों का प्रयोग नहीं कर पाया। कृषि क्षेत्र में बीज, खाद में अनेक नवीन आविष्कारों का जन्म हुआ है। लेकिन आज भी कृषि उद्योगों के समान स्थान प्राप्त नहीं हो पाया। सरकार के द्वारा विभिन्न तथा कार्यक्रमों से आर्थिक समस्याओं का निराकरण की व्यवस्था की गयी है लेकिन इसके पश्चात् भी कृषि का पिछड़ापन भारतीय विकास के मार्ग में बाधा बना हुआ है।

(5) साक्षरता का अभाव - भारत में विकास की गति धीमी होने का मुख्य कारण है कि स्वतन्त्रता के 60 वर्षों के पश्चात् भी जनता में साक्षरता का अभाव है जिससे जनता राज्य के कार्यों के प्रति उदासीन है। वह राज्य के कार्यों में अधिक भागीदारी नहीं दिखाती है, जो व्यक्ति आज उच्च शिक्षित हैं वह भी अपने ज्ञान का प्रयोग विदेशों में कर रहे हैं। जिससे भारत योग्यता से वंचित हो रहा है। जिस ज्ञान के द्वारा भारत का विकास होना चाहिए उस ज्ञान का उपयोग विदेशों में होता है, जिससे विकास का मार्ग अवरूद्ध हो जाता है।

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