राज्य की उत्पत्ति के पितृसत्तात्मक सिद्धांत को समझाइये।

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राज्य की उत्पत्ति के पितृसत्तात्मक सिद्धांत को समझाइये।

राज्य की उत्पत्ति का पितृसत्तात्मक सिद्धांत

राज्य की उत्पत्ति के पितृसत्तात्मक सिद्धांत के अनुसार प्राचीन समय में समाज व्यक्तियों का समूह न होकर परिवार का समूह था और प्राचीन समाज की इकाई परिवार था। इस परिवार के प्रारम्भिक परिवारों में पिता की प्रधानता होती थी। प्रारम्भ में परिवार था, जिसकी वृद्धि से जाति अस्तित्व में आयी, जाति से समुदाय तथा समुदाय से समाज का निर्माण हुआ और कालान्तर में इसी समाज ने राज्य का रूप ले लिया है। लीकॉक ने इस विकास क्रम का वर्णन करते हुए, कहा है कि "पहले एक गृहस्थी, फिर एक पितृ-प्रधान परिवार, फिर समान नस्ल के व्यक्तियों की एक जाति और फिर अन्त में एक राष्ट्र, सामाजिक श्रृंखला का निर्माण इसी आधार पर हुआ है।"

पितृसत्तात्मक सिद्धांत की विशेषताएं

  1. पितृसत्तात्मक सिद्धांत के अनुसार प्राचीन समाज में समाज की इकाई व्यक्ति न होकर परिवार था।
  2. इस सिद्धांत के अनुसार आदिकाल में विवाह की प्रथा प्रचलित थी और पितृसत्तात्मक तत्व मुख्य था।
  3. वंशावली केवल पुरुषों से खोजी जाती थी। स्त्री पक्ष का कोई भी उत्तराधिकारी परिवार में शामिल नहीं किया जाता था।
  4. अन्तिम सत्ता पितृसत्तात्मक परिवार के प्रधान मखिया के हाथों में थी, जिसके अन्तर्गत परिवार के सभी सदस्य आ जाते थे।

सर हेनरी मैन ने पैतृक सिद्धांत का सबसे प्रबल समर्थन किया है। उन्होंने अपने इस सिद्धांत की पुष्टि यूनानवासी हिन्दू जाति, रोमवासियों तथा भारत में आर्यों के उदाहरण से की है। हिबू जाति में परिवार के प्रमुख की सत्ता सर्वोपरि होती थी और परिवार के प्रधान का परिवार के सभी लोगों पर निरंकुश अधिकार रहता था। यूनान में परिवार तथा मातृसंघ होते थे और रोम में 'पैट्रिया पोस्टैस्टा' (Patria Postestas) जाति के लोगों ने अपने प्रधान को असीमित अधिकार दे रखे थे। भारत में भी आर्यों में संयुक्त कुटुम्ब प्रणाली थी और इन कुटुम्बों में पिता की सत्ता की प्रधानता होती थी।

वर्तमान समय के फ्रांसीसी विचारक डिग्विट ने भी पैतृक सिद्धांत का समर्थन किया है। उसके शब्दों में, "पिता परिवार का प्राकृतिक मुखिया होता है। यह अपने छोटे से राज्य का राज्यपाल होता है और परिवार के सदस्यों पर राज्य करता है। प्राचीन नगर छोटे-छोटे परिवारों से बनी एक राजनीतिक इकाई होते थे, जिनमें सारी शक्ति एक वयोवृद्ध पिता के हाथों में होती थी।" 

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