राजनीतिक सिद्धांत के प्रयुक्त अर्थ को स्पष्ट कीजिए।

Admin
0

राजनीतिक सिद्धांत के प्रयुक्त अर्थ को स्पष्ट कीजिए।

इस विषय के अध्येता का संबंध राजनीतिक सिद्धांत के दोनों पहलुओं-मूल्य-भारित और तथ्य भारित से होना चाहिये। इस लिहाज से समसामयिक राजनीति के छात्र के लिये राजनीतिक सिद्धांत के दो अर्थ हैं

राजनीतिक सिद्धांत के प्रयुक्त अर्थ 

  1. यह राजनीतिक विचारों के इतिहास का समर्थक है। प्लेटो से लेकर अब तक इन विचारों को बौद्धिक परम्परा में योगदान माना जाता है। इनका अध्ययन उन ऐतिहासिक परिवेशों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है जिन्होंने उन्हें उत्पन्न किया है एवं राजनीतिक व्यवहार पर उनका प्रभाव सदैव परिकल्पना का विषय बना रहा है। इन दोनों में राजनीतिक सिद्धांत के बारे में ऐसा ज्ञान अधिक परम्परागत है और विद्वता की सम्मानजनक परम्परा इसका समर्थन करती
  2. सिद्धांत की दूसरी परिकल्पना अपने प्रयोजनों और विधियों के बारे में अधिक नई अपितु उतनी अधिक सुनिश्चित नहीं है। फिर भी, यह कहा जा सकता है कि इस दृष्टिकोण के लिये आधनिक जगत में राजनीतिक व्यवहार के व्यवस्थाबद्ध अध्ययन की आवश्यकता है।

स्पष्ट रूप में, राजनीति सिद्धांत के क्षेत्र में परम्परागत और आधुनिक दोनों पक्ष इस तथ्य के बावजूद आते हैं कि इन दोनों में किन्हीं वैध आधारों पर भेद किया जा सकता है। अतः हेकर कहता है - "जबकि पुरानी संकल्पना में विषय-वस्तु के रूप में ऐतिहासिक तथ्य और उनके लेखों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियाँ हैं, सिद्धान्तों के बारे में आधुनिक दृष्टिकोणों में हमारे अपने युग के लोगों और उनकी संस्थाओं के वास्तविक व्यवहारों को अपना विषय बनाया जाता है।

व्यवस्थाबद्ध सिद्धांत का संबंध ऐसे सामान्यीकरण प्रस्तुत करने से है जो समसामयिक राजनीतिक परिघटना का वर्णन व उनकी व्याख्या करते हैं। कुल मिलाकर, यह आँकड़े एकत्रित करने के तरीके को अधिक महत्व देता है, क्योंकि व्यवस्थाबद्ध ज्ञान का आधार मनोभावना की बजाए प्रमाण होना चाहिये। समग्र अर्थ में, सिद्धांत के प्रति यह दृष्टिकोण मूल्य-निर्णय या नैतिक विवादों में फंसने से बचना है।"

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !