Thursday, 20 January 2022

भारतीय निर्वाचन प्रणाली के दोषों को दूर करने के उपाय लिखिए।

भारतीय निर्वाचन प्रणाली के दोषों को दूर करने के उपाय लिखिए।

  1. निर्वाचन आयोग का गठन दोषपूर्ण है, स्पष्ट कीजिए। 
  2. स्वतंत्र निर्वाचन प्रणाली से निर्वाचन पद्धति के दोषों को दूर किया जा सकता है, स्पष्ट कीजिए। 
  3. क्या भारतीय चुनाव प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है?
  4. भारतीय चुनाव प्रणाली के कोई चार दोष लिखिए

निर्वाचन पद्धति के दोषों को दूर करने के उपाय

निर्वाचन में धन (Money) और बाहुबल (Muscle) के बढ़ते प्रभाव ने स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन के समक्ष प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। निर्वाचन को और सार्थक और निष्पक्ष बनाने के लिए समय-समय पर राजनीतिक और गैर राजनीतिक स्तर पर अनेक उपाय दिये गये। जो निम्नलिखित हैं.

  1. निर्वाचन आयोग का पुनर्गठन 
  2. स्वतन्त्र निर्वाचन प्रणाली
  3. सभी स्तरों पर चुनाव एक साथ आयोजित हों
  4. चुनाव प्रचार का व्यय राज्य द्वारा उठाया जाना 
  5. जाली प्रत्याशियों को प्रतिबन्धित करना
  6. फोटो पहचान पत्र का प्रयोग 
  7. निर्वाचन समय-सारिणी को प्रभावशाली बनाना
  8. उप चनाव शीघताशीघ्र आयोजित किये जाये
  9. इलेक्ट्रॉनिक मशीन का प्रयोग

निर्वाचन आयोग का पुनर्गठन (Re-organization of Election Commission) - आलोचकों का मत है कि निर्वाचन आयोग का गठन दोषपूर्ण है। वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति मन्त्रिमण्डल (व्यवहार में प्रधानमन्त्री) के परामर्श से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

स्वतन्त्र निर्वाचन प्रणाली (Independent Election Machinery) - निवाचन आयोग की राज्य स्तर पर अपनी प्रशासकीय मशीनरी होनी चाहिए और इसके अधिकारों में भी वृद्धि की जानी चाहिए। वर्तमान में निर्वाचन आयोग अपने कार्यों के लिए पूर्णतया केन्द्र और राज्य सरकारों पर निर्भर है। राज्य सरकारों की सहायता के बिना यह मतदान पंजिकाओं (Electroal Rolls) को भी अद्यतन (Up-to-date) नहीं रख सकता।

सभी स्तरों पर चुनाव एक साथ आयोजित हों - (Elections at all levells should be Organized Simultaneously) - यदि लोकसभा, विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ आयोजित किये जायें तो खर्च में काफी कमी हो सकती है। संवैधानिक संशोधन करके ऐसी व्यवस्था सहज ही की जा सकती है।

चुनाव प्रचार का व्यय राज्य द्वारा उठाया जाना - विभिन्न स्तरों पर एक साथ निर्वाचन करवाने के साथ-साथ राज्य द्वारा एक निश्चित मात्रा में चुनाव प्रचार का खर्च भी उठाया जाना चाहिए। यह व्यवस्था की जा सकती है कि पिछले निर्वाचन में जिन दलीय स्वतन्त्र प्रत्याशियों ने 25 प्रतिशत या अधिक मत प्राप्त किये हैं, उन्हें आयोग द्वारा निर्धारित व्यय राशि का 75 प्रतिशत दो किश्तों में राज्य द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

जाली प्रत्याशियों को प्रतिबन्धित करना - गैर गम्भीर (Non-Serious) - प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा अनेक उपाय किये गये हैं जैसे- प्रत्याशियों की जमानत राशि को लोकसभा के लिए 5,000 रुपये और विधानसभा के लिए 2,500 रुपये करना है स्वयं प्रत्याशियों के लिए टेलीफोन तथा रियायती दर पर छपाई हेतु कागज न उपलब्ध कराना तथा उन प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करना जो न्यूनतम 20 प्रतिशत वैध मत नहीं प्राप्त करते हैं।

फोटो पहचान पत्र का प्रयोग - फर्जी मतदान जोकि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चिन्ता का विषय है को रोकने तथा बाहबलियों की बूथ कैपचरिंग की घटनाओं को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सभी मतदाताओं को फोटो युक्त पहचान पत्र दिये जाने सम्बन्धी चुनाव आयोग के सुझाव के तहत भारत सरकार ने भारत के सभी मतदाताओं को फोटो युक्त पहचान पत्र देने की प्रक्रिया का शुभारम्भ मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी० एन० शेषन के नेतृत्व में सन् 1993 में किया। यद्यपि यह कार्य काफी तीव्रगति से प्रारम्भ किया गया कि लोक सभा चुनाव के पूर्व ही समस्त मतदाताओं को फोटो युक्त पहचानपत्र दे दिये जायेंगे तथा फोटो युक्त पहचान पत्र के बिना मताधिकार का प्रयोग न किया जा सकेगा। किन्तु इस प्रक्रिया के अनुपालन में अनेकों कठिनाइयाँ आने के कारण इसे समय से पूरा नहीं किया जा सका । यह प्रक्रिया आज भी अधूरी है। फोटो युक्त पहचानपत्र को अनिवार्य बनाने से जाली मतदान को रोकने में काफी हद तक सफलता प्राप्त की जा सकती है। यद्यपि अब भारत सरकार ने फोटो युक्त मतदान सूची तैयार कराने की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है।

अभी फोटो युक्त पहचान पत्र की उपयोगिता मात्र चुनाव में मतदान तक सीमित है किन्तु यदि इस पहचान पत्र को बहुउद्देश्यीय जैसे - जन्मतिथि प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, व्यक्तिगत परिचय पत्र इत्यादि को भी इसमें सम्मिलित कर लिया जाये तो शायद इसकी उपादेयता सार्थकता एवं प्रासंगिकता और भी बढ़ जाये।

निर्वाचन समय-सारिणी को प्रभावशाली बनाना - प्रत्याशियों के चुनावी व्यय को कम करने के लिए यह वांछनीय होगा कि निर्वाचन की समय-सारणी को प्रभावी बनाया जाय एवं नामांकन की अंतिम तिथियों के तुरंत बाद नामांकन पत्रों की जाँच हो जानी चाहिए। 2 दिन का समय नाम वापसी के लिए होना चाहिए और चुनाव प्रचार के लिए अधिकतम 15 दिन का समय होना चाहिए। 

उप चनाव शीघताशीघ्र आयोजित किये जाये - प्रायः उप-चुनावों के आयोजन में अधिक समय लगता है। इससे सहज ही प्राधिकारियों के प्रति लोगों में सन्देह की भावना घर कर लेती है। समय लगता है। लोकसभा की संयुक्त संसदीय समिति ने यह सुझाव दिया है कि सभी उप-चुनाव अधिकतम 6 माह की अवधि के भीतर आयोजित कर लिए जाने चाहिए।

इलेक्ट्रॉनिक मशीन का प्रयोग - मतदान प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने के लिए इलेक्ट्रानिक मशीन के प्रयोग का भी सुझाव दिया गया है। इससे मतदान प्रक्रिया को तेजी से तो पूरा किया ही जा सकेगा, व्यय भी कम होगा। 


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