राजनीतिक सिद्धांत क्या है ? इसके विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।

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राजनीतिक सिद्धांत क्या है ? इसके विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिए। 

राजनीतिक सिद्धांत क्या है ?

सर्वसाधारण स्तर पर, राजनीतिक सिद्धांत राज्य से सम्बन्धित ज्ञान है जिसमें राजनीतिक का अर्थ है 'सार्वजनिक हित के विषय' तथा सिद्धांत का अर्थ है 'क्रमबद्ध ज्ञान'। राजनीतिक सिद्धान्तों को हम गुल्ड और कोल्व की व्यापक परिभाषा से बेहतर समझ सकते हैं। उनके अनुसार, 'राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिशास्त्र का वह भाग है, जिसके निम्नलिखित अंग हैं

  1. राजनीतिक दर्शनशास्त्र-यह राजनीतिक विचारों के इतिहास का अध्ययन और नैतिक मूल्यांकन से सम्बन्धित है।
  2. एक वैज्ञानिक पद्धति; 
  3. राजनीतिक विचारों का भाषा विषयक विश्लेषण; तथा 
  4. राजनीतिक व्यवहार के सामान्य नियमों की खोज तथा उनका क्रमबद्ध विकास।'

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि राजनीतिक सिद्धांत मुख्यतः दार्शनिक और व्यवहारिक दृष्टिकोण से राज्य का अध्ययन है। सिद्धांत का सम्बन्ध केवल राज्य तथा राजनीतिक संस्थाओं की व्याख्या, वर्णन तथा निर्धारण से ही नहीं है बल्कि उसके नैतिक उद्देश्यों का मूल्यांकन करने से भी है। इनका सम्बन्ध केवल इस बात का अध्ययन करना ही नहीं है कि राज्य कैसा है बल्कि यह भी कि राज्य कैसा होना चाहिये। एक लेखक के अनुसार, राजनीतिक सिद्धान्तों को एक ऐसी गतिविधि के रूप में देखा जा सकता है जो व्यक्ति के सार्वजनिक और सामुदायिक जीवन से सम्बन्धित प्रश्न पूछती है, उसके सम्भव उत्तर तलाश करती है तथा काल्पनिक विकल्पों का निर्माण करती है। अपने लम्बे इतिहास में यह इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर खोजते रहे हैं-राज्य की प्रकृति और उद्देश्य क्या हैं ? एक राज्य दूसरे से श्रेष्ठ क्यों है ? राजनीतिक संगठनों का उद्देश्य क्या है ? इन उद्देश्यों के मानदण्ड क्या होते हैं ? राज्य तथा व्यक्ति में सम्बन्ध क्या है ? आदि। प्लेटो से लेकर आज तक राजनीतिक चिन्तक इन प्रश्नों के उत्तर तलाश रहे हैं क्योंकि इन उत्तरों के साथ व्यक्ति का भाग्य अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। आरम्भ से ही सिद्धांत उन नियमों की खोज में लगे हुए हैं जिनके आधार पर व्यक्ति एक ऐसे राजनीतिक समुदाय का विकास कर सके जिसमें शासक और शासित दोनों सामान्य हित की भावना से प्रेरित हों। यह आवश्यक नहीं कि राजनीतिक सिद्धांत सभी राजनीतिक प्रश्नों के कोई निश्चित व अन्तिम हल ढूँढने में सफल हो जायें, परन्तु यह हमें उन प्रश्नों के हल के लिये सही दिशा संकेत अवश्य दे सकते हैं।

राजनीतिक सिद्धांत के प्रकार

  1. परम्परागत राजनीतिक सिद्धांत
  2. आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत। 

परंपरागत राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ (Classical Political Theory)

परंपरागत राजनीतिक सिद्धांत को 'क्लासिकल राजनीतिक सिद्धांत' (Classical Political Theory), अथवा 'आदर्श राजनीतिक सिद्धांत' (Normative Political Theory) भी कहा है। यह कल्पना पर आधारित है और इसकी जड़ें इतिहास तथा दर्शन में हैं। कतिपय लेखकों के अनुसार परंपरागत राजनीतिक सिद्धांतों में व्यवहारवादी क्रान्ति से पूर्व प्रचलित विचार सामग्री, राजनीतिक संस्थाओं के अध्ययन, विचारधाराओं तथा राजनीतिक विचारों के विश्लेषण को शामिल किया जाता है। परंपरागत स्वरूप में सिद्धांत, विचार. दष्टिकोण विचारधारा. परिप्रेक्ष्य, उपागम आदि सभी पर्यायवाची बन जाते हैं। इनमें दार्शनिक, ऐतिहासिक नैतिक, संस्थात्मक, तुलनात्मक पद्धतियों तथा अन्य विषयगत दृष्टिकोणों जैसे समाजशास्त्रीय, मनोविज्ञानात्मक, अर्थशास्त्रीय आदि को महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य, राज्य की प्रकृति तथा उसका आधार, सरकार, कानून, नैतिकता, प्राकृतिक विधि, राजनैतिक संस्थाएँ आदि परंपरागत राजशास्त्र के प्रिय विषय रहे हैं।

आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत (Modern Political Theory)

पन्द्रहवीं शताब्दी के बाद सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में एक मूलभूत परिवर्तन हुआ जिसका स्वाभाविक प्रभाव यूरोपीय देशों की राजनीतिक परिस्थितियों पर पड़ा। विज्ञान और तकनीकी ने औद्योगिक क्रान्ति को जन्म दिया, प्रतिनिधि शासन प्रणाली के विचार का उदय हुआ और राजनीति में मध्यमवर्ग का आविर्भाव हुआ। आगस्ट काम्टे जैसे फ्रांस के सिद्धांतशास्त्री ने निश्चयवाद या प्रत्यक्षवाद (Positivism) की नई दिशा दिखाई और सामाजिक व राजनीतिक सिद्धांतशास्त्रियों को यह सुझाव दिया कि वे राजनीति का अध्ययन निश्चयवादी (वैज्ञानिक) अर्थों में करें। इन सबका यह परिणाम हुआ कि स्वप्नलोकीय (आदर्शी) अध्ययनों की जगह वर्तमान जगत की असफलताओं का कठोर रूप में व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।

राजनीतिक सिद्धांत की आधुनिक धारा को जर्मनी के मैक्स वेबर ने बड़ी आस्था के साथ स्वीकार किया और उसकी पुनर्व्याख्या के माध्यम से यह धारा अमेरिका पहुँची जहाँ चार्ल्स मेरियम इसका उत्साही समर्थक हुआ। डेविड ईस्टन, ऐप्टर, आमण्ड डहल और लैसवेल इस धारा के समर्थक हैं और इसलिए इन सभी को 'आधुनिकतावादी' कहा जा सकता है। द्वितीय विश्व के बाद की अवधि में यह धारा इतनी प्रबल हो गई कि अनेक अमरीकी सिद्धांतशास्त्री इस प्रकार की राजनीति के अध्ययन के प्रति प्रतिबद्ध हो गए जो राजनीतिक समुदाय के सदस्यों के रूप में मनुष्यों के व्यवहार से उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप व्यवहारवाद आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की प्रधान धारा बन गया।

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