Friday, 8 February 2019

एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी निधि योजना


एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी निधि योजना - CGTMSE

सरकार ने अगस्‍त 2000 में सूक्ष्‍म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि योजना की शुरूआत की है जिसका उद्देश्‍य ऐसे उद्यमों को किसी जमानत/त्रिपक्षीय गारंटी के बिना एक करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्‍ध कराना है। शुरूआती चरण के ऐसे उद्यमों के लिए संगठित बैंकों से ऋण प्राप्‍त करना काफी कठिन था। बैंक छोटे ऋणों में होने वाली गड़बडि़यों को लेकर काफी चिंतित रहे और इसी वजह से छोटे ऋणधारकों को जमानत के जरिये ही ऋण उपलब्‍ध कराने की कोशिश करते हैं। इसे ध्‍यान में रखते हुए यह विचार किया गया कि बैंको के लिए ऋण वित्‍तीयन को आसान बनाने के लिए ऋण गारंटी तंत्र का गठन किया जाए जिसमें सूक्ष्‍म और लघू उद्यम के ऋण गारंटी निधि ट्रस्‍ट (सीजीटीएसएसई) द्वारा चलाई जा रही है और इसकी स्‍थापना संयुक्‍त रूप से केन्‍द्र सरकारन और सिडबी (एसआईडीबीआई) द्वारा की गई है।

इस योजना के जरिए बिना किसी जमानत के पात्र ऋण संस्‍थाओं द्वारा नए और वर्तमान सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों (एमएसई) को प्रति ऋण इकाई की दर से एक करोड़ रुपये तक की ऋण की सुविधा उपलब्‍ध कराई जाती है। इस गारंटी में 50 लाख रुपये की 75 प्रतिशत गारंटी सुरक्षा और 50 लाख रुपये से अधिक और एक करोड़ रुपये (सूक्ष्‍म उद्यमों को पाँच लाख रूपये तक 85 प्रतिशत गारंटी सुरक्षा, महिलाओं द्वारा संचालित और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में सभी ऋणोंपर 80 प्रतिशत की गारंटी सुरक्षा) तक उपलब्‍ध कराए जाने वाली ऋण सुविधा पर 50 प्रतिशत अतिरिक्‍त गारंटी भी शामिल है। सदस्‍य ऋण संस्‍थाओं (एमएलआई) से स्‍वीकृत ऋण सुविधा (सिक्‍किम सहित उत्तर-पूर्वी क्षेत्रके लिए 0.75 प्रतिशत) का 1.5 प्रतिशत एकमुश्‍त गारंटी शुल्‍क और 0.75 प्रतिशत वार्षिक सेवा शुल्‍क एकत्र किए जातेहैं। सीजीटीएमएसई की पूरी राशि में सरकार और सिडबी को योगदान 4:। है। वर्तमान में इसके लिए पूरी संग्रहित राशि लगभग 33 सौ करोडद्य रुपये की है जिसके जरिए एमएसई को मिलने वाले ऋण में लगातार वृद्धि हो रही है।

ऋण के दायरे को देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में विस्‍तारित करने के लिए कुल 125 सदस्‍य ऋण संस्‍थाएं पंजीकृत हैं जिसमें 26 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 18 निजी क्षेत्र के बैंक, 68 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), चार विदेशी बैंक और नौ अन्‍य वित्तीय संस्‍थाएं शामिल हैं। अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान बना चुके सीजीटीएमएसई को एशियन क्रेडिट सप्‍लीमेंटेशन इंस्‍टीच्‍यूशन कफेड्रेशन (एसीएसआईसी) का सदस्‍य बनाया गया है। यह संस्‍थान वार्ता और सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए एशियाई देशों में काम कर रहे सूक्ष्‍म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण उपलब्‍धता को बढ़ावा देने का कार्य करता है। अक्‍टूबर-नवंबर, 2011 में पहली बार भारत में 24वें एसीएसआईसी सम्‍मेलन का आयोजन सीजीटीएमएसई ने किया। यह एशियाई क्षेत्रों के गारंटी संगठनों के अध्‍यक्षों को एक वार्षिक सम्‍मेलन था। इस योजना के जरिए लगभग सात लाख उद्यमियों को गारंटी सुरक्षा और 31 हजार करोड़ रुपये की ऋण सुविधा उपलब्‍ध कराई गई। इसमें एक छोटे टैक्‍सी चालक से लेकर इस्‍पात उपकरण विनिर्माताओं से जुड़ी सफलता के वृतांत शामिल हैं। इनमें से कुछ वृतांत यहाँ प्रस्‍तुत किए जा रहे हैं।

जमानत मुक्‍त जीवन यापन
मुंबई के टैक्‍सी चालक घनश्‍याम दुबे का कहना है कि सीजीटीएमएसई के जरिए उनका जीवन कितना सरल हो गया है। छह कारों के मालिक दुबे को 30 सालों के चालक जीवनकाल में पहले ऋण प्राप्‍त करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। बिना कियी गांरटी के उन्‍हें बैंक से ऋण नहीं मिल सकता था और मजबूरन उन्‍हें धन प्राप्‍त करने के लिए असंगठित क्षेत्रों का साहरा लेना पड़ा। इस बार उन्‍होंने एजीटीएमएसई के सदस्‍य ऋण संस्‍थान से संपर्क किया है। यह संस्‍थान उन्‍हें न सिर्फ बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्‍ध कराने में मदद करता है बल्‍कि उनके सारे दस्‍तावेजी कार्य में भी सहायता करता है। घनश्‍याम का कहना है कि उन्‍हें रिकार्ड तीन दिनों के अंतराल में ही ऋण की स्‍वीकृति मिल गई। अपने अनुभवों के बारे में बताते हुए उन्‍होंने कहा कि एक तरफ जहां उनके सहयोगी को दस्‍तवेजी कार्य को पूरा करने के लिए 20 दिनोंका इंतजार करना पड़ा वहीं सिर्फ पाँच दिनों में ही उनकी टैक्‍सी उनके घर के दरवाजे पर खड़ी थी। अब उन्‍हें सिर्फ पोष्‍ट डेटेड चेक के जरिए मासिक किस्‍तों का भुगतान करना है। अपनी वर्तमान मासिक आय के जरिए वह अपने बच्‍चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्‍ध कराने के साथ-साथ बिना किसी परेशानी के उनकी आवश्‍यकताओं को भी पूरा कर सकते हैं। इस ट्रस्‍ट के माध्‍यम से उनके जीवन स्‍तर में काफी सुधार हुआ है।

आधुनिकीकरण वित्तीयन
राजीव मैथ्‍यु मुंबई में इस्‍पात उपकरण विनिर्माता हैं। वे 70 लाख रुपये के निवेश से अपने मशीनों का आधुनिकीकरण करना चाहते थे। समय के साथ बेहतर उत्‍पादों के लिए पुराने उपकरणों को बदलना जरूरी था और इस लिहाज से वह ऋण प्राप्‍त करने में तय समय-सीमा से काफी पीछे चल रहे थे। 14 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत उद्यमी राजू को सब्सिडी प्रदान करने वाली एमएसई योजना के बारे में जानकारी मिली तो उन्‍होंने सीजीटीएमएसई के एमएलआई से से ऋण के लिए संपर्क किया। इस प्रतिस्‍पर्धी बाजार में राजू को ज्‍यादा से ज्‍यादा सब्‍सिडी की आशा थी। क्‍या कोई उनकी जमानत के लिए मदद दे सकता था पर सौभाग्‍य से सीजीटीएमएसई योजनाके अंतर्गत राजू की जरूरतों को पात्र समझा गया और इसके बाद उन्‍हें ऋण गारंटी सुरक्षा प्राप्‍त हुई। ऋण स्‍वीकृति की प्रक्रिया एक ही समय में पूरी कर ली गई। राजू की कंपनी इस्‍पात से संबंधित उत्‍पादों का निर्माण करती है और उनके उत्‍पाद भारत के अलावा ईरान, अफ्रीका, वियतनाम, ब्रग्‍लादेश और श्रीलंका के बाजारों में भी बिक्री के लिए उपलब्‍ध हैं। पिछले वर्ष जहां उनकी कंपनी का कुल व्‍यापार 15.45 करोड़ रुपये तक सीमित था वहीं वित्त वर्ष 2011 की प्रथम तिमाही में कुल व्‍यापार लगभग चार करोड रुपए रहा। फिलहाल इस कंपनी में कुल25 कर्मचारी कार्यरत हैं।

सभी उद्यमियों द्वारा जमानत मुक्‍त ऋण की प्रशंसा
निधि सक्‍सेना का अपनी एक कंपनी होने का सपना 2005 में पूरा हुआ। 15 साल तक आईटी और बीपीओ उद्योग में काम करने के बाद उनकी चाहत थी कि वह एक उद्यमी बनें। 2002 में मुंबई के एसपी जैन कालेज से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्‍होंने जैविक विज्ञान व्‍यापार में अपार संभावनाओं को देखते हुए 80 हजार रुपये के निवेश के जरिए कार्मिक जैविक विज्ञान कंपनी की शुरुआत की। प्रारंभ में सफलता का मतलब था कि निधि को अपने व्‍यापार को बढ़ाने के लिए बिना किसी जमानत के बैंकों से ऋण सुविधा प्राप्‍त हो। हालांकि उनकी प्राथमिकता निजी इक्‍विटी वित्तीयन था लेकिन उनके निवेशक इंडियन इंटरनेटवर्क ने उन्‍हें जमानतमुक्‍त ऋण के लिए सीजीटीएमएसई के एमएलआई योजना का लाभ उठाने की सलाह दी और बताया कि यह ट्रस्‍ट उन्‍हें केवल जमानतमुक्‍त ऋण उपलब्‍ध कराने में ही सहायता नहीं देगा बल्‍कि उन्‍हें समय-समय पर उचित सलाह भी देगा। चूंकि उनके ऋण की अवश्‍यकता सीजीटीएमएसई के दायरे के कहीं ज्‍यादा थी और इसे देखते हुए यह निर्णय किया गया कि एमएलआई के सुक्ष्‍म एवं लघु उद्यम संवर्द्धन ऋण योजना के तहत एक सम्मिलित ऋण और इक्‍विटी निवेश पर कार्य किया जाए। निधि के लिए सिर्फ एक ही कार्य करना था कि उन्‍हें गारंटी के लिए प्रोमोटर आश्‍वस्‍त करना था। हालांकि सीजीटीएमएसई योजना उनकी शुरूआत के लिए एक वरदान साबित हुई और वह अपने व्‍यवसाय के जरिए आसानी से ऋण चुकता करने के लिए मासिक किस्‍त भर सकती है। फिरहाल उनकी कार्मिक जैविक विज्ञान कंपनी जो प्रगति की राह में है उसमें 50 व्‍यवसायिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। वर्ष 2011 में कंपनी के कुल व्‍यवसाय का लक्ष्‍य 8 करोड़ रुपये था और यह अमरीकी बाजार में भी काम कर रही है। मुंबई में यह कंपनी 12 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में फैली है। यह सितंबर 2010 में सूचना सुरक्षा के लिए पूर्ण गोल्‍ड स्‍टैंडर्ड में शामिल होने के लिए योजना बना रही थी। इस कंपनी की अमरीका में भी एक बिक्री कार्यालय खोलने की योजनाहै। निधि की कंपनी द्वारा भारत में एक कैंसर अस्‍पताल तैयार करने की भी योजना है। जमानतमुक्‍त ऋण उपलब्‍ध होने पर खुशी जाहिर करते हुए निधि ने संभावित उद्यमियों को इस ट्रस्‍ट से संपर्क करने की सलाह दी है।

सीजीएस ने दत्तात्रोय को प्रगति की राह दिखाई
दत्‍तात्रेय वेधीकर ने एक उद्यमी के रूप में अपने जीवन की शुरुआत मुंबई में एक लघु उद्योग के रूप में लोहे की चादर बनाने वाली भारती इंडस्‍ट्रीयल कार्पोरेशन की स्‍थापना के साथ की। जल्‍द ही इस व्‍यवसाय में उनके पुत्र राजेन्‍द्र वेधीकर भी शामिल हो गए जिन्‍होंने अभियंत्रण में डिप्‍लोमा की पढ़ाई पूरी की थी। दत्तात्रेय ने यह महसूस किया कि पुणे, जो कि एक औद्योगिक शहर केरूप में उभर रहा है वहां उन्‍हें अपने व्‍यवसाय को बढ़ाने के लिए आपार संभावनाएं हैं। पुणे के भोसारी में महाराष्‍ट्र औद्योगिक विकस निगम (एमआईडीसी) में एमएसएमई और वृहत उत्‍पादक क्षेत्र की कई औद्योगिक इकाइंया काम कर रही हैं। इनमें से बहुत-सी एमएसएमई इकाइयां आटोमोबाइल पार्ट्स, कलपुर्जे और छोटे कलपुर्जे के निमार्ण में कार्यरत हैं साथ ही भारत और वदिेशों में स्‍थ‍ि‍त बड़े आटो विनिर्माताओं के मांगों को पूरा करने के लिए ओ ई एम आपूर्तिकर्ताओं के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर को देखते हुए वेधीकर ने पुणे की ओर प्रस्‍थान किया और वर्ष 1983 में भोसरी में एक लघु उद्योग के रूप में डाट्सन इंजीनियरिंग वर्क्स की स्‍थापना की जो मुख्‍य रूप से टेल्‍को कंपनी को कलपुर्जे उपलब्‍ध कराता है। दत्तात्रेय ने इस प्रोजेक्‍ट के लिए आवश्‍यक पूंजी की पूर्ति अपनी बची हुई कमाई और मुंबई स्‍थिति अपने आवास को बेचकर की। प्रारंभ के वर्षों में इस इकाई ने लागत पर पर्याप्‍त लाभ देने के लिए काफी संघर्ष किया।इस कंपनी को खराब ढांचा और कच्‍चे मालों की पर्याप्‍त आपूर्ति के अभाव के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा जिसके कारण पड़ा जिसके कारण उच्‍च क्षमता में इनके उपकरण काम नहीं कर सकते थे। इन समस्‍याओंके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से ऋण की सुविधा प्राप्‍त कर विकास की राह पर आगे बढ़े। पुणे स्‍थ‍ित एक बैंक के जरिए इस इकाई के विकास में काफी सहायता मिली और इस बैंक ने शुरूआती वर्षों के दौरान इस इकाई को जमानती सुरक्षा के साथ चार ऋण भी प्रदान किए।

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